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बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्‍मान नचिकेता और सुरेन्‍द्र को

पटना : हिन्दी साहित्य का बहुचर्चित ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ वर्ष 2008 एवं 2009 के लिए क्रमश: प्रसिद्ध गीताकर नचिकेता तथा हिन्दी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर सुरेन्द्र स्निग्ध को दिया गया है। इस सम्मान के चयन के लिए निर्णायक मंडल के सदस्य थे- वरिष्ठ हिन्दी आलोचक डॉ. विजेन्द्र नारायण सिंह एवं डॉ. खगेन्द्र ठाकुर तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि अरूण कमल। यह सम्मान 26 दिसम्बर, 2010 को माध्यमिक शिक्षक संघ सभागार, जमाल रोड, पटना में वरिष्ठ गीतकार/कवि नरेश सक्सेना तथा वरिष्ठ हिन्दी कवि आलोक धन्वा के हाथों प्रदान किया जाएगा।

पटना : हिन्दी साहित्य का बहुचर्चित ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ वर्ष 2008 एवं 2009 के लिए क्रमश: प्रसिद्ध गीताकर नचिकेता तथा हिन्दी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर सुरेन्द्र स्निग्ध को दिया गया है। इस सम्मान के चयन के लिए निर्णायक मंडल के सदस्य थे- वरिष्ठ हिन्दी आलोचक डॉ. विजेन्द्र नारायण सिंह एवं डॉ. खगेन्द्र ठाकुर तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि अरूण कमल। यह सम्मान 26 दिसम्बर, 2010 को माध्यमिक शिक्षक संघ सभागार, जमाल रोड, पटना में वरिष्ठ गीतकार/कवि नरेश सक्सेना तथा वरिष्ठ हिन्दी कवि आलोक धन्वा के हाथों प्रदान किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन सुविख्यात समालोचक डॉ. विजेन्द्र नारायण सिंह करेंगे तथा विशिष्ट अतिथि होंगे प्रसिद्ध आलोचक डॉ. रविभूषण। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक डॉ. खगेन्द्र ठाकुर द्वारा की जायेगी। यह सम्मान-योजना आरा निवासी प्रेमचंदकालीन साहित्यकार बनारसी प्रसाद भोजपुरी की स्मृति में वर्ष 1989 से शुरू की गयी है। जिसका उद्देश्य बिहार की सम्भावनाशील तथा महत्वपूर्ण रचनाशीलता को सम्मानित करना है। इसके अन्तर्गत प्रतिवर्ष साहित्य की किसी एक विधा में उल्लेखनीय योगदान के लिए किसी एक रचनाकार को ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ से सम्मानित किया जाता है, जिसमें सम्मान-पत्र के अतिरिक्त ग्यारह सौ रुपये की राशि एवं प्रतीक चिह्न शामिल है।

अब तक यह सम्मान वर्ष 1989 में पत्रकारिता के क्षेत्र में अनिल चमड़िया तथा वेद प्रकाश वाजपेयी को संयुक्त रूप से, 1990 में कहानी में विजेन्द्र अनिल को, 1991 में कविता में आलोक धन्वा को, 1992 में उपन्यास लेखन के लिए मनमोहन पाठक को, 1993 में कहानी में सुरेश कांटक को, 1994 में कविता के क्षेत्र में मदन कश्यप को, 1995 में कहानी चन्द्रकिशोर जायसवाल को, 1996 में कविता में ज्ञानेन्द्रपति को, 1997 में कहानी में अवधेश प्रीत को, 1998 में कविता में विमल कुमार को, 1999 में कहानी में हेमन्त को, 2000 में कविता में बद्रीनारायण को, 2001 में कहानी में हृषिकेश सुलभ को, 2002 में कविता में निलय उपाध्याय को, 2003 में कहानी में शैवाल को, 2004 में कविता में निर्मला पुतुल को, 2005 में कहानी में देवेन्द्र सिंह को, 2006 में कविता में अनीता वर्मा तथा 2007 में जयनंदन को यह सम्‍मान प्रदान किया जा चुका है।

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