अखंड हिमाचल को अब नहीं छाप रहा दैनिक भास्‍कर

हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर से छपने वाले अखबार अखंड हिमाचल, जो चंडीगढ़ में दैनिक भास्कर की प्रेस से छपवाया जा रहा था, को भास्कर प्रबंधन ने वित्तीय गड़बडि़यों के चलते छापना बंद कर दिया है. पता चला है कि अंखड हिमाचल के प्रबंधकों ने प्रिंटिग की एवज में जो चेक भास्कर को दिया वह बाउंस हो गया. बाद में भास्‍कर की ओर से रितेश बंसल को सुंदरनगर भेजा गया. तब जाकर वसूली हो पाई.

हालात यह रहे कि इन सब दिक्‍कतों के चलते अखबार छापने में भी मुश्किलें आईं. बाद में अंखड हिमाचल को मोहाली के जगजीत प्रेस में छपवाने का इंतजाम किया गया. हालांकि अखबार की प्रिंट लाइन में अभी भी भास्कर का नाम ही दिया जा रहा है, लेकिन सच यह है कि अखबार को भास्कर नहीं छाप रहा, लेकिन इस सारी कवायद में कंपनी की जो साख गिरी उससे जगजीत प्रेस में भी अखबार छपवाने में खासी दिक्कत पेश आ रही है. यही वजह है कि अब हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अखबार को नहीं भेजा जा रहा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

भास्‍कर की नई रीत : किसी परिजन के मरने पर पहले अवकाश लें फिर अर्थी को कंधा दें!

: डेस्‍क हेड के चलते इंसानियत शर्मसार : दैनिक भास्‍कर, जो अपने आप को भारत का सबसे बड़ा मीडिया समूह कहता है तथा अपने कर्मचारियों के लिए हमेशा कुछ न कुछ नए आयाम लेकर आता है, में हाल ही में एक घटना को लेकर जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार तो किया ही, मानवीयता को भी कहीं का नहीं छोड़ा.

बात दैनिक भास्‍कर, इंदौर के साल भर पहले लांच हुए खंडवा संस्‍करण की है. वहां पर कार्य करने वाले साथी के दादाजी का आकस्मिक निधन हो गया था. चूंकि वो साथी पहले से ही चार दिन के अवकाश पर था. अपने बीमार दादाजी का हालचाल लेने ही घर गया हुआ था. उसी दौरान उसके दादाजी का निधन हो गया. उसने फोन से डेस्‍क हेड को इस दुखद घटना से अवगत करा दिया. साथ ही अवकाश मांगते हुए कहा कि वह रस्‍म पगड़ी पूरी होने के बाद आएगा. परन्‍तु सातवें या आठवें दिन उस साथी के पास डेस्‍क हेड का एसएमएस आता है कि आप जब भी ऑफिस आएं अपने दादाजी का मृत्‍यु प्रमाण पत्र साथ में लाएं.

करीब 13 दिन बाद जब वह साथी ऑफिस आया और अपने दादाजी का मृत्‍यु प्रमाण पत्र डेस्‍क हेड के सामने पेश किया. इसके बाद साथी को एचआर डिपार्टमेंट में भेज दिया गया, परन्‍तु जब वेतन की बात आई तो उसका 11 दिन का वेतन काट दिया गया. जब उसने एचआर से बात की तो पता चला कि उसका अवकाश डेस्‍क हेड द्वारा अनुमोदित ही नहीं किया गया था. उधर, डेस्‍क हेड कहते हैं कि आपको पूर्व में सूचना देनी चाहिए थी.

अब यह कहां तक न्‍याय संगत है कि जिसके परिवार में कोई दुखद घटना हो जाए तो अर्थी छोड़कर पहले संस्‍थान में अवकाश की अर्जी देने जाएगा और उसके बाद अर्थी को कंधा देगा. इसके पहले भी खंडवा कार्यालय में दो-तीन साथी के परिवार में ऐसी आकस्मिक घटना घटित हुई थी, परन्‍तु उनसे आज तक मृत्‍यु प्रमाण पत्र नहीं मांगा गया. इस पूरे प्रकरण को लेकर स्‍थानीय समाचार संपादक चुप्‍पी साधे हुए हैं. क्‍या भविष्‍य में भास्‍कर कर्मियों को मृत्‍यु प्रमाण पत्र पेश करना होगा?

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

दैनिक भास्‍कर, धनबाद से चार लोगों ने दिया इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर, धनबाद से सूचना है कि चार लोगों ने संस्‍थान को बाय बोल दिया है. ये लोग स्‍टेट हेड ओम गौड़ के रवैये से परेशान थे. चीफ सब के रूप में कार्यरत अंजय श्रीवास्‍तव यहां से इस्‍तीफा देकर हिंदुस्‍तान, पटना चले गए हैं. दूसरे चीफ सब एडिटर विकाश शुक्‍ला भी यहां से इस्‍तीफा देकर यूपी लौट गए हैं. विकास यूपी के ही रहने वाले हैं. उन्‍होंने कहां ज्‍वाइन किया है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. सब एडिटर मान सिंह भी विकास की तरह अपने प्रदेश में लौट आए हैं. वे भी यूपी के रहने वाले हैं. खबर है कि इन्‍होंने हिंदुस्‍तान ज्‍वाइन किया है.

वहीं डीबी स्‍टार में सब एडिटर के पद पर कार्यरत दीपक वर्मा भी यहां से इस्‍तीफा दे दिया है. वे प्रभात खबर जमशेदपुर से भास्‍कर, धनबाद गए थे. उन्‍होंने धनबाद में एक स्‍थानीय अखबार ज्‍वाइन कर लिया है. बताया जा रहा है कि रांची में एनई रहे अंकित शुक्‍ला की गुड बुक में रहे इन लोगों को लगातार प्रताडि़त किया जा रहा था, जिसके चलते इन लोगों ने अखबार को अलविदा कह दिया.

भास्‍कर में छपी रिपोर्ट को झूठा बताते हुए थानेदार ने की प्रेसवार्ता

: अपने पक्ष में दस्‍तावेजी प्रमाण भी प्रस्‍तुत किए : हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर ने हजारीबाग के एक थाने के ऊपर छींटाकशी करते हुए तथा कुछ उदाहरण देते हुए उसे भ्रष्‍टाचार का अड्डा बताया. 11 अक्टूबर को इसी बात को लेकर हजारीबाग थाने में प्रभारी विनोद कुमार तथा निरीक्षक अनिल कुमार पत्रकार सभा बुलाकर प्रेस वालों के सामने दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करते हुए दैनिक भास्कर के रिपोर्ट को गलत बताया.

यह भी बताया कि ये पत्रकार ब्लैकमेलिंग करते हैं और बात नहीं मानने पर तथ्य से परे रिपोर्ट छापकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं. उन्होंने जितने भी रिपोर्ट छापे हैं उनका उसमे अपना हित जुड़ा हुआ है. इसीलिए वे गलत रिपोर्ट छाप रहें हैं. इस प्रेसवार्ता में दैनिक भास्कर का कोई भी पत्रकार शामिल नहीं हुआ क्योंकि सामने पोल खुलने की बारी थी. उसी समय मिथलेश कुमार उर्फ़ मंटी सिंह थाने में पहुंचे और उन्होंने दैनिक भास्कर के उमेश राणा तथा सुबोध मिश्र दोनों को ब्लैकमेलर बताया. मंटी सिंह ने इस बाबत एक वकालतन नोटिस भी अख़बार को भेजा है. मंटी सिंह ने आगे कहा कि यही दोनों पत्रकार हजारीबाग में स्टार नाइट के नाम पर लाखों की ठगी भी की. इस स्टार नाइट में मुंबई से आये कलाकारों की लुटिया डुबो दी. समाजसेवियों ने इन्हें वापस जाने का पैसा दिया. इस बात को दैनिक भास्कर क्यों नहीं छापता? नक्सलियों से इनके संबंधों की चर्चा पूरे पुलिस विभाग के लोग करते हैं, कॉल डिटेल्स में इस बात का खुलासा हो चुका है.

आगे श्री सिंह ने बताया कि उनको भी उन्होंने ब्लैकमेलिंग करने की कोशिश की और पचास हज़ार रुपये भी मांगे और नहीं देने पर उनके विरुद्ध भी दो रपटें छापी. इस बात को लेकर मंटी  सिंह ने हजारीबाग के पुलिस कप्तान को लिखित आवेदन भी दिया है. उमेश राणा और सुबोध मिश्र दोनों नक्सली क्षेत्र से आते हैं इसीलिए इनकी नक्सलियों के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं. दोनों ने जमीन माफियाओं कैश और काइंड के रूप में काफी मदद पाई है. इन्होंने ज़रीना विला नामक एक ज़मीन के बारे में पंद्रह रिपोर्ट छपी हैं क्योंकि वहां उन्हें जमीन देने का प्रलोभन मिला है. सेंट्रल जेल में हो रहे भ्रष्‍टाचार इन्हें दिखाई नहीं देते जबकि महीने में ये सेंट्रल जेल की बारह-पंद्रह दलाली वालीं ख़बरें छापते हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भास्‍कर कार्यालय पर हमला : ब्‍यूरोचीफ से लेकर चपरासी तक को पीटा

खरगोन। विजयादशमी की शाम दैनिक भास्कर के ब्यूरो कार्यालय के परिसर में जमकर हंगामा मचा। फोटो जर्नलिस्ट से निजी विवाद के चलते कुछ युवकों ने दैनिक भास्कर ब्यूरो कार्यालय पर हंगामा मचाया। विवाद की शुरुआत रावण दहन स्थल पर कहासुनी से हुई। फोटो जर्नलिस्ट अजय तिवारी को लेकर उपजे विवाद के बाद युवकों ने दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ ममताराम पाटूद, सीनियर रिपोर्टर कमलेश दुबे, विनयप्रकाश पांडे, कम्प्यूटर ऑपरेटर राजा भाटिया व प्यून राजू के साथ ही फोटो जर्नलिस्ट अजय तिवारी के साथ जमकर मारपीट कर डाली।

भास्‍कर के पत्रकारों ने इसकी शिकायत खरगोन कोतवाली में की है। वहीं युवकों ने भी दैनिक भास्कर स्टाफ के खिलाफ मारपीट का प्रकरण दर्ज कराया है। इस घटना के बाद से खरगौन के पत्रकारों में रोष व्‍याप्‍त है।

भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट के चलते बची एक युवक की जान

कोटा : अपनी मौत सुनिश्चित करने के लिए तीन तरीके से आत्‍महत्‍या का प्रयास करने वाला एक युवक भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट की सूचना तथा एक कांस्‍टेबल की मदद से जिंदा बच गया. केशवपुरा निवासी दीपक कुमार नाम का यह युवक अपनी पत्‍नी के ससुराल से वापस न लौटने आत्‍महत्‍या की कोशिश की परन्‍तु होनी को शायद इसकी मौत मंजूर नहीं थी.

भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट सलीम शैरी की नजर किशोरपुरा राइट कैनाल में डूब रहे दीपक पड़ी तो उन्‍होंने उसे शव समझकर फोटो लेने के लिए कैमरा निकाल लिया, जैसे ही कैमरे को क्लिक किया तो युवक के शरीर में हरकत देखी. सलीम ने तत्‍काल 100 नम्‍बर तथा फायर स्‍टेशन एवं एम्‍बुलेंस के लिए फोन किया. सूचना मिलते ही मौके पर किशोरपुरा पुलिस पहुंच गई. पुलिस टीम में शामिल कांस्‍टेबल राजेश कुमार स्‍थानीय लोगों की मदद से नहर में उतर कर युवक को किनारे लाए. इतने में फायर बिग्रेड के लोग भी पहुंच गए तथा युवक को बाहर निकाला.

दीपक को तत्‍काल एमबीएस अस्‍पताल पहुंचाया गया. जांच में पता चला कि उसने पहले अपनी नस काटी, फिर जहर खाया, उसके बाद नहर में कूद गया. डॉक्‍टरों ने बताया कि युवक जिंदा रहने की कोई उम्‍मीद बाकी नहीं रखना चाहता था. परन्‍तु भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट का वहां पहुंच जाना उसके लिए जिंदगी बन गया.

पंजाब-हरियाणा में भास्‍कर ने फेरबदल किया, कमलेश सिंह का कद बढ़ा

दैनिक भास्‍कर ने पंजाब-हरियाणा में अपने संपादकीय टीम में व्‍यापक फेरबदल किया है. कई संपादकों तथा समाचार संपादकों को इधर से उधर किया गया है. कमलेश सिंह का कद भी बढ़ा दिया गया है. अब तक नार्थ रीजन के संपादक और स्‍टेड हेड के रूप में काम देख रहे कमलेश सिंह को प्रमोट करके चीफ एडिटर बना दिया गया है. वे नए लुधियाना में बने नए कारपोरेट ऑफिस में बैठेंगे.

खबर है कि हिसार के संपादक योगश्‍वर दत्‍त सुयाल को इसी पद पर जालंधर भेजा जा रहा है. लुधियाना के आरई हिमांशु ढौढियाल को हिसार की जिम्‍मेदारी सौंपी जा रही है. पठानकोट एडिशन में एनई सुरजीत सिंह सैनी को लुधियाना बुला लिया गया है. अमृतसर में एनई रणदीप सिंह वशिष्‍ट को पठानकोट का एनई बनाया जा रहा है. लुधियाना कारपोरेट ऑफिस में तेजी में काम शुरू होने के बाद कई और लोगों को लुधियाना लाए जाने की योजना भी प्रबंधन बना रहा है.

हाई कोर्ट ने कहा ‘सच का सामना’ बेहद अश्‍लील

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2009 में प्रसारित टीवी रियलिटी शो ‘सच का सामना’ की दो विवादास्पद कड़ियों के लिए स्टार प्लस चैनल को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस को शुक्रवार को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी और कहा कि कार्यक्रम में दिखाई गई वषय-वस्तु ‘अश्लील, अशोभनीय तथा अच्छी रुचि एवं मर्यादा के विरुद्ध’ थी जो केबल टेलीविजन नेटवर्क के नियमों के तहत वर्णित कार्यक्रम आचार संहिता का उल्लंघन है।

चैनल ने यह याचिका मंत्रालय द्वारा 27 नवम्बर, 2009 को जारी नोटिस के विरुद्ध दायर की थी। मंत्रालय ने 17 और 21 जुलाई, 2009 को प्रसारित ‘सच का सामना’ की दो कड़ियों पर आपत्ति जताई थी। साभार : भास्‍कर

शहरों में दैनिक भास्कर सबसे आगे, 1.58 लाख नए पाठक भी जोड़े

मुंबई. भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस)-2011 की दूसरी तिमाही के परिणाम जारी हो गए हैं। इसके मुताबिक, दैनिक भास्कर समूह ने तीन महीनों में 1.58 लाख पाठक जोड़े हैं। पिछले कई सालों की तरह इस बार भी यह 1.82 करोड़ पाठकों के साथ देश का सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह बना हुआ है। ताजा आंकड़ों में दिव्य मराठी और दैनिक भास्कर झारखंड के संस्करणों के पाठकों को शामिल नहीं किया गया है।

हाल ही में दिव्य मराठी के औरंगाबाद, नासिक और जलगांव संस्करण लॉन्च किए गए हैं। जबकि झारखंड के रांची, धनबाद और जमशेदपुर में दैनिक भास्कर के संस्करण हैं। दैनिक भास्कर 91.37 लाख शहरी पाठकों के साथ देश का सबसे बड़ा शहरी अखबार भी बना हुआ है। शहरों में टाइम्स ऑफ इंडिया की तुलना में भास्कर के 19 लाख पाठक ज्यादा हैं। मध्यप्रदेश में भी दैनिक भास्कर की बढ़त कायम है। इस बार अखबार ने यहां 76 हजार पाठक और जोड़े हैं। प्रदेश में भास्कर की रीडरशिप अब 38.06 लाख हो चुकी है। यह प्रतिस्पर्धी अखबार की तुलना में 204 फीसदी ज्यादा है।

