Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

जनाजा रिटायरात्मा का

[caption id="attachment_18361" align="alignleft" width="63"]पंडित सुरेश नीरवपंडित सुरेश नीरव[/caption]नौकरी के नर्सिंगहोम में पूरे तीस साल ट्रांसफर और सीट बदल के झटकों को मुसलसल झेलने के बाद आखिरकार आज भैयाजी को रिटाटरमेंट की मूर्चरी में भेज ही दिया गया। यूं भी मूर्चरी कोई अपने आप तो जाता नहीं है। कोई कितना भी भैरंट स्वावलंबी क्यों न हो मूर्चरी उसे भेजा ही जाता है। बड़े-बड़े फन्ने खां इस मूर्चरी में बाकायदा भेजे ही गये हैं।

पंडित सुरेश नीरव

पंडित सुरेश नीरव

नौकरी के नर्सिंगहोम में पूरे तीस साल ट्रांसफर और सीट बदल के झटकों को मुसलसल झेलने के बाद आखिरकार आज भैयाजी को रिटाटरमेंट की मूर्चरी में भेज ही दिया गया। यूं भी मूर्चरी कोई अपने आप तो जाता नहीं है। कोई कितना भी भैरंट स्वावलंबी क्यों न हो मूर्चरी उसे भेजा ही जाता है। बड़े-बड़े फन्ने खां इस मूर्चरी में बाकायदा भेजे ही गये हैं।

सगे-संबंधी भी तो बेचारे इसी दिन काम आते हैं। उनकी मुद्दतों की मन-मुराद पूरी होती है। खुशी में भले ही काम ना आएं,ऐसे समय में साथ देना ही पड़ता है। ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते ही उनके पुण्यवाले रजिस्टर में अचानक एक एंट्री और बढ़ जाती है। इस बढ़त को देखकर उन्हें भरपेट सात्विक प्रसन्नता होती है। मन फूलकर कुप्पा और बाग-बाग दोनों हो जाता है। आज भैयाजी के शुभचिंतक हितकारी मुद्रा में फेयरवेल की मालाओं से लदे उनके पार्थिव शरीर को देख रहे हैं।

भैयाजी आज अचानक अपने दफ्तरी दोस्तों की नज़रों में भैयाजी न रहकर महज एक बाडी हो गए हैं। इस बाडी का प्रचंड बल झेल चुके लस्त-पस्त सहयोगी बाडी-नश्वरता की उत्साहवर्धक चर्चा-प्रतियोगिता में आकंठरत हैं। हर पार्टीसिपेंट का एनर्जी लेबल टाप पर है। जिन कर्मचारियों के निधन की विभागीय अधिसूचना जारी नहीं होती है वो नौकरीपर्यंत इस मूर्चरी को भावुकतावश दफ्तर कहते रहते हैं। मूर्चरी का कक्ष इस वक्त बिग बास का घर बना हुआ है। रिटायरात्मा की हालत बिग बास के घर से निकाले पार्टीसिपेंट-जैसी हो जाती है। जो जिंदा है या मरा कुछ पता ही नहीं चलता।

भैयाजी की बाडी अभी मूर्चरी से बाहर भी नहीं निकली है,फेयरवैल के फूल कुम्लाए भी नहीं हैं कि एक संदेशवाहक कबूतर ने फुसफुसाकर सूचना दी कि भैयाजी की सीट पर निष्ठुरजी सशरीर काबिज हो गए हैं। उन्होंने अपना कंप्यूटर वहां रखकर कब्जा पक्का कर लिया है। और कल होनेवाली अपनी ज्वाइनिंग पार्टी के सिलसिले में घर चले गए हैं। यों भी यहां आकर अपना मूड खराब करने की क्या तुक बनती है। हमलोगों की तो अपने ही चंदे पर पहलवानी करने की दफ्तरी मजबूरी है। चुहुलभरे अंदाज में एक आवाज तैरी। सभी मातमी बड़े बाबू के आने के इंतजार में बैठे-बैठे बोर हो रहे थे। वरना कबके अपने-अपने घर चले गए होते। बाडी के पास कितनी देर कोई बैठता है।

