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नए नवेले सांसद के पास लाखों रुपये कहां से आए और कहां गए!

भ्रष्‍टाचार की गंगोत्री को बंद करने के सवाल पर इस बार संसद में खूब हंगामा हुआ. चाहे वो मामला 2जी स्पेक्ट्रम का हो या फिर कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स घोटाले का. विपक्ष ताबड़तोड़ इन मुद्दों पर सरकार को घेरती रही और सरकार भी विपक्ष के हमले का उसी के लहजे में जवाब देती रही. खबरिया चैनल वाले भी अपनी सुविधा के हिसाब से खबरों को छापते और दिखाते रहे. इन खबरों को किस अंदाज़ में पेश करना है इसकी हिदायत भी वो अपने राजनितिक आकाओं से लेना नहीं भूले और भ्रष्‍टाचार की गंगोत्री अपने द्रुत गति से बहती रही.

भ्रष्‍टाचार की गंगोत्री को बंद करने के सवाल पर इस बार संसद में खूब हंगामा हुआ. चाहे वो मामला 2जी स्पेक्ट्रम का हो या फिर कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स घोटाले का. विपक्ष ताबड़तोड़ इन मुद्दों पर सरकार को घेरती रही और सरकार भी विपक्ष के हमले का उसी के लहजे में जवाब देती रही. खबरिया चैनल वाले भी अपनी सुविधा के हिसाब से खबरों को छापते और दिखाते रहे. इन खबरों को किस अंदाज़ में पेश करना है इसकी हिदायत भी वो अपने राजनितिक आकाओं से लेना नहीं भूले और भ्रष्‍टाचार की गंगोत्री अपने द्रुत गति से बहती रही.

खैर संसद का सत्र 25 तारीख को ख़तम हो गया. इसी बीच एक बड़ी घटना घटी और इसकी खबर देश की जनता को कानो कान नहीं हुई. मामला फिर भ्रष्‍टाचार से जुड़ा हुआ था. जी अभी कुछ दिन पहले ही ये जनाब अपनी पोटली की ताकत पर झारखण्ड से चुन कर राज्यसभा पहुंचे हैं. वैसे उन्होंने चुनाव के वक़्त नोटों की पोटली को अहमियत देने वाली झारखण्ड की एक ख़ास पार्टी, जिसने पहले नोट के बदले वोट देकर नरसिम्‍हा राव की सरकार की डूबती नैया को पार लगाया था, का दमन थामा था. पर कुछ दिनों बाद अपनी सुविधा की हिसाब से ममता दीदी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए.

खैर मामला क्या था वो अब आप के सामने पेश कर दूं. हुआ कुछ यों कि 22 मार्च को दिल्ली हवाई अड्डे पर एक सज्जन को एअरपोर्ट पुलिस ने पकड़ा. सज्जन संभ्रांत दिख रहे थे, साथ में कुछ बड़े-बड़े बैग भी थे. जाँच की कार्रवाई आगे बढ़ी तो सनसनी फ़ैल गई. घबराने की कोई वैसी बात नहीं थी. बैग में किसी  महिला की लाश तो नहीं थी, पर जो उसके अन्दर था वो भारतीय राजनीति पर एक तगड़ा तमाचा था. जी, बैग में थे कुल 57 लाख रुपये के ख़ालिश नगद नोट और सज्जन थे अभी हाल में ही झारखण्ड से राज्यसभा में चुन कर आये श्रीमान केडी सिंह उर्फ कवंर दीप सिंह.

सूत्रों के मुताबिक उनसे लगभग दो-तीन घंटे तक सवाल-जवाब हुआ और उन्हें फिर स-सम्मान छोड़ दिया गया. क्या था उन 57 लाख रुपयों का राज ये अभी तक आम जनता को मालूम नहीं और ना ही किसी खबरिया चैनल ने इस खबर को खबर बनाने की कोशिश की, आखिर क्यों? कहीं यहाँ भी पोटली ने तो अपना कमाल नहीं दिखाया? या इस खबर में कोई दम नहीं थी? जो भी हो इतना तो तय हैं कि भ्रष्‍टाचार पर बहस एक बकवास है. सिर्फ दिखावा है. सरकार हो या मीडिया ये सब अपनी दुकानदारी चला रहे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

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0 Comments

  1. om prakash gaur

    March 27, 2011 at 4:38 pm

    जय बोलो बेईमान की जय बोलो…

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