: सुशील शर्मा बने नए आरई : पीपुल्स समाचार, भोपाल से आरई रत्नाकर त्रिपाठी ने इस्तीफा दे दिया है. वे कहां जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. अब प्रिंट लाइन से उनका नाम हट गया है. उनकी जगह प्रिंट लाइन में सुशील शर्मा का नाम जा रहा है. यानी सुशील शर्मा अब उनकी जागह आरई बना दिए गए हैं. पिछले एक सप्ताह में ऐसा दूसरी बार हुआ है. चार दिन पहले तक प्रिंट लाइन में सुशील शर्मा का नाम ही जा रहा था.
बताया जा रहा है कि प्रबंधन से तारतम्य न बैठ पाने के चलते रत्नाकर ने कुछ दिनों पहले इस्तीफा दे दिया था. संस्थान से चले गए थे. आनन-फानन में उनकी जगह सुशील शर्मा को आरई बनाकर प्रिंट लाइन में उनका नाम भेजा जाने लगा. इधर, प्रबंधन रत्नाकर को मनाने की कोशिश भी करता रहा. प्रबंधन के आश्वासन के बाद रत्नाकर फिर से पीपुल्स समाचार, भोपाल के आरई के पद पर ज्वाइन कर लिया. परन्तु पुन: किसी बात पर प्रबंधन से अनबन हो जाने के बाद उन्होंने दोबारा अपना इस्तीफा दे दिया.
बताया जा रहा है कि पीपुल्स समाचार में हालात ठीक नहीं चल रहे है. अखबार के इंदौर, जबलपुर, ग्वालिय एवं भोपाल के प्रोडक्शन, सर्कुलेशन, विज्ञापन विभाग के लोगों की सेलरी होल्ड कर दी गई है. एक दिन पूर्व सिर्फ एडिटोरियल विभाग के लोगों की सेलरी दी गई है. इससे कर्मचारी काफी नाराज हैं.












atul
December 14, 2010 at 7:54 am
andha bate (AB) revrei aur cheen-cheen kar de. yah kahawat proples me 1000 percent sahi hai. AB revri bat raha hai, mil use he rahi jo uska aadesh sir mathe le apna dimag ghar rakh kar aaye. geet-manoj-praveen-sushil iska example hai.
कमल शर्मा
December 14, 2010 at 8:05 am
अपने दूसरे बिजनैस के लिए आए इस तरह के अखबारों की हालत यही होती है। सेलेरी होल्ड कर दी या दे दी गई, यहां यही होता है। पता नहीं लोग क्या सोचकर इस तरह के दौ कौड़ी के अखबारों में जाते हैं और टिके रहते हैं। सेलेरी नहीं मिल रही तो पहले ही क्यों नहीं निकल जाते।
kapil sharma
December 14, 2010 at 11:55 am
ये तो सब जानते है की रत्नाकर त्रिपाठी को जान्भुझ्कर परेशान किया जा रहा था. अवधेश बजाज यहाँ अपने चमचे को स्थापित करना चाहते थे. हुआ भी यही. पत्रकारिता छोड़कर सिर्फ पैर चुने वाले ही तो अब संपादक बनेगे
ग्वालियर वाला
December 15, 2010 at 5:48 am
पीपुल्स की पार्टी को लेकर फसाद
समाचार पत्र की वर्षगांठ होने पर क्लाइंट्स को पार्टी देने की परंपरा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ग्वालियर में एक साल पूरा होने पर पीपुल्स के प्रबंधन ने जो पार्टी दी, उसे लेकर खासा बवाल मचा हुआ है। पार्टी में न्योते गए लोगों ने तो पीपुल्स की मार्केटिंग टीम को यह कहते हुए हडक़ा दिया है कि खबरदार, भविष्य में जो विज्ञापन के लिए हमारे संस्थान की सीढ़ी