इंदौर को हिंदी अखबारों की मंडी कहा जाता है। यहाँ से जब भी कोई अखबार निकलता है तो उसके मालिक के मुगालतों की शुरुआत दैनिक भास्कर या नईदुनिया जैसा मालिक बनने से होती है। यह जाने बगैर कि उन्हें इस ताकत को पाने में कितने साल लगे हैं। इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति ‘दबंग दुनिया’ के मालिक किशोर वाधवानी की दिखाई दे रही है, जो अखबार मालिक होने के गुरूर में कुछ ज्यादा ही चौड़े होते दिखाई दे रहे हैं।
एक गुटखा व्यापारी से अखबार मालिक बने किशोर वाधवानी को इस तरह के मुगालते पालने का शौक किसी और ने नहीं, बल्कि ‘दबंग दुनिया’ के ही कुछ कर्मचारियों ने लगाया है। मुद्दे की बात यह कि ये कर्मचारी पत्रकार नहीं, एक फोटोग्राफर वैभव शर्मा है जो पहले जिस अखबार में थे वहाँ भी किशोर वाधवानी के फोटो खींचकर छपवाया करते थे। वैभव शर्मा का उपयोग करके कुछ और नाकाम लोग ‘दबंग दुनिया’ में आ गए और अखबार को अखाड़ा बना दिया है।
तीन महीने पहले जब यह अखबार शुरू हुआ था, तब एक उम्मीद जागी थी, कि शायद यह अखबार नए कलेवर में पाठकों की पसंद बनेगा, पर किशोर वाधवानी के मुँह लगे दो-चार लोगों ने अभी से माहौल बिगाड़ना शुरू कर दिया है। वैभव शर्मा एंड पार्टी एक तरफ वाधवानी को सब्जबाग दिखा रही है, दूसरी तरफ उन्हें चूना लगाने से भी बाज नहीं आ रही। फोटोग्राफर वैभव शर्मा स्पेशल फोटो के लिए हजारों रुपए फूँककर ऊटी, गोवा और दक्षिण भारत की सैर कर आए हैं।
उनके ही एक साथी सचिन तेडूलकर का इंटरव्यू लेने के नाम पर मुंबई गए और सचिन के घर का फोटो खींचकर लौट आए। आज स्थिति यह है कि 16 पेज के अखबार में करीब 100 से ज्यादा फोटो रोज छपते हैं। इनमें से कई फोटो सिर्फ इसलिए छपते हैं कि वैभव शर्मा चाहते हैं। संभवत: ‘दबंग दुनिया’ देश का पहला ऐसा अखबार है जो फोटोग्राफर की सलाह पर निकल रहा है। तात्पर्य यह कि किशोर वाधवानी अभी तक सच को समझ नहीं पाए हैं कि अखबार सिर्फ फोटो छापने से नहीं, खबरों और रिपोर्टो से अपनी पहचान बनाता है।
ये तो बात हुई फोटोग्राफर के दबदबे से ‘दबंग दुनिया’ निकलने की। दूसरा मामला है, मार्केटिंग में ऐसे लोगों की भर्ती का, जो पहले कई अखबारों को चूना लगाकर आए हैं और अब ‘दबंग दुनिया’ पर घात लगाकर बैठे हैं। मार्केटिंग के लोगों की यह टीम ‘राज एक्सप्रेस’ से आई है, जहाँ इनपर लाखों रुपए की वसूली करके निकल जाने का मामला है। खबर यह भी है कि ‘राज एक्सप्रेस’ इन लोगों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। इस पर यह टीम ‘दबंग दुनिया’ के लिए विज्ञापन न लाकर प्लानिंग बनाने में जुटी है। तय है कि एक दिन वैभव शर्मा के साथ यह टीम एक दिन किशोर वाधवानी को चूना लगाकर निकल जाएगी।
ऐसे में ‘दबंग दुनिया’ से शुरुआत से जुड़े अवनींद्र जोशी परेशान दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि मालिक खुद ही सीधे लोगों की भर्ती करते जा रहे हैं, यह जाने बगैर कि इनकी उपयोगित क्या है? दैनिक भास्कर छोड़कर शिमला से ‘दबंग दुनिया” में संपादक बने कीर्ति राणा के बारे में भी खबर है कि वे किशोर वाधवानी की दखलंदाजी से तंग आकर कहीं और जुगाड़ में हैं। इन स्थितियों को देखकर कयास लगाए जाने लगे हैं कि इस अखबार के भी जल्द ही जागरण, राज एक्सप्रेस और पीपुल्स समाचार की तरह बंटाधार होने वाला है। जब अखबार का नौसिखिया मालिक अपनी मर्जी से अखबार निकालने लगता है, संपादक और मैनेजर के काम में दखल देने लगता है और अपने सलाहकारों की टीम बना लेता है, तो अखबार के काम लगने में ज्यादा दिन नहीं लगते।
यह रिपोर्ट एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित है. इससे अगर आप असहमत हैं तो अपनी बात नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कह सकते हैं या भड़ास4मीडिया तक [email protected] के जरिए भेज सकते हैं.












arun
July 18, 2011 at 5:46 pm
jaisa lagta he vaisa hota nahi he janab. vaibhav par ungli uthane wale ye nahi jante ki jin avnindraji ko wo bhala bata rahe hai wa jagran ki lutia duboi thi. ye kisi se chipa nahi he. rahi baat ranaji ki to we bhale insan hain. dosti nibhate hue jin khatamkhalifa tyagi or avasthi ko moka diya ve puri tarah unhe niras kar chuke hain. we bade patrkaro ko rakhna chahte hain lekin unki selery dimand ke 7 unke dukandari bhare aandaj ka aandaja is bhale aadmi ko nahi hai. in waristho ki hakikat un k w se chipi bhi nahi he jo unki kai dimand puri kar chuke hain.isi liye yadi we yang team ka sapna dekhte hain to jalkukdo ka pet dukhne lagta hai.