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क्‍या फेसबुक पर सच लिखने की सजा निलंबन है?

[caption id="attachment_21166" align="alignleft" width="85"]विष्‍णु राजगढि़या [/caption]फेसबुक पर टिप्पणी लिखने के कारण निलंबन का यह अनोखा मामला है। 17 सितंबर 2011 को बिहार विधान परिषद में कार्यरत मुसाफिर बैठा, सहायक (हिंदी प्रकाशन) को निलंबित कर दिया गया। मुसाफिर बैठा ने अपने भविष्य निधि की राशि से कर्ज लेना चाहते थे। लेकिन इसमें लाल फीताशाही को वह झेल नहीं पाये। साहित्य और लेखन में रूचि के कारण उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार को फेसबुक पर लिख डाला।

विष्‍णु राजगढि़या

फेसबुक पर टिप्पणी लिखने के कारण निलंबन का यह अनोखा मामला है। 17 सितंबर 2011 को बिहार विधान परिषद में कार्यरत मुसाफिर बैठा, सहायक (हिंदी प्रकाशन) को निलंबित कर दिया गया। मुसाफिर बैठा ने अपने भविष्य निधि की राशि से कर्ज लेना चाहते थे। लेकिन इसमें लाल फीताशाही को वह झेल नहीं पाये। साहित्य और लेखन में रूचि के कारण उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार को फेसबुक पर लिख डाला।

आठ सितंबर 2011 को उन्होंने फेसबुक पर लिखा- ”मुझे अपने भविष्य निधि खाते पर आधारित ऋण लेना है, आवेदन दिया है, कार्य की प्रगति जानने के लिए सम्बंधित कर्मचारियों, अधिकारियों के पास गया तो एक ने कहा कि आपका भविष्य निधि अकाउंट अपडेट नहीं है, ऐसा होने पर ही ऋण मिल सकेगा. जब भविष्य निधि अकाउंट अपडेट करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी से इसके बारे में मैं ने पूछा कि मेरा खाता सात सालों से अपडेट क्यों नहीं हुआ है तो साहब ने प्रतिप्रश्न किया और लगभग डाँटते हुए कहा- इतने दिनों से कहाँ सोये हुए थे आप? मैं ने कहा, काम आपका और कोतवाल बन उलटे मुझे डांट रहे हैं? अब लीजिए, आरटीआई झेलिये…..और यह करने जा रहा हूँ।”

यह टिप्पणी सरकारी कार्यालयों में बाबुओं की मनमानी कार्यप्रणाली से निराश, लेकिन सूचनाधिकार से लैस एक आम नागरिक की पीड़ा और संघर्ष का अच्छा उदाहरण है। इसके एक-दो दिन बाद मुसाफिर बैठा ने फेसबुक पर लिखा- ”दीपक तले अँधेरा ! यह लोकोक्ति है जो बहुत से व्यक्तियों, संस्थाओं और सत्ता प्रतिष्ठानों पर लागू होता है. बिहार विधान परिषद जिसकी मैं नौकरी करता हूँ, वहाँ विधानों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं. कुछ यहाँ नियुक्त कर्मी ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति के लिए जिस दिन निर्णय हुआ उसी दिन या एक दो दिन के बाद ही उनको नियुक्त भी कर लिया गया. न कोई सार्वजनिक नोटिस-अधिसूचना न ही मीडिया में विज्ञापन. किस लोकतंत्र में रह रहे हैं हम?”

उक्त टिप्पणी के कारण विधान परिषद के सभापति के आदेश पर मुसाफिर बैठा को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन पत्र इन शब्दों में है-” श्री मुसाफिर बैठा, सहायक (हिंदी प्रकाशन) को परिषद के अधिकारियों के विरुद्ध असंवैधानिक भाषा का प्रयोग करने तथा दीपक तले अँधेरा, यह लोकोक्ति है जो बहुत से व्यक्तियों, संस्थाओं और सत्ता प्रतिष्ठानों पर लागू होता है, बिहार विधान परिषद, जिसकी मैं नौकरी करता हूँ, वहाँ विधानों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं- इस तरह की टिप्पणी करने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है. सभापति, बिहार विधान परिषद के आदेश से….”

