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पत्रकार सुरक्षा कानून को नहीं मिली कैबिनेट की मंजूरी

मुंबई : आखिर वही हुआ जिसकी आशंका पहले से थी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे व राष्‍ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मधुकरराव पिचड़ के आश्वासन के बावजूद बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में पत्रकार सुरक्षा विधेयक के प्रारूप को मंजूरी नहीं मिल सकी.

मुंबई : आखिर वही हुआ जिसकी आशंका पहले से थी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे व राष्‍ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मधुकरराव पिचड़ के आश्वासन के बावजूद बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में पत्रकार सुरक्षा विधेयक के प्रारूप को मंजूरी नहीं मिल सकी.

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि इसके लिए 5-6 मंत्रियों की समिति बनाई जाएगी, जो विधेयक के मसौदे को मंजूरी देगी. उसके बाद इसे कैबिनेट के सामने फिर से रखा जाएगा. जैसे ही मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की मंत्रालय की छठी मंजिल पर बड़ी संख्या में एकत्र हुए पत्रकार गुस्से से उबल पडे. फिर क्या था सीएम के सामने सवालों की झड़ी लग गई और बेचारे चव्हाण को जवाब देना भारी पड़ने लगा. जवाब में चव्हाण ने कहा कि इसके पहले हमने इस विधेयक को लेकर राजनीतिक दलों को राजी करने की कोशिश की थी. पर, ऐसा हो नहीं पाया. इस पर एक बुजुर्ग पत्रकार ने कहा कि क्या सरकार सभी विधेयक पारित करने से पहले विपक्ष की मंजूरी लेती है.

तभी टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शशीकांत सांडभोर ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि कैसे विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान आधी रात को गुपचुप तरीके से कांग्रेस को भी अंधेरे में रखकर एनसीपी के मंत्रियों ने जल नियामक विधेयक को पारित करा लिया था. उसके लिए विपक्ष से क्यों नहीं राय ली गई थी. उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार यह कानून बनाना ही नहीं चाहती. यह पूछे जाने पर कि समिति कब तक मसौदा तैयार करेगी. क्या इसके लिए सरकार की तरफ से कोई समय सीमा तय की गई है? मुख्यमंत्री ने कहा कि इसको लेकर कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है.

विधेयक के खिलाफ उठ खडे़ हुए राणे :  कैबिनेट की बैठक मुख्यमंत्री चव्हाण ने पत्रकार सुरक्षा विधेयक को चर्चा के लिए पेश करते हुए कहा कि मुझे हर रोज पत्रकारों को जवाब देना भारी पड़ रहा है. अब आप लोग ही तय करें कि इसका क्या करना हैं. कोई मंत्री इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं था. गृहमंत्री आरआर पाटिल ने यह कहते हुए कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया कि पत्रकार वैसे ही मुझ पर खफा हैं. अभी यहां मैं जो कुछ बोलूंगा. कुछ ही मिनटों में पत्रकारों को पता चल जाएगा. इस लिए इस बारे में मैं कुछ नहीं बोलना चाहता. आप लोगों को जो करना हो करों.

इसके बाद शिवसेना के मुखपत्र सामना का मुकाबला करने के लिए एक मराठी अखबार प्रहार निकालने वाले महाराष्ट्र के उद्योगमंत्री नारायण राणे ने कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक के विरोध में बोलने की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि डाक्टरों के बाद यदि पत्रकारों के लिए भी अलग कानून बना तो कल को उद्योग जगत व फिल्म वाले भी इसी तरह अलग कानून की मांग करेंगे. किस-किस के लिए कानून बनाऐंगे. अलग कानून बनाने की अपेक्षा जो कानून पहले से हैं. उन्हें अच्छे से लागू करने की जरुरत है.

इसके बाद कई मंत्रियों ने विधेयक के मसौदे पर यह कहकर आपत्ति जताई कि वास्तविक पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनना चाहिए, पर गली-कूचों से कभी-कभार छपने वाले अखबारों के लोग इस कानून का दुरुपयोग करने से बाज नहीं आएंगे. कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि दोनों दलों के मंत्री इस बात को लेकर एक मत थे कि पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने वाले छोटे-मोटे अखबार वाले इस कानून का दुरुपयोग करेंगे. बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पत्रकार संगठनों के साथ चर्चा कर इस समस्या का समाधान खोजा जाए. मंत्रियों की राय थी कि इस कानून के लिए पत्रकारों का वर्गीकरण करना जरूरी होगा.

गृहमंत्री पर निशाना : कैबिनेट की बैठक में भी जेडे हत्याकांड की गूंज सुनाई दी. कांग्रेस कोटे के मंत्रियों ने दबी जुबान राज्य में खराब कानून-व्यवस्था को सुधारने की बात कही. मुख्यमंत्री चव्हाण भी इस मसले को लेकर चिंतित दिखाई दिए. सूत्रों के अनुसार इस हत्याकांड की बाबत दिल्ली से भी सवाल किए गए हैं. बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार होना चाहिए. कुछ मंत्रियों ने नाम लिए बगैर गृहमंत्री पाटिल को निशाना बनाया.

मुंबई से विजय सिंह ‘कौशिक’ की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. Anjani Gautam,[email protected]

    June 16, 2011 at 12:57 pm

    hathi ke khane aur dikhane ke alag-alag dant wali kahawat satik baithti hai in netawon ko state se lekar nation tak pahuchane me reporters ki bhumika kya hoti hai,bataya nahin ja sakta,aur unki bhumika kya hai samjha ja sakta hai.

  2. namani pandey

    June 16, 2011 at 2:51 pm

    narayan rane ki surcha nikal eni chahiye tab unhe pata chalega ki mahrashtra me kanun wawsaha kya kar rha hai or patrkaro ko surcha jarurat hai ki nhi….ab tak sab se jayada maharashtra patrkaro par hamle or murdar hua hai

  3. भारतीय नागरिक

    June 16, 2011 at 4:25 pm

    यह ऐसा क्यों करेंगे. इन्हें बस अपने से मतलब है.

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