स्पेनिश भाषा के प्रख्यात लेखक और राष्ट्रपति का चुनाव लड़ चुके पेरू के मारिओ वर्गास लोसा को साहित्य के क्षेत्र में 2010 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. स्वीडिस अकादमी ने गुरुवार को घोषणा की कि 74 वर्षीय लेखक को सत्ता के ढांचे के चित्रण और उसके प्रति व्यक्तियों के प्रतिरोध, विद्रोह और पराजय की प्रभावशाली तस्वीर पेश करने के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है.
लोसा ने कन्वर्शेसन इन कैथेड्रल और द ग्रीन हाऊस सहित 30 से अधिक उपन्यास, नाटक और लेख लिखे हैं. 1995 में उन्हें विश्व में स्पेनिश भाषा के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार सवेन्तेस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. साठ के दशक में अपने उपन्यास द टाइम ऑफ द हीरो से सुर्खियों में आए लोसा 1982 में कोलंबियाई लेखक गैब्रिल गार्सिया मारक्वेज को नोबेल से सम्मानित किये जाने के बाद यह पुरस्कार पाने वाले पहले दक्षिण अमेरिकी हैं.
इससे पहले के छह साल में अकादमी पुरस्कार यूरोप के पांच नागरिकों और एक तुर्की के नागरिक को दिया गया था. इससे आलोचना होने लगी थी कि यह यूरोपीय केन्द्रित हो गया है. पेरु के अरेक्विपा में जन्मे लोसा का परवरिश माता-पिता में तलाक होने के बाद दादा के यहां बोलिविया में हुई. 1946 में उनका परिवार पेरू लौट आया और बाद में उन्होंने सैनिक स्कूल में दाखिला ले लिया. लोसा ने लीमा और मेड्रिड में साहित्य और कानून की पढ़ाई की. 1959 में वे पेरिस चले गए जहां उन्होंने भाषा शिक्षक और एएफपी संवाद समिति और फ्रांस के सरकारी टेलीविजन में पत्रकार के तौर पर काम किया. साभार : जनसत्ता











