नई दुनिया, मुंबई के ब्यूरो चीफ चंद्रकांत शिंदे ने संस्थान को अलविदा कह दिया है. 30 अप्रैल 2011 उनका आखिरी कार्यदिवस था. संस्थान छोड़ने के वक्त शिंदे ने भरे मन से नई दुनिया के सभी वरिष्ठों-कनिष्ठों को एक पत्र लिखकर सभी का सहयोग के लिए आभार जताया. दिल्ली, मुंबई, इंदौर आदि संस्करणों के वरिष्ठों को भेजे एक आंतरिक ईमेल में चंद्रकांत शिंदे ने कई लोगों के नाम गिनाकर उनके प्रति आभार जताया.
उनका पत्र इस प्रकार है-
नई दुनिया के सभी साथियों को प्यार भरा नमस्कार
नई दुनिया में कार्य का आज मेरा आखिरी दिन है। पिछले लगभग पौने तीन वर्ष के मेरे कार्यकाल के दौरान नई दुनिया के सभी साथियों ने मुझे बेहद सहयोग दिया जिसकी वजह से मैं अच्छा काम करने में सफल रहा। श्री आलोक जी ने मुंबई कार्यालय में काम करने की जिम्मेदारी मुझ पर सौंपी थी जिसके लिए मैं आपका बेहद आभारी हूं। आपके द्वारा सौंपी जिम्मेदारी को गंभीरतापूर्वक निभाने की मैंने पूरी कोशिश की थी। इसमें मुझे दिल्ली कार्यालय के सभी साथी श्री मधुसूदन जी, श्री हरीश जी, श्री अशोक जी, श्री विनोद जी, श्रीचंदजी, सुश्री मानसी जी, दुष्यंत जी, श्री धनंजय जी, श्री रविंद्र जी, श्री विवेकानंद जी, कुमार नरेंद्र, श्री रवी बात्रा जी, श्री सुरेश बाफना जी, सुश्री भाषा जी, सुश्री कोमिका जी, श्री रासबिहारी जी, सुश्री सुनंदा जी, श्री अशोक राय, श्री सौरभ जी, श्री कौशिक जी और अन्य सभी सहयोगियों का बेहद सहयोग प्राप्त हुआ, जिसके लिए मैं इन सभी का बेहद आभारी हूं। आशा है काम के दौरान भूलवश अगर मुझसे गलती हुई होगी तो आप मुझे उदार मन से क्षमा करेंगे। अगर किसी का नाम लिखना भूल गया हूं तो मुझे क्षमा करें।
दिल्ली कार्यालय के साथ ही इंदौर कार्यालय के श्री जयदीप जी, सुश्री निर्मला जी, श्री किरण जी, श्री केपीएस जे डान जी, श्री समय जी, श्री आशीष जी, श्री भिका जी, सुश्री स्मिता जी का भी मैं बेहद आभारी हूं। इंदौर, दिल्ली के साथ ही नई दुनिया के सभी संस्करणों के सभी साथियों का भी मैं बेहद आभारी हूं। मुंबई कार्यालय के श्री अर्पण जी, श्री स्टीव, श्री चंदन जी, श्री हैदर जी, आलोक, सुश्री सिमला, सुश्री घनश्री, श्री वैलेंटाइन, मेहुल, काशिफ, रावेल, आशीष, मनोज, सुमित, सुश्री प्रियंका, श्री पंकज जी, श्री गिरीश जी का भी मैं बेहद आभारी हूं। अगर किसी का नाम भूल गया हूं तो क्षमा करें।
नई दुनिया में काम करते हुए मझे सभी साथियों ने बेहद सहयोग दिया जिसकी वजह से मैं अपना काम बेहतरीन तरीके से कर पाया। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भी आपका सहयोग रहेगा।
चंद्रकांत शिंदे












dinesh
May 1, 2011 at 11:31 am
apka estifa aur nimach office se mera estifa ak hee din hua hai.maine neemach mai sade 4 sall beauro chife ka kam kiya. sahyog to kiska kitna rha kah nahi sakta, lekin……….