ग्वालियर के कलेक्टर ने चिट फंड कम्पनियों के खिलाफ सार्थक कार्रवाई शुरू की तो आम जनता द्वारा इसकी सराहना भी हुई. कलेक्टर ने कुछ चिटफंडियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई और इनकी संपत्ति भी कुर्क करने के आदेश दिए. इस कार्रवाई की ज़द में इन चिटफंड कम्पनियों द्वारा अपने रक्षा कवच के लिये शुरू किये गए समाचार पत्र और लोकल न्यूज़ चैनल भी आ गए.
चिटफंडियों ने जब अपना आर्थिक एम्पायर खड़ा कर लिया तो फिर उन्हें इसको बचने के लिए सही रास्ता अखबार और मीडिया का ही लगा. इसकी एक वजह और थी वह थी मीडिया द्वार रोज़-रोज़ की जाने वाली ब्लैकमेलिंग. अखबार और मीडिया के छुटभैये कभी भी इनके दफ्तर में आ धमकते थे और पैसे ऐंठते थे. इससे परेशान चिटफंडियों को इन्हीं पत्रकारों के बीच के विभीषण मिल गए. उन्होंने सब्जबाग दिखाए कि खुद मीडिया में आ जाओ, संतरी से लेकर मंत्री तक सब सलाम ठोकेंगे, वे सब बगल में बैठाएंगे. पैसा मांगने वाले पत्रकार उनके दर पर अपना बायो-डाटा लेकर नौकरी मांगते फिरेंगे. इसके चलते के एमजे लैण्ड डेवलपर्स नामक चिटफंड कम्पनी के संतोषी लाल राठौर ने डीजी केबल वालों से एक चैनल किराये पर लेकर चौबीसों घंटे की न्यूज़ शुरू कर दी. इसका इतना प्रचार-प्रसार किया गया मानो कोई बड़ा चैनल हो.
बीपीएन कंपनी ने बीपीएन टाइम्स नामक और परिवार डेरी एंड अलाइड कम्पनी के राकेश सिंह नरवरिया ने परिवार टुडे नामक दैनिक अखबार शुरू कर दिया. इन संस्थानों में पत्रकारिता के तीसरे और चौथे दर्जे के पत्रकार घुस गए. मात्र कुछ साल पहले तक सड़क पर पैदल घूमने वाले ये लोग कुछ सालों में ही अरबपति बन गए और मीडिया में आते ही सेलिब्रिटी भी बन गए. संतोषी लाल राठौर तो राजनेताओं के भी संपर्क में आ गया. शिवराज सरकार के एक मंत्री तो खुले आम उसके द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शरीक होने लगे. जो होर्डिंग लगे उन में उन मंत्री जी के साथ संतोषी लाल का फोटो छपा रहता है. इतना ही नहीं उसने मंत्री से अपनी नज़दीकी दिखाने के लिए संतोषी लाल राठौर फैंस क्लब (एसएलआरऍफ़सी) बना दिया इसके संरक्षक मंत्री जी को बना दिया गया. इन्ही मंत्री जी की कृपा से वह राठौर समाज के नाम पर एक कार्यक्रम आयोजित कर उसमें मुख्यमंत्री तक को ले आया और उनके साथ मंच पर बैठा.
इन सबके चलते इनको लगने लगा की अब इनका रसूख निरापद हो गया, लेकिन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इनकी औकात को आईना दिखा दिया. इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से लेकर सारी संपत्ति सीज करने और बैंक खातों को सील करने की कार्यवाही करने से हडकंप मचा दिया. लेकिन इसके साथ ही उठने लगी कलेक्टर की कार्रवाई पर उंगलिया. कलेक्टर ने परिवार टुडे अखबार की प्रिंटिंग यूनिट को सील कर दिया. प्रशासन ने सभी प्रेस वालों पर दवाव बना दिया कि वे परिवार टुडे अखबार न छापें. तीन दिन से अखबार बंद है. लेकिन प्रशासन ने बीपीएन टाइम्स की प्रेस सीज नहीं की.