राजस्थान में दैनिक भास्कर ने 1.13 लाख नए पाठक जोड़े हैं। अब वहां अखबार की कुल रीडरशिप 64.25 लाख हो चुकी है। जबकि नजदीकी प्रतिस्पर्धी के 60 हजार पाठक कम हुए हैं। सर्वे में चार शहरों-जयपुर, जोधपुर, कोटा और बीकानेर को शामिल किया गया। इनमें 17.11 लाख पाठकों के साथ दैनिक भास्कर की लीडरशिप पोजीशन कायम है। पंजाब में दैनिक भास्कर जालंधर, अमृतसर और लुधियाना में 4.35 लाख रीडरशिप के साथ लीडर बना हुआ है। जबकि चंडीगढ़ में 1.63 लाख पाठकों के साथ अपने प्रतिस्पर्धी से 61.3 फीसदी आगे है। दैनिक भास्कर के हरियाणा में 13.12 लाख पाठक हैं और यह अपने प्रतिस्पर्धी अखबार से 33 फीसदी आगे है।

गुजरात में दिव्य भास्कर के 35.36 लाख पाठक हैं। दिव्य भास्कर अकेला गुजराती अखबार है, जिसके अहमदाबाद में 10 लाख से ज्यादा पाठक हैं। सर्वे में शामिल किए गए शहरों में अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट, भावनगर और जामनगर में संयुक्त रूप से दिव्य भास्कर के 22.34 लाख पाठक हैं। 1.82 करोड़ पाठकों के साथ दैनिक भास्कर पिछले कई वषों की तरह इस बार भी देश का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला समाचार पत्र समूह बना हुआ है। 13 राज्यों और चार भाषाओं में समूह के कुल 62 संस्करण हैं। यह समूह सबसे ज्यादा भोगौलिक क्षेत्र को कवर करते हुए सर्वाधिक भारतीय आबादी की जरूरतें पूरी करता है।

समूह की सफलता वास्तव में उसके पाठकों की सफलता है। इसके लिए हम अपने पाठकों और उन सहयोगियों को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने यह सफलता हासिल करने में मदद की। हम गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम हैं। साभार : भास्‍कर

अमर उजाला में अजय राय का तबादला, भास्‍कर में प्रभात कुमार का इस्‍तीफा नामंजूर

अमर उजाला, वाराणसी से खबर है कि सीनियर सब एडिटर अजय राय का तबादला इलाहाबाद के लिए कर दिया गया है. वे काफी समय से वाराणसी में अमर उजाला को अपनी सेवाएं दे रहे थे. अजय के बारे में बताया जा रहा है कि कंपनी के चेयरमैन राजुल माहेश्‍वरी से अकेले में बात करना उनके लिए भारी पड़ गया है. सूत्रों ने बताया कि राजुल माहेश्‍वरी के वाराणसी दौरे के समय अजय राय ने उनसे अकेले में बात करने की इच्‍छा जाहिर की थी, जो वरिष्‍ठों को काफी नागवार गुजरी थी. इसके बाद से अजय राय को परेशान किया जाने लगा था. उन्‍हें दो बार मेमो भी दिया गया था.

अजय राय ने बारह साल पहले आगरा में अमर उजाला ज्‍वाइन किया था. इसके बाद उनका तबादला वाराणसी के लिए कर दिया गया था. एक साल तक वे अखबार के गाजीपुर के ब्‍यूरोचीफ भी रहे. इसके पहले अमृत प्रभात को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर, रांची से खबर है कि 23 सितम्‍बर को गुस्‍से में इस्‍तीफा देने वाले प्रभात कुमार का इस्‍तीफा नामंजूर कर दिया गया है. खबर है कि स्‍टेट हेड ओम गौड़ के हस्‍तक्षेप के बाद  वापस लौटे हैं. गौरतलब है कि बिहार डेस्‍क देखने वाले प्रभात कुमार का बिहार के एक ब्‍यूरो के रिपोर्टर से कहासुनी हो गई थी. उन्‍होंने उसकी शिकायत संपादक राघवेन्‍द्र से की, परन्‍तु संपादक ने कोई तवज्‍जो नहीं दिया, जिससे नाराज प्रभात कुमार शुक्रवार की रात को ही अपना इस्‍तीफा देकर चले गए थे.

मीडियाकर्मी को घसीटते हुए थाने ले गया सिपाही

नागपुर. बर्डी थाने में पदास्थापित एक नायक सिपाही की दबंगई सोमवार को उस वक्त देखने को मिली, जब एक मीडियाकर्मी को घसीटते हुए वह थाने ले गया और थाने में शर्ट उतारकर दबंगई का प्रदर्शन करने लगा। वाक्या कुछ इस प्रकार है- एक स्थानीय टीवी चैनल का कैमरामैन गिरीश सोमवार को बर्डी थाने के सामने हुई दुर्घटना को कवर करने गया था। दुर्घटना में छात्रा शरवरी सोनारे घायल हुई है। एक महिला सिपाही ने शरवरी के बैग की तलाशी ली, तो उसके कॉलेज का पहचान पत्र मिला।

पत्र पर लगी फोटो को कैमरे में लेने के लिए गिरीश ने महिला सिपाही को छात्रा का पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा। इसे लेकर दोनों में थोड़ी बहुत नोंक-झोंक भी हुई। उसी समय नायक सिपाही शेषराव पवार ने गिरीश का कैमरा छीनते हुए उससे हाथापाई की व उसे घसीटते हुए थाने ले गया। इस घटना को वहां पर मौजूद अन्य अखबारकर्मी व राहगीरों ने भी देखा। सिपाही शेषराव पवार की दबंगई यह पर खत्म नहीं हुई, थाने पहुंचकर उसने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ही शर्ट उतारा व गिरीश समेत अन्य मीडियाकर्मियों को ललकारते हुए देख लेने की धमकी देने लगा।

मामले को बिगड़ता देख सिपाही शेषराव ने अपने वर्दी पर लगी नेम प्लेट निकालकर जेब में छुपा ली थी। पूछे जाने पर कहा- नेम प्लेट कई गिर गई है। यही नहीं बटन टूटने से शर्ट निकालने की झूठी जानकारी उसने एसीपी धरमशी व पीआई जाधव को दी थी। भाजपा नेता विकास कुंभारे ने दबंग सिपाही को निलंबित करने की मांग की है। साभार : भास्‍कर

भास्‍कर से प्रभात कुमार का इस्‍तीफा, आईबीएन7 से हटाए गए गौरव, पंकज को जिम्‍मेदारी

दैनिक भास्‍कर, रांची से खबर है कि काम को लेकर हुए विवाद के बाद सीनियर रिपोर्टर प्रभात कुमार ने इस्‍तीफा दे दिया है. अभी उनका इस्‍तीफा स्‍वीकार नहीं किया गया है. बताया जा रहा है कि बिहार डेस्‍क देखने वाले प्रभात कुमार का बिहार के एक ब्‍यूरो के रिपोर्टर से कहासुनी हो गई. उन्‍होंने उसकी शिकायत संपादक राघवेन्‍द्र से की, परन्‍तु संपादक ने कोई तवज्‍जो नहीं दिया, जिससे नाराज प्रभात कुमार शुक्रवार की रात को ही अपना इस्‍तीफा देकर चले गए. बताया जा रहा है कि विवाद करने वाला रिपोर्टर संपादक के साप्‍ताहिक अखबार में काम कर चुका है. इस संदर्भ में जब प्रभात कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन स्‍वीच ऑफ मिला.

आईबीएन7 से खबर है कि गौरव मिश्रा को हटा दिया गया है. गौरव मिश्रा पिछले कई सालों से सहारनपुर में आईबीएन7 को अपनी सेवाएं दे रहे थे. उन्‍हें अपने लोकल ब्‍यूरोचीफ की दूसरे चैनलों के लिए भी रिपोर्टिंग करने की बात न मानना महंगा पड़ गया. उन्‍होंने पूरे मामले की लिखित एवं मौखिक शिकायत यूपी के वरिष्‍ठों से लेकर नोएडा में बैठे हाकिमों से की थी, पर सीनियरों को अपने जूनियर की जूझने और अपनी बात कहने की हरकत रास नहीं आई और गौरव को ही बलि का बकरा बना दिया गया. गौरव की जगह पंकज बालियान को आईबीएन7, सहारनपुर की जिम्‍मेदारी सौंप दी गई है.

सुधीर अग्रवाल को पत्र लिखकर की इस्तीफे की पेशकश

दैनिक भास्‍कर, अलवर में पिछले पांच सालों से कार्यरत सुरेश शर्मा ने अपने मैनेजिंग डाइरेक्‍टर सुधीर अग्रवाल को पत्र लिखा है. पत्र में उन्‍होंने अलवार एडिशन में चल रही गतिविधियां एवं अपनी परेशानियों का जिक्र किया है. उन्‍होंने अलवर के कार्यकारी संपादक डा. प्रदीप भटनागर द्वारा प्रताडि़त किए जाने का आरोप लगाते हुए अपने इस्‍तीफे की पेशकश की है. उन्‍हों ने कहा है कि अगर संभव हो तो इस पत्र को ही उनका इस्‍तीफा समझा जाए.

नीचे सुरेश शर्मा द्वारा सुधीर अग्रवाल को लिखा गया पत्र.


सुधीर अग्रवाल

मैनेजिंग डायरेक्टर,

दैनिक भास्कर समूह।

पत्र लिखने का सबब : अलवर क‍े संपादक डॉ. भटनागर द्वारा दी जा रही प्रताडऩा के क्रम में। अब तक कई छोड़ भागे। गलत हरकतों से संस्थान की इज्जत दांव पर।

आदरणीय भाई साहब,

मुझे दर्द असहनीय और वृहद होने के सबब आपके समय की कीमत का भान होने के बावजूद आपको तुच्छ बात के लिए कष्ट देना पड़ रहा है। मेरी व्यथा है कि मैं दैनिक भास्कर के अलवर संस्करण में 23 दिसंबर 2006 को उप संपादक के रूप में जुड़ा। इससे पूर्व दैनिक अरुण प्रभा में सह संपादक के रूप में डेढ़ दशक तक कार्यरत रहा। जहां मैं कंप्यूटर तकनीक से बिल्कुल अनभिज्ञ था। दैनिक भास्कर से जुडऩे पर मुझे पेन लेस न्यूज चलाने का अवसर मिला। चूंकि मैंने स्टेनो और टाइप की थी। अत: त्वरित पकड़ बनाने में कतई परेशानी नहीं हुई। इसके बाद तत्कालीन संपादक आदरणीय श्री प्रदीप द्विवेदी जी ने क्रमश: धौलपुर और भरतपुर जिलों का प्रभार सौंपकर वहां से आने वाले समाचार संपादित कर ऑपरेटर्स से पेज लगवाने की जिम्मेदारी दी। इसके बाद उनका तबादला जयपुर हो गया और श्री श्याम शर्मा नए संपादक आए। उन्होंने स्टॉफ की स्टडी के बाद मुझे अलवर जिले का प्रभार सौंपा। जिसे भाई प्रदीप यादव और पुष्पेश शर्मा के सहयोग से मैंने बखूबी निभाया।

इसके बाद विश्व स्तरीय मंदी के दौरान भास्कर में ऑपरेटर पद समाप्त कर सब एडिटर्स को क्वार्क में पेज मेकिंग सिखाई गई और ऑपरेटर्स को सब एडिटर बनाया गया। बहुत अच्छा प्रयोग रहा। तभी से नियमित जिले के समाचार चलाकर एक पेज जिला और एक सिटी स्वयं बनाने की जिम्मेदारी मिली। जो बखूबी निभाई। तदुपरांत मैट्रिक्स का दौर आया और उसमें भी सफल रहे। लेकिन अब आए विश्व स्तरीय तकनीक इन डिजाइन के प्रति हम अति उत्साहित थे। परिणाम स्वरूप विश्वास नहीं होने के बावजूद खरे उतरे और गत 4 सितंबर से अब तक दो पेज लगाए। शुरुआती दौर था तो ट्रेंड ऑपरेटर्स की मदद भी ली, लेकिन उत्साह अधिक था कि अब हम इस तकनीक से जुडक़र बहुत आगे हो जाएंगे। हमारी परफॉर्मेंस भी कामयाब रही।

भाई साहब आप इस परिवार के मुखिया हैं। आपको यह बताना कष्टप्रद है कि जब से इस संस्करण में हिसार (हरियाणा) से माननीय डॉ. प्रदीप भटनागर कार्यकारी संपादक साहब आए हैं। तभी से भास्कर के एडिटोरियल की कर्णधार (ग्रास रुट) अतिनिराश है। कारण उनका, पक्षपातपूर्ण रवैया, अधीनस्थों को प्रताडऩा और पद के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान का अभाव। एक ओर दैनिक भास्कर जहां एक अप्रशिक्षित या अर्द्धप्रशिक्षित संपादकीय सहयोगी की भर्ती कर उसे प्रशिक्षित करने में वर्षों से जाया करता है। वहीं मुझे कहते हुए खेद है कि डॉ. प्रदीप भटनागर साहब ने भाई यशवंत अग्रवाल मोबाइल नंबर 09829058811, भाई प्रदीप यादव मोबाइल नंबर 09672971502 और अब मुझे त्यागपत्र नहीं देने पर बर्खास्त करने की चेतावनी दी है। यशवंत जी और प्रदीप जी भास्कर से ही जुड़े रहने की तमन्ना रखते थे, लेकिन उन्हें अपनी इज्जत बचाने के लिए त्यागपत्र देना पड़ा।

इसी तरह मदर एडिशन पर वर्षों से सफलतापूर्वक कार्य कर रहे भाई गीतेश शर्मा मोबाइल नंबर 07891341144 जो कि किसी भी परिस्थिति में एडिशन समय पर निकालने का माद्दा रखते थे। उन्हें सब एडिटर के पद पर नियुक्त करने की बधाई देने के बावजूद ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी गई कि उन्हें भी विवश होकर त्यागपत्र देना पड़ा। ये अलग बात है कि अब वे भास्कर से दो गुने वेतन पर लेकिन छोटे अखबार में अलवर से बाहर सेवारत हैं। उन दोनों की जगह डॉ. साहब इलाहबाद और बिहार से उनसे करीब दो गुना सीटीसी पर अरुणाभ मिश्रा व सौरभ सिंह को लाए। जिनमें से अरुणाभ मिश्रा भी प्रताडऩा नहीं झेलने के कारण त्यागपत्र देकर जा चुके हैं। अब मेरे साथ भी यही हो रहा है। त्यागपत्र नहीं देने पर बर्खास्त करने की चेतावनी दी गई है। 13 सितंबर को मुझे रात के साढ़े आठ बजे के करीब अपने चेंबर में बुलाकर यह चेतावनी दी गई। जिससे मुझे डिप्रेशन में उन्हें त्यागपत्र का आश्वासन देकर कार्यालय छोडक़र बीच में ही आना पड़ा।

मेरी उम्र 48 वर्ष और पत्रकारिता का अनुभव 20 वर्ष है। दैनिक भास्कर से मेरा इमोशनल जुड़ाव है। शेष समय भी इसी संस्थान में देने की इच्छा थी। लेकिन मन भर आया है कि कैसे लिखूं त्याग पत्र। मेरी परिस्थितियां मुझे अलवर रहकर ही कार्य करने को विवश कर रही हैं। मेरे ऊपर 88 वर्षीय माताजी, दो बेटे 10 व 9 वर्ष तथा पत्नी सहित एक भांजे का भी भार है। मैं भलिभांति जानता हूं कि दैनिक भास्कर में मैने गत पांच वर्ष में जो सीखा उसकी बदौलत मुझे भास्कर में मिलने वाले वेतन से डेढ़ से दो गुणा तक पगार दूसरे किसी अखबार में मिल जाएगी, लेकिन उसके लिए संभव है मुझे इस विपरित परिस्थितिवश घर छोडऩा पड़े और एक-दो महीने का समय लग जाए। इसके अलावा जो उत्साह भास्कर से जुड़ाव का था वह क्षीण हो जाएगा और एक अर्से बाद नॉर्मल हो पाएंगे।

श्रीमान जी से निवेदन है कि मुझे उचित न्याय यदि नहीं भी दिला पाएं तो मेरे स्वाभिमान की रक्षा करते हुए इसे त्याग पत्र पूर्व एक माह के नोटिस की मान्यता प्रदान कर वांछित लाभ-परिलाभ दिलाने की अवश्य कृपा करें। या इसे ही त्यागपत्र समझें। मान्यवर

उचित न्याय की अपेक्षा सहित।

विशेष :- भाईसाहब मुझको तो वे हटा देंगे लेकिन आपसे एक अनुरोध हैं कि संस्थान की छवि बचाने के लिए डॉ. भटनागर के निवास स्थान के आस-पास जांच कराएं। वहां क्या हो रहा है, पूरी स्कीम एक की, महिलाएं क्या बातें करती हैं? किस बारे में करती हैं और भास्कर किस तरह कोसा जाता है। इस व्यक्ति ने हद की सीमा पार कर दी है।

प्रार्थी

सुरेश शर्मा

उपसंपादक

दैनिक भास्कर, अलवर

मो. 09672940542

Email : suresh.sharma@raj.bhaskarnet.com

इंडियन एक्‍सप्रेस जाएंगे अभिषेक, भास्‍कर से जुड़े शिव प्रकाश

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, दिल्‍ली से अभिषेक दस्‍तीदार इस्‍तीफा देने जा रहे हैं. वे सिटी टीम में रिपोर्टर हैं. वे अपनी नई पारी जल्‍द ही इंडियन एक्‍सप्रेस के पॉलिटिकल ब्‍यूरो के साथ शुरू करने जा रहे हैं. संभावना है कि वे अक्‍टूबर में इंडियन एक्‍सप्रेस से जुड़ जाएंगे.

