उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हिन्दुस्तान, अमर उजाला, जागरण, भास्कर, पत्रिका समेत लगभग सभी प्रमुख अखबारों ने 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी हैं. दरअसल यह न तो इन अखबारों की तरफ से दी गई शुभकामना है और ना ही अनजाने में हुई गलती है. यह टाटा डोकोमो का 3जी का विज्ञापन है. जिसको पढ़ने के बाद कई पाठक चौक गए.
कुछ ने कड़ी प्रतिक्रियाएं भी कीं. लेकिन जो सबसे दुखद है वह है गणतंत्र दिवस का माखौल उड़ाया जाना. पैसे के नाम पर जिस तरह से लगभग सभी अखबारों ने इस विज्ञापन को प्रमुखता से छापा है, उससे जाहिर है ये पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं, कुछ भी. विज्ञापन के नाम पर कंपनी और अखबारों ने जिस तरह राष्ट्रीय पर्व का अपमान किया है उससे लोग स्तब्ध हैं. अभी तक पेड न्यूज के लिए बदनाम अखबार अब पैसे के लिए कुछ भी करने को तत्पर दिखाई पड़ने लगे हैं. चाहे उससे अपने राष्ट्रीय पर्व का अपमान ही क्यों न होता हो.
इसके बाद अब तो ऐसा भी लगने लगा है कि आप कुछ पैसे देकर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या किसी भी व्यक्ति संस्था के खिलाफ गाली-ग्लौज, अपशब्द तक विज्ञापन के रूप में प्रकाशित करा सकते हैं. और ये अखबार ऐसा करने से कतई गुरेज नहीं करेंगे. इस पर पाठकों ने काफी तीखी प्रतिक्रियाएं भेजी हैं. हालांकि यह अनजाने में हुई गलती नहीं है बल्कि एक विज्ञापन का हिस्सा है, लिहाजा हम उनके शब्दों को नहीं बल्कि भावनाओं को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं. नीचे आप भी इन अखबारों में छपे विज्ञापन पर नजर दौड़ाइये.

















sandesh Kumar sharma
January 26, 2011 at 8:53 am
Yaswant Jee uttarakhand, Himanchal va Punjab main bhee ye vigyapan yese hi chhapa hai.
अमित
January 26, 2011 at 9:43 am
त्वरित प्रतिक्रियाएं देने वालों को पहले इस विज्ञापन को गौर से पढ़ लेना चाहिए था। केवल मोटे अक्षर पढ़कर घोर निंदा करना उनकी बुद्धिमता पर ही प्रश्नचिह्न लगा रहा है। विज्ञापन का संदर्भ मोबाइल पोर्टेबिलिटी से है और यह किसी अनजानी भूल या अक्षम्य अपराध का नमूना न होकर रचनात्मकता का उदाहरण है, जिसमें इस गणतंत्र दिवस पर अपने पुराने बोझिल मोबाइल नेटवर्क से स्वतंत्रता हासिल करने की बात कही गई है। विज्ञापन की बॉडी में यह बात स्पष्ट रूप से लिखी गई है कि इस गणतंत्र दिवस पर पुराने नेटवर्क से आजाद होकर इसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाएं।
uttam malviya
January 26, 2011 at 9:44 am
muze nahi lagta ki gantantra divas ka apman karne tata docomo ne janbujhkar vah vigyapan publish karvaya hoga. yah jarur ho sakta hai ki company ke aala adhikariyo ne rastriya mahatva ke itne gambhir vigyapan ko jari karne se pahle dekhna tak uchit nahi samza ya fir unhe gantantra divas aour swatantrata divas ka antar hi malum na ho. yah sharmnak bat hai.
madan kumar tiwary
January 26, 2011 at 10:38 am
सभी अखबारों के संपादक क्या कर रहे थें। कहीं यह जानबुझकर की गई हरकत तो नही । कम्पनी को इससे ज्यादा प्रचार मिला । जहां उसका गणतंत्र दिवस पर दी गई बधाई की शायद हीं कोई चर्चा करता , वहीं इस एक खबर ने उसे कंपनी का नाम हर जुबां पर ला दिया , यह कुछ ऐसा हीं है जैसे सांध्य दैनिक अपने अखबार को बेचने के लिये , हेमा वर्मा ,शर्मा या कोई और उपनाम के साथ हुये बलात्कार को यह कहते हुये बेचते हैं , आज की ताजा खबर हेमा के साथ बलात्कार । चिल्ला -चिल्ला कर अखबार बेचने वाले लडको से कोई नही पुछता कौन हेमा ।
madan kumar tiwary
January 26, 2011 at 10:50 am
अमित भाई मेरे पास वह कापी जो हिंदुस्तान में छपी है । उसमे लिखा है ।स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें। फ़िर उसके नीचे लिखा है , अपने मौजूदा आपरेटर से खुद को आजाद करें और इस गणतंत्र दिवस को बनायें अपने लिये आजादी का दिन । अगर आप इसे रचनात्मकता की बाद कहते हैं , तो इसका तात्पर्य यह हुआ की , आजादी का दिन के संदर्भ में इसका जिक्र किया गया है। लेकिन बात ऐसी है नही । रचनात्मकता का अर्थ क्या हुआ ? बेतुकापन , वैसे यह जानबुझकर की गई हरकत है , और इसके पिछे लाजिक वही है जो आप कह रहे हैं परन्तु उद्देश्य जानबुझकर लोगों का ध्यान आकर्षित करना । ठिक दुर्गंध दुर करने वाले परफ़्यूम को लगाने के बाद लडकी का खींचे चले आने वाले विग्यापन की तरह ।
Abhishek sharma
January 26, 2011 at 12:21 pm
are bhi theek hai, kam se kam gulami ki badhaee to nahi dee…chalta hai.Abhishek sharma
http://www.exultvision.blogspot.com
Rahul Singh
January 26, 2011 at 2:02 pm
ye vichar dene se pehle add ko poora padna tha,
usmein dia hain ki majuda operator ko chod kar docomo ko apnaeyin,
or
aaj ke samay ko dekhkar agar wo yahi likhta ki gadtantra divas ki badhai to sayad usse koi bhi na padta…. so……
Ankit Khandelwal
January 26, 2011 at 2:52 pm
Is vigyapan main kuch bhi galat nahi hain.. comment dene vaalon ko thik se padna chahyein comment dene se pehle..
Anand Kumar Soni
January 30, 2011 at 12:10 am
कुछ भी. विज्ञापन के नाम पर कंपनी और अखबारों ने जिस तरह राष्ट्रीय पर्व का अपमान किया है उससे लोग स्तब्ध हैं. अखबार अब पैसे के लिए कुछ भी करने को तत्पर दिखाई पड़ने लगे हैं. चाहे उससे अपने राष्ट्रीय पर्व का अपमान ही क्यों न होता हो. Anand Soni. Barhaj Deoria
nandan rathore
February 5, 2011 at 10:43 am
wahe waheeeeeeeeeee