आप सभी को मैं अपनी दास्तान सुनाना चाहता हूं, जो पीपुल्स समाचार ने मेरे साथ अपनाया. शाजापुर ब्यूरो कार्यालय के लिये पीपुल्स समाचार द्बारा मुझे जुलाई 2010 मे बुलाया गया और राशि 2 लाख रुपये जमा कराई गई. मुझे अवधेश बजाज ने नियुक्त करने के आदेश दिये लेकिन शाम को ही बिना कारण बताये मेरा मामला पेंडिंग कर दिया. उसके बाद मार्च 2011 मे पुन: इन्दौर प्रेस से मुझे नियुक्त करने के लिये बुलाया गया जहां मेरे साथ अनुबंध किया गया और कार्यालय खोलने के निर्देश दिये गये.
मैंने कार्यालय किराय पर लिया जिस में टेलीफोन और मोडम लगवाया और 60 हजार के विज्ञापन भी दिये, लेकिन अचानक इन्दौर यूनिट हेड अजय मिश्रा और संपादक प्रवीणजी के बीच आपसी ईगो के चलते दूसरे दिन बिना बताये मेरा बंडल बंद कर दिया गया. इसके बाद फिर से मेरे साथ पीपुल्स प्रबंधन ने मजाक किया और मुझे फिर बुलाया. इन्दौर प्रेस की आपसी गुटबाजी का शिकार मैं हुआ. मैं स्वयं कभी प्रेस नहीं गया बार-बार मुझे बुलाया गया और मेरे मान सम्मान से खिलवाड़ किया गया.
इन्दौर प्रेस की स्थिति यह है कि सम्पादक अपने ईगो में रहते हैं तो यूनिट हेड अपने ईगो में. निर्णय लेने मे अक्षम पीपुल्स प्रबंधन के खिलाफ़ धारा 420, 120 बी के तहत शाजापुर न्यायालय में वाद दायर किया गया है ताकि जो धोखा मेरे साथ हुआ है, वह दूसरे के साथ ना हो सके. अब मुझे प्रेस से अपने खोये मान सम्मान और जमा राशि मय ब्याज के चाहिये, क्योंकि पीपुल्स समाचार में जो गुटबाजी देखने को मिली है वह शायद मीडिया जगत में और कहीं नहीं होगी.
वरुण त्रिवेदी
शाजापुर
9425084251












abhishek
June 29, 2011 at 7:31 am
sahi kaha aap ney gwaliour ke sab akhbaar chor hain bpn times ne bhi aisa hi kara pahley agra ke teen logo ka use karkey unsey agra ki situtation pata kar li aur jab kaam nikal gaya tab nidhar ko sampaadak bana diya vaha par bhi vakeel singh baghel aur anoop kharey jo iska ca hain bhi bhi logo ko chutiya bana kar paisey jama kar leta hain.aur maalik joki eletrate hain vo sahi aur galat aadmi mein farak nahi samajh paata .
MANINDER
June 29, 2011 at 8:54 am
श्रीमान वरुण दिवेदी जी आप पेशेवर नहीं धन्देबाज पत्रकार हैं क्योंकि यदि आप पेशेवर पत्रकार होते तो कभीभी ना तो लाखो रुपैये की सिक्यूरिटी देते और ना ही दफ्तर का किराया मोडेम और पता नहीं कितने लटरम पटरम खर्चो का रोना भड़ास पर बयाँ कर अपने घडयाली आंसू बहाते.अपने लिखा है की जो धोखा मेरे साथ हुआ है, वह दूसरे के साथ ना हो सके. लकिन जब तक तुम्हारे जैसे धन्देबाज पत्रकार तथा दुसरे मिलती जुलती फितरत के लोग एजेंट कम पत्रकाररीता की आड़ में अपनी दुकान दरी ज़माने का प्रयास करेगे तो पीपुल्स समाचार हों या कोई और मिलती जुलती दुकान तुम लोग खता तो खायेंगे ही ? रही बात अपने खोये मान सम्मान और जमा राशि मय ब्याज तो लड़ते रहो कानूनी जंग और अपने बचो को विरासत में दे जाना क्यों की सालो तक इसका फेसला नहीं होगा . मुफ्त लकिन नेक सलाह लाखो खर्च कर टटपूंजिया पत्रकारिता की जगह अपनी कलम में इतना दम पैदा करो की बड़े बड़े अख़बार तुम्हे मोटी तनख्वाह की आफर दे क्यों की कहा भी है की ………खुदी को कर बुलंद इतना की हर तदबीर से पहले वो पूछे की वरुण दिवादी तेरी रजा क्या है
rajesh joshi
July 8, 2011 at 3:56 pm
varun ji aap ko salah dene wale dalle se punchai ki wo talented hai to wo yaha tukadai kyo tod raha hai . tel malish kar bhand giri kar raha hai yeh .
rajesh joshi
July 17, 2011 at 8:10 am
kyo rey maninder tu kub se salahskar bun gaya. managment k talve chatne vale bhand tere aukat se sabhi parichit h. bajaj ko takla shakal ruchi ko randia v suresh vijayvargi ko 420 khne vale aaj tu naye patrakar ko chamaka raha h . tere jesay logo k karan aaj media badnam h . jyda chtra mat bun dal se kha ley.