Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

प्रमोद जोशी-विनोद वार्ष्णेय में क्या हुआ?

कनबतियां 

इन दिनों जिसे देखो वही हिंदुस्तान, दिल्ली के स्थानीय संपादक प्रमोद जोशी और इसी अखबार के नेशनल ब्यूरो के हेड विनोद वार्ष्णेय के बीच हुई तू-तू-मैं-मैं को चटखारे लेकर एक दूसरे से बांटता फिर रहा है। दरअसल यह तू-तू-मैं-मैं अगर बंद कमरे में हुई होती तो किसी को कानोंकान खबर न हुई होती। पर यह सब हुआ सरेआम। सरेआम का मतलब आम हिंदुस्तानियों के सामने। पिछले दिनों दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली की तरफ से दो दिनी वर्कशाप इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया। इस वर्कशाप का एजेंडा संपादकीय कामधाम और आपसी तालमेल को बेहतर बनाना था लेकिन वर्कशाप का खात्मा होते-होते एक नई तरह की तनातनी पैदा हो गई।

कनबतियां 

इन दिनों जिसे देखो वही हिंदुस्तान, दिल्ली के स्थानीय संपादक प्रमोद जोशी और इसी अखबार के नेशनल ब्यूरो के हेड विनोद वार्ष्णेय के बीच हुई तू-तू-मैं-मैं को चटखारे लेकर एक दूसरे से बांटता फिर रहा है। दरअसल यह तू-तू-मैं-मैं अगर बंद कमरे में हुई होती तो किसी को कानोंकान खबर न हुई होती। पर यह सब हुआ सरेआम। सरेआम का मतलब आम हिंदुस्तानियों के सामने। पिछले दिनों दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली की तरफ से दो दिनी वर्कशाप इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया। इस वर्कशाप का एजेंडा संपादकीय कामधाम और आपसी तालमेल को बेहतर बनाना था लेकिन वर्कशाप का खात्मा होते-होते एक नई तरह की तनातनी पैदा हो गई।

जो विवाद व गुटबाजी अब तक अंदरखाने सुलग रही थी, इस वर्कशाप में उसने दिल से होते हुए जुबान के सहारे बाहर का रास्ता अख्तियार कर लिया। मीटिंग में मौजूद सूत्रों का कहना है कि ब्यूरो के रिपोर्टरों की कापियों के घटिया संपादन को लेकर शुरू हुआ सवाल-जवाब एक दूसरे की निष्ठा जांचने-परखने तक जा पहुंची और देखते ही देखते इस्तीफा लेने-देने की पेशकश होने लगी। सूत्रों के मुताबिक स्थानीय संपादक प्रमोद जोशी और नेशनल ब्यूरो के चीफ विनोद वार्ष्णेय के बीच गरमागरमी व आरोप-प्रत्यारोप को देख आम हिंदुस्तानी भौचक नहीं हुए। वजह, सबको इस बात का अंदाजा था कि जो गुटबाजी व खेमेबंदी हिंदुस्तान में है, वो कभी न कभी यह शक्ल ले सकती है।

वर्कशाप के पहले दिन हिंदुस्तान की प्रमुख संपादक मृणाल पांडेय मौजूद थीं सो सबकुछ शांत-शांत रहा। दूसरे दिन वो नहीं थीं। सूत्रों का कहना है कि दूसरे दिन वर्कशाप में कामधाम को लेकर सवाल जवाब के क्रम में विवाद शुरू होने से वर्कशाप में सन्नाटा पसर गया। प्रमोद जोशी उठकर जाने लगे। संजय अभिज्ञान ने बीच बचाव किया। उन्हें वापस ले आए। बाद में अगले दिन बंद कमरे में  प्रमोद जोशी और विनोद वार्ष्णेय ने विवाद खत्म करने के लिए एक दूसरे के प्रति मुस्कान का भाव चेहरे पर ले आए।

उधर, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि दरअसल वर्कशाप के पहले दिन प्रमुख संपादक मृणाल पांडे ने अपने संबोधन में सभी हिंदुस्तानियों से अखबार को बेहतर बनाने को लेकर अपनी बात खुलकर रखने और बेहिचक सुझाव देने की अपील की थी। इसके बाद दूसरे दिन जब वो वर्कशाप में मौजूद नहीं थीं,  कई लोगों ने हिंदुस्तान में कामकाज को लेकर कई कड़वी सच्चाइयों को खुलकर बोल गए। ये बात वहां मौजूद बेहद वरिष्ठ लोगों को बुरी लगी और खुद पर आंच आती देख इस तरह की बहस पर ही सवाल खड़े करने लगे। इसी के बाद एक स्वस्थ बहस ने तनातनी का रूप ले लिया।

(इस कनबतियां पर आप अपनी राय या प्रतिवाद [email protected] पर मेल कर सकते हैं)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...