पीपुल्स समाचार, इंदौर का संपादक पद छोड़ेंगे विकास

: राकेश पांडेय, गौरव शुक्ला और धनीष की नई पारी : खबर है कि पीपुल्स समाचार, इंदौर के संपादक विकास मिश्र ने संस्थान से नाता तोड़ने का फैसला कर लिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विकास मिश्र का प्रबंधन ने तबादला जबलपुर कर दिया. जबलपुर में पहले से ही पीपुल्स समाचार के आरई के रूप में गीत दीक्षित कार्यरत हैं. ऐसे में विकास मिश्र का वहां तबादला किया जाना खुद उनके गले नहीं उतरा और उन्होंने छुट्टी ले ली. सूत्रों का कहना है कि वे जल्द ही पीपुल्स समाचार से इस्तीफा दे देंगे.

कई अखबारों मे और कई शहरों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके विकास मिश्र अच्छे पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं. सूत्र बताते हैं कि पीपुल्स समाचार में प्रधान संपादक के पद पर अवधेश बजाज के होते हुए भी प्रबंधन संपादकीय के लोगों से बिजनेस कराने जैसा नापाक काम कर रहा है. इस कारण पीपुल्स समाचार के कई पत्रकारों में रोष है. सूत्रों के मुताबिक जो पत्रकार बिजनेस कराने को तैयार नहीं हो रहे हैं, उन्हें खासतौर पर परेशान किया जा रहा है. पीपुल्स समाचार के भोपाल आफिस में भी संपादकीय विभाग की हालत काफी खराब है. भय और आतंक के माहौल में पत्रकार काम कर रहे हैं और एक एक छुट्टियों के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

आवाजाही की कुछ अन्य खबरें…

हरिभूमि, रायपुर में सीनियर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत राकेश पांडेय के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने संस्थान से इस्तीफा देकर साधना न्यूज चैनल ज्वाइन कर लिया है.

गौरव शुक्ला ने कानपुर से प्रकाशित कंपू मेल से इस्तीफा देकर कानपुर में दैनिक जागरण अखबार ज्वाइन कर लिया है.

डेली न्यूज एक्टिविस्ट, लखनऊ में कार्यरत रहे धनीष श्रीवास्तव के बारे में सूचना है कि उन्होंने नई पारी की शुरुआत दैनिक जागरण, सिलीगुड़ी के साथ की है. वे दैनिक जागरण में स्टाफ रिपोर्टर के पद पर पहुंचे हैं.

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Comments on “पीपुल्स समाचार, इंदौर का संपादक पद छोड़ेंगे विकास

  • Bilkul aisa to nahi hai. Vyaktigat anubhav se kah sakta hu ki vaajib kaaran ho to leave mil aasani se mil jaati hai. Haan, baat-bebaat chhutti maarne wale zaroor pareshaan ho rahe hain.

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  • rajeshawasthi says:

    jahan tak chuttion ki baat hai to yahi kah sakta hoon ki yah khaber sahi nahee hai. yahan jaroori kaam hoine per chutti mil jati hai. naakkara loag hee chutti naa milne ka roana ro rahe hain.

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  • अवधेश बजाज ·के रहते पत्र·कारों ·को धंधा नहीं ·करना पड़ रहा, उनके ·कारण ही यह करना पड़ रहा है। दो साल से ·काम कर रहे लोगों ·को इंक्रीमेंट नहीं मिला। प्रबंधन ने जब उनसे राय पूछी तो इन महाशय ने ·कह दिया, ·कोई जरूरत नहीं है। वास्तव में अवधेश बजाज ·के पत्रकारिता कैरियर का पीपुल्स अंतिम पड़ाव है। इसके बाद वह फिर बिना डंक का बिच्छु बन जाएंगे। बहुत ·म उम्र में एक· व्यक्ति ·को मिली सफलता से उसका ·िकतना दिमाग खराब हो सकता है, यह बेचारे भोपाल ·के पत्र·कारों से बेहतर कोई नहीं जान सकता।