इसी प्रकार के एमजे न्यूज़ भी चल रही है. पहली बात तो अखबार को बंद करना गलत है क्योंकि चिटफंड कम्पनी की सजा उसी डाइरेक्टर की दूसरी कम्पनी को नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन जिस तर्क के आधार पर कि -अखबार चलाने का पैसा चिटफंड से ही आया है तो फिर कार्रवाई सिर्फ एक अखबार पर क्यों? इसकी वजह दवाब है या कुछ और? इसको लेकर अब पूरे इलाके में तरह -तरह की चर्चाएँ चल रहीं है. हालाँकि कलेक्टर से सम्बन्ध रखने वाले लोग बता रहे हैं कि जल्द ही इन पर भी कार्रवाई होगी.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












Manoj Sharma
June 5, 2011 at 2:53 pm
Yashwant Je,
Bilkul Shahe hai k 1 K saath He Aisa kiyo..! Kiya D.M. BHE B.P.N Times k Haatho Bik Gaye hai.. Jo in ko Sanrakshan Dey Rahey hai..! B.P.N. Times ke Press Bhe Sheel Karne Chaahiye…! or es k liye Media house ko Bhe Saath deyna chaahiye k Aisey Log na Aaye es Media Jagat mai Jo Aam Janta ke Paseeney ke Kamaaye sey unka Kila Khada Hua ho…! in sabhe logo ke Press Par Taaley Lagjaney Chaahiye…! Janta ak Paisa hai in K Baap ka Nahe…! Gwalor k D.M. ko ye Samajna hoga k Ye chor hai inko Janta k Saamney Nanga kar k Duniya K Saamney Laaya Jaye… Tabhe Aisey logo ko Sabak Mileyga…!
neha
June 5, 2011 at 4:19 pm
likha sahi hai. yeh seedha hamla press par hai. esme gwailor ki media bhi doshi hai. hamla kisi per ho .mari taygi patrakaro ki jamat. dusre patrakaro ko sochna chahiya biradari ko sawal hai kal shikar aap ho sakte ho. lakin yeh galat hai ki patrakar ka koi darja hota hai. patrakar bas patrakar hota hai. darja aap jese ghhoti soch vale sochte hai.
ram
June 7, 2011 at 8:16 am
yashwant jee aapko pahale hi mail kar is bare me jankari di thi isame bahut se media house rah gaye he tv99 (jsv news) , ye log ab naye naam se channel lane ki taiyari kar rahe he, aane wale channel jo chit fund se jude he, news express khabar india , azad news bhi chitfund wale laaye the or skylard k naam se nes paper bhi, or bhi he ese naam
deep
June 7, 2011 at 11:29 am
एक निवेदन …
ग्वालियर में चिटफण्ड का कारोबार करने वाले लोगों पर प्रशासन के द्वारा शिकंजा कसा जा रहा? यह सही है कि जो भी कदम उठाया गया है, वह कुछ हद तक तो गलत नहीं कहा जा सकता है? लेकिन कुछ सवाल तो इस प्रशासनिक कार्यवाही से उभरते ही है, और जिस तरह कार्यवाही की जा रही है, वह न्याय संगत कैसे कहीं जा सकती है?
मसलन जिस चिटफण्ड कम्पनियों के नाम प्रशासन ने होर्डिग पर लटका दिया है, जिससे अचानक भीड़ उमड़ी और कहा गया कि धोखा दिया जा रहा है, (एक अनुमान है कि चिटफण्ड का कारोबार 1950 से जारी है) इसमें शामिल कुछ कम्पनियां कमतर तो कुछ बीस वर्षो से कार्यरत है, उनका पिछला लेखा-जोखा क्यूं नहीं देखा गया? कि उन्होंने कब-कब किसके साथ धोखा किया है? यथार्थ के धरातल पर चल रही और तमाम सालों में से जिन कम्पनियों के खाते सील और कुर्क किये जा रहे है, वह कम्पनी रातों-रात जनाब कैसे भाग सकती है? हां… यह कार्यवाही तो उन कम्पनियों पर होनी चाहिये थी, जो पैसा लेकर न तो कहीं किसी प्रोजेक्ट में लगा रही थी, और न ही वह अपनी कम्पनी के नाम चल-अचल सम्पत्ति बना रही थी? ऐसे में वह तो भागेगी ही, यह नियत तो साफ होती है, लेकिन जिनकी चल-अचल सम्पत्ति है, तमाम कारोबार है और