और उधर बड़े बाबू ब्यूटीपार्लर में अटके हुए थे। बिना बने-ठने वो किसी भी आयोजन में नहीं जाते हैं। तो फिर यहां कैसे आ जाते। ब्यूटीपार्लर की कुर्सी में धंसे-धंसे ही उन्होंने मोबाइल के मुंह से छोटे बाबू के कान में पीक थूका- मैं अभी एक अर्जेंट मीटिंग में विजी हूं,थोड़ी देर में फ्री होकर पहुंच रहा हूं। बड़े बाबू के पीक की सनसनाती ताजगी से लहराते हुए छोटे बाबू ने घोषणा की कि बड़े बाबू मीटिंग में हैं जल्दी ही यहां सिधारेंगे। उनके इंतजार में ऊंघते हुए साथियों ने इस बीच सिगरेटों और पानमसाले के तमाम पाउचों का सामीहिक नृशंस संहार कर वातावरण को और वीभत्स बना डाला। रैंप पर कैटवाक करती हसीना की तरह लरजते हुए बने-ठने बड़े बाबू अचानक प्रकट हुए।

सारी महफिल में एक स्तरीय और अनुशासित मातमी सन्नाटा पसर गया। मनहूसियत के महोत्सव का यह हाउसफुल शो था। बड़े बाबू ने भैयाजी को ऐसी भावविह्वल मुद्रा में माला पहनाई जैसे कोई मंत्री शहीद सैनिक के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित करता है। पूरे शो में ऐसे जान आ गई जैसे किसी फिल्म को प्रमोट करने टाकीज में दर्शकों के बीच खुद हीरो हाजिर हो जाए। भैयाजी के पार्थिव शरीर में भी बड़े बाबू को देखकर ऐसी हलचल हुई जैसे हवा चलने पर पेड़ पर लटके मरे सांप के शरीर में होती है। छोटे बाबू ने बड़े बाबू के सामने भैयाजी के स्याह जीवन पर पूरी निष्ठा से रोशनी डालते हुए गुटखारुद्ध गले से कहा- हम लोगों की नज़र मे शराफत के मामले में भैयाजी नारायणदत्त तिवारीजी की नस्ल के जीव हैं। भैयाजी ने हमेशा काम को (काम, क्रोध और लोभ वाले काम को भी) पूजा और कार्यस्थल को पूजा स्थल ही माना है।

यह दफ्तर पूरे तीस साल तक भैयाजी की दिव्य लीलाओं का क्रीड़ा स्थल रहा है। दफ्तर की हर फाइल को भैयाजी ने पवित्र धार्मिक ग्रंथ माना और उसे लाल कपड़े में बांधकर हर बुरी नजर से बचाकर रखा। किसी को भी इन्हें छूकर अपमानित करने का उन्होंने मौका नहीं दिया। और-तो-और नौकरीपर्यंत खुद भी नहीं छुआ। जीर्ण-शीर्ण वयोवृद्ध फाइलों को पूरे धर्मभाव से इन्होंने समय-समय पर पवित्र नदियों में विसर्जित कर अपना सरकारी धर्म निभाया। इसके लिए ये कई बार हरिद्वार भी गए मगर सरकार से इसके लिए कभी खर्चा भी नहीं लिया। ऐसे नैतिक और निष्ठावान कर्मनिष्ठ भैयाजी पर हमें गर्व है। नई पीढ़ी के लिए वे जबतक सूरज-चांद रहेगा की तर्ज पर एक प्रेरणापुरुष बने रहेंगे।

भैयाजी उधार लेने को सदैव पुरुषार्थ मानते थे और उधार वापसी को एक जघन्य पाप समझते थे। उधार वापस कर उन्होंने कभी अपने किसी शुभचिंतक को भूलकर भी शर्मिंदा नहीं किया। ऐसे दूषित विचारों से भैयाजी हमेशा ही दूर रहे। कभी किसी ने उधार वापसी का तकाजा कर भैयाजी को बरगलाने की शरारत की भी तो पूरी विनम्रता के साथ दृढ़ता दिखाते हुए भैयाजी ने अपने को धर्मभ्रष्ट होने से बचाते हुए दुर्दांत संयम का परिचय देकर सभी को चकित कर दिया। अपने उसूलों को भैयाजी बहुत महत्व देते हैं। और इस बात पर तो विद्वानों में बहस हो सकती है कि पृथ्वी गोल है या चपटी या फिर सूरज पूरब से उगता है या पश्चिम से मगर भैयाजी के उधार लेकर वापस न करने के सिद्धांत पर इतनी हाई क्वालिटी की सर्वसम्मति कभी किसी ने कहीं नहीं देखी।

कुछ सिरफिरे अभी भी इस अँधविश्वास को लेकर बैठे हैं कि वे किन्हीं कमजोर क्षणों में भैयाजी से कभी-न-कभी उधाऱ वापसी का पाप करवा ही डालेंगे। उनका मानना है कि आज जब स्त्रियां सही समय पर गलत काम करने से नहीं चूक रहीं तो भैयाजी कैसे बच पाएंगे। निरीह रिटायर्ड मर्द हैं बेचारे। कभी-न-कभी, कहीं-न-कहीं फिसलकर ही रहेंगे।