दैनिक नवज्‍योति, जयपुर से शिव प्रकाश ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, जयपुर के साथ शुरू की है. उन्‍हें क्राइम रिपोर्टर बनाया गया है. शिव प्रकाश इसके पहले भी कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

महाराष्‍ट्र में ‘दिव्‍य मराठी’ का तीसरा संस्‍करण जलगांव से लांच

जलगांव : देश के सबसे बड़े समाचार पत्र समूह दैनिक भास्कर द्वारा संचालित ‘दिव्य मराठी’ के जलगांव संस्करण का शनिवार को लोकार्पण हो गया। दिव्य मराठी का यह तीसरा संस्करण है। औरंगाबाद और नासिक से यह अख़बार पहले से ही प्रकाशित हो रहा है। भास्कर समूह के इस 64वें संस्करण का लोकार्पण एक भव्‍य समारोह में किया गया।

समारोह की अध्‍यक्षता महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से ने की। इस मौके पर विशेष अतिथि के रूप में जल आपूर्ति मंत्री सुनील तटकरे, परिवहन राज्य मंत्री गुलाबराव देवकर सहित कई गणमान्‍य लोग मौजूद रहे। दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल और ‘दिव्य मराठी’ के प्रधान संपादक कुमार केतकर ने कार्यक्रम में पहुंचे मेहमानों का स्‍वागत किया। उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर के सफर और ‘दिव्य मराठी’ के नए संस्‍करण के लिए जलगांव का चयन किए जाने के कारणों पर रोशनी डाली। साभार : भास्‍कर

जोधपुर में हॉकरों की हड़ताल, मारपीट, भास्‍कर की बिक्री ठप

जोधपुर में दैनिक भास्‍कर के यूनिट हेड और सर्कुलेशन मैनेजर को हटाने की मांग का लेकर हॉकर कई दिनों से हड़ताल कर रहे हैं, जिसके चलते दैनिक भास्‍कर की अस्‍सी हजार कॉपियां बिना बंटे रह जा रही हैं. इसी बीच कुछ लोगों ने हॉकरों के धरनास्‍थल पर पहुंचकर मारपीट कर ली, जिसमें कई हॉकरों को चोट लगी है. हॉकरों ने इसकी शिकायत थाने में भी दर्ज कराई है.

पिछले छह दिनों से हॉकर भास्‍कर के यूनिट हेड और सर्कुलेशन हेड को हटाने की जिद पर अड़े हुए हैं. वो मालिक सुधीर अग्रवाल के अलावा और किसी से बात करने को तैयार नहीं हैं. प्रतिदिन अस्‍सी हजार अखबारों की डम्‍पिंग हो रही है, जिससे प्रबंधन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है. अखबार को विज्ञापन देने वालों ने भी अपना दबाव बढ़ा दिया है. इसी बीच कुछ लोग हॉकरों के धरनास्‍थल पर पहुंचे. बातचीत के बीच विवाद शुरू हो गया. मारपीट हो गई, जिसमें कई हॉकरों को चोटें आईं.

इसके बाद नाराज हॉकरों ने थाने में कुछ लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. अपने साथ हुई मारपीट की घटना से नाराज हॉकरों ने शहर में जुलूस निकाला तथा आरोपियों की जल्‍द से जल्‍द गिरफ्तारी करने की मांग की. हॉकरों ने आरोप लगाया है कि मारपीट करने वालों ने कई लोगों का कलेक्‍शन बैग भी छीन लिए. उन्‍होंने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है. हॉकरों की हड़ताल के चलते भास्‍कर प्रबंधन तनाव में हैं.

निरंजन शुक्‍ला बने कलस्‍टर हेड, एक दिन में ही घर वापसी कर ली कुंदन ने

दैनिक भास्‍कर, झुंझनू का कलस्‍टर हेड का पद निरंजन शुक्‍ला ने संभाल लिया है. शुक्‍ला इसके पूर्व दैनिक भास्‍कर जोधपुर में कार्यरत थे. मांगू सिंह शेखावत के भास्‍कर छोड़कर जाने के बाद से यह पद खाली पड़ा था. झुंझनू कलस्‍टर के अंतर्गत झुंझनू व चुरू ब्‍यूरो कार्यालय आते हैं.

मुजफ्फरपुर से खबर है कि यहां आने का क्रम जारी है. हिंदुस्‍तान के रिपोर्टर कुंदन कुमार ने प्रभात खबर ज्‍वाइन किया था, परन्‍तु हिंदुस्‍तान प्रबंधन द्वारा पैसे बढ़ाने जाने की बात पर एक दिन बाद ही वापस फिर हिंदुस्‍तान लौट आए. इस खबर को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. यहां यहां जागरण, हिंदुस्‍तान एवं प्रभात खबर के बीच जमकर एक दूसरे के कर्मचारी को अपने साथ जोड़ने की कवायद चल रही है.

ये देखिए दैनिक भास्‍कर, चंडीगढ़ का हाल

सबसे बड़ा ग्रुप होने का दावा करने वाले अखबार दैनिक भास्‍कर का चंडीगढ़ में हाल गजब है. अखबार के कर्मचारी पाठकों को अच्‍छी खबरें देने की बजाय अपने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए दूसरे अखबारों में पहले छप चुकी खबरों को प्रकाशित करने से भी नहीं हिचकता है. ऐसा ही एक मामला कल यानी पांच सितम्‍बर को देखने को मिला. यह सारी कवायद चंडीगढ़ पहुंचे एमडी सुधीर अग्रवाल को दिखाने के लिए की गई थी.

सूत्रों ने बताया कि इस तरह के खेल अखबार के लोग आए दिन करते रहते हैं. दूसरे अखबारों की बड़ी स्‍टोरियों में थोड़ा बहुत फेरबदल करके ये लोग उसे नए सिरे से छाप देते हैं. इसी के कारण अखबार की आम पाठकों में किरकिरी होती रहती है. बीते शनिवार को राष्‍ट्रीय संपादक कल्‍पेश जी चंडीगढ़ के कर्मचारियों की घंटों मीटिंग ली तथा अखबार में सुधार करने के लिए फटकार लगाई. नीचे देखिए 19 अगस्‍त को आज समाज में प्रकाशित खबर और 5 सितम्‍बर को भास्‍कर में प्रकाशित खबर.

19 अगस्‍त को आज समाज में प्रकाशित खबर
5 सितम्‍बर को दैनिक भास्‍कर में प्रकाशित खबर

भास्‍कर के मार्केटिंग एवं सेल्‍स हेड हेमंत अरोरा का इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर, मुंबई से खबर है कि यहां मार्केटिंग और सेल्‍स हेड के रूप में सेवाएं दे रहे हेमंत अरोरा ने इस्‍तीफा दे दिया है. हेमंत एक साल भी यहां नहीं रह पाए. बताया जा रहा है कि वे अपनी नई पारी टाइम्‍स टेलीविजन नेटवर्क के साथ शुरू करने जा रहे हैं. उन्‍हें यहां सेल्‍स हेड बनाया जा रहा है. हेमंत ने करियर की शुरुआत टाइम्‍स समूह के साथ 1997 में की थी. उसके बाद कई मीडिया संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दीं. पिछले साल दिसम्‍बर में वे दैनिक भास्‍कर के साथ जुड़ गए थे.

भास्‍कर का एक और ब्‍लंडर, सस्‍ती पत्रकारिता का नतीजा

पत्रकारिता में कितने जिम्मेदार लोग हैं और वे किस जिम्मेदारी से अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं, यह जानना बहुत मुश्किल नहीं है. खुद को जनता का हमदर्द और समाज का आईना बताने वाले मीडिया की जिम्मेदारी से वाकिफ कराने के लिए आपके सामने एक उदाहरण रख रहा हूं. यह उदाहरण वेब मीडिया से जुड़ा है. एक ऐसे बड़े संस्थान से जुड़ा है, जो खुद को भारत का सबसे बड़ा समाचार-पत्र समूह बताता है. मैं दैनिक भास्कर की बात कर रहा हूं.

दैनिक भास्कर की वेबसाइट bhaskar.com पर एक समाचार नज़र आया. हैडिंग था- बिपाशा ने मारा सलमान को ताना, मुझे नहीं चाहिए ऐसा ‘बॉडीगार्ड’! देखकर अचंभा हुआ, क्योंकि कुछ देर पहले ही नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर पढ़ा था- ‘बॉडीगार्ड हो तो ऐसा’. दोनों समाचार एक दूसरे के बिलकुल विपरीत हैं.

अब यकीन किस पर किया जाए? दोनों की बड़े समाचार पत्र समूह हैं. सोचा, क्यों न twitter पर ही इसे परखा जाए. Twitter पर जब बिपाशा बसु का ट्वीट पढ़ा तो भास्कर को झूठा पाया. खैर, गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन पूरी खबर ही उलट हो जाए, यह कैसे संभव है? मेरी समझ से बाहर है. मैंने भी प्रिंट मीडिया में 5 साल तक काम किया है. भास्कर के साथ भी काम कर चुका हूं, पर ऐसी गलती कहीं नहीं देखी.

बिपाशा के twitter पर लिखा- Just saw Bodyguard! Another blockbuster for Salman Khan!It would be nice to have a cute bodyguard like lovely singh!

एक बात और. बिपाशा ने इसे 28 अगस्त को ट्वीट किया (बिपाशा का ट्वीट देखने के लिए उपर के फोटो पर क्लिक करें). नवभारत टाइम्स ने 29 अगस्त पर साइट पर डाला. भास्कर ने 30 अगस्त को. दो दिन बाद आप समाचार दे रहे हैं और वह भी बिलकुल गलत. कुछ नहीं हो सकता!!!

जाहिर है, आज समाचार पत्र समूहों को बिजनेस से ज्यादा और कुछ नहीं चाहिए. बिजनेस कम नहीं होना चाहिए, समाचार चाहे गलत छप जाएं. एक कारण यह भी है कि सस्ते से सस्ते पत्रकार रखे जा रहे हैं. उन्हें न तो समाचार की समझ है और न ही उसे लिखने का तरीका. सभी की बात नहीं कर रहा, पर ज्यादातर ऐसे ही हैं. पत्रकारों को 10 हजार रुपए भी बा‍मुश्किल सैलरी मिल पाती है. ज्यादातर पत्रकार 5 हजार के आसपास रहते हैं. ऐसे में उनसे क्वालिटी की उम्मीद बेमानी ही होगी.


भास्‍कर की वेबसाइट से लिया गया समाचार-  बिपाशा ने मारा सलमान को ताना, मुझे नहीं चाहिए ऐसा ‘बॉडीगार्ड‘! नीचे पूरी खबर-

बिपाशा ने मारा सलमान को ताना, मुझे नहीं चाहिए ऐसा ‘बॉडीगार्ड’!

Source: Vaibhavi Risbood   |   Last Updated 11:53 AM (30/08/2011)

आजकल बॉलीवुड में एक शब्द सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है और वह है ‘बॉडीगार्ड’। वहीं टॉप की एक्ट्रेसेज भी अपने-अपने हिसाब से बॉडीगार्ड को प्रिफर कर रहीं हैं। हालांकि ब्लैक ब्यूटी के नाम से मशहूर बिपाशा बसु खुद को लेकर कांफिडेंट हैं। उनका दावा है कि उन्हें किसी बॉडीगार्ड की जरूरत नहीं है।

ऐसा कहकर बिपाशा क्या सलमान पर ताना मार रहीं हैं। इस सवाल के होने के पीछे कारण भी हैं क्योंकि आजकल सलमान खुद को अपने साथ काम करने वाले हर कॉ-स्टार्स के बॉडीगार्ड के रूप में दिखा रहे हैं। खैर इसका सही जवाब तो बिपाशा के पास ही है।

जब बिपाशा से यह सवाल किया गया कि वह किसे अपने बॉडीगार्ड के तौर पर आइडल मानती हैं तो बिपाशा ने कहा, “मैं नहीं मानती कि मुझे बॉडीगार्ड की जरूरत है।”

आपको बता दें कि इस ब्लैक ब्यूटी ने राज 3 में अपना जादू चलाने की पूरी तैयारी कर ली है और आगे भी भट्ट कैम्प के साथ काम करने की जुगत में लगी हुईं हैं।

लेखक मलखान सिंह पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. यह लेख उनके ब्‍लॉग दुनाली से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.

औरंगाबाद एडिशन 27 को लांच करेगा दैनिक भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर, जबलपुर ग्रुप अपना छठा एडिशन औरंगाबाद से लांच करने जा रहा है. इसकी लांचिंग 27 अगस्‍त को होगी. औरंगाबाद दैनिक भास्‍कर का महाराष्‍ट्र में तीसरा एडिशन था. औरंगाबाद का संपादकीय प्रभार अब्‍दुल कादिर को सौंपी गई है. औरंगाबाद एडिशन आसपास के 12 जिलों को कवर करेगा. इसकी लांचिंग उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी एवं महाराष्‍ट्र के सीएम पृथ्‍वीराज चाह्वाण करेंगे.

इसके पहले जबलपुर ग्रुप जबलपुर,  सतना, छिंदवाड़ा के अलावा महाराष्‍ट्र के नागपुर और अकोला से दैनिक भास्‍कर का प्रकाशन कर रहा है. औरंगाबाद से लांच होने वाला अखबार 20 पेज का होगा. इसका कवर प्राइज ढाई रुपये रखा गया है. इस अखबार की 81000 कॉपियां बुक की जा चुकी हैं. यह अखबार कलर और ब्‍लैक एंड व्‍हाइट फार्मेट में प्रकाशित किया जाएगा.

इस अखबार के साथ सप्‍लीमेंट के रूप में हर सप्‍ताह शनिवार को ‘नव रंग, रविवार को ‘रास रंग’ तथा बुधवार को ‘ मधुरिमा’ पाठकों के लिए उपलब्‍ध रहेगा.  सूत्रों का कहना है कि औरंगाबाद की लांचिंग के बाद दैनिक भास्‍कर अपने अगले एडिशन के लिए पुणे का चयन किया है. इसके बाद पुणे एडिशन को लांच करने के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी.

