
‘पिस्तौल’ लहराते कुमार संजय त्गायी
रेस्ट हाउस में उपर है सेफ हाउस का कमरा. इस सेफ हाउस में चार प्रेमी जोड़े अदालत से सुरक्षा हासिल कर जान बचाने के लिए शरण लिए हैं. कमरे के बाहर पुलिसकर्मी नाइट ड्रेस में सो रहा है. इसी पुलिसकर्मी पर प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा का जिम्मा है. अंदर दाखिल हुए लोग सीढ़ियां चढ़कर सेफ हाउस तक पहुंच जाते हैं और पिस्तौल लहराते हैं. इन्हीं में से कुछ लोग तस्वीर खींचते हैं. और फिर बेरोकटोक वापस लौट आते हैं. अगले दिन यह पूरी सच्चा कहानी आज समाज के कैथल-जींद के लांचिंग एडिशन में मय तस्वीर प्रकाशित होती है. क्या है पूरी कहानी, और कौन कौन लोग थे टीम में, जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें…












tejwani girdhar, ajmer
September 30, 2011 at 2:18 pm
ये तो दिलेरी की बात है जनाब
arti dalal
September 30, 2011 at 3:08 pm
sanjay sir… very very xelent work haii…
good job….
rakesh singh
October 1, 2011 at 6:30 pm
this is a job of very enthujistic journalsim. i appreciate it. well done big brother. carry on to renaisance of society.