चढ़े। इनका पारा क्यों चढ़ा, इसकी अलग ही कहानी है। शहर के एक प्रसिद्ध होटल में पार्टी रखी गई थी। ग्वालियर में सर्दी भी खूब पड़ रही है, इसलिए पार्टी में शराब की बोतलें भी खूब खुलीं और खुले आसमान तले शहर के गणमान्य लोगों ने इस सुरा का आनंद भी खूब लिया। यहां तक तो सब ठीक था पर बात बिगड़ी इस पार्टी के सीन पीपुल्स अखबार की आईएम ग्वालियर पुल आउट में छपने के बाद। इस पार्टी का आनंद उठाने के लिए एकत्र हुए लोगों की टेबल पर शराब से सजे गिलास साफ नजर आ रहे थे और यही फोटो सार्वजनिक हो गए। इसके साथ ही यह बात भी सार्वजनिक हो गई कि देखो यह हैं शहर के सफेदपोश। जो सब के सामने शराब से परहेज करते हैं और यहां पार्टी में खुले आम चीयर्स कर रहे हैं। बात 11 दिसंबर की रात हुई पार्टी की है। मजेदार बात तो यह रही कि पार्टी में मौजूद अखबार की सीईओ रुचि विजयवर्गीय का फोटो तो छपा पर उनके फोटो के नीचे से कैप्शन गायब था। फिर क्या था, भोपाल में बैठे समूह संपादक अवधेश बजाज ने ग्वालियर पीपुल्स के संपादक मनोज वर्मा से लेकर आईएम ग्वालियर के प्रभारी सुदर्शन सोनी तक की कड़ी क्लास ले डाली। इन दोनों को अब सांप सूंघा हुआ है क्योंकि जिन गणमान्य लोगों के फोटो रंगीन पानी वाले गिलास के साथ छपे हैं, उन्होंने साफ कह दिया है कि आपने हमारा सार्वजनिक रूप से जो करना था, वो कर लिया। अब भविष्य में हमसे विज्ञापन की कतई आस नहीं रखना। वैसे भी ग्वालियर में पीपुल्स की पकड़ बन नहीं रही है और जो लोग इससे जुड़े थे, वे इस कहानी के बाद पीपुल्स से दूर होने जा रहे हैं। भोपाल में बैठे पीपुल्स के प्रबंधन के पास जो खबर है, उसके मुताबिक मनोज वर्मा से अखबार संभल नहीं रहा है। क्योंकि उनके पास कोई अधिकार ही नहीं हैं। वे न तो किसी को डांट सकते हैं, न ही किसी के खिलाफ एक्शन ले सकते हैं। इसका फायदा वे लोग उठा रहे हैं जो संपादक को अंगूठा बताते हुए सीधे समूह संपादक को ग्वालियर एडीशन की चुगली कर रहे हैं। कहा जा रहा है इस एपीसोड के बाद कुछ लोगों पर गाज गिरने वाली है इसमें ग्वालियर संपादक का हुक्का भरने वाले भी शामिल हैं।
Shubhechu
December 15, 2010 at 7:14 am
YEHI GATI HAI :
Udhav,Karman ki gati Nyari,
Ganaga Jaman ka jal mitho hai,
Sagar rahat hai khari,
Udhav karman ki gati nyari,
Murakh raja raj karat hai,
Pandit bane bhikhari
Udhav karman ki gati nyari
Rajkumar Jain
December 15, 2010 at 7:34 am
जो हो रहा है अच्छा हो रहा है
[email protected]
Syed Abdal husain (advocate)
December 16, 2010 at 6:30 pm
यह कोई नई बात नहीं है सदैव ही पत्रकारों का शोषण प्रैस मालिकों द्वारा किया जाता रहा है जहां तक सम्पादक या पत्रकारों का प्रश्र है जब तक वह नये ग्रुप में नहीं जावेंगे तब तक उनका विकास सम्भव नहीं है । जो हो रहा है अच्छा हो रहा है
सम्पादक ,अकबर टाइम्स भोपाल