बुद्धि प्रकाश आजसमाज में तथा एमएस राठौर दैनिक अंबर में मैनेजर बने

दैनिक भास्‍कर, चंडीगढ़ से बुद्धि प्रकाश शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सर्कुलेशन विभाग में डिप्‍टी मैनेजर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी चंडीगढ़ में ही आज समाज के साथ की है. इन्‍हें यहां सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में मैनेजर बनाया गया है. पिछले छह सालों में सर्कुलेशन के क्षेत्र में सक्रिय बुद्धि भास्‍कर से पहले अमर उजाला और हिंदुस्‍तान टाइम्‍स को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर, सीकर से फिर एक विकेट गिरा है. इस बार एमएस राठौर ने भास्‍कर को बाय किया है. वे मार्केटिंग डिपार्टमेंट में कार्यरत थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी सीकर से जल्‍द ही प्रकाशित होने जा रहे दैनिक अंबर के साथ की है. इन्‍हें यहां पर मार्केटिंग मैनेजर बनाया गया है. एमएस काफी समय से भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे रहे थे. वे जयपुर में बैठेंगे.

चेक बाउंस मामले के लपेटे में आए देवघर के इंडिया न्‍यूज/ भास्‍कर के संवाददाता

देवघर में इंडिया न्‍यूज संवाददाता सह दैनिक भास्‍कर के देवघर रिपोर्टर मुकुंद पंडित इन दिनों मुश्किल में हैं. एक चेक बाउंस होने के सिलसिले में पुलिस ने उन्‍हें दो घंटे थाने में बैठाए रखा. मामला पत्रकारिता का होने के चलते एसपी ने कुछ दिनों की मोहलत देकर इस मामले को निपटाने को कहा. अब जाकर पत्रकार महोदय की जान में जान आई है.

पेशे से इलेक्‍ट्रानिक सामानों के विक्रेता मुकुंद पंडित पिछले कुछ वर्षों से पत्रकारिता भी कर रहे हैं. इनके इलेक्‍ट्रानिक सामानों के कारोबार में वर्ष 2006 में इनके द्वारा दिया गया दस हज़ार का चेक बाऊंस हो गया था. इस संबंधित मामले में 22  अगस्त को देवघर पुलिस मुकुंद पंडित को उसके दुकान से उठाकर नगर थाने ले गई. जहां लगभग दो घंटे तक इस बात को लेकर जद्दोजहद होती रही की मुकुंद को हिरासत में भेजा जाए या नहीं.

चूंकि मामला इलेक्‍ट्रानिक और प्रिंट दोनों जगहों पर एक साथ काम करने वाले पत्रकार का था,  इसलिए पुलिस के वरीय अधिकारियों के पास जब बात पहुंची तो उन्होंने मुकुंद को गिरफ़्तारी से बचने के लिए मामले को जल्‍द से जल्‍द निपट लेने की बात कह घर जाने दिया. एसपी ने उन्‍हें इस मामले का जल्‍द से जल्‍द निपटारा करा लेने को कहा. तब जाकर दो-दो प्रतिष्ठित हाउस के लिए सीना ठोक कर काम करने वाले इस पत्रकार ने राहत की सांस ली है.

इस संदर्भ में मुकेश पंडित से जब बात की गई तो उन्‍होंने कहा ऐसी कोई बड़ी बात नहीं थी. इस मामले में बहुत पहले ही कम्‍प्रोमाइज हो गया था. चूंकि केस उठाया नहीं गया था और मुझे पता नहीं था इसलिए कोर्ट में हाजिर नहीं हो पाया, जिसके बाद पुलिस ने मुझे बुलाया था. अब यह मामला खतम हो गया है कोई बड़ी बात नहीं है.

अंकित शुक्‍ला की विदाई के बाद मजबूत हुआ राघवेंद्र झा का गुट

दैनिक भास्‍कर, रांची से अंकित शुक्‍ला को चंडीगढ़ भेजे जाने के बाद खबर है कि राघवेंद्र झा गुट काफी खुश है. भास्‍कर में अभी तक अघोषित रूप से तीन लॉबी काम कर रही थी. पहली लॉबी को ओम गौड़ का संरक्षण था तो दूसरी लॉबी को राघवेंद्र का. तीसरी लॉबी यहां के दबे कुचलों की थी, जो अंकित शुक्‍ला के साथ थी. अंकित शुक्‍ला के रहते इन दो लॉबियों की मनमानी नहीं चल पा रही थी, इसलिए दोनों लॉबी एक होकर अंकित को चंडीगढ़ का रास्‍ता नपवा दिए.

अपने लांचिंग के बाद से ही भास्‍कर कंटेंट लेबल पर कोई छाप नहीं छोड़ पाया है. यहां पर उसका नम्‍बर प्रभात खबर, हिंदुस्‍तान और जागरण के बाद चौथा है. लांचिंग के समय प्रबंधन ने प्रभात खबर, हिंदुस्‍तान और जागरण से कई पत्रकारों को ऊंचे वेतन का लालच देकर तोड़ लिया. कुछ भगोड़े टाइप के लोग भी भास्‍कर के साथ हो लिए थे. लांचिंग तक सब ठीक ठाक रहा, परन्‍तु लांचिंग के बाद जब आपस में अहम और हित टकराने लगे तो गुटबाजी शुरू हो गई, जिसके बाद यहां तीन गुट बन गए.

पहला गुट संपादक ओम गौड़ का बना,  इसमें उनके साथ आए लोग तथा कुछ स्‍थानीय लोग शामिल हुए. कुछ सत्‍ता की नजदीकी देखकर जुड़ गए. दूसरा गुट भास्‍कर में पॉलिटिकल एडिटर बनकर आए राघवेंद्र झा ने तैयार किया. इसमें ज्‍यादातर ब्राह्मण लॉबी शामिल हुई. और खासकर जागरण से आए मैथिल ब्राह्मण. तीसरी लॉबी बनी अंकित शुक्‍ला की, जिसमें हिंदुस्‍तान से आए लोग तथा अपने को यहां दबा कुचला समझने वाले दूसरी जाति के लोग शामिल हुए. इसके बाद तीनों लॉबी अपनी अपनी टीम के साथ जुटी रही एक दूसरे को तरीके से सलटाने में.

असली खबर यह है कि खबरों के जरिए ब्‍लैकमेंलिंग, एवं खबरों को मेनुपुलेट करने वाली लॉबियों के बीच अंकित शुक्‍ला दीवार बन गए थे. वो खबरों को लेकर दूसरी टीम के लोगों से इतनी क्‍वेरी करते थे कि बाकी गुट उनसे परेशान था. खबरों को लेकर वो किसी भी स्थिति में समझौता करने को तैयार नहीं होते थे, जो बाकी दो टीमों को खटकता था. अंकित सीधे उपर से आए थे लिहाजा ये दोनों गुट अपने को असहज पाते थे. अलग-अलग अंकित गुट से निपटना इन दोनों गुटों के लिए मुश्किल हो रहा था. इनके अपने हित भी प्रभावित हो रहे थे.

लगातार प्रभावित हो रहे व्‍यक्तिगत हित ने ओम गौड़ और राघवेंद्र झा गुट को आपसी शीत युद्ध रोकने को मजबूर किया. इसके बाद ये लोग अपने राह में रोड़ा बने अंकित शुक्‍ल लॉबी को सलटाने में लग गए. इस तरह की स्थिति देखने के बाद इस गुट के कुछ लोग मौका मिलते ही अपने पुराने संस्‍थान या दूसरे संस्‍थानों में चले गए. जिसके बाद ये दोनों गुट मिलकर और मजबूत हो गए. पर इसके बावजूद खबरों को लेकर इस गुट की मनमानी नहीं चल पा रही थी. जिसकी काट खोजने में एका हुआ गुट लगा था.

इसमें काम आए पंजाब में प्रभार देख रहे कमलेश सिंह. कमलेश सिंह राघवेंद्र झा के इलाके के हैं. राघवेंद्र झा की एंट्री भी भास्‍कर में कमलेश सिंह के जरिए ही हुई थी. सूत्रों का कहना है कि दोनों ग्रुप ने कमलेश सिंह को आधी अधूरी सूचना देकर अंकित से होने वाली परेशानी का हवाला दिया. परन्‍तु प्रबंधन में अंकित की अच्‍छी छवि के चलते तत्‍काल उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर पाना किसी के लिए संभव नहीं था, लिहाजा उनको बुलाने के लिए उनके प्रमोशन की योजना बनी. इसमें भास्‍कर के कुछ और उच्‍च प्रबंधन के लोग लगे. जिसके बाद अंकित शुक्‍ला को प्रमोशन देकर चंडीगढ़ बुला लिया गया. यानी शिकारी जीत भी गए और शिकार को कोई गिला शिकवा भी नहीं हुआ.

अब ताजा खबर है कि यहां ओम गौड़ की वजह से यहां जोधपुर वाला कल्‍चर तो बना ही है, अब अंकित से नजदीकी रखने वालों को भी किनारे किए जाने की रणनीति तैयार की जाने लगी है. अब यहां जागरण से आने वाली लॉबी ज्‍यादा हावी हो गई है. हिंदुस्‍तान से आने वाले लोग अब अपने को उपेक्षित महसूस करने लगे हैं. बताया जा रहा है कि जिस तरह मैथिली ब्राह्मण लॉबी हावी है, उससे अन्‍य लोग काफी परेशान है. कई लोग भास्‍कर छोड़कर दूसरे संस्‍थानों में जाने के लिए अपने संपर्कों को खंगालना भी शुरू कर दिया है.

भास्‍कर, रांची से एनई अंकित शुक्‍ला डीआरई बनाकर चंडीगढ़ भेजे गए

दैनिक भास्‍कर, रांची से अंकित शुक्‍ला का तबादला चंडीगढ़ के लिए कर दिया गया है. वे रांची में एनई के पोस्‍ट पर कार्यरत थे, चंडीगढ़ में उन्‍हें डिप्‍टी रेजिडेंट एडिटर बनाकर भेजा गया है. अंकित रांची में सेंट्रल डेस्‍क की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. चंडीगढ़ में भी उन्‍हें यही जिम्‍मेदारी दी गई है. अंकित शुक्‍ला अपने लगभग एक दशक के करियर में टाइम्‍स ऑफ इंडिया, दैनिक जागरण समेत कई अखबारों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. कानपुर के रहने वाले अंकित की गिनती तेज तर्रार पत्रकारों में होती है.

पांच संपादक भी बदल नहीं पाए जोधपुर में भास्‍कर की तकदीर!

राजस्थान के दूसरे बड़े और सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाली शहर जोधपुर में दैनिक भास्कर कई उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद अभी तक अपनी मजबूत पहचान नहीं बना पाया है। इसे अभी तक पाठकों का वो भरोसा हासिल नहीं हो पाया है जो पत्रिका को मिलता रहा है। आज भी कोई समझदार पत्रकार भास्कर में जाने से पहले दो बार जरूर सोचता है।

इसका कारण भास्कर की वेतन प्रणाली, गुटबाजी एवं रोज बना रहने वाला कलह का वातावरण है। और भी अनेक कारण हैं जिनके कारण पत्रकारिता के लिए साफसुथरा महौल नहीं बना है। अब तक पांच सम्पादक भी इसे सुधार नहीं पाए हैं। भास्कर की इस हालत के लिए जिम्मेदार भी यही सम्पादक ही रहे हैं। दैनिक भास्कर के जोधपुर संस्करण की शुरुआत सन 1997 में हुई थी। उस समय राजस्थान पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार कमल श्रीमाली को स्थानीय सम्पादक बनाया गया। उस समय कमलजी पत्रिका छोड़ कर घर बैठे थे और राजस्थान केसरी जैसे छोटे अखबारों में काम कर चुके थे। भास्कर में उस समय दैनिक जलतेदीप और राजस्थान केसरी के स्टाफ की भर्ती की गई। मांगीलाल पारीक, गुरुदत्त अवस्थी, सुरेश व्यास और मोइन उल हक थे जलतेदीप से तथा ओम गौड़ राजस्थान केसरी से लिए गए। इनमें से पहले दो लोग ही अनुभवी थे, बाकी सब काम चलाऊ थे।

कमल श्रीमाली ने अपने खास सुरेश व्यास को चीफ रिपोर्टर बनाया। ओम गौड़ को उप सम्पादक बनाया गया। अब तक चालू किस्म के पत्रकार की छवि रखने वाले ओम गौड़ ने कई गौड़ बंधुओं को भर लिया जैसे नवीन गौड़, रामचन्द्र गौड़, भूपेन्द्र शर्मा आदि। ओम गौड़ की नजरें काफी दिन से सम्पादक की कुर्सी पर थीं और वे इसके लिए सही वक्त के इंतजार में थे। सात महीने बाद ही वो दिन आ गया। कमल श्रीमाली यानि खुद सम्पादक ने ही भास्कर में हड़ताल करा दी। हुआ यूं था कि मैनेजर जगदीश शर्मा ने अर्जुन पंवार नाम के एक रिपोर्टर को बिना अनुमति के गैर हाजिर रहने पर नौकरी से निकाल दिया। चतुर ओम गौड़ पहले से ही जगदीश शर्मा से साठगांठ किए हुए थे। उन्होंने पहले दिन तो हड़ताल में साथ देने का नाटक किया और अगले दिन खुद सम्पादक बन बैठे।

ओम गौड़ ने मालिकों से कहा कि वे इन हड़तालियों के बिना भी अखबार चला लेंगे। लिहाजा हड़तालियों की छुट्टी कर दी गई। ओम गौड़ तो इसी ताक में थे। कुछ लोगों का कहना है कि ओम गौड़ और जगदीश शर्मा ने ही मिल कर हड़ताल के हालात बनाए थे। खैर प्रबंधन ने हड़तालियों की छुट्टी कर दी और ओम गौड़ ने राजस्थान केसरी से अपने चेले-चेली नरेन्द्र चूरा, भंवर जागिड़ और एक महिला पत्रकार को बुला कर भास्कर में लगा दिया। मोइन उल हक और अयोध्याप्रसाद गौड़ भी लौट आए। अब ओम गौड का राज चला तो रिपोर्टरों को वसूली और दुश्मनी निकालने की छूट मिल गई। सबसे ज्यादा फायदा हुआ महिला पत्रकार को।

मैं गवाह हूं कि ओम गौड़ इस महिला पत्रकार की खबरों को खुद रीराइट करते और बाइलाइन देते थे। क्यों, यह आज तक कोई समझ नहीं पाया। महिला पत्रकार की ऑफिस में किसी से नहीं बनी। वह तब से अब तक लगातार दूसरे रिपोर्टरों के काम में खबरों में दखल देती आ रही हैं। वह चाहे जिसकी खबर छीन लेती है और कहती है कि मैं तो चार दिन से इस पर काम कर रही हूं। या मुझे सम्पादकजी ने कहा है यह खबर करने को। महिला पत्रकारपर अंकुश लगा ओम गौड़ की गैरहाजरी में। अंकुश लगाया था तत्कालीन सम्पादक मुकेश भूषण ने। उन्होंने महिला पत्रकार का ट्रांसफऱ जयपुर कर दिया। मगर वह प्रबन्धन के सामने रोना रोकर वापस आ गई। फिर ओम गौड़ पुनः सम्पादक बन कर जोधपुर लौट आए तो महिला पत्रकार के पौ बारह हो गए। ओम गौड़ ने उसे विशेष संवाददाता बना दिया।

जोधपुर से अपने ट्रांसफर के पहले ओम गौड ने महिला पत्रकार को नजदीकी जिले में जहां से पुलआऊट छपता है,  का सम्पादक बना दिया। उनकी प्लानिंग बाद में उसे जोधपुरका सम्पादक बनाने की थी। मगर यह प्लानिंग 15 दिन में ही फेल हो गई। नए व वर्तमान सम्पादक कुलदीप व्यास ने 15 दिन में ही महिला पत्रकार को वहां से हटा कर जोधपुर बुला लिया। कुलदीप व्यास ने ओम गौड़ के कई चेलों का सफाया किया, लेकिन आखिर खुद ही उनके चक्कर में आ गए।  हां यह बात सही है कि कुलदीप व्यास ने प्रसार संख्या के मामले में भास्कर को पत्रिका के बराबर लाकर ख़ड़ा कर दिया, लेकिन डीबी स्टार नाम के भंडाफोड़ सप्लीमेन्ट की बदौलत हुआ यह फायदा साथ में बदनामी भी लेकर आया है। सप्लीमेन्ट में लगे रिपोर्टर व फोटोग्राफर भंडाफोड़ के नाम पर शहर में जमकर वसूली कर रहे हैं। इसके अलावा भी भास्कर की इमारत कमजोर है। क्योकि वहां ज्यादातर छोटे अखबारों से आए ऐसे पत्रकार भरे पड़े हैं जो ग्रेजुएट भी नहीं हैं। खराब सैलेरी सिस्टम के कारण अच्छे पत्रकार वहां जाना नहीं चाहते। इसलिए छोटे अखबारों से आए कम जानकार लोगों से काम चलाना प्रबन्धन की मजबूरी है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

सतीश का तबादला, रवींद्र कुमार कार्यमुक्‍त

दिव्‍य हिमाचल, सालोन में कार्यरत सतीश शर्मा का तबादला बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) के लिए कर दिया गया है. वे यहां के जिला संवाददाता बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि प्रबंधन इन्‍हें जिला प्रभारी बना सकता है. सतीश इसके पहले अमर उजाला, बिलासपुर में ही कार्यरत थे.