फिलहाल यह मामला दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। बिहार में सुशासन का हल्ला बहुत सुनने को मिलता है। नीतीश कुमार बिहार में लोकायुक्त को मजबूत बनाने की बात करते हैं। लेकिन उन्होंने सुशासन के सूचना कानून को ही बदल डाला है। बिहार में अपराधियों को कुकर्मों की सजा देने के बजाय माननीय या ठेकेदार बनाकर महिमामंडित किया जा रहा है। पुलिस जुल्म के नमूने रोज देखने को मिल रहे हैं। इतने बड़े सुशासन के लिए ऐसी छोटी-मोटी कुरबानियां तो देनी ही होंगी।

अब मुसाफिर बैठा के निलंबन ने अन्ना आंदोलन से जुड़े कई सवालों को सतह पर ला दिया है। क्या श्री बैठा का यह पूछना गलत था कि मेरा खाता सात सालों से अपडेट क्यों नहीं हुआ? अगर उन्हें जायज हक से वंचित और परेशान किया जा रहा था तो इसे सार्वजनिक मंच पर लाना अपराध कैसे हुआ? यही बात अगर अखबार में संपादक के नाम पत्र में लिखी गयी होती तो क्या उस पर भी निलंबन होता?

मुसाफिर बैठा ने बिहार विधान परिषद में नियुक्तियों को लेकर जो सवाल उठाये हैं, वह भी जांच का विषय है। इसी विधानमंडल में गुलाम सरवर के जमाने में तीन-चार सौ नौकरियों में मनमानी को स्वर्गीय विधायक महेंद्र सिंह ने उठाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और गलत नियुक्तियां रद्द हुईं। भविष्य निधि खाते को सात साल से अपडेट नहीं करना सुशासन नहीं है। अगर नीतीश कुमार सचमुच सुशासन चाहते हैं, तो उन्हें राज्य में ऐसे परिवेश की गारंटी करनी होगी, जो ऐसे सवालों को सहिष्णुतापूर्वक ले। लेकिन सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को गैरकानूनी तरीके से बदलकर, कमजोर करके नीतीश कुमार ने नौकरशाहों को स्पष्ट संकेत दिया है कि वह कैसा सुशासन चाहते हैं। मुसाफिर बैठा के साथ अन्याय हुआ तो अन्ना समर्थकों के बीच खिल्ली ही उडे़गी, क्योंकि नीतीश कुमार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में बड़े-बड़े वायदे कर रखे हैं।

लेखक विष्‍णु राजगढि़या झारखंड में वरिष्‍ठ पत्रकार तथा आरटीआई कार्यकर्ता हैं.

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13 Comments

13 Comments

  1. nikhilchauhan

    September 17, 2011 at 9:47 am

    very bad sir ji.

  2. प्रशान्त

    September 17, 2011 at 6:20 pm

    खेद है और धिक्कार है. यह लोकतन्त्र है या ताना शाही.

  3. सिध्हार्थ वर्मा

    September 18, 2011 at 8:24 am

    फेसबुक पर मुसाफिर बैठा की पोस्ट्स देखिये. निहायत घटिया और नीचता भरे धार्मिक और जातीय कमेंट्स पढ़ने को मिलेगे. ऐसा आदमी आजतक किसी जिम्मेदार जगह पर कार्यरत कैसे था ,आश्चर्य की बात है. वैसे सुना है कि विभागीय चेक के लेनदेन की हेरा फेरी का इलज़ाम है इन जनाब पर .

    • मुसाफ़िर बैठा

      November 11, 2021 at 2:17 pm

      धर्म और जाति व्यवस्था समाज के कोढ़ हैं, इसके प्रति समाज को जगाना हमारा संवैधानिक नागरिक कर्तव्य है, जाने रहिये।

      चेक-फेक का मामला मेरे साथ न जुड़ा था।

      अब भी आकर देखिए, ईमानदारी से अपने कर्तव्य निभाने वाला कर्मी हूँ।

  4. Ajeet Tyagi Journalist

    September 18, 2011 at 2:29 pm

    it is the example of tana shahi.