नाम का गुडविल भी बन चला है उसका, तब ऐसे में यह कैसे मान लिया जाये कि यह कम्पनियां भाग जायेगी, शायद ऐसा सोच लेना गलत ही होगा? वैसे जनाव जिस तरह चिटफण्ड का कारोबार करने वाले कम्पनियों के होर्डिंग लगे है, उदाहरणार्थ कभी भूले से शहर के राष्ट्रीयकृत बैंक के नाम भुगतान में देरी की मामूली सी बात ही लिख कर लिस्ट ऐसे ही चस्पा कर दीजियेगा, देखियेगा पूरा शहर उमड़ आयेगा, धोखा-धड़ी की शिकायत लेकर, खौफ और असमंजस तो इस कदर हावी हो जायेगा कि कुछ बैंकों की इमारत बाबरी मस्जिद हो उठेगी? मतलब उसकी ईंट और फर्नीचर भी नहीं मिलेगें ढूढऩे से? दूसरी बात प्रतिद्वंदी कम्पनियों की क्रिया पर प्रतिक्रिया के आसरे जिस तरह शहर में बेरोजगारी को फैलाने और अपने कर्मचारी पर दबाव की प्रक्रिया अपनायी गयी वह सोची समझी साजिश कही जा सकती है, कुछ कम्पनियां जिनका अस्तित्व मात्र कागज पर ही है, वह कागज के आसरे ही नोट बटोर कर तो फरार हो सकती है? लेकिन जिन्होंने चिटफण्ड का पैसा कारोबार में लगा कर उसे जमाया है, चल-अचल सम्पत्ति में निवेशकों का पैसा लगाया है, और व्यापार किया है, ऐसे में उनका फरार हो जाना समझ से परे है? निवेशकों का हूजूम जिस तरह उमड़ा है, कभी पूछियेगा आम आदमी से कि घर में मासिक वेतन के आसरे चुकाये जाने वाले घरेलू कर्जे के कर्जदार एक साथ आ धमकते है तो क्या हालत होती है, ऐसे में एक साथ इतने निवेशक आ जाये तो कार्यवाही में समय तो शायद लगेगा ही जो उन्हें मिलना चाहिये?
जब शहर में बांटे जा रहे पीले पानी के दौर में, पानी बचाने का अभियान चलाकर एज्यूमेंटपार्क में साफ पानी बर्बाद हो रहा हो, या किया जा रहा हो अपनी मनमानी से मनोरंजन के नाम पर? तब ऐसे में विश्वास के योग्य, काम कर रही कुछ कम्पनियों पर कार्यवाही करने का उलाहना देना कहां न्याय या तर्क संगतकहा जा सकता है?
निवेशकों को जिस धोखे से बचाने की जिद् में प्रशासन अड़ा है, उसी प्रशासन के आंगन में निवेशकों का शोषण शुरू हो चला है, फार्म छप गये है, 50 पैसे के कागज का टुकड़ा दस से बीस रूपये में खुलेआम बेचा जा रहा है, जी जनाब बात यही तक आकर रुक जाती तो ठीक था। अपुष्ट कुछ शिकायतें ऐसी भी सुनने में आयी है कि प्रतिद्वंदी कम्पनियों ने जानबूझ कर करवायी हैं, भ्रमित निवेशकों को उसकी ब्याज रहित कुल जमा राशि का कुछ अंश देकर, कागज और आवेदन लेकर शिकायत की गयी हैं, जिससे शिकायती आंकड़ा तो बढ़ा ही साथ ही प्रशासन पर दबाव भी? प्रशासन को ऐसे तमाम शिकायतों को भी संज्ञान में लेना चाहिये। प्रशासन जिस तरह नेकनियति और दरियादिली दिखला रहा है वह इसी तरह उन लोगों के प्रति भी दिखलाये जो जीवन के अंतिम समय में पेंशन की उम्मीद के आसरे साहब के चौखट पर बेहोश हो जाता है? यही दरियादिली उनके भी नसीब में आये जो अपनी उम्मीद के पुर्जे पर कार्यवाही की आस में चप्पलें घिस देता है? और कार्यवाही का झुनझुना एक टेबिल से दूसरे टेबिल तक कूंदता-फांदता ही रह जाता है?
प्रशासन को चाहिये कि ऐसे में वह वृहद्स्तर पर संचालित कम्पनियों (जिनकी चल-अचल संपत्ति हो) ज्ञात-अज्ञात संपत्ति के बारे कार्याही करते हुये कम्पनियों के प्रमुख से लिखित में सम्पत्ति खुर्द-बुर्द न करने, न दान में देने या कूटरचित तरीके से इसे अन्य किसी भी तरीके से किसी को बेचने या देने का शपथ पत्र लेकर कम्पनियों को उनके चिटफंड के कारोबार पर लगे प्रतिबंध को जारी रखने के अतिरिक्त अन्य कारोबार को करने की अनुमति दिया जाना चाहिये, वैैश्विक मंदी के दौर में हुये तमाम बेरोजगार को मिला हुआ रोजगार छीन लेना उचित नहीं कहा जा सकता है?