भड़ास4मीडिया को एक मेल के जरिए मिली सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर, रायपुर में कार्यरत प्रोडक्शन मैनेजर रवींद्र कुमार दुबे को कार्यमुक्त कर दिया गया है. बताया जाता है कि उन पर कुछ आरोप लगे थे. प्रबंधन ने आरोपों की जांच के बाद उन्हें कार्यमुक्त कर दिया. भड़ास4मीडिया के पास रवींद्र कुमार दुबे का मोबाइल नंबर न होने के कारण उनसे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका.

वीर अर्जुन के पूर्व पत्रकार डा. टीडीएस आलोक का निधन

शिमला एचपी यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. टीडीएस आलोक का रविवार को निधन हो गया। 56 वर्षीय डॉ. आलोक एक साल से बीमार चल रहे थे। कुल्लू की आनी तहसील से संबंध रखने वाले डॉ. आलोक करीब 15 साल से एचपीयू में पत्रकारिता विभाग में कार्यरत थे। वह कई बार विभागाध्यक्ष भी रहे। अपने सरल स्वभाव के धनी डॉ. आलोक ‘वीर अर्जुन’  और ‘गिरिराज’  जैसे समाचार पत्रों में भी सेवाएं दे चुके थे।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में बतौर उप संपादक करिअर की शुरुआत करने वाले डॉ. आलोक की साहित्य में खास रुचि थी। डॉ. आलोक के निधन पर राज्यपाल उर्मिला सिंह, मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह समेत कई राजनेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी टीडीएस आलोक के निधन पर शोक जताया। कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी, रजिस्ट्रार सीपी वर्मा और दूसरे अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके निधन पर दुख प्रकट किया है। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक बीडी शर्मा ने भी दुख व्यक्त किया है। साभार : भास्‍कर

भोपाल सेंट्रल प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष बने गणेश साकल्‍ले, राजेश सिरोठिया महासचिव

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पत्रकारों द्वारा संचालित सेन्ट्रल प्रेस क्लब के भोपाल में सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न हुए। जिसमें दैनिक भास्कर के संस्करण डीबी स्टार के कार्यकारी संपादक गणेश साकल्ले अध्यक्ष तथा नव दुनिया के संयुक्त संपादक राजेश सिरोठिया महासचिव बने। सेन्ट्रल प्रेस क्लब की नवगठित कार्यकारिणी की घोषणा सेन्ट्रल प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूण कुमार भंडारी ने गुरूवार 11 अगस्त 2011 को सेन्ट्रल प्रेस क्लब की विशेष बैठक के दौरान की।

सेन्ट्रल प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के समस्त पदों के लिए निवर्तमान अध्यक्ष एनके सिंह ने प्रस्ताव रखा। बैठक में उपस्थित सभी पत्रकारों ने नवगठित कार्यकारिणी का सर्वानुमति से गठन किए जाने का समर्थन किया। जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार मदनमोहन जोशी, महेश श्रीवास्तव, मनोज माथुर, सेन्ट्रल प्रेस क्लब राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूण कुमार भंडारी, सेन्ट्रल प्रेस क्लब भोपाल के निवर्तमान अध्यक्ष एनके सिंह, मुख्य समन्वयक विजय कुमार दास ने अपने-अपने विचार रखे।

सेन्ट्रल प्रेस क्लब के नवागत अध्यक्ष गणेश साकल्ले तथा महासचिव राजेश सिरोठिया ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सेन्ट्रल प्रेस क्लब की उपयोगिता प्रेस क्लब द्वारा अभी तक किए उल्लेखनीय कार्यों, उसके महत्व और गठन पर प्रकाश डाला। सभी वक्ताओं ने एक स्वर से यह भी कहा कि देश के अन्य राज्यों की भांति सेन्ट्रल प्रेस क्लब अपनी पहचान बनाएगा। साथ ही पत्रकारिता के पवित्र पेशे के उदात्त मानदण्डों को अंगीकार करते हुए काम करेगा।

सेन्ट्रल प्रेस क्लब की नवगठित कार्यकारिणी के अध्यक्ष पद पर गणेश साकल्ले, दैनिक भास्कर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुश्री सुचांदना गुप्ता, द टाइम्स आफ इंडिया, अरविन्द शर्मा, पीटीआई, उपाध्यक्ष क्रांति चतुर्वेदी, नवभारत, मृगेन्द्र सिंह, दैनिक जागरण, सुश्री शाइनी के.एस, आउटलुक अंग्रेजी., अजय त्रिपाठी, साधना न्यूज, महासचिव राजेश सिरोठिया, नवदुनिया, संयुक्त सचिव प्रकाश भटनागर, एलएन स्टार, भारत शास्त्री, लाइव इंडिया, कन्हैया लोधी, राजएक्सप्रेस, राहुल नरोन्हा, हिन्दुस्तान टाइम्स, संजय रायजादा, सहारा समय, अंकित जैन, ईएमएस, सुश्री आरती शर्मा, सांध्यप्रकाश, कोषाध्यक्ष के पद पर के.डी. शर्मा, दैनिक नई दुनिया को सर्वसम्मति से चुना गया।

कार्यकारिणी में अरूण कुमार भण्डारी, नरेन्द्र कुमार सिंह, उमेश त्रिवेदी, विनोद पुरोहित, रमेश शर्मा, विजय कुमार दास, अमित जैन, रंजन श्रीवास्तव, अरूण पटेल, शिव अनुराग पटैरिया, हदयेश दीक्षित, अक्षत शर्मा, राकेश दीवान, आत्मदीप, शशिकांत त्रिवेदी, जगदीप सिंह बैस, गिरीश शर्मा, वीरेन्द्र सिन्हा, प्रशांत जैन, पंकज पाठक, मधुकर द्विवेदी, मनीष गौतम, शरद द्विवेदी, सोमदत्त शास्त्री, महेन्द्र गगन, नासिर हुसैन, सुश्री रूबी सरकार, संजीव श्रीवास्तव, सरमन नगेले, विनोद उपाध्यय, प्रदीप गुप्ता पल्ली को सर्वसम्मति से चुना गया है।

संरक्षक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन जोशी, महेश श्रीवास्तव, डॉ. मनोज माथुर, राजेन्द्र शर्मा, डॉ. सुरेश महरोत्रा, गिरजा शंकर, विजयदत्त श्रीधर, लज्जा शंकर हरदेनिया को रखा गया है। सेन्ट्रल प्रेस क्लब की गतिविधियों को गति देने तथा उसके सुचारू रूप से संचालन के साथ-साथ अतिथियों से समन्वय करने के लिये विजय कुमार दास को मुख्य समन्वयक बनाया गया है। शिवअनुराग पटैरिया, पंकज पाठक और वीरेन्द्र सिन्हा को समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सेन्ट्रल प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूण कुमार भंडारी ने नई कार्यकारिणी की घोषणा करने के बाद यह भी कहा कि सेन्ट्रल प्रेस क्लब की राष्ट्रीय कार्यकारिणी यथावत रहेगी। आभार व्यक्त सेन्ट्रल प्रेस क्लब के निवर्तमान उपाध्यक्ष पंकज पाठक ने किया। सेन्ट्रल प्रेस क्लब द्वारा आयोजित इस विशेष बैठक में राजधानी भोपाल के अनेक पत्रकार मौजूद थे। साभार : भास्‍कर

भास्‍कर ने छापी न्‍यायालय की फोटो, जज को चिट्ठी लिखकर कार्रवाई की मांग की गई

इंदौर। दैनिक भास्कर के इंदौर संस्करण में प्रकाशित एक खबर पर इंदौर के एक नागरिक ने एक शिकायत मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी है, जिसमें 21 जुलाई को अखबार में प्रकाशित एक फोटो को कोर्ट की अवमानना बताते हुए अखबार के मालिक, संपादक एवं फोटो लेने वाले के खिलाफ आपराधिक केस चलाने की मांग की है।

भास्‍कर ने अपने 21 जुलाई के इंदौर सस्‍करण के पेज नम्‍बर 4 पर सुगनीदेवी जमीन घोटाले के मामले में एक खबर छापी थी। इस खबर में कोर्ट के भीतर का फोटो प्रकाशित किया गया था तथा उस के नीचे लिखा था कि विशेष अदालत में लोकायुक्त पुलिस अधिकारी। इसी खबर को न्यायालय की अवमानना बताते हुए चीफ जस्टिस से संज्ञान लेने की मांग की गई है। पत्र में  कहा गया है कि न्यायालय के भीतर के फोटो प्रकाशित नहीं किए जा सकते है, यह कोर्ट की अवमानना है, लेकिन उक्त अखबार ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए नियम कायदों को ताक पर रख दिया है। इसलिए अखबार के जिम्‍मेदार लोगों खिलाफ आवश्‍यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

राजेश यादव बने विशेष संवाददाता, चतुरेश देंगे इस्‍तीफा

दैनिक भास्कर, नागपुर में कार्यरत सीनियर रिपोर्टर राजेश यादव को प्रमोशन हो गया है। राजेश को विशेष संवाददाता बनाये गए हैं। राजेश यादव एक से एक बेहतरीन खबर को ब्रेक करने के लिए नागपुर में मशहूर हैं। उन्हें बेहतरीन रिपोर्टिंग के लिए विदर्भ के प्रतिष्ठित यशवंत बाबू देशमुख पत्रकारिता पुरस्कार और क्रांतिकारी कुंदन लाल गुप्त पत्रकारिता सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। दैनिक भास्कर के नागपुर संस्करण में यह पहला ऐसा मौका है जब किसी रिपोर्टर को प्रमोट कर विशेष संवाददाता बनाया गया है।

अमर उजाला, वाराणसी से खबर है कि जूनियर सब एडिटर चतुरेश तिवारी संस्‍थान के साथ अपनी पारी आगे नहीं बढ़ाएंगे। वे जल्‍द ही इस्‍तीफा देने वाले हैं। वे कहां ज्‍वाइन करने वाले हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। चर्चा है कि वे सब एडिटर के रूप में किसी अखबार में ज्‍वाइन करने वाले हैं। हालांकि चर्चा थी कि वे अपने वरिष्‍ठों के व्‍यवहार से तंग आकर संस्‍थान को बाय कर रहे हैं।

भास्‍कर के फोटोग्राफर पर लाठीचार्ज की सुषमा स्‍वराज ने निंदा की

लोकसभा के विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने दैनिक भास्कर के फोटो पत्रकार पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करने के साथ ही गृहमंत्री पी.चिदंबरम के इस्तीफे की मांग की है। घायल पत्रकार शेखर घोष की तस्वीरों को देख सुषमा स्वराज रो पड़ीं। दिल्‍ली पुलिस ने भाजयुमो का प्रदर्शन कवर करते समय दैनिक भास्‍कर के फोटोग्राफर शेखर घोष को समय जमकर पीट दिया था।

राज्‍य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी केंद्र सरकार आरोप लगाया कि उसके इशारे पर लाठीचार्ज किया गया। दोनों नेताओं ने दिल्ली पुलिस पर हल्ला बोलते हुए कहा कि पुलिस केंद्र सरकार की एजेंट की तरह काम कर रही है। निहत्थे कार्यकर्ताओं की पिटाई मीडिया में नहीं आ सके, इसलिए पुलिस ने दैनिक भास्कर के पत्रकार की जमकर पिटाई कर दी। दैनिक भास्कर के घायल पत्रकार शेखर घोष की तस्वीर को देखकर भाजपा नेता सुषमा स्वराज भावुक हो गयीं। उन्होंने कहा कि इस तरह तो अपराधियों की भी दिल्ली पुलिस पिटाई नहीं करती है। इस घटना कि कड़े शब्दों में निंदा करते हुए गृहमंत्री पी. चिदंबरम के इस्तीफे की मांग की है। ( इनपुट : भास्‍कर)

मांगू सिंह एवं खलील शरीफ की नई पारी

राजस्‍थान से शीघ्र प्रकाशित होने जा रहे प्रात:कालीन समाचार पत्र दैनिक अम्‍बर के साथ मांगू सिंह शेखावत ने अपनी नई पारी शुरू की है. इन्‍हें झुंझनू जिले का ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. मांगू सिंह लम्‍बे समय तक झुंझनू जिला मुख्‍यालय पर पत्रकारिता कर रहे हैं. इसके पहले ये कई वर्षों तक दैनिक भास्‍कर, झुंझनू के ब्‍यूरोचीफ रह चुके हैं. इसके अलावा भी इन्‍होंने कई अखबारों को अपनी सेवाएं दी हैं.

टीवी9, मुंबई से खलील शरीफ गिरकर ने इस्‍तीफा दे दिया है. ये यहां पर रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक साकाल, मुंबई के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां भी रिपोर्टर बनाया गया है. पिछले पांच सालों से पत्रकारिता में सक्रिय खलील कई अन्‍य संस्‍थानों को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर से अजय उमट का इस्‍तीफा, टीओआई में सीनियर एडिटर बने

दैनिक भास्‍कर, दिल्‍ली से नेशनल पॉलिटिकल एडिटर अजय उमट ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अब टाइम्‍स ऑफ इंडिया से जुड़ गए हैं. उन्‍हें टाइम्‍स ऑफ इंडिया, अहमदाबाद का सीनियर एडिटर बनाया गया है. मूल रूप से गुजरात के रहने वाले अजय उमट पिछले ढाई दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं.

हिंदी, अंग्रेजी एवं गुजराती भाषा पर मजबूत पकड़ रखने वाले अजय उमट ने करियर की शुरुआत 1987 में जनसत्‍ता-लोकसत्‍ता से की थी. इसके बाद वे टाइम्‍स ऑफ इंडिया गुजराती, इंडिया टुडे गुजराती के साथ वरिष्‍ठ पदों पर रहे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद वे 1992 में गुजरात समाचार से रेजिडेंट एडिटर के रूप में जुड़ गए. 2003 तक यहां रहने के दौरान इन्‍होंने गुजरात दंगा, गुजरात भूकंप समेत कई बड़ी खबरों का कवरेज किया. 2003 में दिव्‍य भास्‍कर से जुड़ गए. दिव्‍य भास्‍कर को गुजरात में जमाने में इन्‍होंने अपना अहम योगदान दिया. बाद में इन्‍हें दिव्‍य भास्‍कर का स्‍टेट हेड बना दिया गया था. पिछले दिनों ही अजय उमट को प्रमोट कर दिव्‍य भास्‍कर से दैनिक भास्‍कर लाया गया था. इनकी राजनीतिक पकड़, जानकारी एवं विश्‍लेषण की क्षमता को देखते हुए इन्‍हें नेशनल पॉलिटिकल एडिटर बना दिया गया था.

