: बन गया कीर्तिमान लीजिए! आपका थ्री-डी भास्कर : जयपुर. यही है वह ऐतिहासिक सुबह। दैनिक भास्कर का जयपुर में एक विनम्र प्रयास। पूरा अखबार थ्री-डी। आपका चश्मा आज के अंक के साथ दिए गए विशेष परिशिष्ट ‘भास्कर होम्स’ के भीतर सुरक्षित है। अपने हिस्से का चश्मा निकालिए और बनाइए कीर्तिमान। ऐसा कीर्तिमान जो अब तक किसी भी हिंदी अखबार द्वारा रचा नहीं गया। अगर इस अंक के साथ चश्मा न मिले तो तुरंत अपने हॉकर से लें। ध्यान रहे चश्मा इस तरह लगाएं कि उसका लाल रंग बाईं और नीला रंग दाईं आंख की तरफ रहे। थ्री-डी के अनूठे अनुभव के लिए फोटो या विज्ञापन को कम से कम 15 सेकेण्ड्स तक देखें।
चश्मे का फ्रेम गीला न करें। खास आपके लिए यह थ्री-डी चश्मा जिलेटिन या प्लास्टिक से नहीं, बल्कि विशिष्ट पॉलीमर शीट से बनवाया गया है। कृपया पेज-1, 4, 20 और स्पोर्ट्स पेज के फोटो तथा सभी विज्ञापन (पेज-6 छोड़कर) थ्री-डी चश्मे से देखें। आपके अनुभव हमें जरूर बताएं। हां-अपना थ्री-डी चश्मा जरूर संभाल कर रखें। शीघ्र ही आपको फिर थ्री-डी भास्कर का रोमांच देखने को मिलेगा।
: थ्रीडी भास्कर ने मचाई धूम : जयपुर जयपुर के करोड़ों पाठकों को दीपावली पर थ्री डी भास्कर की सौगात मिल गई। यह ऐसी सौगात थी जिसने उन्हें न केवल रोमांचित कर दिया बल्कि एक अनूठा पल संजोने का मौका भी दिया। दुनिया भर में हिंदी अखबारों के इतिहास में यह पल ऐतिहासिक बन गया।
दो कारणों से लोग शुक्रवार को जल्दी उठे। एक दीपावली के कारण। दूसरा जल्द सुबह अखबार लेकर आने वाले हॉकर के कारण। कहीं उनका थ्री डी भास्कर कहीं मिस नहीं हो जाए, चश्मा सही सलामत उन्हें मिल जाए। जैसे ही अखबार आया परिवार के सभी सदस्यों की निगाह उस ओर थी। बिना चश्मे के देखा तो कुछ अजीब सा लगा, पर जैसे ही चश्मा लगाकर देखा तो ऐसे लगा जैसे अखबार के पन्नों से दुपहिया और चौपहिया वाहन निकल कर बस सामने ही आने वाले हों। दिवाली पर सजे बाजारों की फोटो ऐसे लगे जैसे बस वे आंखों के सामने ही सजे हों और लोगों की चहल पहल स्पष्ट नजर आ रही हो। भास्कर में छपे विज्ञापन भी ऐसे दिख रहे थे जैसे जो भी उसमें दिखाई दे रहा है आंखों के सामने हो रहा है।
: वाकई रोमांचकारी है यह क्षण : भास्कर टीम जब जल्द सुबह थ्री भास्कर पर लोगों का क्रेज जानने निकली तो अलग प्रकार का अनुभव हुआ। आमतौर अपनी रुचि या जनरुचि की खबरें पढ़ने वाले पाठक न केवल पूरे अखबार को चश्मा लगाकर देख और पढ़ रहे थे, बल्कि वे भी निहार रहे थे, जो अमूमन अखबार पढ़ते नहीं है। शहर के चार उद्यानों में यह अलग प्रकार का अनुभव था। सेंट्रल पार्क में रोज घूमने आने वाले उद्योगपति धर्मदेव अग्रवाल, उनकी पत्नी सुषमा तथा परिवार के बच्चे स्नेहा व ओजस्व ने थ्री डी भास्कर पढ़ते हुए कुछ यूं प्रतिक्रिया दी-—मार्वलस, क्या गजब है। ऐसा पहले न कभी सोचा गया और न ही ऐसी कोई कल्पना भी की जा सकती थी। क्या अखबार के पन्ने भी थ्री डी हो सकते हैं, भास्कर ने कर दिखाया।
एक पार्क में टहल रहे दंपत्ती सिराज अहमद व जुबेदा बेगम भी अखबार में उभरती तस्वीरों पर कौतूहलवश बोले, गजब हो गया। कई दिनों से इंतजार था कि आखिर थ्री डी अखबार कैसे निकाला जा सकता है, लेकिन आज हाथ में है और वाकई थ्री डी ही है। घाटगेट निवासी नजीर अहमद ने भी कुछ इसी तरह प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने कहा कि तस्वीरों का मजा वाकई थ्री डी इमेज में ही है।
