नीचे दिए गए दो वीडियो यह बताने के लिए काफी है कि पत्रकारिता में संवेदना अभी मरी नहीं है. जब एक पगलाई भीड़ पुलिस वालों को दौड़ा रही हो, अकेले पड़ गए एक पुलिस अधिकारी को पीट पीट कर कचूमर निकाल रही हो, तब किसी पत्रकार साथी का डंडा लेकर भीड़ से भिड़ जाना दुस्साहस लगता है, लेकिन ऐसा किया एक पत्रकार साथी ने. रायपुर में पिछले दिनों हुई इस घटना के दो वीडियो देखने से पता चलता है कि पत्रकार साथियों ने जान जोखिम में डाला.
तभी जाकर एक पुलिस अधिकारी की जान बच सकी. पहले वीडियो में भीड़ से डंडा लेकर भिड़े एक पत्रकार और पुलिस अफसर को बचाने में भीड़ द्वारा पत्रकार को पीटे जाने के दृश्य हैं तो दूसरे में पुलिस अधिकारी को मौके से भीड़ से बचाकर घायल अवस्था में उठाकर इलाज के लिए ले जाते पत्रकार साथियों के विजुवल हैं. इस प्रकरण से संबंधित पूरी खबर आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं- पत्रकारों ने बचाई पुलिस अधिकारी की जान
संबंधित दोनों वीडियो इन लिंक पर क्लिक करके देखे जा सकते हैं-












O.P. Tiwari
May 21, 2011 at 2:49 pm
वाकई कबीले तारीफ़ है,अपनी जान को जोखिम में डाल कर पुलिस की जान बचाना,मुझे आज के पत्रकारों पर गर्व है……
yogesh kumar
May 25, 2011 at 8:58 am
raipur ke patrkaro ne jo bhi kiya wo kabile tarif hai..ham sabhi ko raipur ke patrkaro par garbh hona chahiye ki un logo ne apni jaan ki parwah na karte huye us pulish karmi ki jaan bachai…
yogesh kumar
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