Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

कौन बताएगा छोटे और बड़े पत्रकार का अंतर!

एजाज: क्‍या बेअंदाजी से बात करना ही बड़े पत्रकार की निशानी है : मैं मोहम्‍मद एजाज अहमद शायद छोटा पत्रकार हूं. देवघर जिला अंतर्गत मधुपुर प्रखंड से मैंने पत्रक‍ारिता की शुरुआत जाने माने अखबार प्रभात खबर से की थी. बिल्‍कुल ही मुफ्त पत्रकारिता का ज्ञान हासिल कर अपनी बुलंदी खुद तय किया. इसके लिए मुझे किसी तरह का शुल्‍क अखबार को नहीं चुकाना पड़ा. हां चुकाना पड़ा तो अपना कीमती वक्‍त, मोटरसाइकिल और मोबाइल व्‍यवहार के लिए कुछ पैसे. सीखने को तो कुछ सीख लिया और बहुत कुछ बाकी है.

एजाज: क्‍या बेअंदाजी से बात करना ही बड़े पत्रकार की निशानी है : मैं मोहम्‍मद एजाज अहमद शायद छोटा पत्रकार हूं. देवघर जिला अंतर्गत मधुपुर प्रखंड से मैंने पत्रक‍ारिता की शुरुआत जाने माने अखबार प्रभात खबर से की थी. बिल्‍कुल ही मुफ्त पत्रकारिता का ज्ञान हासिल कर अपनी बुलंदी खुद तय किया. इसके लिए मुझे किसी तरह का शुल्‍क अखबार को नहीं चुकाना पड़ा. हां चुकाना पड़ा तो अपना कीमती वक्‍त, मोटरसाइकिल और मोबाइल व्‍यवहार के लिए कुछ पैसे. सीखने को तो कुछ सीख लिया और बहुत कुछ बाकी है.

पर यह जानना जरूरी था कि पत्रकार छोटा या फिर बड़ा कब होता है. इसकी समझ ने मुझे परेशानी में डाल दिया. हालांकि बड़े अखबार की बात ही कुछ और है. जब भी कहीं समाचार संकलन के लिए जाता तो लोग सिर्फ यह सवाल ही पूछते थे कि‍ आप किस अखबार से हैं, न की आप कौन हैं, कितने बड़े पत्रकार हैं. जान पहचान का सवाल बाद का होता था. लेकिन जब मैंने प्रभात खबर छोड़कर अन्‍य अखबार की ओर रूख किया तो कुछ लोग ही मुझे पूछते थे. ज्‍यादातर लोग यही पूछते थे कि प्रभात खबर क्‍यों छोड़ दिया. लोग कहते कि बड़े अखबार में काम करने से लोग आपको पहचानेंगे. ऐसे लोग छोटे-मोटे अखबारों की गरिमा को ही भूल जाते.

मैंने फिर एक कोशिश की प्रिंट मीडिया को छोड़कर इलेक्‍ट्रानिक मीडिया की ओर जाने की. बड़ी मुश्किल से 365 दिन न्‍यूज चैनल में मधुपुर से संवाददाता के लिए मौका मिला. प्रतिदिन समाचार भेज दिया करता था. पर सारी चलती नहीं थी. मुझे खुशी तब होती जब भेजी गई खबरें चैनल पर चलती थीं. यहां काम करते मुझे दो माह बीत चुके थे, अचानक खबर आई कि चैनल अपरिहार्य कारणों से बंद हो गया है और उसे दूसरी कंपनी ने खरीद लिया है. फिर क्‍या था इस चैनल से नाता टूटने के बाद दूसरे चैनल में काम की तलाश में जुट गया. कोशिश जारी रही. काम खोजने के दौरान एक चैनल के ब्‍यूरोचीफ का नम्‍बर मिल गया. उनसे बात होने लगी.