माननीय जिलाधीश महोदय श्री आकाश त्रिपाठी जी से मेरा निवेदन है कि वह इन कम्पनियों को अपनी कार्यवाही की जद में तो रखें, लेकिन आपके अधीन तमाम विभागों से अनुमति लेकर कई कारोबार करने वाली कम्पनियों को कार्य करने का अवसर प्रदान कर दें। ताकि निवेशक का पैसा भी लौटे और उसका विश्वास भी लेकिन जो कम्पनियां सिर्फ कागजों पर चल रही है, और फरार है, उनके विरूद्ध अवश्य ही मात्र कागजी कार्यवाही करने के बजाये ठोस धरातल पर कार्यवाही की जाये? देखा गया है कि कई विभाग माल जब्त कर सुपुदर्गी में दे जाते है, की जा रही कार्यवाही किसी नतीजे पर पहुंचने तक, ऐसा ही विचार आप बना लें तो निवेशक का धैर्य नहीं टूटेगा, और किसी का रोजगार (जो निवेशक के पैसे से संचालित हो रहा है) नहीं छूटेगा? अगर ऐसा न हो पाया तो न जाने शहर में कितने अपराध यह बेरोजगारी जन्म देगी, उसे भी रोकने का दायित्व और कत्र्तव्य आप के पद का ही है?
सो कुछ ऐसा रास्ता निकालिये कि दोषी पर कार्यवाही भी हो और गैर-बैंकिंग वाले कारोबार भी संचालित होते रहे?
neeraj
June 7, 2011 at 12:16 pm
yashvantji
kash hm kaue hote,ek marta hai baki chillate hai . gwalior ke patrkar to sanp hogye hai ek doosre ko jinda niglne ko tyyar hai.loktentr ke chote stembh ki dhazzia ud rahi hai or hum khush ho rahe hai ki doosre paper ko bhi band karo kyo? baki paper harishchandr chala rahe hai? inke patrkaro ke ghar mai chori ki bijli nahin jal rahi hogi? ek doosre per keechad mat uchalo sab baniye ki nukri kar rahe ho.jitne paper band honge tumhari kemat utni ghat jaygi malik se galia abhi khate ho bad mai kutee ki tareh lat bhi khana
neeraj
June 7, 2011 at 12:20 pm
gwalior ke patrkar sanp hoge hai ek doosre ko jinda kha rahe hai jab kewal teen paper chalenge to kutto ki tareh mare mare phirenge 2000 ki nukri doondege. gaddaro ki yahi saza hoti hai. are tumse to ache kauue hai ek marta hai baki chillate hai
sunita
June 24, 2011 at 11:18 am
Jeetendra Singh Gurjar dwara sanchalit sukhchain naam ki chitfund company ne JSV news ki jagah apne naam se G News Shuru kar di hai,
Pehle B.S. Kathet ko barbaad kar Ab Nayee Dukandari Shuru kar di Hai Jiska licence Nahi liya gaya hai Us par Bhi sharm ki baat to ye hai ki janab ne News Channel Ke naam se Adibaazi Shuru kar di hai..
yogendra
July 6, 2011 at 1:00 pm
EK CHITFUND COMPANY JSV, JISAME JITENDRA SINGH GURJAR OR BHEL KE PURV NETA KATHAIT KI SAJHEDARI ME SANCHALIT COMPANY DWARA NAYE NEWS CHANNEL G NEWS KE NAAM SE AARAHE HE, JSV NEWS KE BARE AAPKE IS WEBSIT PAR LIKHANE KE BAAD JSV KI ID USE KARNA BAND KAR DI THI , WAHI LOG AB G NEWS LEKAR AAYE HE JO CHITFUNDIYO DWARA CHALAYI JA RAHI HE , PATA NAHI IS NEWS KA BHI REGISTRATION HE YA NAHI, JITENDRA SINGH GURJAR KI SARKAR ME BAHUT ACHCHI PAKAD JISAKA SABOOT YAH HE KI KRISHI MANTRI RAMKRISHN KUSUMARIYA NE INHE BHOPAL SEHORE ROAD PAR 132 BEEGHA JAMIN BAHUT KAM DAMO ME DI HE , IS JAMIN KA INAGURATION KUSUMARIYA JI KE KAR KAMALO SE HUA HE, SHAYAD KUSUMARIYA JI BHI INKE PARTNER HE, SUNA HE AB ISAME KOI PATIDAR JEE BHI JUDANE WALE HE. HAMARE PATRKAR MITRO KE LIYE YEH KHABAR NAYI HOGI.