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कुछ बदले नजर आ रहे हैं न्यूज चैनलों के सुर…

संपादक, भड़ास4मीडिया, महोदय, मीडिया का मुंह सरकारी विज्ञापनों से भर कर मीडिया को सच दिखाने से रोकने की कोशिश और जनता को बरगलाने की कोशिश हो रही है. आज मैंने कई चैनलों पर कई सरकारी और पब्लिक सेक्टर कंपनी के विज्ञापन देखे. ये विज्ञापन पहले नहीं देखे थे इन चैनलों पर. कई चैनलों ने (एक वह भी चैनल है जिनके लोग सरकार से अवार्ड लेते रहे हैं और जिनकी पत्रकार राडिया से सेटिंग किया करती थी.

संपादक, भड़ास4मीडिया, महोदय, मीडिया का मुंह सरकारी विज्ञापनों से भर कर मीडिया को सच दिखाने से रोकने की कोशिश और जनता को बरगलाने की कोशिश हो रही है. आज मैंने कई चैनलों पर कई सरकारी और पब्लिक सेक्टर कंपनी के विज्ञापन देखे. ये विज्ञापन पहले नहीं देखे थे इन चैनलों पर. कई चैनलों ने (एक वह भी चैनल है जिनके लोग सरकार से अवार्ड लेते रहे हैं और जिनकी पत्रकार राडिया से सेटिंग किया करती थी.

एक वह चैनल भी सुर बदले हुए था जो सबसे तेज होने का दावा बरसों से करता आ रहा है और जिसके एडिटर भी राडिया से सेटिंग करते फोन टैप में पाए गए थे) सुर बदल लिए हैं. क्या यह मीडिया का बिकना नहीं है? अब खबरों में कनफ्यूजन तैयार किया जा रहा है. तीसरे पक्ष को लेकर आ रहे हैं चैनल, बता रहे हैं कि यह तो संसद का अपमान है.  क्या वेब पत्रकारिता इन बिके हुए मीडिया के खिलाफ सच को सामने ला पायेगा? क्या आप जैसे लोग जनता की आवाज की हत्या होने देंगे. उम्मीद है आप जैसे लोग वेब मीडिया के द्वारा इस बेइमानी को उजागर करते रहेंगे.

आपका अपना
इशु मिश्रा
[email protected]

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0 Comments

  1. mohan

    August 23, 2011 at 8:59 am

    क्या अब तक जो मीडिया हाक रही थी वो सब सच था क्या वाकई में भारत में भूचाल आ गया था हमने अपने शहर में वाकई में भुचाल नही देखा हां कुछ लोग जरुर लगे हुए है भ्रष्टा चार के आन्ना के मुहिम के साथ लेकिन जिस तरह से मीडिया ने इस पुरे प्रकरण को पेश किया अगर दूसरा देश रहता तो गृह युद्ध होता लेकिन शुक्र है कि यह भारत देश है यहां के लोग काफी सुलझे हुए है हद कभी ठीक नही होता और मीडिया ने तो हद ही कर दी । खबरो में आम आदमी के सरोकार की खबर किसी चैनल पर नही होती वो तो प्रोफाइल देखी जाती है उसमे अगर मीडिया ने इतना वक्त दिया इस मसले पर तो मै समझ रहा हू यह भी अति है , लेकिन हर लोगो की सोच अलग अलग है।

  2. मदन कुमार तिवारी

    August 23, 2011 at 2:43 pm

    सारा ड्रामा मीडिया का था । बचाव करना था टाटा और अंबानी का टूजी घोटाले में। अब समझौता हो गया होगा मामला शांत । अन्ना बेचारा मुखौटा है असली चेहरा तो मनीष और केजरिवाल है । मनीष को पैसा मिलता है फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन से , उसकी कबीर नाम की संस्था के नाम पर । फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन का संबंध है सीआईए से । पैसा दिलवाने में अहम भूमिका है नारायन मूर्ति की जो राष्ट्रपति नही बनाये जाने से खपा हैं। वे फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन के बोर्ड में भी हैं।

  3. tarkesh kumar ojha

    August 23, 2011 at 3:58 pm

    bahut sahi niskarsa nikala hai indu ji ne, yeh sahi hai ki moodon ko hawa dene me media apna swartha dekhta hai, warna kya wajah hai ki sudur ilakon ki goonj media me kam hi sunai deti kai
    tarkesh kumar ojha, kharagpur(west bengal)
    contact_09434453934

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