ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोई मीडिया (खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की निरंकुशता का शिकार हुआ हो. पर अब यह प्रवृत्ति रुकनी चाहिए. दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सब-कुछ ताजा-ताजा दिखाने व बताने वाले खबरिया चैनलों की वजह से मीडिया की विश्वसनीयता को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है.
दरअसल हुआ यह कि शनिवार को सभी न्यूज चैनलों पर एक फ्लैश चलना शुरू हुआ कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह के विर्लेपारले स्थित आवास पर आयकर विभाग का छापा पडा. यह फ्लैश सबसे पहले एक ऐसे हिंदी चैनल पर दिखाई दिया, जिसकी विश्वसनीयता को लेकर लोगों को संदेह रहता है. पर उसकी देखा-देखी सभी छोटे-बड़े हिंदी-मराठी न्यूज चैनलों पर यही फ्लैश दिखाई देने लगा.
खबर की सच्चाई जानने के लिए जब मैंने कोशिश की तो पता चला कि छापे जैसा कुछ नहीं है. न्यूज चैनल विर्लेपारले के जिस पर घर पर छापे की खबर दिखा रहे हैं. वहां अब कृपाशंकर सिंह रहते ही नहीं. वे पिछले 8 महीनों से बांद्रा में रह रहे हैं. शाम होते-होते मुंबई कांग्रेस की तरफ से प्रेस रिलीज भी आ गई कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के घर पर कोई छापा नहीं पड़ा. उनको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.
मिली जानकारी के अनुसार एक हिंदी न्यूज चैनल के अति उत्साही रिपोर्टर ने सभी रिपोर्टरों को छापे की खबर वाला एसएमएस भेज दिया. उसके बाद किसी रिपोर्टर ने खबर को कंफर्म करने की कोशिश नहीं की और अपने-अपने चैनल पर न्यूज फ्लैश करने की होड़ में शामिल हो गए. बात मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष की ही नहीं है. खबरिया चैनल इस तरह की लापरवाही करते रहते हैं और यह भूल जाते हैं कि इससे सामने वाले को कितनी मानसिक तकलीफ होती है.
कुछ मिनट में पूरे देश को यह झूठी खबर देने के बाद गलती का अहसास होने पर सभी चैनलों ने छापे वाले फ्लैश हटा लिया, पर तब तक सारा देश जान चुका था कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के घर आईटी का छापा पड़ा है. बाद में किसी चैनल ने यह फ्लैश करना जरुरी नहीं समझा की छापे की खबर गलत थी.
पिछले दिनों महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार व बाद में केंद्रीय मंत्री विलाशराव देशमुख ने मीडिया को काफी भला-बुरा कहा था. सारे पत्रकारों की तरह मुझे भी दोनों नेताओं पर गुस्सा आया. हमने अपने अखबार में दोनों नेताओं के इस बयान के खिलाफ पत्रकार संगठनों के आंदोलन की खबरें भी प्रमुखता से छापी. बाद में दोनों नेता ऑफ दी रिकार्ड यही कहते रहे, ‘यह बातें हमने अखबारों के लिए थोडे़ कही थी. ये चैनल वालों ने मीडिया का कबाडा कर रखा है’. हालांकि प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया की बात कर मीडिया का बंटवारा नहीं होना चाहिए, लेकिन खबरिया चैनलों में बैठे वरिष्ठ लोगों को इस बारे में सोचना जरूर पडे़गा कि मीडिया की विश्वसनीयता का क्या?
लेखक विजय सिंह ‘कौशिक’ मुंबई में पत्रकार हैं.












alok
March 28, 2011 at 4:46 am
aisha hi hota hai bhai. news chanell walo ko na jane kab akl aayegi. jab tak aayegi sab kuch khatm ho chuka hai.
sonia gandhi
March 28, 2011 at 4:35 pm
Jai Ho Kirpa Bhaiyya Ki…….
raj
March 29, 2011 at 5:04 am
यह सब मुंबई कांग्रेश में उत्तरभारतीय और दक्षिण भारतीय गुट की लडाई है. गुरुदास कामत एंड कंपनी यह सब करा रही है. न जाने कांग्रेश हाई कमान को कब सद्बुधी आएगी.
संजय
March 29, 2011 at 8:48 am
क्या बात है विजयजी, ये ‘रागकृपा’ क्यों अलापना शुरू कर दिया? खार में एक झोपड़े में बड़े भाई के साथ रहने वाले व्यक्ति ने बांद्रा पश्चिम के पॉश इलाके में डूप्लेक्स फ्लैट केसे खरीदा। कृपाशंकर सिंह ऐसा कौन सा काम करते हैं कि इतनी आमदनी होती है कि आज हजारों करोड़ के आदमी हो गए। छोड़िए कृपाशंकर जैसे लोगों को के पक्ष में खड़े होने से अपकी साफ सुथरी इमैज पर असर पड़ेगा। चलिए छापे की बात गलत है मान लिया। क्या डाइनॉमिक्स से चार करोड़ नहीं लिए और शाहिद बलवा के गिरफ्तार होते ही पैसे जमा नहीं करा दिए… मेरा आग्रह है कि कृपा के लिए अपने इमैज की बलि मत दीजिए…
आपका शुभचिंतक
मनोज दुबे ( मालाड)
March 29, 2011 at 4:55 pm
विजय जी , कृपाशंकर के खिलाफ कांग्रेस का ही एक केन्द्रीय मंत्री एक साल से मुहीम चलाये हुए है. शनिवार को कृपाशंकर के घर पर छापे की खबर भी कई न्यूज चैनलों के रिपोर्टरों को उसी केन्द्रीय मंत्री के एक समर्थक ने मोटी रकम दे कर चलवाई थी. एसी चर्चा अब मीडिया के लोगों में है. सच मुझे नहीं पता.
मनोज दुबे ( मालाड)
Manoj
March 29, 2011 at 4:57 pm
विजय जी , कृपाशंकर के खिलाफ कांग्रेस का ही एक केन्द्रीय मंत्री एक साल से मुहीम चलाये हुए है. शनिवार को कृपाशंकर के घर पर छापे की खबर भी कई न्यूज चैनलों के रिपोर्टरों को उसी केन्द्रीय मंत्री के एक समर्थक ने मोटी रकम दे कर चलवाई थी. एसी चर्चा अब मीडिया के लोगों में है. सच मुझे नहीं part
vijay singh
March 31, 2011 at 4:52 pm
संजय जी पहले खबर ध्यान से पढ़िए, मैंने कृपा शंकर सिंह के बैंक बलेंस को लेकर कोई सफाई नहीं दी है.
बात केवल गलत खबर दिखने की है. मैंने केवल इसी बात को उठाया है. रही बात उनके करोडपति बनने की तो इस शहर में लाखो ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे की खाली जेब मुंबई में आने वाल़े अरबपति बन गए.