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दुख-दर्द

बच सकती थी युवा अमित की जान बशर्ते…

युवा अमित चौहान को पहली बार दिल का दौरा पड़ा और गुजर गए. अमित की आठ महीने पहले ही शादी हुई थी. वे अपने मां-पिता के इकलौते पुत्र थे. अमित ने 2 साल पहले अपनी एमबीए की पढाई भी पूरी कर ली थी मगर अच्छी नौकरी नहीं मिल पाने के कारण वे ए2जेड न्यूज चैनल में बतौर रिपोर्टर व कैमरामैन काम कर रहे थे. देहरादून में एटूजेड के कैमरामैन अमित चौहान की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत होने से हर कोई सदमें में है.

युवा अमित चौहान को पहली बार दिल का दौरा पड़ा और गुजर गए. अमित की आठ महीने पहले ही शादी हुई थी. वे अपने मां-पिता के इकलौते पुत्र थे. अमित ने 2 साल पहले अपनी एमबीए की पढाई भी पूरी कर ली थी मगर अच्छी नौकरी नहीं मिल पाने के कारण वे ए2जेड न्यूज चैनल में बतौर रिपोर्टर व कैमरामैन काम कर रहे थे. देहरादून में एटूजेड के कैमरामैन अमित चौहान की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत होने से हर कोई सदमें में है.

शनिवार की सुबह तक अमित बिल्कुल ठीक ठाक थे. 11 बजे रायपुर में मुख्यमंत्री निशंक के कार्यक्रम की कवरेज कर रहे थे. अचानक कवरेज करते-करते अमित बेहोश होकर मुख्यमंत्री के पास ही गिर पड़े. मगर मुख्यमंत्री ने इस घटना को हल्के में लिया और नजरअंदाज कर दिया. तमाम मीडियाकर्मीयों ने अमित को होश में लाने की कोशिश की तो थोड़ी देर में अमित को होश आ गया मगर फिर चंद सेकण्डों बाद ही बेहोश होकर गिर पड़े.

वहां मौजूद लोगों ने मिर्गी का दौरा समझकर अपने अपने उपचार किए. मौके पर पहुंचे डॉक्टरों ने भी नब्ज टटोल कर मिर्गी आने की बात कहकर तुरंत हॉस्पिटल के लिए रैफर करने को कहा. मगर बीच रास्ते में ही अमित ने दम तोड़ दिया. पूरे मामले के बाद जहां मीडिया वालों का तांता अस्पताल के बाहर लगा रहा वहीं सभी ने अमित की मौत पर शोक संवेदना जताई. उधर मुख्यमंत्री ने अमित की मौत पर दुख जताया और मृतक आश्रितों को दो लाख रुपये देने का ऐलान किया.

ऐसा होता तो अमित बच सकता था : मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ना तो एंबुलेंस की कोई सुविधा थी और ना ही चिकित्सकों की. अमित को पुलिस ने अपनी ही गाड़ी में डाला और हॉस्पिटल ले गए. अगर अमित को तुरंत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल पाता तो हो सकता था अमित बच जाता. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में सचल वाहन था मगर उसमें ऑक्सीजन नहीं थी जिसके कारण अमित को ऑक्सीजन भी नहीं दी जा सकी.

अमित चौहान के बेहोशी को सभी ने मिर्गी का दौरा समझा. यहां तक की मौके पर आए चिकित्सक भी नौसिखियों की तरह बातें करते रहे और उन्होंने भी मिर्गी का ही अंदेशा जताया जबकि अमित को दिल का दौरा पड़ा था और लगातार तीन दिल के दौरे पड़े. अगर उसकी बीमारी को पहचान लिया जाता तो अमित बच सकता था. आधे घंटे तक अमित का घटनास्थल पर ही प्राथमिक उपचार होता रहा अगर उसको सीधे अस्पताल ले जाया जाता तो हो सकता था अमित बच सकता था.

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0 Comments

  1. Gautam Singh

    January 23, 2011 at 11:25 am

    mukhyamantri ka program hone ke bavjud vaha par koi bhi ambulance nahi thi agar koi isse bhi bada hadsa ho jata to??????????

    agar CM ki tabiyat kharab ho jati to kya unke sath bhi yahi hota???

    isse pata chalta hai ki hamara parshashan kitna laparwah hai

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