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बिहार में ईमानदार पत्रकारिता मतलब जेल!

क्या बिहार की पत्रकारिता को घुन लग गया है? रूपम पाठक को इन्साफ के लिए जब मीडिया का सहारा चाहिए था तो सारे मीडिया हॉउस सत्ता सेवा में लगे हुए थे. क्या हिन्दुस्तान क्या जागरण, आज हो या सहारा या फिर प्रभात खबर या फिर अन्य अखबार, सभी के पत्रकार से लेकर सम्पादक तक नीतीश सेवा में लगे हुए थे तो इन्साफ की आवाज में रूपम का साथ देने का साहस किया नवलेश पाठक ने. जब रूपम ने इन्साफ की लड़ाई का आखिरी हथियार चला दिया तो परिणाम स्वरुप नवलेश पाठक को सरकार के नुमाइंदे अपहरण कर के जेल भेज देते हैं और बिहार के बड़े अख़बारों के सम्पादक हड्डी के लिए नीतीश दरबार में कूँ कूँ करते हुए नजर आते हैं. अगर बिहार की पत्रकारिता दहाड़ नहीं सकती तो भौंकना भी भूल चुकी है.

क्या बिहार की पत्रकारिता को घुन लग गया है? रूपम पाठक को इन्साफ के लिए जब मीडिया का सहारा चाहिए था तो सारे मीडिया हॉउस सत्ता सेवा में लगे हुए थे. क्या हिन्दुस्तान क्या जागरण, आज हो या सहारा या फिर प्रभात खबर या फिर अन्य अखबार, सभी के पत्रकार से लेकर सम्पादक तक नीतीश सेवा में लगे हुए थे तो इन्साफ की आवाज में रूपम का साथ देने का साहस किया नवलेश पाठक ने. जब रूपम ने इन्साफ की लड़ाई का आखिरी हथियार चला दिया तो परिणाम स्वरुप नवलेश पाठक को सरकार के नुमाइंदे अपहरण कर के जेल भेज देते हैं और बिहार के बड़े अख़बारों के सम्पादक हड्डी के लिए नीतीश दरबार में कूँ कूँ करते हुए नजर आते हैं. अगर बिहार की पत्रकारिता दहाड़ नहीं सकती तो भौंकना भी भूल चुकी है.

पूर्णिया सदर से भाजपा विधायक राजकिशोर केशरी हत्याकांड मामले में पुलिस ने एक स्थानीय साप्ताहिक के संपादक नवलेश पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है. पुलिस ने उसे आज गिरफ्तार कर लिया. पूर्णिया रेंज के डीआईजी (पुलिस उपमहानिरीक्षक) अमित कुमार ने आज पत्रकारों को बताया कि दिवंगत विधायक के भतीजे सुदीप केसरी के बयान पर केहाट थाना में विधायक की हत्या की आरोपी रुपम पाठक, पत्रकार नवलेश पाठक और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कल रात प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी. डीआईजी ने कहा कि पुलिस ने नवलेश पाठक को उसके घर से गिरफ्तार किया और उससे कई घंटे तक पूछताछ भी की गयी है.

मालूम हो कि पाठक ‘क्विसलिंग’ नामक एक साप्ताहिक पत्रिका के संपादक हैं. इस पत्रिका में ही सबसे पहले आरोपी महिला रुपम पाठक की शिकायत पर उसकी यौन शोषण की रिपोर्ट कुछ ही महीने पहले छपी थी. पुलिस को उम्मीद है कि नवलेश पाठक की गिरफ्तारी से इस घटना के बारे में कुछ नयी बातें सामने आ सकती हैं. इधर, पाठक की पत्नी ने आरोप लगाया है कि पुलिस जांच में पक्षपात कर रही है. साथ ही उन्होंने आशंका जताई है कि पुलिस हिरासत में पत्रकार की जान को खतरा है. रूपम पाठक की आज कोर्ट में पेशी होनी थी. लेकिन, ख़राब स्वास्थ्य के कारण आज रूपम की पेशी अदालत में नहीं हो सकेगी. सो, आज रूपम को डाक्टरों की निगरानी कटिहार मेडिकल हास्पिटल एंड कालेज में ही रखा जायेगा. मालूम हो कि रूपम ने अपने बयान में कल ही विधायक की हत्या की बात स्वीकार ली थी.