  5. sachin

    September 18, 2011 at 4:15 pm

    ye bahut galat hai

  6. Ashok Kumar Choudhary

    September 18, 2011 at 4:59 pm

    Disgusting, Susasan ki dhajjiya urai jaa rahi hai

  7. abhishek ag

    September 18, 2011 at 5:32 pm

    >:( dhhikar hi hum sab par hamare samaj par jahan insaan ke such bolne ki saja hi nilaban ki moot

  8. पगलू बाबा

    September 18, 2011 at 7:51 pm

    सरकारी कर्मचारी रहते हुए इस तरह सार्वजनिक मंच पर बयानबाजी को उचित नहीं कहा जा सकता है | मुसाफिर जी को चाहिए था कि विधान परिषद के उच्चाधिकारी या सभापति से मिलकर अपनी समस्या बताते|

  9. kuldeep Bhardwaj

    September 18, 2011 at 8:35 pm

    जब भी मंज़र खंडित होते है …शब्दों को ढाल बनाया जाता है ..
    सत्ता के इशारे पर ये प्रयत्न जारी है .. जनता पर कठपुतली का रंग चढ़ाया जाता है

  10. ek patrakar

    September 19, 2011 at 2:23 pm

    बहुत ठीक हुआ. फेसबुक पर मुसाफिर ने नफ़रत, गाली गलौज बदतमीजी के सारी हदें पार कर दी थी, उसको लगता था कि सरकारी नौकरी में रहते हुए उसको ये सब करने का हक़ है. उसने जन्माष्टमी पर लिखा था—आज छिनाल शिरोमणि का जन्मदिन है, ऐसे घटिया, सरकरी टुकड़ों पर पलने वाले को अपनी औकात तो पता चली. उसकी जम्मत के लोगों को लगता है किवो सरकारी दामाद है, और उसको बिना काम के तनखा मिलन ही चाहिए. उसे सस्पेंड नहीं, बर्खास्त करना चाहिए. ऐसे बदमिजाज क्या सरकारी नौकरी के काबिल है? अच्छा हुआ. [b][/b]

  11. durgesh

    September 21, 2011 at 5:51 am

    भ्रष्टाचार एवं सरकारी पैसों की बर्बादी का एक नमूना

    मुख्यमंत्री महोदय, बिहार सरकार, पटना

    बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ी गई आपकी मुहिम पर धन्यवाद। हमें पूर्ण विश्वास है कि चाहे पूरा भारत भ्रष्टाचार से मुक्त हो या न हो पर आपके नेतृत्व में कम से कम बिहार में तो भ्रष्टाचार की रीढ़ जरूर ही टूट जाएगी।

    भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के आपके सपने मे योगदान देने हेतु मै भी एक नागरिक की हैसियत से प्राप्त जानकारियों के आधार पर एक मामला आप के समक्ष रख रहा हूँ। उम्मीद है कि आप इस की जाँच निगरानी विभाग से करवाने की कृपा करेंगे।

    यह मामला पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अंतर्गत गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना में करोड़ों रुपयों के सरकारी पैसों की लूट एवं बबार्दी का है

    –जहाँ मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनका कार्यालय अपने अधीन गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के शकील अहमद नाम के लिपिक से मिलकर घूस के लालच में उनके हाथों की कठपुतली बन गंगा पुल परियोजना की करोंड़ों की जमीन को आज की तारीख में मात्र हजारों में विस्थापितों को बेचवाने की कारवाई में लगा हैं।

    –जहाँ शकील अहमद नामक लिपिक के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में धड़ल्ले से सरकारी क्वाटरों को अवैध रूप से मासिक किराए पर चलाया जा रहा है।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में धड़ल्ले से सरकारी जमीनों को अवैध रूप से किराए पर उठाकर गायघाट पुल के नीचे कोने पर मारुति गैरेज, चाउमीन की दुकान, बालू की दुकान आदि अनेक दुकानों को मासिक किराए पर चलाया जा रहा है।

    –जहाँ शकील अहमद मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में धड़ल्ले से सरकारी आम, केला, लीची, ताड़ आदि के हजारों पेड़ों की नीलामी नही कर उनसे खुद पैसा कमा रहें हैं।

    –जहाँ मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय को यह पता ही नही है कि गंगा पुल परियोजना की कितनी सरकारी जमीन कहाँ कहाँ है क्योंकि शकील अहमद एवं सज्जाद हसन अमीन के द्वारा हजारों एकड़ सरकारी जमीन के सारे नक्शे गायब कर दिए गए हैं।

    — जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में गायघाट पुल के नीचे कई एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से चाँद कोलोनी बसवाकर मासिक किराए वसूला जा रहा है।

    — जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में जडुआ, हाजीपुर में पुल के नीचे कई एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कोलोनी एवं दुकानें बसवाकर मासिक किराया वसूला जा रहा है।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में सरकारी पैसों को साल साल भर सूद पर चलाने के बाद सरकार में जमा किया जाता है।

    –जहाँ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू ने सरकारी पैसों के गबन और जालसाजी के मामले में मुख्य अभियंता को तीन साढ़े तीन सौ पत्र लिखे पर मुख्य अभियंता ने कोई कारवाई नही की और अपने बचने के लिए कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू का ही दो वर्षों में ही स्थानांतरण करवा दिया जबकि नियम तीन साल का है। कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू का तो दो वर्षों में ही स्थानांतरण करवा दिया पर मुख्य अभियंता ने गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के कर्मचारियों का पिछले पचीस वर्षों से आज तक स्थानांतरण नहीं किया।

    –जहाँ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू के द्वारा शकील अहमद के ऊपर सरकारी पैसों के गबन और जालसाजी के मामले में आलमगंज थाना, पटना में केस दर्ज करने के बाद भी मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय ने आज तक शकील अहमद पर कोई कारवाई नहीं की और शकील अहमद का स्थानांतरण नहीं कर उन्हे बचाने एवं उनके द्वारा सबूतों को मिटाने में उनका साथ दे रहें हैं।

    –जहाँ पिछले पचीस वर्षों से आज तक कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया गया।

    –जहाँ पिछले पचीस वर्षों से आज तक बिना किसी काम के 80-90 कर्मचारियों के वेतन पर सरकार का चालीस करोड़ लुटाया जा चुका है।

    –जहाँ पिछले पचीस वर्षों से आज तक बिना किसी काम के तथा बिना आफिस आए दो तीन महीने पर एक दिन आफिस आकर हाजरी बनाई जाती है पर वेतन की नियमित निकासी होती है।

    –जहाँ नहीं आने पर हाजरी काटने पर शकील अहमद के द्वारा रामलगन रजक, बड़ा बाबू को मिथिलेश कुमार नाम के एक गुन्डे चपरासी से पिटवाया जाता है। मिथिलेश कुमार वेतन सरकार से लेते हैं पर दिन भर खुद टेम्पो चलाते हैं।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा सरेआम एकाउंटेंट बाबू को जेल भिजवाने की धमकी दी गई क्योंकि वे शकील अहमद के काले कारनामों के साथी नही बन पाए।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा अशोक सिंह, ब्रह्मदेव बाबू, एकाउंटेंट बाबू और दिलीप बाबू को मारने की धमकी दी गई क्योंकि वे शकील अहमद के काले कारनामों के साथी नही बन पाए।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग के कार्यालय एवं उनके संरक्षण में हाजरी बही को फाड़ दिया जा रहा है या गायब कर दिया जा रहा है ताकि सबूत नहीं रहे।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग के कार्यालय एवं उनके संरक्षण में सरकारी जमीन पर निजी व्यक्ति द्वारा लगाए गए हॅाट मिक्स प्लांट का चार साल का 30 लाख रूपए से ज्यादा का सरकारी किराया आजतक वसूल नही किया गया और अब हॅाट मिक्स प्लांट लगाने वाला निजी व्यक्ति अपना हॅाट मिक्स प्लांट उठाकर चला भी गया है।

    –जहाँ सुनील कुमार सिंह नामक बाहुबली पथबेलन चालक द्वारा मसौढ़ी में पदस्थापन के बाद भी पटना की दर से मकान किराया भत्ता अपने बाहुबल पर मुख्य अभियंता के संरक्षण में लिया जा रहा है और सरकार को लाखों की चपत लगाई जा रही है।

    –जहाँ कई कर्मचारी अवैध रूप से फर्जी ढ़ग से बहाली होकर भी आज तक बने हुए हैं और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामलों को दबा दिया जा रहा है।

    –जहाँ प्रभुनंदन झा नाम के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी अवैध रूप से फर्जी ढ़ग से तृतीय श्रेणी के लिपिक के पद का वेतन ले रहे हैं जबकि वे चतुर्थ श्रेणी के चपरासी हैं।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में ठेकेदारों की लाखों की बैंक गारंटी लैप्स करवाई जा चुकी है और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामलों को दबा दिया गया है।

