: नई व्यवस्था में गणेश साकल्ले और सतीश एलिया सिर्फ स्पेशल रिपोर्ट तक खुद को सीमित रखेंगे और स्टेट हेड अभिलाष खांडेकर को रिपोर्ट करेंगे. बाकी ब्यूरो संवाददाता अपनी बीटों की खबरें सीधे स्थानीय संपादक आनंद पांडे को रिपोर्ट करेंगे. पूरा ब्यूरो दो हिस्सों में बंटकर सीधे संपादकों के अधीन हो गया है : अखबार में लगातार बदलाव दैनिक भास्कर की विशेष पहचान रही है.
इस प्रक्रिया में ताजा परिवर्तन यह है कि भास्कर प्रबंधन ने राजधानी स्थित ब्यूरो और ब्यूरो चीफ की व्यवस्था खत्म कर दी है. अब ब्यूरो का अलग से कोई अस्तित्व नहीं होगा. ब्यूरो के संवाददाताओं को दो टीमों में बांटा गया है. एक टीम निर्धारित चुनिंदा प्रशासनिक बीटों पर काम करेगी और दूसरी टीम सिर्फ स्पेशल रिपोर्ट पर. बताया जाता है कि समूह के मुख्यालय भोपाल संस्करण स्थित ब्यूरो के कामकाज से प्रबंधन की सख्त नाराजगी के चलते पहली बार यह कड़ा फैसला लिया गया है.
प्रतिस्पर्धी अखबारों की तुलना में ब्यूरो के बेहद कमजोर कवरेज, प्लानिंग की कमी, गुटबाजी, खबरें रोकने और बाइलाइन काटने से जुड़ी रिपोर्टरों की शिकायतें लगातार मिल रही थीं. इन्हीं समस्याओं के चलते पिछले दो-ढाई सालों में कई अनुभवी संवाददाता ब्यूरो को अलविदा कह गए. ब्यूरो की भारी-भरकम टीम प्रबंधन की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी. प्रबंधन के निर्देश पर संपादकों ने पिछले दो महीनों में ब्यूरो के हर रिपोर्टर से इस बारे में अलग-अलग बात की.
आखिरकार ब्यूरो चीफ गणेश साकल्ले को दो हफ्ते पहले व्यवस्था परिवर्तन का निर्णय सुना दिया गया. नई व्यवस्था में गणेश साकल्ले और सतीश एलिया सिर्फ स्पेशल रिपोर्ट तक खुद को सीमित रखेंगे और स्टेट हेड अभिलाष खांडेकर को रिपोर्ट करेंगे. बाकी ब्यूरो संवाददाता अपनी बीटों की खबरें सीधे स्थानीय संपादक आनंद पांडे को रिपोर्ट करेंगे. पूरा ब्यूरो दो हिस्सों में बंटकर सीधे संपादकों के अधीन हो गया है. नई व्यवस्था में होने वाले कवरेज की सख्त मॉनीटरिंग का सिस्टम भी तैयार किया गया है. भोपाल के इस प्रयोग को भास्कर ने सभी ब्यूरो पर लागू करने का भी निर्णय लिया है.











