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पॉवर-पुलिस

खून भरे मायावी चार साल

यूपी में मायावती सरकार ने आज चार साल पूरे कर लिए हैं. जी हां. जंगलराज के चार साल. सूबे में पुलिस का राज है. उस पुलिस का नहीं जो जनता की मित्र है. उस पुलिस का जिसे जनता को सता सता कर पैसे वसूल करने हैं और अपने आकाओं तक पहुंचाने हैं. सूबे में कोई नेता नहीं है. सिर्फ पुलिस ही शासक है. नेता एकमात्र मायावती हैं जो खुद इतनी डरी हुई हैं कि वह एक किले नुमा मकान में खुद को कैद रखती हैं. एसपीजी से घिरी रहती हैं.

यूपी में मायावती सरकार ने आज चार साल पूरे कर लिए हैं. जी हां. जंगलराज के चार साल. सूबे में पुलिस का राज है. उस पुलिस का नहीं जो जनता की मित्र है. उस पुलिस का जिसे जनता को सता सता कर पैसे वसूल करने हैं और अपने आकाओं तक पहुंचाने हैं. सूबे में कोई नेता नहीं है. सिर्फ पुलिस ही शासक है. नेता एकमात्र मायावती हैं जो खुद इतनी डरी हुई हैं कि वह एक किले नुमा मकान में खुद को कैद रखती हैं. एसपीजी से घिरी रहती हैं.

मायावती के बाद उनके पार्टी में कोई दूसरा नेता नहीं है. सब के सब कार्यकर्ता हैं. और ये कार्यकर्ता किसी मिशन या आदर्श के भाव से नहीं भरे हैं बल्कि सत्ता लोभ तले संचालित हैं, इसी वजह से मायावती की जयगान करते रहते हैं. मायावती के चार साल पूरे हुए हैं और इधर नोएडा से आगरा तक किसानों के खून से धरती लाल हुई जा रही है. कभी माताओं को थाने में बिठाया जाता है, कभी बेटियों की इज्जत लूटी जाती है, कभी बड़े-बड़े घपले घोटाले किए जाते हैं, कभी धरना प्रदर्शन न करने के आदेश दे दिए जाते हैं… और, तिस पर तुर्रा ये कि बहन जी मसीहा हैं. अपने खुद छपवाए बैनरों-पोस्टरों में बहन मायावती खुद को गरीबों का मसीहा बताती हैं. भ्रष्ट अफसरों से घिरी इस मुख्यमंत्री तक गरीब की आवाज पहुंचने ही नहीं दी जाती, लेकिन वे खुद को गरीबों का मसीहा बताती हैं. गरीब किसान अपनी जमीन छीने जाने के बदले ठीकठाक पैसे दिए जाने की मांग कर रहे हैं पर उन्हें बदले में गोली व गाली दी जा रही है. लेकिन मायावती अपने को गरीबों का मसीहा बताती हैं.

यकीन न हो तो आप ग्रेटर नोएडा के भट्ठा गांव पहुंच जाइए. पुलिस जुल्म की जो दास्तान यहां आपको दिखाई व सुनाई पड़ेगा, उससे आपके रोंगटे खड़े हो जोएंगे. नोएडा एक्‍सप्रेस वे के निर्माण के लिए अपनी जमीनों के अधिग्रहण के खिलाफ ग्रेटर नोएडा में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस की फायरिंग, रात भर भट्ठा गांव में रात भर किसानों की धरपकड़ के लिए पुलिस का तांडव और अब रविवार की सुबह से आगरा में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की दोबारा फायरिंग.

जी हां ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक किसानों पर पुलिस का कहर जारी है. वो भी उस दिन जब प्रदेश सरकार के चार साल पूरे हुए हैं. जी हां उत्‍तर प्रदेश में मायावती सरकार ने आज अपने चार साल पूरे किये हैं, लेकिन ऐसे समय में जहां मुख्‍यमंत्री अपनी उपलब्धियों का बखान करने निकली हैं, वहीं दूसरी ओर उन्‍हीं की पुलिस किसानों पर कहर बरपा रही है. शनिवार को ग्रेटर नोएडा में फायरिंग के दौरान एक जवान और दो किसानों की मौत के खिलाफ आगरा व ग्रेटर नोएडा दोनों जगह किसानों ने रविवार की सुबह जमकर प्रदर्शन किया. इस दौरान किसानों ने आगरा में कई फैक्ट्रियों में आग लगा दी और एक्‍सप्रेस हाईवे जाम कर दिया. उधर अलीगढ़ के किसान भी आंदोलन में उतर आये हैं.

