एक दूसरे से तेज समाचार देने की दौड़ में लगे समाचार पत्रों का यह हाल है कि आने वाले दिनों में बीमार आदमी के मरने के पहले मरने का समाचार छपना शुरू हो जायेगा। इस तेज रफ़्तार दौड़ की शुरुआत दैनिक जागरण ने गया के एक समाचार से कर दी है। गया दैनिक जागरण के कार्यालय प्रभारी कमल नयन के चाचा की मौत दिनांक 2 मई को हो गई तथा दाह संस्कार ३ मई को दिन में संपन्न हुआ। हालांकि चाचा की मौत के समाचार का कोई अर्थ नहीं था परन्तु एक कार्यालय प्रभारी के चाचा की मौत हो तो वह समाचार बन ही जाता है।
दैनिक जागरण ने कमल नयन के चाचा की मौत के बाद मुखाग्नि का समाचार अपने 3 मई के अंक मे बिना दाह संस्कार हुये ही प्रकाशित किया जबकि दाह संस्कार 3 मई को दिन में हुआ। समाचार पत्रों में एक दिन पूर्व का समाचार छपता है यानी 2 मई की रात तक की घटना का प्रकाशन 3 मई को प्रकाशित होनेवाले अखबार में होगा परन्तु दैनिक जागरण ने 3 मई को दिन में हुये दाह संस्कार की खबर 3 मई के सुबह के अखबार में प्रकाशित कर दी। इस प्रकार बिना दाह संस्कार हुये ही दाह संस्कार का समाचार छप गया और चापलूसी की हद तो यह हुई कि उसमें शहर के गणमान्य लोगों को उपस्थित भी दिखा दिया गया। वाह रे दैनिक जागरण।
गया से मदन कुमार तिवारी की रिपोर्ट.












ravish sharma
May 5, 2011 at 9:46 am
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