    –जहाँ विश्वनाथ पांडेय के सेवा निवृति के छह माह बाद भी उनके सेवांत लाभों का कोई भुगतान आजतक उन्हे नही किया गया क्योंकि शकील अहमद ने उनकी 127 मापी पुस्तिकाएँ गायब कर रखी हैं।

    –जहाँ बृजकिशोर सिंह, पत्राचार लिपिक मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में सरेआम कार्यालय परिसर में विस्थापितों से घूस लेते हैं और कार्यालय परिसर में ही शराब का दौर चलाते हैं। बिना घूस के बृजकिशोर सिंह कोई मामला निष्पादित नहीं करते है जिसकी जाँच उन्हें प्राप्त कराए गए पत्रों एवं उनके द्वारा निष्पादित पत्रों की सूची से की जा सकती है।

    –जहाँ बृजकिशोर सिंह, पत्राचार लिपिक द्वारा सरेआम कार्यालय परिसर में ही शराब का दौर चलाने की जानकारी वहाँ रहने वाले कुंदन नाम के चौकीदार से ली जा सकती है।

    –जहाँ बृजकिशोर सिंह, पत्राचार लिपिक और शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में स्व0 लाल बाबू प्रसाद, कार्यभारित जीप चालक को 94,390.00 का फर्जी भुगतान कर दिया और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामले को दबा दिया गया है।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में पिछले आठ दस वर्षों से गलत रुप से रोकड़ संचालन भत्ते की निकासी की गई और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामले को दबा दिया गया है।

    –जहाँ अरविंद और निरंजन नाम के चपरासियों द्वारा शकील अहमद, सज्जाद हसन, बृजकिशोर सिंह, सुनील कुमार सिंह और मुख्य अभियंता का भेद खोलने के डर से इन दोनों चपरासियों को तंग कराने के लिए इनकी प्रतिनियुक्ति मुख्य अभियंता के कार्यालय में करवाने की साजिश रची जा रही है।

    –जहाँ इस तरह के घोटालों की निगरानी विभाग से जाँच करवाने के लिए प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू की ओर से मुख्य अभियंता को लिखे गए तीन साढ़े तीन सौ पत्रों के बावजूद मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के द्वारा निगरानी विभाग से जाँच नही करवा कर मामलों को दबा दिया गया है।

    अतः अनुरोध है कि शकील अहमद, सज्जाद हसन, बृजकिशोर सिंह, सुनील कुमार सिंह जैसे लोगों का अन्यत्र जिलों में स्थानांतरण कर इन मामलों की निगरानी विभाग से जाँच करवाने की कृपा करते हुए भ्रष्टाचारियों की रीढ़ तोड़ते हुए विश्वनाथ पांडेय के सेवा निवृति लाभों को दिलाने की कृपा करें।

  12. durgesh

    September 21, 2011 at 5:52 am

    भ्रष्टाचार एवं सरकारी पैसों की बर्बादी का एक नमूना

    मुख्यमंत्री महोदय, बिहार सरकार, पटना

    बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ी गई आपकी मुहिम पर धन्यवाद। हमें पूर्ण विश्वास है कि चाहे पूरा भारत भ्रष्टाचार से मुक्त हो या न हो पर आपके नेतृत्व में कम से कम बिहार में तो भ्रष्टाचार की रीढ़ जरूर ही टूट जाएगी।

    भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के आपके सपने मे योगदान देने हेतु मै भी एक नागरिक की हैसियत से प्राप्त जानकारियों के आधार पर एक मामला आप के समक्ष रख रहा हूँ। उम्मीद है कि आप इस की जाँच निगरानी विभाग से करवाने की कृपा करेंगे।

    यह मामला पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अंतर्गत गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना में करोड़ों रुपयों के सरकारी पैसों की लूट एवं बबार्दी का है

    –जहाँ मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनका कार्यालय अपने अधीन गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के शकील अहमद नाम के लिपिक से मिलकर घूस के लालच में उनके हाथों की कठपुतली बन गंगा पुल परियोजना की करोंड़ों की जमीन को आज की तारीख में मात्र हजारों में विस्थापितों को बेचवाने की कारवाई में लगा हैं।