बड़ौदा के एमएस यूनिवर्सिटी से बीएससी, एमसडब्‍ल्‍यू एवं एलएलबी करने वाले अजय उमट पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं मनमोहन सिंह के कई विदेशी दौरों में उनके साथ रहे हैं. अमेरिका, रुस, त‍जाकिस्‍तान, सीरिया, ब्राजील, मारीशस, थाइलैंड, केन्‍या, स्विटजरलैंड, तंजानिया, यूथोपिया, साउथ अफ्रीका समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं. पिछले साल इन्‍हें बेस्‍ट एडिटर का हरेंद्र दवे पुरस्‍कार भी मिला है. इसके अलावा भी इन्‍हें कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है. माना जा रहा है कि गुजरात में बेहतर मौका मिलने के चलते इन्‍होंने भास्‍कर को बाय किया है.

दैनिक भास्कर, शिमला को चाहिए सस्ता संपादक

दैनिक भास्कर,  शिमला पिछले दो माह से बिना संपादक के चल रहा है। देश के सबसे तेज बढ़ते अखबार को शिमला के लिए कोई संपादक नहीं मिल रहा। भास्कर में यूं तो संपादकों की फौज है,  मगर शिमला के लिए अखबार को सस्ता संपादक चाहिए जो कम से कम पैसे में काम चला सके। अखबार ने 2008 में शिमला को फुल एडिशन का दर्जा दिया था।

यहां पहले संपादक के तौर पर मुकेश माथुर ने ज्वाइन किया था। उनका बजट 3 प्लस था। इसके बाद कीर्ति राणा को शिमला भेजा गया था मगर उनका बजट 4 प्लस था। यही बजट उनकी विदाई का कारण बना। प्रबंधन को शिमला के लिए ऐसा संपादक चाहिए जो 35 हजार से अधिक की मांग न करें। इसके लिए अखबार ने कई लोगों से बात की मगर किसी ने जाने के लिए हामी नहीं भरी। मजबूरन प्रबंधन ने दूसरी यूनिट के लोगों को बारी-बारी से शिमला भेजा।

सबसे पहले जालंधर से डिप्टी न्यूज एडिटर चंदन स्वप्निल को भेजा, जो एक सप्ताह काम करने के बाद वहां से दौड़ गए। उसके बाद अमृतसर के प्रभारी रणदीप वशिष्ट को भेजा, 15 दिनों के बाद उन्हें भी वापस बुलाया गया। हाल ही में बठिंडा के प्रभारी रह चुके चेतन शारदा को शिमला भेजा मगर उनका बजट 6 प्लस था इसलिए वह भी लौट गए। अब आलम यह है कि शिमला भास्कर बिना प्रभारी के चल रहा है। ऑफिस में अब हर कोई बॉस की भूमिका में है।

ब्यूरो प्रभारी प्रकाश भारद्वाज और डेस्क इंचार्ज ब्रह्मनंद देह्लरानी दोनों अपने को बॉस मान कर टीम पर रौब झाड़ रहे हैं। कुल मिलाकर ऑफिस कई गुटों में बंट गया है। अखबार से क्वालिटी की खबरें नदारद हैं और प्रसार संख्या तेजी से गिरती जा रही है। प्रबंधन ने समय रहते अगर कोई उपाए नहीं किया तो शिमला में भास्कर ढूंढे नहीं मिलेगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

नीतेश, शैलेंद्र एवं पारुल की नई पारी

दैनिक भास्‍कर, इंदौर से नितेश पाल ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर करेस्‍पांडेंट थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी इंदौर में ही दबंग दुनिया के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां स्‍पेशल रिपोर्टर बनाया गया है. भास्‍कर में पूर्व संपादक अवनीश जैन के करीबियों में गिने जाने वाले नितेश पिछले दिनों एक्‍सीडेंट के बाद लम्‍बी छुट्टी पर चले गए थे. इस संदर्भ में जब नितेश से बात की गई तो उन्‍होंने दबंग दुनिया ज्‍वाइन करने की पुष्टि की.

नवभारत, दंतेवाड़ा से शैलेंद्र ठाकुर ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे तथा पिछले सात सालों से नवभारत से जुड़े हुए थे. इन्‍होंने अपनी पारी दैनिक भास्‍कर के साथ दंतेवाड़ा में ही शुरू की है. उन्‍हें ब्‍यूरो प्रभारी बनाया गया है. माना जा रहा है कि सात साल तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षाकृत वेतन और पदोन्‍नति न मिलने के चलते शैलेंद्र ने नवभारत को बाय किया है.

पारुल ने साधना न्‍यूज के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है. उन्‍हें रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. इसके पहले वे एआईआर, एचटी और द न्‍यूज से भी जुड़ी रही हैं.

भास्‍कर ग्रुप में एजीएम बने बिश्‍वराज चौधरी, सन टीवी ने के विजय कुमार को सीईओ बनाया

बिश्‍वराज चौधरी ने रेडियो सिटी से इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां डीजीएम के पद पर कार्यरत थे.  वे रेडिया सिटी के लिए एलाइंस, नए बिजनेस तथा इसके प्रमोशन की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी भास्‍कर ग्रुप के साथ शुरू की है.  मुंबई में उन्‍होंने मारकॉम के एजीएम के रूप में ज्‍वाइन किया है. वे ग्रुप के वीपी संजीव कोटनाला को रिपोर्ट करेंगे. बिश्‍वराज 11 साल से इस क्षेत्र में हैं. इसके पहले वे जेट एयरवेज को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

सन टीवी प्रबंधन ने सीओओ के विजय कुमार को प्रमोट करके सीईओ बना दिया है. प्रबंधन ने यह जिम्‍मेदारी के विजय कुमार के कार्य क्षमता और कर्मठता को देखते हुए लिया है. पिछले 18 सालों से वे ग्रुप को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सन 1993 में उनकी नियुक्ति सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में हुई थी. सन टीवी के सीओओ अजय विद्यासागर के इस्‍तीफा देने के बाद के विजय कुमार को सीओओ बना दिया गया था.

अजय उमट बने नेशनल पालिटिकल एडिटर, अवनीश जैन को स्टेट हेड की जिम्मेदारी

: भास्कर में बदलाव जारी, ट्रांसफर किए गए संपादकों ने नई जिम्मेदारी संभाली :  दैनिक भास्‍कर में शीर्ष स्‍तर पर कई बदलाव किए गए हैं. दिव्‍य भास्‍कर, गुजरात के स्‍टेट हेड अजय उमट को नेशनल पॉलिटकल एडिटर बनाकर दिल्‍ली बुला लिया गया है. अजय को प्रमोट करके मेन स्‍ट्रीम में लाया गया है. अब वे यहां दैनिक भास्‍कर की जिम्‍मेदारी संभालेंगे.

कुछ दिन पहले दैनिक भास्‍कर, इंदौर के स्‍थानीय संपादक के पद से हटाकर गुजरात भेजे गए अवनीश जैन को भी प्रमोट कर दिव्‍य भास्‍कर का स्‍टेट हेड बना दिया गया है. वे अजय उमट की जगह लेंगे. दैनिक भास्‍कर, जयपुर में एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर हरिश्‍चंद्र सिंह को भी प्रमोट कर उदयपुर का आरई बना दिया गया है. अभी तक उदयपुर में स्‍थानीय संपादक के रूप में काम देख रहे सुदेश गौड़ को श्रीगंगानगर भेज दिया गया है. वे यहां भी आरई की भूमिका निभाएंगे. श्रीगंगानगर में स्‍थानीय संपादक रहे सुधीर मिश्रा को जयपुर बुला लिया गया है. उन्‍हें भास्‍कर के तीन एडिशनों के कोआर्डिनेशन का काम सौंपा गया है. डीबी स्‍टार, भोपाल से विजय सिंह चौहान को कोटा भेज दिया गया है. वे यहां के स्‍थानीय संपादक होंगे.  कोटा से अनूप शाह को भोपाल बुला लिया गया है. सभी लोगों ने अपनी जिम्‍मेदारियां संभाल ली है.

बिहार में प्रभात खबर से खतरा महसूस कर रहा है हिंदुस्तान

: सुपारी स्कीम – प्रभात खबर से आदमी लाइए, 10 से 25 हजार पाइए : हिंदुस्तान प्रभात खबर से आशंकित है। उसे अब लगने लगा है कि भास्कर जब आएगा, तब आएगा लेकिन प्रभात खबर जिस आक्रामक और गठी हुई रणनीति से मजबूत होता जा रहा है, उसे नहीं रोका गया तो भास्कर आने से पहले ही बिहार में हिंदुस्तान की एकछत्र लीडरशिप ढह जाएगी। पिछले दिनों दिल्ली में एचटी मीडिया और हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स के शीर्ष लोगों की बैठक हुई। बैठक में प्रभात खबर को लेकर चिंता जाहिर की गई।

 

इस बैठक में हिंदुस्तान के सीईओ अमित चोपड़ा, एचटी मीडिया के डाइरेक्टर मार्केटिंग बिनोय रायचौधरी और हिंदुस्तान के प्रधान संपादक को कहा गया कि वे तुरंत प्रभात खबर की गति अवरुद्ध करने का काम शुरू कर दें। इसके बाद, ये लोग पटना आए। अमित चोपड़ा और बिनोय रायचौधरी ने पटना में वरिष्ठों की बैठक की और बिहार व झारखंड के परिदृश्य का रिव्यू किया। इस रिव्यू में इन लोगों ने कहा कि हमें प्रभात खबर को कम करके आंकने की गलती नहीं करनी चाहिए। प्रभात खबर ने न सिर्फ हमारी प्रसार संख्या में बहुत सधे लेकिन चुपचाप तरीके से सेंध लगा रहा है बल्कि हमारा विज्ञापन रेवेन्यू भी खाने लगा है। इसलिए जरूरी है कि प्रभात खबर को तोड़ा जाए।

इन लोगों स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रभात खबर से खतरा है और इसलिए रणनीति प्रभात खबर को रोकने की होनी चाहिए। नए लोगों को लेने में प्रभात खबर के अच्छे लोगों को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए एचआर की रेफरल स्कीम भी लागू करने की घोषणा की गई। इस स्कीम के तहत, प्रभात खबर का आदमी लाने पर, लाए गए आदमी के ग्रेड के हिसाब से प्रभात खबर से आदमी लाने वाले हिंदुस्तान के स्टाफ को 10 से 25 हजार रुपए का रेफरल दिया जाएगा। अमित चोपड़ा व बिनोय रायचैधरी ने भागलपुर को लेकर खास चिंता जाहिर की।

हिंदुस्तान प्रबंधन ने इसके लिए सबसे पहले प्रभात खबर की मैनपावर तोड़कर उसे कमजोर करने की रणनीति बनाई है। सर्कुलेशन व मार्केटिंग के लोगों के साथ एडीटोरियल के लोगों से भी हिंदुस्तान संपर्क कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अभी प्रभात खबर के लोगों को किसी भी कीमत पर तोड़ना है, बाद में उन सबको जरूरत के हिसाब से यूपी या झारखंड ट्रांसफर कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, रांची में भी हिंदुस्तान ने यही रणनीति अपनाई थी कि भास्कर के लोगों को ज्यादा पैसा देकर तोड़ा और फिर उन्हें इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया।

पिछले हफ्ते पटना आए प्रधान संपादक शशि शेखर ने भी इस रेफरल स्कीम को दोहराया। यानी प्रभात खबर के लोगों के लिए हिंदुस्तान अपने स्टाफ को सुपारी दे रहा है। उन्होंने भी एडीटोरियल मीटिंग में प्रभात खबर की चर्चा की और कंटेंट सुधारने और दिल्ली से तैयार कंटेंट स्ट्रेटजी का 100 फीसदी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीनियर्स की मीटिंग में उन्होंने एडीटोरियल मैनपावर पर बात की और रेफरल स्कीम को दोहराया। कहा यह जा रहा है कि यह रेफरल स्कीम सिर्फ प्रभात खबर का स्टाफ लाने के लिए ही है।

हिंदुस्तान के सूत्रों ने बताया कि हिंदुस्तान के पत्रकार प्रभात खबर के साथियों के नाम वहां दे रहे हैं कि वे इनको ला सकते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि हिंदुस्तान के स्टाफरों ने पिछले हफ्ते प्रभात खबर के 15-18 पत्रकारों की सूची भी प्रबंधन को दी है कि इनको वे लोग ला सकते हैं। ऐसी खबर है कि पटना में प्रभात खबर के कुछ लोगों से शशि शेखर मिले भी और कुछ लोगों से बात की। हम आपको यह बताते चलें कि प्रभात खबर भागलपुर जिले में पहले दिन से ही प्रसार संख्या में सबसे आगे चल रहा है और मुजफ्फरपुर में वह नंबर एक पर काबिज हिंदुस्तान से मात्र 1000-1500 कापी पीछे है। अब इन संस्करणों के जिलों में भी प्रभात खबर तेजी से अपनी पकड़ बनाने लगा है और कई जिलों में आगे भी हो गया है।

मुजफ्फरपुर व भागलपुर में हिंदुस्तान ने प्रभात खबर को बहुत हल्के से लिया था लेकिन भागलपुर में प्रभात की लांचिंग के हफ्ते भर बाद ही हिंदुस्तान को अपनी साख बचाने के लिए दाम कम करने पड़े थे। पटना में भी प्रभात खबर अपनी पकड़ लगातार मजबूत करता जा रहा है। कुल मिलाकर बिहार में अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही। झारखंड में तो पहले से ही हिंदुस्तान पिछड़ चुका है। आईआरएस के आकड़े कुछ भी कहें लेकिन एबीसी के आकड़ों में हिंदुस्तान प्रभात से बहुत पीछे छूट चुका है। वैसे भी आईआरएस में प्रसार संख्या का असर आने में एक से दो साल का समय लगता है।

पिछले दिनों हिंदुस्तान बिहार व झारखंड के कई वरिष्ठ लोगों ने प्रभात खबर ज्वाइन किया। हिदुस्तान के कई लोग आज भी प्रभात से संपर्क में हैं। अब हिंदुस्तान पैसे के बूते किसी भी कीमत पर बाजी पलटना चाहता है। देखना है कि वह उसमें कहां तक सफल होता है। लेकिन हिंदुस्तान की दिक्कत यह है कि उसके स्टाफ अपनी शीर्ष लीडरशिप को भरोसे की नजरों से नहीं देख पा रहे हैं और न शीर्ष लीडरशिप को बिहार के अपने लीडर्स पर भरोसा है। न वहां स्थानीय संपादकों की चलती है और न प्रबंधकों की, सबको एक-एक पैसे के लिए दिल्ली की मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके चलते हिंदुस्तान में आशंका का माहौल बना हुआ है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

राकेश रंजन एवं अमित दास का भास्‍कर से इस्‍तीफा

डीबी स्‍टार, रांची से राकेश रंजन ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर रिपोर्टर थे. वे कुछ महीने पहले ही भास्‍कर ग्रुप से जुड़े थे. चर्चा है कि वे आई नेक्‍स्‍ट, जमशेदपुर के साथ अपनी नई पारी चीफ रिपोर्टर के रूप में शुरू करने वाले हैं. माना जा रहा है कि राकेश ने भास्‍कर के आतंरिक गुटबाजी से परेशान होकर यह कदम उठाया है.

उनके पहले दैनिक भास्‍कर, रांची से अमित दास ने भी इस्‍तीफा दे दिया था. वे यहां पर फोटोग्राफर थे. अमित ने अपनी नई पारी रांची में ही प्रभात खबर के साथ शुरू की है. वे भी कुछ समय पहले ही भास्‍कर ज्‍वाइन किया था. यहां की गुटबाजी से परेशान तमाम लोग अपने पुराने सम्‍पर्कों को खंगाल कर वापस लौटने की जुगत लगा रहे हैं. खबर है कि आने वाले दिनों में कई और विकेट गिर सकते हैं.

