आरबीआई ने जनता से जमा लेने पर सहारा परिवार और सहारा इंडिया परिवार के खिलाफ चेतावनी जारी की है. आरबीआई ने 17 जून 2008 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें 30 जून, 2011 के बाद मैच्योर होने वाली स्कीम पर सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एसआईएफसीएल को कोई नया डिपोजिट नहीं लेने के लिए निर्देशित किया गया था. आरबीआई के पास शिकायत आ रही थी कि सहारा ग्रुप, सहारा इंडिया परिवार और सहारा परिवार के नाम पर पैसा जुटा रहा है.
बहरहाल आरबीआई ने अखबारों में विज्ञापन निकालकर साफ कर दिया है कि उसने सहारा परिवार या सहारा इंडिया परिवार को किसी तरह का डिपॉजिट जुटाने की अनुमति नहीं दी है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि सहारा ग्रुप की किसी भी कंपनी द्वारा जुटाए गए फंड को लौटाने की गारंटी रिजर्व बैंक की नहीं होगी और ये कंपनियां रिजर्व बैंक का नाम लेकर काम नहीं कर सकतीं. आरबीआई ने कहा है कि जब तक सहारा इंडिया परिवार या सहारा परिवार के नाम पर पैसा जुटाया जाता है तो कंपनी का नाम रसीद पर जरूर जांच लें. साथ ही ये भी देखें कि क्या कंपनी रिजर्व बैंक से पैसा जुटाने के लिए मान्यता प्राप्त है या नहीं.
रिजर्व बैंक की नोटिस के अनुसार लोगों में ऐसा भ्रम है कि सभी सहारा ग्रुप कंपनियां आरबीआई के नियंत्रण में हैं लेकिन ऐसा नहीं है. सिर्फ सहारा इंडिया फायनेंसियल कार्पोरेशन लिमिटेड (एसआईएफसीएल), सहारा इंडिया कार्पोरेशन इंवेस्टमेंट लिमिटेड (एसआईसीआईएल) और सहारा इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड (एसआईआईडीएल) ही रिजर्व बैंक से नियंत्रित होती हैं. दरअसल, आरबीआई के नोटिस जारी करने के दस दिन पूर्व सेबी ने भी निवेशकों को कुछ ऐसी ही चेतावनी दी थी. (साभार : हिन्दुस्तान)











