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पत्रकार शिवानी हत्‍याकांड : आरके शर्मा समेत तीन आरोपी बरी

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रवि कांत शर्मा और दो अन्य को पत्रकार शिवानी भटनागर के सनसनीखेज हत्याकांड से बरी कर दिया। अदालत ने चौथे आरोपी प्रदीप शर्मा की दोषसिद्धी और उम्र कैद की सजा की पुष्टि की। प्रदीप ने शिवानी की हत्या की थी। इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या 23 जनवरी 1999 को पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में उनके नवकुंज सोसाइटी के फ्लैट में कर दी गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रवि कांत शर्मा और दो अन्य को पत्रकार शिवानी भटनागर के सनसनीखेज हत्याकांड से बरी कर दिया। अदालत ने चौथे आरोपी प्रदीप शर्मा की दोषसिद्धी और उम्र कैद की सजा की पुष्टि की। प्रदीप ने शिवानी की हत्या की थी। इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या 23 जनवरी 1999 को पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में उनके नवकुंज सोसाइटी के फ्लैट में कर दी गई थी।

जस्टिस बीडी अहमद और जस्टिस मनमोहन सिंह की खंडपीठ ने इस हत्याकांड में दोषसिद्धी और सजा के खिलाफ चार आरोपियों की ओर से दायर अपीलों पर फैसला करते हुए कहा कि आरोपित आरके शर्मा, श्रीभगवान शर्मा और सत्यप्रकाश को शक का लाभ मिला। हम इस मामले में प्रदीप शर्मा की दोषसिद्धी की पुष्टि करते हैं। निचली अदालत ने 24 मार्च 2008 को पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा समेत चारों आरोपितों को दोषी ठहराया था। आरके शर्मा एक समय प्रधानमंत्री कार्यालय में ओएसडी के रूप में काम कर चुके थे। निचली अदालत ने इस मामले में सहआरोपी देव प्रकाश शर्मा और वेद उर्फ कालू को पहले ही बरी कर दिया था।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत में दोषी ठहराए शर्मा और तीन अन्य की अपील पर पिछले साल 21 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। चारों तिहाड़ में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। पूर्व आईपीएस अधिकारी को बरी करने की मांग करते हुए उनके वकील ने दलील दी थी कि टेलीफोन कॉल के रिकार्ड समेत परिस्थितियों की श्रृंखला की अनेक कड़ियां गुम हैं। उन्हें फंसाने के लिए रिकार्ड में छेड़छाड़ की गई है।

स्थाई अधिवक्ता पवन शर्मा ने बचाव पक्ष की दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि आरोपित एक उच्च पद पर था और उसने गवाहों को प्रभावित किया। नतीजतन इस मामले में अभियोजन पक्ष के 43 गवाह मुकर गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार पूर्व आईपीएस अधिकारी ने शिवानी को कुछ गोपनीय दस्तावेज दिए थे। शिवानी उन दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहती थी। इस कारण उसकी हत्या की गई।

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