
श्याम सुन्दर
श्याम सुन्दर वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा न्यूज एक्सप्रेस से जुड़ने से पहले न्यूज एजेंसी आईएएनएस के कंसलटेंट थे. श्याम सुन्दर लम्बे समय से बीबीसी से जुड़े रहे हैं. बीबीसी से संजीव श्रीवास्तव जब इस्तीफा देकर सहारा पहुंचे थे, तब श्याम सुन्दर भी बीबीसी से सहारा आ गए थे. सहारा से संजीव श्रीवास्तव के इस्तीफा देने के बाद इन्होंने भी सहारा को अलविदा कह दिया था. श्याम सुन्दर की पॉलिटिकल खबरों पर बेहतर पकड़ है. इस्तीफा के संदर्भ में पूछे जाने पर श्याम सुन्दर ने कहा कि बेहतर विकल्प मिलने के चलते उन्होंने यह फैसला लिया है. उन्होंने चैनल हेड मुकेश कुमार के साथ अपने काम के अनुभव को शानदार तथा बेहतर बताया. उन्होंने अपना इस्तीफा देने की पुष्टि की.
सीनियर डिप्टी एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर कम प्रोग्रामिंग हेड पुनीत कुमार ने भी इस्तीफा दे दिया है. पुनीत कुमार को प्रोग्राम का मास्टर माना जाता है. वे लम्बे समय तक सहारा समय के साथ जुड़े रहे हैं. वे जी न्यूज के उस शुरुआती कोर टीम के सदस्य रहे हैं, जब जी टीवी के नाम से बुलेटिन का प्रसारण होता था. वे टीवीआई तथा दूरदर्शन के साथ भी लंबे समय तक कार्यरत रहे हैं. इस्तीफा के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे मैं ने पूरा कर दिया है. अब चैनल लांच हो गया है तथा मैंने प्रबंधन के नजरिए के अनुसार चीजे सेट कर दी हैं. अब मेरे लिए वहां कुछ नहीं था, लिहाजा रुकने का कोई कारण नहीं था. प्रबंधन ने पुनीत कुमार का इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया है.
हालांकि अंदरखाने की जो खबर है वह यह है कि यहां पर ग्रुप बन गए हैं, जो काम से ज्यादा राजनीति में दिलचस्पी लेते हैं. इसी ग्रुप के कारण लांचिंग से पहले प्रोड्यूसर कृष्ण कुमार कन्हैया ने भी यहां से इस्तीफा दे दिया था. इन लोगों के चलते न्यूज एक्सप्रेस में काम का माहौल नहीं बन पा रहा है. ये ग्रुप चैनल हेड के विश्वास को भी तोड़ने में जुटा हुआ है. जिन लोगों के सहारे न्यूज एक्सप्रेस को आगे बढ़ना था, वो सीनियर ही चैनल को एक-एक कर अलविदा कहते जा रहे हैं. इन दो वरिष्ठों का जाना चैनल के लिए झटका माना जा रहा है. इसके पहले इंवेस्टीगेशन हेड रजत अमरनाथ भी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे चुके हैं. श्याम सुन्दर एवं पुनीत कुमार के इस्तीफा देने की पुष्टि चैनल हेड मुकेश कुमार ने भी की.












aaaa
August 4, 2011 at 7:02 am
pankaj shukla jahan hi vahan aisi baatein hona lazmi hai………
journalism se jyada politics me unka interest rahta hai…………………..
ravi kumar
August 4, 2011 at 7:33 am
अच्छे इन्सां क्यों नहीं मिलते,परवरिश में कमी रह गई होगी..आज इस घर में इतना उजाला कैसे हुआ..ज़रूर कोई दीवार गिर गई होगी..आदरणीय मुकेश जी इस उजाले में देंखें कि आपके बगलगीरों की कमीज कितनी उजली है और कितनी दागदार।अगर अब भी नहीं देख पाएंगे तो जान लीजिए कि न्यूज एक्सप्रेस गर्त में चला जाएगा।इतनी जल्दी ठीक-ठाक लोगों के चैनल छोड़ जाने से साफ है कि दाल में ज़रूर काला है।इसे समझने की कोशिश कीजिए जनाब
Harishankar Shahi
August 4, 2011 at 11:21 am
वाइस ऑफ इन्डिया की याद आ रही है.
समीर
August 4, 2011 at 6:38 pm
भई, हफ्ते भर में यह हश्र। कहने को बहुत कुछ है पर फिलहाल इतना ही कि आपसी रंजिशों को भूलकर काम पर ध्यान लगाएं और चैनल को आगे बढाने में हाथ बंटाएं। मालिकान का क्या, आजिज आकर कर देंगे नमस्ते, फिर करते रहिएगा राजनीति। शुक्ला जी, थोडा संयम रखें, फल मीठा … नहीं तो खट्टे का स्वाद चखने के लिए रहें तैयार।
RAMU SHARMA......JODHPUR
August 5, 2011 at 5:10 am
अरे भाई चैनल ही राजनीती फोकास है तो स्टाफ मे क्यों राजनीती नहीं होगी……सारे स्टेट मे मीडिया के बड़े-बड़े राजनीती करने वाले लोगो कोई जो ले लिया है …आगे-आगे देखना होता है क्या………. ;D
deepak singh
August 5, 2011 at 8:59 am
जब इस चैनल का आगाज ये है तो अंजाम क्या होगा………. बहुत कठिन है ठगर पनघट की।।।
ravi kumar
August 5, 2011 at 12:05 pm
केवल पंकज शुक्ल ही क्यों।असल राजनीति तो खुद मुकेश कुमार कर रहे हैं।भाई मुकेश जी जिस प्रकार देश की बढ़ती विकास दर से गरीब आदमी का कोई सरोकार नहीं है उसकी प्रकार इस चैनल को भी देखिए।केवल हाई डेफीनेशन होने से कुछ नहीं होगा।दर्शक कोई पिक्चर क्वालिटी थोड़े ही देखेगा।वो तो इस पर निर्भर रहता है कि आली जनाब आप दिखा क्या रहे हैं।मुकेश जी पहले खुद की सोच को दुरुस्त कीजिए।अपनी रीजनल सोच से ऊपर उठिए।नेशनल चैनल रीजनल सोच और कम सस्ते वर्कर्स से नहीं चलता।फिलहाल तो चैनल कहीं-कहीं दिख रहा है।जब सभी जगह दिखेगा तो लोग सोचेंगे कि इस चैनल में अलग क्या है..?
pawan bhargav
August 6, 2011 at 9:34 am
bil kul theak kha ki same as VOICE OF INDIA