छोटे बाबू की विभागीय लोरियां सुनते-सुनते भैयाजी कब निद्रालोक में सिधारे इसका खुलासा तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा मगर अचानक भैयाजी का पार्थिव शरीर घटोत्कच की तरह कु़र्सी से फिसलकर धरती की बांहों में धड़ाम से जा गिरा। बाडी विस्फोट इतना तीव्र था कि दफ्तर की पूरी पृथ्वी हिल गई। दफ्तर के बाहर की धटना के लिए दफ्तर जिम्मेदार नहीं होता इसलिए बाहर पृथ्वी हिली या नहीं इसकी चर्चा बेमानी है। इस अफरातफरी में घबराए हुए लोग चारों तरफ ऐसे फैल गए जैसे दिल्ली में डेंगू बुखार।

उधर इस दुर्घना से बेखबर कुछ  जांबाज दफ्तरी इस चर्चा में मशगूल थे कि भैयाजी को घर कैसे पहुंचाया जाए। अपनी कार से कोई उन्हें घर छोड़ने को तैयार नहीं था। उनका कहना था कि फेयरवैलपार्टी का चंदा लेकर हमें पहले ही खल्लास कर दिया गया है अब हम पेट्रोल क्यों फूंके। हम बेमौसम हजामत के लिए कतई तैयार नहीं हैं। हजामत की भी एक ऋतु होती है। एक सुझाव आया कि अस्पताल से फोन करके क्यों न एंबुलेंस बुला ली जाए। दूसरे ने तकनीकी आधाऱ पर आपत्ति जताई। कहा कि यदि भैयाजी को अस्पतालवालों ने भर्ती कर डाला तो किसने फोन करके एंबुलेंस को बुलाया था उस मुलजिम के शिनाख्त होने का भऱपूर खतरा है। फिर घर जाकर  उसे ये भी बताना पड़ेगा कि इस वक्त भैयाजी फलां अस्पताल के फलां वार्ड के फलां बेड पर लुत्फअंदोज हो रहे हैं। जाकर देख आइए।

तभी एक सिंथेटिक सुझाव आया- मैं एक धार्मिक सेवा समिति का सदस्य हूं. हमारी समिति के तमाम निशुल्क शव यात्रा वाहन शहर में चलते हैं। मैं अभी फोन करके किसी वाहन को बुला लेता हूं। सारे ड्रायवर भी मुझे जानते हैं। रास्ते में अंग्रेजी ठेके से कुछ माल-मसाला भी ले लेंगे। रास्तेभर तफरी रहेगी और भैयाजी की रिटायर्ड बाडी भी हँसी-खुशी घर पहुंचादी जाएगी। संवेदनशील साथियों ने कोरस में हांका लगाया-ये रिटाटर्ड का जनाजा है,निकलेगा धूमधाम से। पूरी उत्साहजनक भावनाओं के साथ दोस्तों ने शवयात्रा वाहन बुलाने का सर्वसम्मत फैसला ले डाला।

थोड़ी देर में शवयात्रा वाहन के शून्य में सोडा मिश्रित सासायनिक गंध अपने नमकीन डैने फैलाने लगी। शवयात्रा वाहन की नागरिकता ले चुके जिंदा जीव भावुक होने लगे। रिटायरमेंट से बाल-बाल बचा एक साथी हिचकियां ले-लेकर कह रहा था कि भैया संसार का हर प्राणी मरणधर्मा है और हर कर्मचारी रिटायरधर्मा है। जो आया है वह कल जाएगा भी। आज भैयाजी गए हैं कल हम सब भी जाएंगे। समय के कसाई के आगे हम सभी बकरे हैं। कब तक खैर मनाएंगे। और दोस्तो इस तरह तीस साल तक नियमित बेनागा दफ्तरी कष्ट झेलनेवाली  एक और बाडी आज मूर्चरी से विदा हो गई…। भैयाजी आज से दफ्तर के लिए एक भूला हुआ अफसाना हो गए, गुज़रा हुआ जमाना हो गए।

व्यंग्य लेखक पंडित सुरेश नीरव हिंदी काव्यमंच के लोकप्रिय कवि हैं. 16 पुस्तकें प्रकाशित. 7 धारावाहिकों का पटकथा लेखन. अंग्रेजी, उर्दू, फ्रेंच में अनुवाद. 30 वर्ष तक कादम्बिनी के संपादन मंडल से संबद्ध. आजकल स्वतंत्र लेखन और यायावरी.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...