रेवाड़ी। प्रदेश में पिछले कई दिनों से फर्जी पत्रकारों की मानो बाढ़ आ गई है, क्योंकि हर तीसरे वाहन पर प्रेस लिखा देखा जा सकता है। इनमें कई पत्रकार तो ऐसे हैं, जो कुछ दिन किसी अखबार से जुड़ कर दूर हो गए, लेकिन वे गांवों में जा कर लोगों को डरा-धमकाकर अपने आपको किसी राष्ट्रीय अखबार का पत्रकार बताते हैं तथा उसमें खबर छापने की धमकी देकर लोगों से पैसे ऐंठ लाते हैं।
जब इस बात का पता ठगे हुए लोगों को चलता है तो ये फर्जी पत्रकार उन लोगों से बचते फिरते हैं। इन फर्जी पत्रकारों ने किसी न किसी ऐसे साप्ताहिक अखबार का पहचान पत्र बनवा रखा है जिसको कोई जानता तक नहीं। सरकारी हो या गैर-सरकारी, किसी भी विभाग में यह लोग इस कदर सूट-बूट में जाते हैं कि हर कोई इनके चंगुल में फंस जाता है, और ये लोग इन्हें अपना शिकार बनाए बगैर नहीं छोड़ते है। जैसे ही काम बन जाता है ये लोग वहां से रफू-चक्कर हो जाते है, और गलती से भी दुबारा उस जगह से नहीं गुजरते। प्रेस लिखी गाडिय़ों को देखकर पुलिस भी इन लोगों को सैल्यूट मारती है और असली पत्रकार से उलझ जाती है, क्योंकि इनकी चमक-दमक को देखकर पुलिस कर्मचारी भी असली और नकली की पहचान करने में चूक कर जाता है। ये फर्जी पत्रकार दिखने में वीआईपी से कम नहीं लगते, इसी बात का फायदा उठाकर ये प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे है।
लेखक महेन्द्र भारती हरियाणा में पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.












ऋतुपर्ण दवे
September 21, 2011 at 12:23 pm
अरे भइया इसमें बुरा क्या है ……???? लगता है आपने एक पुराना गाना नहीं सुना है क्या “रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलियुग आएगा, हंस चुगेगा दाना चुग्गा कौआ मोती खाएगा ” तो भइया .जमाना ऐसे ही कौओं का है। लेकिन हां एक बात याद रखना कौआ की पहचान काहे से होती है…..? जब वो चोंच मारता है। अब इतना तो आप जानते ही होगे कि कौआ कहां चोंच मारता है….? अपने इलाके के लोगों से कहें कि ऐसे ही पहचाने इन कौओं को ।
Neeraj mahere
September 21, 2011 at 12:54 pm
Are bhai ji ye badi khabar nahin hai . Aapke yahan to ek do darjan honge desh ki rajdhani me to saekdon farji patrkaar maje lut rahe hain .
sonu kumar
December 9, 2011 at 2:44 pm
panipat mai bhiaisa hi hi rha hai