वाराणसी के सांध्य दैनिक गांडीव प्रबंधन की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. आज गांडीव के कार्यालय पर पांच सदस्यीय श्रम विभाग की टीम ने छापा मारा. तमाम कागजातों की जांच-पड़ताल की तथा कर्मचारियों के बयान दर्ज किए. छापा वाराणसी के जिलाधिकारी रवींद्र के लिखित आदेश के बाद मारे गए थे, जो उन्होंने कर्मचारी यूनियन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दिए थे. लेबर टीम का नेतृत्व सहायक समायुक्त अनुराग मिश्र कर रहे थे.
आज पूर्वाह्न श्रम विभाग की टीम अचानक गांडीव कार्यालय जा धमकी. इन लोगों के पहुंचते ही प्रबंधन सकते में आ गया. बताया जा रहा है कि समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन ने बनारस के जिलाधिकारी रवींद्र से शिकायत की थी कि गांडीव अपने कर्मचारियों का पिछले पांच साल से वेतन और अंतरिम नहीं दे रहा है. डीएम ने अपने स्तर से पूरी जानकारी हासिल करने के बाद उप समायुक्त वाराणसी परिक्षेत्र डीके कंचन को निर्देश दिया कि वे तत्काल इस संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई करें. डीएम के निर्देश के बाद डीके कंचन ने अनुराग मिश्र के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया. जिसने गांडीव कार्यालय में छापेमारी की.
टीम ने कर्मचारियों से जब उनके वेतन और अंतरिम भुगतान के बारे में पूछताछ की तो ज्यादातर ने बताया कि उन्हें वेतन और अंतरिम का भुगतान नहीं किया जाता है. सूत्रों का कहना है कि जब टीम के लोगों ने प्रबंधन से वेतन रजिस्टर की मांग की तो हीलाहवाली की गई. टीम को वेतन रजिस्टर उपलब्ध नहीं कराया गया. टीम के सदस्यों ने अन्य कई कागजातों की गहन जांच-पड़ताल की तथा कार्यालय को खंगाल डाला. कर्मचारियों के बयान दर्ज किए. गौरतलब है कि पिछले काफी समय से गांडीव के हालात खराब चल रहे हैं. कर्मचारियों से बेवजह उलझना प्रबंधन को परेशानी में डाल रखा है.
सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारियों को जो पैसे देता था वो एडवांस बाउचर से देता था. बाउचर पर एडवांस लिखकर पेमेंट किया जाता था. वेतन रजिस्टर पर ऐसे लोगों का नाम नहीं लिखा जाता था. यानी इस तरह यहां काम करने वाले ज्यादातर लोगों की हालत दैनिक मजदूरों जैसी बन गई थी. ऐसे ही मामलों की लड़ाई पिछले काफी समय से समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन लड़ रहा है. उनकी लड़ाई का ही असर रहा कि कई अखबारों में पत्रकारों को लाभ मिला है.












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December 28, 2010 at 4:41 pm
गांडीव के कार्यालय पर श्रम विभाग ने मारा छापा — Ye kaam to bahut pahle hi ho jana chaaiye tha ! Khair ! Der aaye – Durust aaye !