
कीर्ति राणा
वे दैनिक भास्कर के इंदौर संस्करण के वर्ष 1983 में लांच के वक्त भास्कर से जुड़े थे और अभी तक भास्कर में थे. उन्होंने दैनिक भास्कर, इंदौर में सिटी रिपोर्टर के रूप में काम शुरू किया था और वहीं पर वे सिटी चीफ, ब्यूरो चीफ, न्यूज एडिटर बनते रहे. बाद में जब भास्कर ने उज्जैन का एडिशन निकाला तो उसकी जिम्मेदारी कीर्ति राणा को दी गई.
फिर कीर्ति राणा दो वर्ष तक दैनिक भास्कर, उदयपुर के संपादक रहे और दो वर्ष तक दैनिक भास्कर, श्रीगंगानगर में. करीब सवा साल से वे दैनिक भास्कर, शिमाल के संपादक के रूप में काम देख रहे थे. कीर्ति राणा और दैनिक भास्कर का रिश्ता करीब 38 वर्षों का था, जो अब खत्म हो चुका है. कीर्ति राणा से जब भास्कर से इस्तीफे और दबंग दुनिया के साथ नई पारी शुरू करने के बारे में जब भड़ास4मीडिया ने पूछा तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.












Noval Thakur
May 23, 2011 at 7:59 am
शिमला में अब पीटेगा भास्कर
कीर्ति राणा जी के इस्तीफे के बाद शिमला में दैनिक भास्कर का पीटना तय है। भास्कर की शिमला में वर्तमान टीम के साथ जिस तरह राणा जी अखबार को खींच रहे थे, इन परिस्थितियों में किसी भी अन्य प्रबंधक के लिए यह काम टेढ़ी खीर साबित होगा। राणा जी को उनके संपादकीय लेखों के लिए शिमला के पाठक हमेशा याद रखेंगे। विशेषकर वो लेख जिसमें उन्होंने अस्पताल में रोगी से मिलने आने वालों के व्यवहार पर कटाक्ष किया था। भास्कर समूह शिमला के लिए अब किसकी जिम्मेदारी तय करता है यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन नए टीम मैनेजर के साथ वर्तमान टीम में अमूल चूल परिवर्तन के कयास तो लगाए ही जा सकते है।
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ajay gupta
May 23, 2011 at 9:18 am
kirti ji ke istife ke bad sachmuch bhaskar ki halat patli ho jaegi. unke rehmo karam par pal rahe do tathakathit adhikari sankat me aa sakte he. nae sampadak ki niyukti k bad karib ek saal pehle jagran se aya ek vyakti or national telente pool ka ek product ki noukri bhi khatre me aa sakti he. kirti ji k estife k bad suna he dono adhikari bhi kahi or apna prabandh kar sakte he. saath hi desk per haal hi jagran se aye ek or vyakti pe bhi sankat aa sakta he. ese logon ko bhi kaam pe rakhne k liye kirti ji hamesha yaad kie jaenge.
rohit
May 23, 2011 at 12:01 pm
कीर्ति राणा जी ने शिमला भास्कर में सिवाय ड्फ्रों की भर्ती के कुछ नहीं किया. पेजमेकर को सब-एडिटर और चीफसब ज़रूर बना गए. ब्रह्मानन्द देवरानी और उपेन्द्र को समय रहते अपना जुगाड़ कर लेना चाहिए. इस से पहले की नया आने वाला बॉस उन्हें धक्के मार कर बहार निकाले. प्रकाश पालीवाल को भी नयी नौकरी तलाश कर लेनी चाहिए. मुफ्त की रोटी कब तक तोड़ते रहेंगे..
mr agarwal
May 23, 2011 at 3:43 pm
kirti rana ne bhaskar choda kyonki bhaskar sampadako ko doosre editions pe bhej kar naye experiment karta hai jaise mbbs docotor hone ke pehle student mareez par tarah tarah ke experiment karta hai.