काबुल। अफगानिस्तान में भारतीय राजदूत जयंत प्रसाद की हत्या के लिए आईएसआई ने कथित रूप से एक अफगानी पत्रकार को करीब 7 करोड़ 50 लाख रूपए की पेशकश की थी। साथ ही बलूच नेता ब्रमदग बुगती की भी हत्या के लिए करीब 3 करोड़ 60 लाख रूपए की पेशकश की थी।
नवाब मोमंद नाम के पत्रकार ने एक साक्षात्कार में इसका खुलासा किया है। कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके मोमंद ने खुलासा किया कि आईएसआई ने काबुल के एक ज्वैलर के खाते में 3 करोड़ 60 लाख रूपए जमा कराए थे। यह राशि बुगती की हत्या के बाद मुझे दी जाने वाली थी। मोमंद का कहना है कि उसे मिशन पूरा करने के लिए एक माह का समय दिया गया था। हालांकि मोमंद यह मिशन पूरा नहीं कर पाए।
मोमंद का कहना है कि मेहमान की सुरक्षा करने की पठानों की परंपरा का निर्वाह करते हुए मैंने यह घृणित कार्य नहीं किया। मोमंद का कहना है कि मेरी अंतरआत्मा ने ऎसा करने की गवाही नहीं दी। इसके बाद मोमंद ने अफगानिस्तान के अधिकारियों को आईएसआई के इरादे की खबर दे दी।
मोमंद ने कहा कि जब वह आईएसआई के मिशन को कामयाब करने में नाकाम हो गया तो उसके परिवार को अगवा करने व जान से मारने की धमकी दी गई। धमकियों के चलते मेरे परिवार को काबुल छोड़कर भागना पड़ा। इसके बाद से मेरा परिवार दर दर की ठोकरें खा रहा है।अब हम एक जगह से दूसरी जगह भागने को मजबूर है। मोमंद का कहना है कि इस घटना के बाद मेरा पत्रकारिता का करियर भी बर्बाद हो गया। निर्माण कंपनी भी बर्बाद हो गई। साभार : पत्रिका












madan kumar tiwary
February 1, 2011 at 1:38 pm
बरखा , सिंघवी , प्रभु डुब मरो , डुब मरो । इस तरह के पत्रकारों की बदौलत हीं पत्रकारिता जिंदा है ।