सनशाइन होंडा के संचालक आर.एस. मित्तल तथा एक फार्मा कंपनी के रीजनल मैनेजर सुनील शर्मा अभिषेक के साथ पार्क में घूमकर एक छतरी में बैठे थे, बोले, भास्कर बहुत आगे निकल गया है। तस्वीरें ऐसे उभरकर निकल रही हैं, जैसे सामने से चलकर आ रही हों। फ्रंट पेज से लास्ट पेज तक अखबार का मजा ही कुछ और है आज।
ब्लैक बैल्ट महावीर भाटी पार्क में दो तीन जनों को प्रशिक्षण देकर घर लौट रहे थे, ठहरे और अखबार देखने लगे। कुछ समझ नहीं कि खास क्या है तो चश्मा लगाया। एकदम बोले, क्या बात है, अखबार की रंगत बदल गई। हर चीज जैसे लाइव हो। कागज पर तस्वीरों की लाइव तो मैंने पहली बार देखी है। साभार : दैनिक भास्कर डॉट कॉम












Mukesh
November 7, 2010 at 2:19 pm
यह खबर है या दैनिक भास्कर का विज्ञापन..अगर ऐसी सामग्री भास्कर बिना संपादन के छापेगी तो भड़ास का नाम डूब जाएगा.
Ankit Khandelwal
November 8, 2010 at 9:34 am
Good initiative. Paisa ho to sab kuch possible hain… but still a good effort.
But Jaipur ki population crore nahi hain.. lakh main hain.. so kahi kahi per kuch jayada hi bada chada karke chap diya hain..aisi galtiyon ka dhyan rakha chahyain..
http://en.wikipedia.org/wiki/Jaipur (to see population of Jaipur)
sach kaha
November 8, 2010 at 9:45 am
Key bhaiya Mukesh aap jivan mai sirg negative hi dekhtey hai. Kisis nai nai shuruaat ki hai to baat failegi hi. Aap bhi kuchh naya kijiye aap bhi chhapengey. Hamesh Gaali dengey to aapko bhi hamesh gaali hi khani padegi.
sanjay
November 8, 2010 at 12:34 pm
lagata he bhaskar ne bhadas midia ko bhi kharidliya hai…
Niel
November 8, 2010 at 3:55 pm
यस्वन्त जी खबर देखी , काफ़ी अफ़्सोसे हुआ कि यस्वन्त जी कब् से भास्कर कि भाषा बोलने लग गये। यस्वन्त जी तो पक्ष् पात के लिये बिल्कुल नही जाने जाते हैं। तो फ़िर् आपसे इतनी बडी गलती कैसे हो गयी , यस्वन्त जी मै मुकेश जी कि बात से सहमत हु कि ये खबर कम ओर विज्ञापन ज्यादा लग रहा हैं। अत: यस्वन्त जी मै आपसे निवेदन् ओर आशा करता हु कि आप मेरी इस जिज्ञासा को जरुर शान्त किजियेगा, आप के जवाब् के इन्तजार मै ।
pushpendra mishra
November 9, 2010 at 2:07 pm
yaswqant ji aap ke dwara bhadas par likhi sabhi khabrain mai bade chav ke sath padhata huin. lekin mai haran hu ki jo khabar 5 se 10 laieno me likhi ja sakti thi use pure 2 page me likhana sansay ke ghere me dalatl hai. bhaskar print ka leading newspaper hai, lekin khabro ke dushare madhamo dwara bhaskar ko etna mahatva deya jana pakshapat ko darshata hai jo bhadas4media ko shobha nahi deta hai. asha hai ki app es masale me gambhirata dekhaege.
kautilya
November 9, 2010 at 2:26 pm
Nice story ……..
Ek Anutha pal print media ke liye….
jaroori nahi ki har pal kisi ki burai ho…..
ye such hai bhaskar ne ek naya pahal kiya hai…:)
raju
November 10, 2010 at 6:32 pm
yashwant ji, me jaipur me to nahi rahta or na hi maine 3D bhaskar dekha h par bharkar ka daily pathak jarur hu, ek bat katunga ki bhaskar or patrika se to local akbhar achhe h. 12 page ke akhbar me 8 page to add hota h. front adhe page par ek hi khabar hoti h or usme bhi adhe me photo. inko news ki heading to banani nahi ati. ye kahe ke state level ke akbhar h. ab chahe 3D do ya 5D, distt. HQ par to bura hall h. bus Add ki chandi kuti ja rahi h.