महासमुन्द में छुरा के पत्रकार उमेश राजपूत (32 वर्ष) की दो बाइक सवार नकाबपोशों ने रविवार शाम करीब पौने सात बजे गोली मारकर हत्या कर दी. उमेश नईदुनिया में छुरा से संवाददाता थे. घटना के समय वे अपने घर पर काम कर रहे थे. वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावरों ने राजपूत के घर में लाल स्याही से लिखा एक पर्चा छोड़ा है. जिसमें समाचार छापने पर हत्या की चेतावनी दी गई है.
जानकारी के अनुसार उमेश का 15 दिन पहले किसी समाचार के प्रकाशन को लेकर किसी से विवाद हुआ था. इसकी शिकायत राजपूत ने पुलिस में दर्ज कराई थी. छुरा थाना प्रभारी पीएल उइके ने बताया कि उमेश राजपूत छुरा के आमापारा स्थित अपने निवास में रविवार की शाम टीवी पत्रकार शिवकुमार वैष्णव के साथ कुछ काम कर रहे थे. इसी दौरान शाम पौने 7 बजे कुछ लोगों ने उन्हें आवाज देकर घर से बाहर बुलाया.
जब उमेश बाहर पहुंचे तो नकाबपोश बदमाशों ने उनपर लक्ष्य करके गोली चला दी. गोली उमेश के बाएं तरफ सीने में लगी. वे चीख मारकर वहीं गिर पड़े. गोली चलने की आवाज सुनकर पत्रकार शिव कुमार एवं उमेश के परिजन बाहर निकले तो उमेश को लहूलुहान देखा. तब तक नकाबपोश हमलावर भाग चुके थे. इसके बाद शिव कुमार व परिजन उमेश को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा ले गए, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
थाना प्रभारी उइके ने बताया कि गोली चलाने के बाद हमलावर राजपूत के घर गेट के पास लाल स्याही से लिखा एक पर्चा छोड़ गए. इसमें लिखा है ‘उमेश राजपूत तुम नईदुनिया में मेरा पेपर छापना बंद कर दो और जीवन-जीना है तो कहीं और चले जाओ, नहीं तो मारे जाओगे.’ हत्या की खबर मिलते ही गरियाबंद से एसपी कमल लोचन व एसडीओपी छुरा पहुंच कर मौके का मुआयना किया. पुलिस हत्या के मामले में शिकायत के साथ-साथ घटना के अन्य पहलुओं पर जाँच कर रही है. पुलिस का मानना है कि आपसी रंजिश का भी मामला हो सकता है.
इस हत्याकांड की पूरे प्रदेश के पत्रकारों ने निंदा की है. हत्याकांड के विरोध में आज बंद का आह्वान किया गया है. गौरतलब है कि इसके पूर्व बदमाशों ने बिलासपुर में भास्कर के पत्रकार सुशील पाठक की भी गोली मारकर हत्या कर चुके हैं. सांसद चंदूलाल साहू, विधायक अमितेश शुक्ल, विधायक डमरूधर पुजारी सहित कई लोगों ने घटना की निंदा की है.












madan kumar tiwary
January 24, 2011 at 4:03 am
हम अराजक राज्य की ओर बढ रहे हैं। पत्रकारों की गिरफ़्तारी से लेकर हत्या और उनके परिवार पर जानलेवा हमले जैसी घटनायें , भ्रष््टाचार , आतंकवाद , धार्मिक कट्टरपन के खिलाफ़ जारी मुहिम को दबाने की साजिश है। सतही तौर पर भले हीं यह असंगठित हरकत लग रही हो , मनह के स्तर पर यह एक नये उभरते हुये।संगठित कट्टरवादी विचारधारा का उदय है । पत्रकार पर हुये हमले को , पुलिस अधिकारी , जज पर हुये हमले की के बराबर मानते हुये , त्वरित कारवाई करके न्याय प्रदान करने की जरुरत है .