आरपी सिंह जनसत्‍ता से जुड़े

 

आज की जनधारा से आरपी सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर प्रोविंसियल चीफ के पद पर कार्यरत थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी रायपुर में जनसत्‍ता के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां सीनियर सब एडिटर बनाया गया है. आरपी इसके पहले भी कई अखबारों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

आज की जनधारा से आरपी सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर प्रोविंसियल चीफ के पद पर कार्यरत थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी रायपुर में जनसत्‍ता के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां सीनियर सब एडिटर बनाया गया है. आरपी इसके पहले भी कई अखबारों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

धर्मेंद्र सिंह फिर भास्‍कर से जुड़े, आलोक का बनारस तबादला

पत्रिका, ग्‍वालियर में समाचार संपादक रहे धर्मेन्‍द्र सिंह भदौरिया ने पत्रिका से अपना नाता तोड़ लिया है. सात महीने की पत्रिका की नौकरी उन्‍हें रास नहीं आई. पत्रिका ने धर्मेंद्र का तबादला चेन्‍नई के लिए कर दिया था. जिसके बाद से वे काफी परेशान हो गए थे. धर्मेंद्र भास्‍कर में विशेष संवाददाता के रूप में अपनी जमी जमाई नौकरी छोड़कर आए थे. उन्‍होंने फिर से भास्‍कर का दामन थाम लिया है. वे बिजनेस भास्‍कर, भोपाल से जुड़ गए हैं. उन्‍हें फिर विशेष संवाददाता बनाया गया है.

हिंदुस्‍तान, लखनऊ के वरिष्‍ठ संवाददाता आलोक पराड़कर का तबादला बनारस कर दिया गया है. आलोक ने अपना तबादला रुकवाने की पूरी कोशिश की लेकिन उन्‍हें सफलता नहीं मिल पाई. खबर है कि वो संस्‍थान से इस्‍तीफा देने का मन बना चुके हैं.  सूत्रों का कहना है कि वह लखनऊ में ही जागरण के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं परन्‍तु बात बन नहीं पा रही है.

प्रभात खबर, रांची के डीएनई बने आलोक, संदीप खबर भारती पहुंचे

दैनिक भास्‍कर, रांची से आलोक कुमार ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर चीफ सब एडिटर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी प्रभात खबर, रांची के साथ शुरू की है. यहां इन्‍हें डीएनई बनाया गया है. वे यहां पर कोआर्डिनेशन देखेंगे.आलोक भास्‍कर की लांचिंग टीम के सदस्‍य थे. भास्‍कर ज्‍वाइन करने से पहले वे सीनियर सब के रूप में हिंदुस्‍तान, रांची को अपनी सेवाएं दे रहे थे. आलोक ने भास्‍कर के लिए कई खबरें ब्रेक की थीं. इन दिनों सिटी डेस्‍क पर जिम्‍मेदारी निभा रहे थे. आलोक कई अन्‍य अखबारों को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इनकी गिनती तेज तर्रार पत्रकारों में होती है.

हमार टीवी से इस्‍तीफा देने वाले संदीप सिंह ने खबर भारती का दामन थाम लिया है. उन्‍होंने एसोसिएट प्रोड्यूसर के पद पर ज्‍वाइन किया है. संदीप ने अपने करियर की शुरुआत बीएजी के साथ शुरू की थी, इसके बाद वो हमार टीवी से जुड़ गए थे.

अरविंद, पवन एवं उपेंद्र का इस्‍तीफा

वॉयस ऑफ लखनऊ से अरविंद कांत त्रिपाठी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. चर्चा है कि वे संपादक पीएम मिश्रा के व्‍यवहार से परेशान होकर इस्‍तीफा देने पर मजबूर हुए.

दैनिक भास्‍कर, चंडीगढ़ को पवन कुमार ने बाय कर दिया है. वे यहां सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे. पवन ने अपनी नई पारी आज समाज, अंबाला के साथ शुरू की है. वे यहां भी सब एडिटर के रूप में अपनी जिम्‍मेदारी निभाएंगे.

दैनिक भास्‍कर, चंडीगढ़ से उपेंद्र गुप्‍त ने भी इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर चीफ फोटोग्राफर के पद पर कार्यरत थे. वे काफी समय से भास्‍कर से जुड़े हुए थे. बताया जा रहा है कि वे अपनी नई पारी दिल्‍ली पोस्‍ट के साथ शुरू करने जा रहे हैं. उपेंद्र का जाना भास्‍कर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

अमर उजाला के अशोक एवं दैनिक जागरण के डा. अनुज के बारे में नई खबर

भड़ास4म‍ीडिया को मेल से मिली एक अपुष्‍ट सूचना के मुताबिक अमर उजाला, बहराइच से खबर है कि ब्‍यूरो इंचार्ज अशोक उपाध्‍याय को प्रबंधन ने हटा दिया है. प्रबंधन को उनके खिलाफ आफिस टाइम में शराब पीने की शिकायत मिली थी. कार्यालय के सेकेंड मैन अतुल अवस्‍थी को बहराइच का प्रभार सौंप दिया गया है.

 

दैनिक जागरण, रामगढ़ से खबर है कि यहां के ब्‍यूरोचीफ डा. अनुज को रांची बुला लिया गया है. उनकी जगह पिछले साल जागरण ज्‍वाइन करने वाले तरुण बागी को नया ब्‍यूरोचीफ बना दिया गया है. हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि उन्‍हें तात्‍कालिक तौर पर रांची बुलाया गया है या परमानेंट बुलाया गया है. इस संदर्भ में जब डा. अनुज से बात की गई तो उन्‍होंने इसे कोरा अफवाह बताते हुए कहा कि वे अब भी रामगढ़ के ब्‍यूरोचीफ हैं तथा रांची कुछ टेक्‍नीकल जानकारी के लिए आए हुए हैं.

भास्‍कर, इंदौर के आरई अवनीश जैन गुजरात भेजे गए

: दिव्‍य भास्‍कर को देंगे सेवाएं : नए स्‍टेट हेड एन रघुरमन ने इंदौर में संभाला चार्ज :  दैनिक भास्‍कर, इंदौर के स्‍थानीय संपादक अवनीश जैन का तबादला कर दिया गया है. उनका तबादला अहमदाबाद में दिव्‍य भास्‍कर के लिए कर दिया गया है. अब वे दिव्‍य भास्‍कर के अजय उमठ को रिपोर्ट करेंगे. सूचना है कि 8 जुलाई तक वे अहमदाबाद में ज्‍वाइन कर लेंगे. बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने नाराजगी के चलते उनका तबादला अहमदाबाद के लिए किया है, क्‍योंकि अवनीश का गुजाराती से दूर दूर का रिश्‍ता नहीं है.

दूसरी तरफ दैनिक भास्‍कर मध्‍य प्रदेश के नए स्‍टेट हेड एन रघुरमन ने इंदौर में काम शुरू कर दिया है. उन्‍होंने दो जुलाई को नेशनल एडिटर कल्‍पेश याज्ञनिक की मौजूदगी में कार्यभार संभाला.  यहां किसी नए स्‍थानीय संपादक की नियुक्ति न होने तक एन रघुरमन ही कार्यभार संभालेंगे. दो साल तक इंदौर के स्‍थानीय संपादक रहे अवनीश जैन पर साथियों से गलत व्‍यवहार से लेकर चापलूसों को प्रश्रय देने तक के आरोप उन पर लगाए गए थे. माना जा रहा है कि इसी के चलते अवनीश जैन का तबादला कर दिया गया.

दिव्‍य मराठी का नासिक से प्रकाशन प्रारम्‍भ

दैनिक भास्कर समूह के मराठी संस्करण ‘दिव्य मराठी’  का शनिवार को नासिक से प्रकाशन प्रारंभ हो गया। यह समूह का 62वां संस्करण है। इसके पहले 29 मई को औरंगाबाद से प्रकाशन शुरू होने के पहले दिन से ही ‘दिव्य मराठी’  नंबर वन अखबार है। नासिक के कालिदास नाट्यमंदिर में हुए समारोह में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व सांसद राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के संस्थापक अध्यक्ष राज ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद समीर भुजबल और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अजित वाडेकर ने दिव्य मराठी के विशेष संस्करण की प्रति का विमोचन किया।

इस मौके पर दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल, डायरेक्टर मनमोहन अग्रवाल, दिव्य मराठी के मुख्य संपादक कुमार केतकर व महाराष्ट्र के संपादक अभिलाष खांडेकर मौजूद थे। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार को पूरी तरह मिटाना चाहे संभव न हो लेकिन उस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है। एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा, ‘आज के जमाने में लोकमान्य तिलक जैसी निर्भीक पत्रकारिता संभव नहीं है, लेकिन यदि दिव्य मराठी ऐसी पत्रकारिता करने वाला है तो उसे मेरी शुभकामनाएं।’

दैनिक भास्कर समूह के अध्यक्ष रमेशचंद्र अग्रवाल ने छोटे शहरों का महत्व रेखांकित करते हुए कहा कि अब ये शहर ही विकास के वाहक बनेंगे। ‘दिव्य मराठी’  के मुख्य संपादक कुमार केतकर ने अखबारों का महत्व स्पष्ट करते हुए कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया की मौजूदगी में भी लोगों के लिए अखबारों का आकर्षण बना हुआ है। साभार : भास्‍कर

दाउद के करीबियों से मुलाकात बना जेडे की हत्‍या का कारण

खोजी पत्रकार ज्‍योतिर्मय डे (जेडे) की हत्‍या की गुत्‍थी धीरे-धीरे सुलझने लगी है। पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि जे डे की हत्‍या के पीछे अंडरवर्ल्‍ड सरगना छोटा राजन का हाथ था। हालांकि जे डे को भी इस बात की भनक लग गई थी छोटा राजन उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकता है। सूत्रों के मुताबिक 56 साल के पत्रकार को यह खबर उनके मुखबिर के जरिये मिली थी।

जेडे को पता चला था कि छोटा राजन अपने चिर प्रतिद्वंद्वी दाऊद इब्राहिम के करीबियों से मुलाकात को लेकर उन पर खफा था। छोटा राजन ने अपने गुर्गों के जरिये जे डे को गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार करने की धमकी दी थी। जे डे बीते अप्रैल-मई में लंदन गए थे और बताया जाता है कि वहां उन्‍होंने दाऊद के बेहद करीबी से मुलाकात की जिसपर 1993 में मुंबई में हुए बम ब्‍लास्‍ट की साजिश रचने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक जे डे की हत्‍या की एक वजह यह भी हो सकती है। इसके बाद डे ने फिलिपींस की यात्रा के लिए  वहां के कॉन्‍सुलेट में कई अर्जियां दी। कहा जाता है कि छोटा राजन इस वक्‍त फिलिपींस में ही है।

डे अंडरवर्ल्‍ड पर अपनी तीसरी किताब लिख रहे थे और सूत्रों के मुताबिक वो इसी सिलसिले में इंग्‍लैंड गए थे जहां उन्‍होंने दाऊद के करीबी से मुलाकात की। बीते 11 जून को डे की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी। हत्‍या से महज दो दिन पहले ही डे ने छोटा राजन के करीबियों से चेंबुर स्थित एक रेस्‍तरां में मुलाकात की। इनमें एक डे का करीबी और बुकमेकर बताया जाता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात डे के पास सुलह का आखिरी मौका था लेकिन अफसोस कि सुलह नहीं हो सका। साभार : भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर में कई लोगों का प्रमोशन

दैनिक भास्‍कर ने पंजाब के यूनिटों में कई लोगों का प्रमोशन किया गया है. मेल से मिली जानकारी के अनुसार लुधियाना में नवीन गुप्‍ता को न्‍यूज एडिटर,  दीपक सेलोपाल को सीनियर रिपोर्टर, विपिन जंद को प्रिंसिपल करेस्‍पांडेंट, राजेश शर्मा को सीनियर रिपोर्टर, निशांत सिंह को सीनियर सब एडिटर, मनीष सिंह को चीफ सब एडिटर, जेएस ग्रेवाल को चीफ फोटो जर्नलिस्‍ट, राहुल मिश्रा को सीनियर सब एडिटर बनाया गया है.

जालंधर में चंदन स्‍वप्निल को डिप्‍टी न्‍यूज एडिटर,  योगेश शर्मा को न्‍यूज एडिटर, चंदन मिश्रा को चीफ सब एडिटर, रेशम सिंह को डिप्‍टी न्‍यूज एडिटर,  हिमानी दीवान को सब एडिटर, कपिल कुमार को सीनियर सब एडिटर के पद पर प्रोन्‍नति दी गई है. भटिंडा में अजय पुरुषोत्‍तम को न्‍यूज एडिटर,  भावेश कुमार को चीफ सब एडिटर तथा बलराज मोर को सब एडिटर बना दिया गया है.

दैनिक भास्‍कर देश का सबसे बड़ा अखबार समूह

एक करोड़ 81 लाख पाठक संख्या के साथ दैनिक भास्कर समूह देश का सबसे बड़ा अखबार समूह बना हुआ है। शुक्रवार को जारी भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस) के 2011 की पहली तिमाही क्यू-1 की सर्वे रिपोर्ट में भास्कर समूह शीर्ष पर कायम है। हरियाणा में 13.33 लाख पाठकों के साथ दैनिक भास्कर अग्रणी है। पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा राज्यों में भी 23.65 लाख पाठकों के साथ भास्कर सबसे आगे है।

पंजाब के प्रमुख शहरों – जालंधर, अमृतसर और लुधियाना में 4.36 लाख सामूहिक पाठक संख्या के साथ यह किसी भी अन्य अखबार के मुकाबले 25 प्रतिशत आगे है। चंडीगढ़ में भास्कर के 1.70 लाख पाठक हैं और यह निकटतम अखबार द ट्रिब्यून से 78 प्रतिशत की बढ़त लिए हुए है। मध्यप्रदेश में पिछले तीन महीनों के दौरान करीब दो लाख नए पाठक जोड़े। राज्य में भास्कर की पाठक संख्या अब 37.30 लाख हो गई है। यह राज्य में निकटतम प्रतिद्वंद्वी अखबार से तीन गुना अधिक है। पिछले तीन महीनों के दौरान भोपाल शहर में भास्कर ने 23 हजार नए पाठक जोड़े। जबकि इंदौर की पाठक संख्या में 16 हजार की वृद्धि हुई।

अन्य राज्यों में भी शिखर पर : छत्तीसगढ़ में भी दैनिक भास्कर 9.66 लाख की पाठक संख्या के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। राजस्थान में शिखर पर मौजूद दैनिक भास्कर के 63.12 लाख पाठक हैं। जयपुर शहर में 10.23 लाख पाठक संख्या के साथ भास्कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अखबार से 43 फीसदी बढ़त बनाए है। राजस्थान के शहरी इलाकों में 35.20 लाख पाठकों के साथ भास्कर शीर्ष पर बना हुआ है। राज्य के चार बड़े शहर जयपुर, जोधपुर, कोटा और बीकानेर में 17.07 लाख पाठकों के साथ भास्कर सबसे आगे है। गुजरात में भी दैनिक भास्कर समूह का गुजराती अखबार दिव्य भास्कर छह शहरों अहमदाबाद, सूरत, वड़ोदरा, राजकोट, भावनगर और जामनगर में अग्रणी बना हुआ है।

दैनिक भास्कर हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में भी 23.65 लाख पाठक संख्या के साथ सबसे आगे है। दैनिक भास्कर समूह ने झारखंड की राजधानी रांची में अगस्त 2010 में दैनिक भास्कर और महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मई 2011 में दैनिक दिव्य मराठी की लांचिंग कर इन दोनों राज्यों में अपना विस्तार किया है। आईआरएस की प्रक्रिया के मुताबिक किसी भी नए अखबार की पाठक संख्या के आंकड़े रिपोर्ट में शामिल होने में एक साल से अधिक समय लगता है। इसलिए दैनिक भास्कर झारखंड और औरंगाबाद की पाठक संख्या रिपोर्ट में शामिल नहीं है।

यह खबर दैनिक भास्‍कर ने अपने पहले पन्‍ने पर प्रकाशित किया है.