लेखक रजनीश के झा का यह लिखा आर्यावर्त ब्लाग से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

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0 Comments

  1. मदन कुमार तिवारी

    January 11, 2011 at 5:18 am

    साले इन बडे पत्रकारों की अपनी बेटी – बहन के साथ जब बलात्कार होगा तब पता चलेगा। बिहार में सभी बडे अखबार के पत्रकार हिजडे और नपुंसक है। मेरी सलाह है की पत्रकारिता छोडकर भडुआगिरी करें , ज्यादा पैसा कमा लेंगें.

  2. ramveer kumawat

    January 9, 2011 at 8:44 pm

    aap sai kah rahy ho par meedia khud hi is ka karan h.meedia line may aaj aprroch say kam hota h, meedia murk loga ka aadha banta ja rha h.

  3. Akhilesh Upadhyaya

    January 9, 2011 at 1:55 pm

    very sad and disgusting

  4. NITESH RANJAN

    January 9, 2011 at 7:57 am

    नवलेश पाठक मुद्दे पर प्रदेश मुख्यालय में बैठे पत्रकार संघ से जुड़े पत्रकारों की चुप्पी शर्मनाक है . नवलेश जी की गलती बस इतनी ही थी कि उन्होंने दैनिक अख़बारों की पत्रकारिता से हटकर सच को सामने लाने का एक रिस्की प्रयास किया था . मैंने रिस्की शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया क्यूंकि पत्रकारिता के वर्त्तमान परिवेश में सच लिखना ही सबसे बड़ा गुनाह है . हाँ कई बड़े पत्रकार इसे पागलपन भी कहते हैं .

  5. sanjeev kumar

    January 7, 2011 at 4:37 pm

    पत्रकार कहके शर्मशार ना करें पेशे को, कुत्ते हैं यहां सब. सत्ता के दलाल हैं सब. पत्रकार तो सचमुच में नवलेश ही है………………….

  6. satish k singh

    January 7, 2011 at 10:06 am

    vknj.kh; jtuh”k th ]
    tks jkLrk :ie th us viuk;k mls fdlh Hkh n”kk esa lgh ugha Bgjk;k tk ldrk gSA ;fn okLro esa :ie th dk ”kks’k.k gks jgk Fkk rks mUgsa dkuwu dk lgkjk ysuk pkfg, FkkA dkuwu mudh iwjh lgk;rk djrkA :fpdk xgjks=k] tsfldk yky vkSj bu tSls dbZ vU; ekeyks eas dkuwu us HkqDrHkksxh dks U;k; fnyk;k gSA rks mUgsa Hkh mfpr ek/;e ls viuh yM+kbZ yM+uh pkfg, FkhA vc tc jktfd”kksj dsljh viuh ckr dgus dks thfor gh ughs gSa rc ge dSls eku ysa fd oks lp cksy jgh gSaA gks ldrk gS fd muds dU/ks dk lgkjk ys dj dksbZ O;fDr viuk fgr lk/kuk pkgrk gksA uhrh”k dqekj ds “kklu esa bruh mEehn rks dh gh tk ldrh gS fd ihfM+r dks U;k; feysA ,sls ekeyksa esa lp dk lkeus vkuk vR;ar vko”;d gksrk gSA ;fn vk[ka ds cnys vka[k dks gh iSekuk eku fy;k tk, rks fQj lwjt dk vkSfpR; lekIr gks tk,xkA vkSj blh fy, ;ga tkpa Hkh vko”;d gS fd vkf[kj fdl vk/kkj ij uoys”k ikBd us bl [k+cj dks bruh rjght nhA vkidks ;kn fnyk nwa fd :fpdk xgjks=k] tsfldk yky tSls ekeyksa esa i=dkjksa dks iqfyl us ugha mBk;k FkkA i=dkfjrk ds izfr vkidh Hkkouk dks eSa le> ik jgk gwa blhfy, vuwjks/k djrk gwa fd d`i;k i=dkjks ij ykNau yxkus ls igys flDds ds nksuks igywvksa fd tkap dj ysaA

  7. Abbott29Frankie

    February 22, 2011 at 10:49 am

    I guess that to get the business loans from banks you must present a great reason. Nevertheless, once I’ve got a collateral loan, just because I was willing to buy a house.

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