ढाई दशक पहले पत्रकार घोटाले खोजते थे, लेकिन अब वे खुद घोटाले का हिस्सा बन गए हैं. टीआरपी की अंधी दौड़ चल रही है और पेड न्यूज का दौर शुरू हो गया है. पेड न्यूज, लाइव रिपोटिंग, वैचारिक पक्षधरता और सेक्युलरिज्म की अंधी दौड़ ने मीडिया के सामने कई विसंगतियां पैदा की हैं. समाज में जबरदस्त गिरावट आ रही है जिसका असर पत्रकारिता जगत पर भी हो रहा है.
पत्रकारिता के गिरते मूल्यों पर संजीदगी से सोचना होगा. पत्रकारिता में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रेस कमीशन बनाना चाहिए. पत्रकारों की अपनी समस्याएं भी हैं. आज पत्रकार की स्वतंत्रता समाप्त हो गई है. यह बातें पत्रकार मनोज मिश्र ने कहीं. मनोज मेरठ में गुरुवार को सूरजकुंड स्थित विश्व संवाद केंद्र में नारद जयंती के अवसर पर आयोजित गोष्ठी ”भारतीय मीडिया में आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता” विषय पर बोल रहे थे.
अजय मित्तल ने पत्रकारिता के इतिहास और प्रथम हिंदी अखबार उदंत मार्तंड के उदभव, विकास व पराभव की चर्चा की. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सूर्यकांत द्विवेदी ने पत्रकारों की नई पीढ़ी के सामने आ रही चुनौतियों और विकल्पों पर प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा कि नारदमुनि जो नर से नारायण के बीच संवाद बनाते थे, आज वह संवाद समाप्त हो गया है. आज पत्रकारों द्वारा ऐसी खबरें नहीं लिखी जाती जो जनमानस को छुए. इस अवसर पर मेरठ की पत्रकारिता में सक्रिय पत्रकार सुनील तनेजा और राजेश शर्मा को विश्व संवाद केंद्र द्वारा सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में डा. नीरज सिंघल, शिवप्रकाश, अतुल स्वरूप शर्मा, ललित कुमार, सुनील छइयां, गौरव दीक्षित, अनुज मित्तल, सूरज आदि मौजूद थे.












ahmadfarid
May 20, 2011 at 5:32 pm
badhi ho sunil bhaiya…………..farid sultanpur