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  • vikas mishra ko to tabhi akal aa jane cahiye the jab akalmand? prabhandhan ne ati akalmand? samooh sampadak ke ghatia salah par jabalpur-bhopal-gwalior ke sampadak badle aur DHANDHE BAJ chaplooso ko fit kiya tha. aur ha akhbar ka DHANDHA to nahi bada gulam SAMPADK mooj me hai. akhwar ke ginti gir rahi hai. malik ko sardi me paseena aa raha hai. group ka paisa akhwar kha raha hai.

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  • विकास मिश्र ने छुट्‍टी लेकर अच्छा ही किया। अवधेश बजाज पत्रकार और पत्रकारिता के नाम पर कलंक है। अभी हाल ही में उसने पीपुल के इंदौर ऑफिस पहँचकर पत्रकारों (मजदूर लिखना ज्यादा अच्छा रहेगा) गाली-गलौज तक कर डाली। लोगों को शोषण से मुक्त कराने का दम भरने वाले ये पत्रकार गर्दन नीचे किए गाली भी सुनते रहे। शर्म आती है ऐसे पत्रकारों पर। आश्चर्य की बात तो यह है कि कथित तौर पर पत्रकारों के हित की बात करने वाले इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खालीवाल भी अवधेश के साथ थे। वह भी जानते थे कि विकास की छुट्‍टी होने के बाद उन्हें अपनी दुकान जमाने का मौका जो मिल जाएगा। ऐसे लोग न तो पत्रकारों का और न ही पत्रकारिता का भला कर सकते हैं। ऐसी पत्रकारिता से तो मजदूरी करना ज्यादा अच्छा है।

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  • Akhilesh Sethi says:

    Shri Awasthi ji,
    Bahane banane se sabhi ko chuttiya mil jati hai, or rahi naakkara logo ki baat to aap kon se tyoharo per office main kaam karte hai na to maine aapko kaam karte hue na to 15 Augst per dekha or na hi diwali per, kaam karne se darne wale hi aise moko per chuttiya lete hai. waise bhi prabhandhan koi bhi ho kaam karne walo ko chuttiya nahi milti hai or naakara logo ko turant chutti milti hai……..

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  • manohar joshi says:

    Awadesh Bajaj ko patrakar nahee kaha ja sakta wo to DALAL AUR DARUKHOR hai, bhpal mai dhandebaaz patrakaro ke kamee nahee hai aur aise logo ko Awadesh jaise nalayak log mil he jaate hai. Jaha tak kam umre mai socalled safalta milne ke baat hai to wo safalta nahee hote balki dhandha hota hai. Aise logo mai Naidunia Indore ka sampadak JAIDEEP KARNIK bhe hai jo kisi bhee mamle mai awadesh se kam nahee hai. Badtameez aur anubhavhaeen Jaideep bhe Awadesh ka he ek roop hai jo aajkal Bhrastra Mantree Kailash Vijayvirgee ke haath mai khel raha hai. Khaas baat yah ke awadesh bhe KALASH ka he pathaa hai.

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  • praveen khariwal to khud avdesh ka chharra hai. utna he chala hai jitna chalaya jata hai. pepole ka count down start ho chuka hai. jag malik jago. kabade ke koi keemat nahi hoti.

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  • yadi darpook sampadko ke list baye jay to top par awdesh ka nam hoga. bo gunner leker chalta hai. are bhaiya jab patrakar ho (jo he nahi) to darte kisse ho. lakin kuch to bat hoge jo ise darati hai. aalam yah hai ke ise ayse chammche chayae jo iske charan he dekhe, iska DHANDHE BAJJ FACE nahi. yah reporters se kahata hai ki fala manrti ke pol khol khabar laoo. khabar aate iska DIMAG chacha choudhrye jaisa chalne lagta hai mall sootne ke liye.

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