देहरादून में हिंदी के बड़े अखबारों के बीच युद्ध शुरू हो चुका है। तलवारें खिंच चुकी हैं। वजह, एक ही बाजार में कई बड़े दिग्गज खिलाड़ियों का पहुंच जाना। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच राष्ट्रीय सहारा, दैनिक हिंदुस्तान, आईनेक्स्ट, इंपैक्ट जैसे अखबारों के आ जाने से मार्केट में एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ मच चुकी है। इसी के चलते अब कंटेंट की लड़ाई मूल्य की लड़ाई पर आ चुकी है। मतलब, सभी ने दाम गिराने शुरू कर दिये हैं।
देहरादून के अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिंदुस्तान अखबारों ने अपने दाम एक रुपेय गिरा दिए हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण ने 6 जून को अपने दाम तीन रुपये से घटाकर 2 रुपये कर दिए तो एक दिन बाद हिंदुस्तान ने यही कदम उठाते हुए अपना भी मूल्य तीन की जगह दो रुपये कर लिया।
अमर उजाला प्रबंधन से जुड़े लोगों का दाम गिराने के बारे में कहना है कि ऐसा उत्तराखंड में प्रसार बढ़ाने और बाजार का विस्तार करने के लिहाज से किया गया है। अमर उजाला ने अपने दाम देहरादून के साथ साथ हरिद्वार में भी गिरा दिए हैं। अमर उजाला के मुताबिक वह उत्तरांचल का नंबर वन प्रकाशन है और मूल्य में कमी से उसका प्रसार और भी बढ जाएगा।
उधर, दैनिक जागरण के सीईओ संजय गुप्ता का कहना है कि उन्होंने भी बाजार में अपने अखबार की हिस्सेदारी बढ़ाने के नाते मूल्य कम किए हैं। साथ ही, नए लांच हुए दैनिक हिंदुस्तान को मजबूत चुनौती देना भी दाम घटाने का एक लक्ष्य है। जागरण ने भी अपने रेट देहरादून के साथ साथ हरिद्वार में भी घटाए हैं। श्री गुप्ता का कहना है कि मूल्य में कटौती उत्तराखंड रीडर डेवलपमेंट प्रोग्राम का एक पार्ट भी है। दाम कम होने से आम आदमी तक अखबार पहुंच सकेगा।
उधर हिंदुस्तान के प्रबंधन के मुताबिक वे पहले से ही नए लांच चंडीगढ़ में एक रुपये के आमंत्रण मूल्य पर अखबार बेच रहे हैं और देहरादून में भी 7 जून से वहां के मार्केट रेट तीन के बजाय दो रुपये में अखबार बेचने का एलान कर दिया है। हालांकि हिंदुस्तान के लोगों का साफ कहना है कि वे कम मूल्य पर अखबार ज्यादा दिन नहीं दे सकते क्योंकि वे हमेशा गुणवत्ता में यकीन करते हैं, कम दाम में बेचने में नहीं।
फिलहाल तो जो भी तर्क अखबारों के प्रबंधन गिनाए, दून वासियों को ढेर सारे अखबार कम दाम में पढ़ने को मिल रहे हैं, क्या ये उन्हें वाकई मार्केट इकानामी का तोहफा नहीं है!