मैंने उनसे काम के बारे में कहा तो जवाब कुछ यूं मिला – ‘मैं तो तुम्‍हें जानता तक नहीं तो फिर कैसे नौकरी पर रख लूं.’ इसके बाद मैंने अपना परिचय दिया कि मैंने जर्नलिज्‍म का कोर्स किया है. मैं ग्रेजुएट हूं. सात साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं. परीक्षा तथा साक्षात्‍कार के लिए तैयार हूं. पर मेरी कोई बात नहीं सुनी गई. मुझसे कहा गया कि समय मिला तो बात करेंगे, मेरे पास टाइम नहीं है, अब मुझे डिस्‍टर्ब मत करना. इसके बाद फोन काट दिया गया. जिसके चलते मैं मानसिक रूप से पीडि़त रहने लगा. रात को नींद गायब हो जाती थी. मन में सिर्फ एक ही सवाल कौंधता था कि क्‍या किसी न्‍यूज चैनल के हेड या फिर ब्‍यूरोचीफ पत्रकारों से ऐसे ही बात करते हैं, या फिर अपने नीचे काम करने वालों को छोटा पत्रकार समझा जाता है. या बड़े पोस्‍टों पर काम करने वाले बड़े पत्रकार होते हैं. आज मैं छोटा पत्रकार ही सही पर प्रभात खबर मधुपुर के संवाददाता के रूप में काम कर रहा हूं.

मोहम्‍मद एजाज अहमद

मधुपुर, देवघर

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. govind goyal,sriganganagar

    March 4, 2011 at 7:22 am

    bada patrkar matlab bade news channel ke office ka koi bhee karinda ya kisi bahut bade news paper ka reporter. patrkar kitna bhee gyani,sachcha ho wah bada hota hee nahin agar wah kisi bade pair ke neeche hai tabhee bada patrkar hai. chote akhbar me chote hee patrkar hotehain.

  2. amitvirat

    March 4, 2011 at 10:32 am

    ek desi kahawat hai chhot lohar lohar, bada lohar tata birla

  3. shamim ekbal

    March 4, 2011 at 11:18 am

    bare patkar ka tamga liye kai ka kam kala dhandha hai aur media me patrkar kaise banai jate hai sab ko pata hai

  4. K.Ashish

    March 4, 2011 at 11:19 am

    दोस्त एजाज,
    जो तुम्हारा दर्द है…उस दर्द से हर पत्रकार को एक बार गुजरना पढ़ता है..समय तय करता है बड़ा या छोटा पत्रकार कौन है..एक वक्त था जब डीडी नयूज से विदाई के बाद दीपक चौरसिया नौकरी के लिए परेशान थे..पुन्य प्रशुन्न वाजपेयी भी सहारा छोड़ने के बाद काफी परेशान रहे..प्रभू चावला आज कहां है..राम कृपाल जी ने voi को कैसे छोड़ा उस दर्द को आप नहीं जानते..आलोक तोमर और प्रभात रंजन दीन से आप मिलिए..ऐसे कई नाम हैं जो लिए जा सकते हैं।दोस्त पत्रकार नहीं आईडिया छोटे या बड़े होते हैं..एक आइडिया से आप तरुण तेजपाल बन सकते हैं…
    शुभ कामनाओं के साथ..
    के.आशीष

  5. Dilip Kumar Lal

    June 1, 2011 at 7:09 pm

    भाई एजाज,
    खबरों की दुनिया से यही सीख मिलती है कि वर्तमान ही काफी है। बहुत कुछ करने के लिए भविष्य है। जिनसे आपके मन को आहत मिला है, हो सकता है उसी दौर से गुजरे होंगे। फिर भी, सभी से संबंध बनाते चलें। हालांकि अब तक आप इन बातों को भूल चुके होंगे। दरअसल, मधुपुर से मेरा गहरा नाता है तो इसी बहाने दो बातें कहने और बांटने का किसी न किसी रूप में अधिकार रखता हूं।
    ढेर सारे प्यार के साथ,
    दिलीप कुमार लाल, नवभारत टाइम्स, दिल्ली।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...