भारत के तमाम समाचारपत्रों में गैलप द्वारा दुनिया के 124 देशों में बेहतर जीवन से संबंधित सर्वे कल प्रकाशित किया गया। इस सर्वे में भारत को 71वां स्थान दिया है जो कि गैलप के साम्राज्यवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। पाकिस्तान जो कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जहां का आमजन आर्थिक एवं मानसिक, दोनों रूप से परेशान है, उसे भारत से ऊपर 40वां स्थान देना इस सर्वे की सत्यता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है।
जहां संपूर्ण पश्चिमी जगत अपने उन्नत जीवन से थक-हार कर शांति के लिए भारतीय परंपरा व जीवन दर्शन की ओर देखता है, उस भारत को 71वां स्थान देना तर्क संगत ही नहीं अपितु अनुचित भी है। सर्वे के आधार पर पश्चिमी देशों को सर्वोच्च स्थान पर रखना भी सर्वे के साम्राज्यवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। भारत, जहां पारिवारिक जीवन विश्व के किसी भी देश से उन्नत व खुशहाल स्थिति में है, उस देश के नागरिक आर्थिक मामले में बेशक कहीं थोड़े कमजोर जरूर हो सकते हैं लेकिन मानसिक तौर पर अन्य देशों की अपेक्षा कहीं ज्यादा संतुष्ट व प्रसन्न हैं। पश्चिमी देश अपने अत्यंत वैभवशाली जीवन से इतने त्रस्त हो चुके हैं कि अब वे भारतीय जीवन दर्शन व परंपरा को अपनाने लगे हैं। इसके बावजूद सर्वे द्वारा सिर्फ आर्थिक पक्षों के आधार पर पश्चिमी देशों की जीवन शैली को सर्वोच्च स्थान पर रखना एक पक्षीय एवं पक्षपातपूर्ण निर्णय है।
नवनीत
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Ankit Khandelwal
April 23, 2011 at 10:31 am
Bhai kis jamane main ji rahe ho.. parivarik sanskarti aaj ki dhod bhag vaali jindagi main lupta hoti ja rahi hain.. or thoda survey main thik se pado.. kab tak sankriti ka rona rote rahoge…or cheezon main bhi thoda jhankarke dekho to acha hoga
jeeven shalley ka matlab parivar hi nahi hota hain.. iska yeah matlab bhi hota hain ki life expectancy, healthy, per capita income, growth, social security jaisi kayi cheeze ismein shamil hoti hain..to is hisab se agar compare kiya jaayein to 71 position hona koi tajub nahi hain..
Haan Pakistan ka naam 40 vi position per aana thoda galta hain..
Navneet.
April 25, 2011 at 7:05 am
भाई अंकित आपने ठीक कहा की आज के भाग दौर वाली जिंदगी मैं पारवारिक महत्त्व कंही खोता जा रहा लेकिन अभी इसका महत्व भारत में बाकि देशो की अपेक्षा कंही अधिक है. आप जब सर्वे को पड़ेंगे तो पाएंगे की इसकी शुरुआत मैं उन्होंने शिक्षा, राजनैतिक स्वतंत्रता, आत्मिक शांति, जैसे विषय को आधार बनया है. लेकिन अगर सर्वे के परिणाम को देखे तो लगता है की ये सर्वे बस आर्थिक पक्षों पर आधारित है इसके अलावा पाकिस्तान के विषय को तो आपने भी माना है इसीलिए इस सर्वे के सत्यता व ध्ये पर ? चिन्ह लगता है.