वरिष्ठ पत्रकार डॉ. महर उद्दीन को फर्जी मामले में फंसा कर जेल भेजने पर भारतीय प्रेस परिशद ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव और मुजफ्फरनगर के एसपी को 19 अगस्त 2011 को नई दिल्ली तलब किया है। उल्लेखनीय है कि कांधला के गांव दिसाला की एक युवती अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई थी। इस सिलसिले में कांधला पुलिस ने प्रेमी युवक के माता-पिता और भाइयों को पकड़ कर जेल भिजवा दिया था।
प्रेमी युवक डॉ. महर उदृदीन खां के भाई का लड़का था। क्षेत्रीय राजनीतिक दबाव के चलते 5 अप्रैल 2008 को कांधला पुलिस डा. महर उद्दीन को रात में पकड़ कर ले गई और रात भर थाने में यातनाएं देने के बाद अगले दिन उन्हें जेल भेज दिया था। पुलिस ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने प्रमी युगल को अपने घर में शरण दी थी। इस आरोप के समर्थन में पुलिस ने दो लोगों के मनगढंत बयान भी लिख लिए थे। डॉ. महर उद्दीन को पूरे एक महीने बाद जमानत मिली थी।
पत्रकार जगत को जब उन के जेल जाने का पता चला तो अखबारों में इस का जम कर विरोध किया गया। डीयूजे ने उत्तर प्रदेश निवास पर प्रदर्शन किया तथा कई सांसदों ने राज्य सभा में यह मामला उठाया था। इस पर भारतीय प्रेस परिषद ने स्वतः संज्ञान ले कर इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। पिछली सुनवाई पर दोनों गवाहों ने प्रेस परिषद को शपथ पत्र दे कर बताया था कि पुलिस ने कभी उनका कोई बयान नहीं लिया और न ही उन्होंने उस प्रेमी युगल को कभी कहीं देखा था। इस शपथ पत्र के बाद अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं।












Tarkeshwar Mishra
August 3, 2011 at 8:00 am
प्रेस परिषद के साहसिक कार्य को नमन एवं हार्दिक बधाई.
asif mirza pioneer
November 6, 2011 at 12:34 am
aksar nirbhik patrkaro ko sajis ke tahat fasa diya jata h press parisad ki karwahi se sabak milega