पुलिस ने किसानों पर जमकर लाठियां भांजी और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां भी चलाईं. पुलिस ने रात भर अभियान चलाकर 100 से ज्‍यादा किसानों को हिरासत में लिया है. गौतमबुद्धनगर में धारा 114 लागू कर दी गई है. आगरा व ग्रेटर नोएडा दोनों जगह भारी संख्‍या में पुलिस बल तैनात कर दिये गये हैं. ये तो रही रविवार की सुबह की कहानी, इससे पहले अगर बीती रात की बात करें तो पीएसी के जवानों ने नोएडा के भट्ठा गांव में रात भर तांडव मचाया. यहां किसानों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने घरों में घुस कर बच्‍चों और महिलाओं को प्रताड़ित किया. गांव की महिलाओं का आरोप है कि कई पुलिस वालों ने लूटपाट भी की. यही नहीं सोते बच्‍चों पर भी पुलिस वाले अत्‍याचार करने से बाज नहीं आये.

किसानों और प्रशासन के बीच हुई खूनी झ़डप के बाद गाजियाबाद के एसएसपी रघुबीर लाल को कमान सौंपी गई है. नोएडा के एसएसपी और डीएम के घायल होने के बाद पुलिस किसानों को गिरफ्तार करने के लिए गांव में घुस गई. किसानों का आरोप है कि पुलिस ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया. हम अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं. अब तक करीब 50 किसानों को गिरफ्तार किया गया है. दो किसानों को गोली लगी है, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

भट्टा आंदोलन एक नजर में : 17 जनवरी को भट्टा पारसौल गांव के किसानों ने बगैर परमिशन के गांव में ही सर्वदल किसान संघर्ष समिति बनाकर आंदोलन की शुरुआत की. 21 जनवरी को प्रशासन ने किसानों से वार्ता करने का प्रयास किया. 22 जनवरी को अपर जिलाधिकारी प्रशासन ओपी आर्या ने मनवीर तेवतिया से फोन पर बात कर वार्ता के लिए बुलाया.  23 जनवरी को धरने पर बैठे किसानों की तबीयत खराब हो गई. इलाज के लिए प्रशासन ने डाक्टरों की टीम भेजी. किसानों ने डाक्टरों के साथ र्दुव्‍यवहार किया. 1 फरवरी को किसानों ने आंदोलन उग्र करते हुए आगरा के लिए कूच कर दिया. इस दौरान पुलिस ने 208 किसानों को गिरफ्तार कर लिया. 3 फरवरी को प्रशासन ने गिरफ्तार किसानों को रिहा कर दिया. 5 फरवरी को एसडीएम सदर व दादरी, सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान और एसएसपी किसानों से वार्ता करने के लिए गांव में पहुंचे, वार्ता विफल रही. 6 फरवरी को डीएम दीपक अग्रवाल ने किसान नेता मनवीर तेवतिया को बातचीत के लिए नोएडा बुलाया. लेकिन, मनवीर तेवतिया वार्ता करने नहीं पहुंचे. 12 फरवरी को बगैर सूचना के किसान चोला रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर बैठ गए. तीन घंटे तक रेलवे यातायात बाधित रहा. 14 फरवरी को एसडीएम सदर, सीओ ग्रेटर नोएडा ने किसान नेता श्रीचंद शर्मा, कुंदन सिंह से वार्ता की. धरना समाप्त करने के लिए वार्ता का आमंत्रण दिया गया. 16 फरवरी को मनवीर तेवतिया ने प्रशासन से वार्ता करने से इनकार कर दिया. 17 फरवरी को सिटी मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर ने आंदोलनकारी किसानों को वार्ता के लिए तैयार कर लिया. 18 फरवरी को दनकौर में किसानों के साथ वार्ता शुरू हुई. तलाशी के दौरान भड़के किसान. लाठीचार्ज. किसानों ने दो अधिकारियों को बंधक बनाया. देर रात छो़डा. 21 फरवरी को शांति व्यवस्था कायम करने के लिए पीएसी बल तैनात कर दिया गया. 7 मार्च को किसानों ने रेलवे ट्रैक बाधित करने का ऐलान किया. 21 फरवरी को ही किसानों ने एक पीएसी के जवान को बंधक बनाया गया. बाद में छोड़ा. 26 मार्च को किसानों ने रास्ता जाम किया. फायरिंग व लाठीचार्ज. पांच अधिकारियों को बनाया बंधक. 06 मई को किसानों ने रोडवेज कर्मियों को बंधक बनाया. 08 मई को किसानों व पुलिस के बीच फिर हुई गोलीबारी.

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