खबर है कि अमर उजाला, आगरा के स्थानीय संपादक पुष्पेंद्र शर्मा का तबादला अमर उजाला, गाजियाबाद के संपादक पद पर कर दिया गया है और अमर उजाला, गाजियाबाद के संपादक राजेंद्र त्रिपाठी को आगरा एडिशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुष्पेंद्र शर्मा के आगरा से जाने की चर्चाएं शशिशेखर के जाने के बाद से ही शुरू हो गईं थी लेकिन हर बार यह चर्चा झूठी साबित हुई। अब उनका तबादला गाजियाबाद किया गया है।
राजेंद्र त्रिपाठी अमर उजाला में काफी लंबे समय से हैं। शशि शेखर के कार्यकाल में उनका कद थोड़ा कम हो गया था। अब एक बार फिर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजेंद्र त्रिपाठी अमर उजाला के निदेशक अतुल माहेश्वरी के काफी करीबी माने जाते हैं और उनके विश्वसनीय लोगों में से हैं। वे लंबे समय तक अमर उजाला, मेरठ के सिटी चीफ रहे हैं। वे उन पुराने लोगों में से हैं जो अमर उजाला के कई दशकों की विकास यात्रा के गवाह हैं। माना जा रहा है कि शशि शेखर के करीबी होने के कारण पुष्पेंद्र शर्मा को आगरा से हटाकर गाजियाबाद भेजा गया है। हालांकि पुष्पेंद्र भी अमर उजाला के पुराने और विश्वसनीय लोगों में से हैं। वे भी लंबे समय तक अमर उजाला, मेरठ में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे हैं।












supriya
January 16, 2010 at 2:15 pm
लेकिन यशवंत जी गाजियाबाद से अमर उजाला छपता कहां है. पुष्पेंद्र जी को ब्यूरो चीफ बनाकर भेजा गया है न कि स्थानीय संपादक। उनके अभिन्न मित्र संतोष कुमार सिंह उर्फ अन्नू भइया भी अपने घर वाराणसी जा रहे हैं, उनका नोटिस पीरिएड खत्म हो गया है और उनके वाराणसी हिंदुस्तान में जाने की अपुष्ट खबरें हैं। हालांकि हिंदुस्तान वाराणसी में यह अटकलबाजियां करार दी जा रही हैं।
radhe
January 18, 2010 at 10:55 am
supriya ji Santosh kr singh pushpendra ji ke mitra nahi hain balki chamche hain. aap chamche ko mitra na banaie. kahan pushpendra ji aur kahan bail (ox) santosh.
Ab chamcho ke din lad gaye hain. JIsko sudh ek line nahi likhne aata hai oh bhi journalism main hai. yeh kum aascharya nahi hai.
shashank
January 18, 2010 at 2:04 pm
राधे जी से सहमति है मेरी। मैंने संतोष जी के साथ सहारा में काम किया था। आश्चर्य होता था कि इस तरह का अनपढ़ आदमी भी पत्रकार हो सकता है लेकिन सुप्रिया जी की बात भी ठीक है। पुष्पेंद्र जी ने अपने मित्र से ज्यादा अहमियत दी इन्हें और हमें मथुरा कार्यालय में होने पर भी प्रताड़ित किया। इन्हें अमर उजाला के बाद कहीं नौकरी नहीं मिलेगी। पहले दिन नए संपादक तक इनकी कहानी पहुंच चुकी है। वैसे नोटिस पीरिएड पहले ही खत्म हो चुका है। इनका एक और ..गुण.. है जो पुष्पेंद्र जी को रास आता था पर यहां उसकी चर्चा नहीं करूंगा वरना यशवंत भैया नाराज होंगे।
Hemant Tyagi, journalist, ghaziabad
January 24, 2010 at 3:59 pm
Amar ujala mei chal rahi ugahi pushpendra sharma ke aane se band ho jaayegi. thanks to management.