    –जहाँ शकील अहमद नामक लिपिक के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में धड़ल्ले से सरकारी क्वाटरों को अवैध रूप से मासिक किराए पर चलाया जा रहा है।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में धड़ल्ले से सरकारी जमीनों को अवैध रूप से किराए पर उठाकर गायघाट पुल के नीचे कोने पर मारुति गैरेज, चाउमीन की दुकान, बालू की दुकान आदि अनेक दुकानों को मासिक किराए पर चलाया जा रहा है।

    –जहाँ शकील अहमद मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में धड़ल्ले से सरकारी आम, केला, लीची, ताड़ आदि के हजारों पेड़ों की नीलामी नही कर उनसे खुद पैसा कमा रहें हैं।

    –जहाँ मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय को यह पता ही नही है कि गंगा पुल परियोजना की कितनी सरकारी जमीन कहाँ कहाँ है क्योंकि शकील अहमद एवं सज्जाद हसन अमीन के द्वारा हजारों एकड़ सरकारी जमीन के सारे नक्शे गायब कर दिए गए हैं।

    — जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में गायघाट पुल के नीचे कई एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से चाँद कोलोनी बसवाकर मासिक किराए वसूला जा रहा है।

    — जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में जडुआ, हाजीपुर में पुल के नीचे कई एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कोलोनी एवं दुकानें बसवाकर मासिक किराया वसूला जा रहा है।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय के संरक्षण में सरकारी पैसों को साल साल भर सूद पर चलाने के बाद सरकार में जमा किया जाता है।

    –जहाँ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू ने सरकारी पैसों के गबन और जालसाजी के मामले में मुख्य अभियंता को तीन साढ़े तीन सौ पत्र लिखे पर मुख्य अभियंता ने कोई कारवाई नही की और अपने बचने के लिए कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू का ही दो वर्षों में ही स्थानांतरण करवा दिया जबकि नियम तीन साल का है। कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू का तो दो वर्षों में ही स्थानांतरण करवा दिया पर मुख्य अभियंता ने गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के कर्मचारियों का पिछले पचीस वर्षों से आज तक स्थानांतरण नहीं किया।

    –जहाँ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू के द्वारा शकील अहमद के ऊपर सरकारी पैसों के गबन और जालसाजी के मामले में आलमगंज थाना, पटना में केस दर्ज करने के बाद भी मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं उनके कार्यालय ने आज तक शकील अहमद पर कोई कारवाई नहीं की और शकील अहमद का स्थानांतरण नहीं कर उन्हे बचाने एवं उनके द्वारा सबूतों को मिटाने में उनका साथ दे रहें हैं।

    –जहाँ पिछले पचीस वर्षों से आज तक कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया गया।

    –जहाँ पिछले पचीस वर्षों से आज तक बिना किसी काम के 80-90 कर्मचारियों के वेतन पर सरकार का चालीस करोड़ लुटाया जा चुका है।

    –जहाँ पिछले पचीस वर्षों से आज तक बिना किसी काम के तथा बिना आफिस आए दो तीन महीने पर एक दिन आफिस आकर हाजरी बनाई जाती है पर वेतन की नियमित निकासी होती है।

    –जहाँ नहीं आने पर हाजरी काटने पर शकील अहमद के द्वारा रामलगन रजक, बड़ा बाबू को मिथिलेश कुमार नाम के एक गुन्डे चपरासी से पिटवाया जाता है। मिथिलेश कुमार वेतन सरकार से लेते हैं पर दिन भर खुद टेम्पो चलाते हैं।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा सरेआम एकाउंटेंट बाबू को जेल भिजवाने की धमकी दी गई क्योंकि वे शकील अहमद के काले कारनामों के साथी नही बन पाए।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा अशोक सिंह, ब्रह्मदेव बाबू, एकाउंटेंट बाबू और दिलीप बाबू को मारने की धमकी दी गई क्योंकि वे शकील अहमद के काले कारनामों के साथी नही बन पाए।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग के कार्यालय एवं उनके संरक्षण में हाजरी बही को फाड़ दिया जा रहा है या गायब कर दिया जा रहा है ताकि सबूत नहीं रहे।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग के कार्यालय एवं उनके संरक्षण में सरकारी जमीन पर निजी व्यक्ति द्वारा लगाए गए हॅाट मिक्स प्लांट का चार साल का 30 लाख रूपए से ज्यादा का सरकारी किराया आजतक वसूल नही किया गया और अब हॅाट मिक्स प्लांट लगाने वाला निजी व्यक्ति अपना हॅाट मिक्स प्लांट उठाकर चला भी गया है।

