तंगहाली से त्रस्त सांध्य दैनिक गांडीव ने अपने एक और वरिष्ठ कर्मचारी को एक मार्च से बाहर का रास्ता दिखा दिया। वरिष्ठ कर्मचारी अत्रि भारद्वाज लंबे समय से गांडीव से जुड़े थे। मात्र एक वर्ष पूर्व उन्हें रिटायर कर दिया गया था। बावजूद इसके उन्हें कम वेतन पर रखकर गांडीव प्रबंधन काम ले रहा था। अपनी मिलनसारिता के कारण स्टाफ में लोकप्रिय रहे अत्रि भारद्वाज दफ्तर में सिर्फ अपने काम से काम रखते थे।
28 तारीख को उनसे प्रबंधन ने कह दिया कि आर्थिक हालत ठीक नहीं है और अब हमें सीमित लोगों से ही काम चलाना होगा, आपकी सेवाएं गांडीव सदैव याद रखेगा और आभारी भी रहेगा। किंतु अब आप कार्यालय न आया करें। इसपर अत्रि ने कहा कि हमारा हिसाब किताब कर दिया जाए तो मैं दफ्तर आना बंद कर दूंगा। लेकिन इस बाबत प्रबंधन ने कोई आश्वासन नहीं दिया। प्रबंधन से जुड़े एक सज्जन से हिसाब किताब के बाबत कुछ बाताकही हुई। उस वक्त गांडीव के संपादक राजीव अरोड़ा मौजूद नहीं थे। कहा यह गया कि इस बारे में वही कुछ कह सकेंगे। फिर अत्रि और उनके सहयोगी विकास पाठक ने उन्हें बुलाने की मांग की। लेकिन राजीव अरोड़ा नहीं आए। अपने पार्टनर शशिधर इस्सर को भेजा। शशिधर से भी गर्मा गर्मी हुई। ये बातें 28 फरवरी को हुईं।
1 मार्च को पुनः अत्रि कार्यालय गए और अपने हिसाब किताब की बात कही। उस दिन राजीव अरोड़ आए और अखबार की आर्थिक तंगी की बात बताते हुए संस्थान से पृथक हो जाने की बात कही, जिस पर अत्रि ने कहा कि मैं पृथक हो जाऊंगा लेकिन मेरा हिसाब तत्काल किया जाए। इस बाबत राजीव अरोड़ा ने दो-चारदिनों की मोहलत मांगी है अब देखना यह हैकि हिसाब किताब वे दो चार दिन में करते हैं, दो चार महीने में करते हैं या दो चार साल में। आर्थिक हालत तो यही बताते हैं कि डा. राधरमण चित्रांशी, जयनारायण मिश्र, शिवमूर्ति दुबे की कड़ी में अत्रि भारद्वाज का भी नाम जुड़ गया वे भी शायद इन्ही लोगों की तरह से गांडीव के खिलाफ मोर्चा खोल दें। साभार : पूर्वांचलदीप