    –जहाँ सुनील कुमार सिंह नामक बाहुबली पथबेलन चालक द्वारा मसौढ़ी में पदस्थापन के बाद भी पटना की दर से मकान किराया भत्ता अपने बाहुबल पर मुख्य अभियंता के संरक्षण में लिया जा रहा है और सरकार को लाखों की चपत लगाई जा रही है।

    –जहाँ कई कर्मचारी अवैध रूप से फर्जी ढ़ग से बहाली होकर भी आज तक बने हुए हैं और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामलों को दबा दिया जा रहा है।

    –जहाँ प्रभुनंदन झा नाम के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी अवैध रूप से फर्जी ढ़ग से तृतीय श्रेणी के लिपिक के पद का वेतन ले रहे हैं जबकि वे चतुर्थ श्रेणी के चपरासी हैं।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में ठेकेदारों की लाखों की बैंक गारंटी लैप्स करवाई जा चुकी है और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामलों को दबा दिया गया है।

    –जहाँ विश्वनाथ पांडेय के सेवा निवृति के छह माह बाद भी उनके सेवांत लाभों का कोई भुगतान आजतक उन्हे नही किया गया क्योंकि शकील अहमद ने उनकी 127 मापी पुस्तिकाएँ गायब कर रखी हैं।

    –जहाँ बृजकिशोर सिंह, पत्राचार लिपिक मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में सरेआम कार्यालय परिसर में विस्थापितों से घूस लेते हैं और कार्यालय परिसर में ही शराब का दौर चलाते हैं। बिना घूस के बृजकिशोर सिंह कोई मामला निष्पादित नहीं करते है जिसकी जाँच उन्हें प्राप्त कराए गए पत्रों एवं उनके द्वारा निष्पादित पत्रों की सूची से की जा सकती है।

    –जहाँ बृजकिशोर सिंह, पत्राचार लिपिक द्वारा सरेआम कार्यालय परिसर में ही शराब का दौर चलाने की जानकारी वहाँ रहने वाले कुंदन नाम के चौकीदार से ली जा सकती है।

    –जहाँ बृजकिशोर सिंह, पत्राचार लिपिक और शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में स्व0 लाल बाबू प्रसाद, कार्यभारित जीप चालक को 94,390.00 का फर्जी भुगतान कर दिया और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामले को दबा दिया गया है।

    –जहाँ शकील अहमद के द्वारा मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के संरक्षण में पिछले आठ दस वर्षों से गलत रुप से रोकड़ संचालन भत्ते की निकासी की गई और मुख्य अभियंता एवं उनके कार्यालय के द्वारा मामले को दबा दिया गया है।

    –जहाँ अरविंद और निरंजन नाम के चपरासियों द्वारा शकील अहमद, सज्जाद हसन, बृजकिशोर सिंह, सुनील कुमार सिंह और मुख्य अभियंता का भेद खोलने के डर से इन दोनों चपरासियों को तंग कराने के लिए इनकी प्रतिनियुक्ति मुख्य अभियंता के कार्यालय में करवाने की साजिश रची जा रही है।

    –जहाँ इस तरह के घोटालों की निगरानी विभाग से जाँच करवाने के लिए प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता दिलीप बाबू की ओर से मुख्य अभियंता को लिखे गए तीन साढ़े तीन सौ पत्रों के बावजूद मुख्य अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, पटना के द्वारा निगरानी विभाग से जाँच नही करवा कर मामलों को दबा दिया गया है।

    अतः अनुरोध है कि शकील अहमद, सज्जाद हसन, बृजकिशोर सिंह, सुनील कुमार सिंह जैसे लोगों का अन्यत्र जिलों में स्थानांतरण कर इन मामलों की निगरानी विभाग से जाँच करवाने की कृपा करते हुए भ्रष्टाचारियों की रीढ़ तोड़ते हुए विश्वनाथ पांडेय के सेवा निवृति लाभों को दिलाने की कृपा करें।

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