धीरेंद्र अवस्‍थी, नजीर, दिलनवाज, सतीश एवं विमल का तबादला

अमर उजाला, जम्‍मू से धीरेंद्र अवस्‍थी का तबादला मुरादाबाद के लिए कर दिया गया है.  वे यहां डीएनई के पोस्‍ट पर कार्यरत थे. बताया जा रहा है कि मुरादाबाद यूनिट को मजबूत करने के लिए धीरेंद्र को जम्‍मू से मुरादाबाद भेजा गया है.

दैनिक जागरण, सिद्धार्थनगर के ब्‍यूरोचीफ नजीर मलिक को गोरखपुर यूनिट से अटैच कर दिया गया है. वे डेस्‍क पर अपनी सेवाएं देंगे. बताया जा रहा है कि चार दिनों से गोरखपुर में कैंप किए रामेश्‍वर पाण्‍डेय स्‍थानीय संपादक शैलेंद्र मणि त्रिपाठी को किनारे करके सारे तबादले कर रहे हैं. दो दिनों चार लोगों को इधर से उधर किया गया है. चर्चा है कि रामेश्‍वर पाण्‍डेय आपराधिक बैकग्राउंड के कुछ खास लोगों को इन स्‍थानों पर बैठाना चाहते हैं. इसी के चलते ये सारी कवायद की जा रही है. कुछ और लोगों के तबादले करके शैलेंद्र मणि को कमजोर किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है.

दैनिक भास्‍कर, भोपाल से दिलनवाज पाशा का तबादला नोएडा के लिए कर दिया है. दिलनवाज भास्‍कर में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. अब नोएडा में भी उन्‍हें डेस्‍क पर जिम्‍मेदारी दी जाएगी. ये काफी समय से भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

प्रतापगढ़ ब्‍यूरो में तैनात सतीश रघुवंशी का तबादला इलाहाबाद कार्यालय के लिए हो गया है. उनके स्‍थान पर प्रतापगढ़ डेस्‍क संभाल रहे विमल मिश्र को प्रतापगढ़ भेजा गया है. सतीश अब प्रतापगढ़ डेस्‍क संभालेंगे. दोनों ने एक दूसरे का स्‍थान लिया है.

अभिषेक एवं सचिन ने बिजनेस भास्‍कर से नई पारी शुरू की

पीपुल्‍स समाचार, ग्‍वालियर से अभिषेक श्रीवास्‍तव और सचिन चतुर्वेदी ने इस्‍तीफा दे दिया है. दोनों लोग सेंट्रल डेस्‍क पर जिम्‍मेदारी निभा रहे थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी बिजनेस भास्‍कर, दिल्‍ली के साथ शुरू की है. इन्‍हें करेस्‍पांडेंट बनाया गया है. बताया जा रहा है कि दो महीने की ट्रेनिंग के बाद इनको पोस्टिंग मिलेगी. इन दोनों के जाने से पीपुल्‍स में मुश्किलें बढ़ गई हैं. प्रयास के बाद भी इन खाली पदों को भरा नहीं जा सका है.

दैनिक भास्कर के जालंधर एवं चंडीगढ़ यूनिट का पैकअप

लुधियाना में कारपोरेट ऑफिस बनने के कारण दैनिक भास्‍कर के दूसरे यूनिटों के कई कर्मचारी अखबार को अलविदा कह रहे हैं. उल्‍लेखनीय है कि भास्‍कर लुधियाना में अखबार का कारपोरेट ऑफिस बनवा रहा है. जिसके चलते जालंधर और चंडीगढ़ आफिस को लुधियाना शिफ्ट किया जा रहा है. लुधियाना अब सबसे महत्‍वपूर्ण यूनिट हो गया है.

जालंधन यूनिट का पैकअप होने के बाद बहुत से कर्मियों ने भास्‍कर को अलविदा कह दिया है. इनमें पीटीएस, विज्ञापन और संपादकीय विभाग के लोग भी शामिल हैं. ये ऐसे लोग हैं जो जालंधर छोड़कर बाहर नहीं जाना चाह रहे थे. ये लोग अब दूसरे अखबारों में अपने लिए नई नौकरी खोज रहे हैं. इसी तरह चंडीगढ़ आफिस भी लुधियाना स्‍थानांतरित किया जा रहा है. यहां से भी कई लोगों ने संस्‍थान को बाय कर दिया है. भास्‍कर के स्‍टेट हेड लुधियाना में ही बैठेंगे.

अशोक अजनबी का भास्‍कर से इस्‍तीफा

गत तीन साल से दैनिक भास्कर में कार्यरत अशोक अजनबी ने संस्‍थान से इस्तीफा दे दिया है। वह जागरण की पंजाबी जागरण की लांचिग टीम के सदस्य हो गए हैं। हिंदी और पंजाबी में दोनों भाषाओं पर पकड़ रखने वाले अशोक अजनबी ने पंजाब में पत्रकारिता के स्कूल नवां ज़माना से करियर की शुरुआत की थी। वे दैनिक जागरण को पहले भी अपनी सेवाएं दु चुके हैं। जागरण ग्रुप के साथ यह उनकी दूसरी पारी होगी।

अपने ही अखबारों में नहीं छपीं पत्रकारों की खबरें

ग्वालियर में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक पत्रकार संगठन द्वारा ग्वालियर में एक परिसंवाद का आयोजन किया गया. इसमें पर्यावरण पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले कुछ रिपोर्टर और फोटो जर्नलिस्टों का सम्मान किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जाने-माने पत्रकार स्वर्गीय प्रभाष जोशी के बेटे पर्यावरण पत्रकार सोपान जोशी थे. इसमें दैनिक भास्कर के पत्रकार हरे कृष्ण दुबोलिया. इसी अखवार के फोटो जर्नलिस्ट विक्रम प्रजापति, पत्रिका के रिपोर्टर राज देव पांडे को भी सम्मानित किया गया.

राज देव पांडे  की अनुपस्थिति में पत्रिका के ही एक सीनियर रिपोर्टर पुष्पेन्द्र सिंह तोमर ने यह सम्मान ग्रहण किया. खास बात यह रही कि दिन रात मेहनत करने वाले इन मीडिया कर्मियों के फोटो दूसरे अखवारों ने इसलिए नहीं छापे क्योंकि वे दूसरे अखबारों में काम करते हैं और उनके अखबारों ने छापे नहीं. दरअसल यह सामान्य बात नहीं है. इन दोनों अखबारों के प्रबंधन ने ऊपर के निर्णायक पदों पर ठीक वैसा ही ढांचा तैयार कर दिया है जैसा अंग्रेजों के राज में था. इन अखबारों ने बाहरी रेजिडेंट रख दिए हैं, जो स्थानीय पत्रकारों की स्वीकरोक्ति और उनके संपर्कों से चिढ़ते हैं और वे ऐसा कोई मौका नहीं गंवाते जब वे अपनी कुंठा को फलीभूत कर सकते हैं.

उन्हें न इलाकों की समझ है और न ही क्षेत्रीय सरोकारों की. पुरानी और घिसी-पिटी खबरें लिखते हैं और उनको यह बाहरी रेजिडेन्ट का यह काकस छापता है. यही वजह है कि अब इन अखबारों से स्थानीयता और चाव्नात्मकता तो गायब ही हो गयी है.ये सब मिलकर स्थानीय पत्रकार और पत्रकारों की गतिविधियों को नज़र अंदाज़ करते हैं. अगर इन बाहरी रेजिडेंट्स में से किसी को कोई फर्जी उपलब्धि भी मिल जाती है तो यह उसे ऐसे छापते हैं, मानो आसमान से तारा तोड़ लाये हों, लेकिन यदि ग्वालियर के किसी स्थानीय पत्रकार को कोई बड़ी भी उपलब्धि मिल जाए तो ये नाक-भौंहें सिकोड़ते हैं और छापने में इनकी नानी मर जाती है.

दूसरों को पुरस्‍कार देने के लिए दिल्ली में करोड़ों खर्च करने वाले पत्रिका के प्रबंधन को अपने ही एक साथी का सम्मान रास क्यों नहीं आता. दैनिक भास्‍कर में पांच लोगों की किटी पार्टी और दस बच्चों की फ्रेशर पार्टी पांच-पांच कॉलम में छपती है, लेकिन अपने रिपोर्टर को बीस सेंटीमीटर भी सिर्फ इसलिए नहीं मिलता क्योंकि वह स्थानीय है. बाहर से नहीं आया है. यह गैर स्थानीयवाद किसी दिन अखबार को भी संकट में डालेगा… क्योंकि अब इस बात की चर्चा पूरे शहर में आम जनों के बीच होने लगी है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भास्‍कर से अग्निमा, प्रमोद तथा अमर उजाला से सुजीत ठाकुर की कुट्टी

दैनिक भास्‍कर में श्रवण गर्ग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. जिस तरह से भास्‍कर के नेशनल ब्‍यूरो में कार्यरत दो लोगों को बिजनेस भास्‍कर के संपादक और मैनेजिंग एडिटर यतीश राजावत ने श्रवण गर्ग को विश्‍वास में लिए बिना निकाला है, उसके कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं. भास्‍कर के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि श्रवण गर्ग की ताकत को कम करके यतीश राजावत को मजबूत किया जा रहा है.

यतीश राजावत ने नेशनल ब्‍यूरो की मीटिंग ली थी. जिसके बाद उन्‍होंने सोलह सालों से भास्‍कर के साथ जुड़ी अग्निमा दुबे और छह महीने पहले प्रभात खबर से आए प्रमोद कुमार सुमन को निकाले जाने का आदेश दे दिया. ये दोनों निष्‍कासन श्रवण गर्ग की अनुमति और उन्‍हें विश्‍वास में लिए बगैर किए गए. यतीश राजावात ने प्रमोद सिंह और अरुण श्रीवास्‍तव पर भी तलवार लटका दी थी, परन्‍तु मामला किसी तरह टल गया. सूत्रों का कहना है कि समूह संपादक के रूप में काम देख रहे श्रवण गर्ग के पर कतर दिए गए हैं. अब उनसे नेशनल ब्‍यूरो लेकर उन्‍हें लोकल तक ही सीमित कर दिया गया है. यतीश राजावत लगातार मजबूत होते जा रहे हैं, जिस तरह से उन्‍होंने दो लोगों को निकाला है, उससे उनकी नेशनल ब्‍यूरो में लगातार बढ़ती हनक तथा ताकत को समझा जा सकता है.

अमर उजाला के नेशनल ब्‍यूरो से खबर है कि सीनियर पत्रकार सुजीत ठाकुर ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं. वे कहां से अपनी नई पारी शुरू करने वाले हैं. इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. सुजीत काफी समय से अमर उजाला के नेशनल ब्‍यूरो से जुड़े हुए थे.

औरंगाबाद में पहले ही दिन नंबर वन हुआ ‘दिव्य मराठी’!

औरंगाबाद। दैनिक भास्कर समूह के मराठी अखबार ‘दिव्य मराठी’ का शनिवार को औरंगाबाद में शुभारंभ हो गया। केवल औरंगाबाद शहर में ८७ हजार प्रतियों के साथ शुरू हुआ ‘दिव्य मराठी’ पहले ही दिन यहां नंबर वन हो गया। समूह का यह साठवां संस्करण है, जो चौथी भाषा में प्रकाशित हो रहा है। हिंदी में ‘दैनिक भास्कर’, अंग्रेजी में ‘डीएनए’ और गुजराती में ‘दिव्य भास्कर’ पहले से ही प्रकाशित हो रहे हैं।

औरंगाबाद में एक भव्य समारोह में ‘दिव्य मराठी’ का विमोचन केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने किया । चिदम्बरम ने इस अवसर पर ‘दिव्य मराठी’ को शुभकामनाएं दीं और कहा कि ‘दैनिक भास्कर’ जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के बड़े अखबार हैरत में पड़ गए हैं। उन्होंने कहा- भास्कर का महाराष्ट्र में प्रवेश एक महत्वपूर्ण घटना है । मुझे विश्वास है कि ‘दिव्य मराठी’ अपने पाठकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा । प्रमुख अतिथियों के भाषण से पहले समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल ने समूह का परिचय दिया और औरंगाबाद व महाराष्ट्र के लोगों के स्नेह के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर पी. चिंदबरम, पृथ्वीराज चव्हाण और शिवराज सिंह चौहान ने जो कुछ कहा, वह इस प्रकार है…

मराठी बोल नहीं सकता, लेकिन मित्रों ने जो कहा उससे मराठी जानने लगा हूं – पी. चिदंबरम, केंद्रीय गृहमंत्री

मैं मराठी बोल नहीं सकता, लेकिन मेरे राजनीतिक मित्रों ने अभी जो कहा उससे मराठी जानने लगा हूं। आज उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र की जनसंख्या सबसे अधिक है। देश की राजनीति में भी महाराष्ट्र का स्थान महत्त्वपूर्ण है. आर्थिक और सामाजिक रूप से भी महाराष्ट्र अग्रसर है. ऐसी स्थिति में भास्कर समूह के दिव्य मराठी की शुरुआत भी अति-महत्वपूर्ण है। यह शिवाजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जैसे महापुरुषों की भूमि है। उनके सिद्धांतों को छोड़ कर समाचारपत्र आगे बढ़ नहीं पाएंगे। मुझे विश्वास है कि दिव्य मराठी सारी अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा।

भास्कर जहां जाता है, पहले ही दिन नंबर वन हो जाता है – पृथ्वीराज चव्हाण, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र

भास्कर की खासियत यह है कि यह जहां भी जाता है, पहले दिन नंबर वन हो जाता है। देश के इस सबसे बड़े समाचारपत्र ने महाराष्ट्र में, मराठी में कदम रखा है। आज किसी अखबार की 60 प्रतियां भी बेचना मुश्किल बन गया है, वहीं भास्कर ने 60 संस्करण खड़े कर दिए हैं। इन संस्करणों से भव्यता झलकती है। एक निष्पक्ष, निर्भीक, धर्मनिरपेक्ष दैनिक के रूप में भास्कर ने अपना स्थान बनाया है। औरंगाबाद एक तेजी से बढऩे वाला शहर है। यहां समाचारपत्रों में स्पर्धा भी है। समाचारपत्रों की संख्या बढ़ रही है और साथ साथ जनतंत्र भी मजबूत होता जा रहा है। मुझे आशा है कि महाराष्ट्र में भी अखबारों में अच्छी स्पर्धा होगी और दिव्य मराठी महाराष्ट्र की तरक्की का हिस्सा बने।

बार बार के चुनाव बंद हों, मीडिया मदद करे- शिवराज सिंह चौहान

भास्कर ग्रुप के अध्यक्ष रमेशचंद्र अग्रवाल को मैं बचपन से देख रहा हूं. व्यक्तिगत स्तर पर मैं उनका बहुत आदर करता हूं. ऐसा हो ही नहीं सकता कि वे मुझे बुलाएं और मैं न आऊं. मध्य प्रदेश का भास्कर न तो सत्ता पक्ष का है न प्रतिपक्ष का है। निष्पक्ष है।मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का भी बड़ा गहरा रिश्ता है. मध्य प्रदेश की राजधानी नागपुर हुआ करती थी और हमारे पूर्वज नागपुर आया करते थे। औरंगाबाद में भी मध्य प्रदेश की कई बेटियां हैं और मध्य प्रदेश में भी महाराष्ट्र की कई बेटियां बहू बन कर आईं हैं। केवल इतना ही नही, मेरी आदर्श शासक अगर कोई है तो वह हैं अहिल्याबाई होलकर, जिन्होंने इंदौर में कभी सुशासन दिया था। महारानी लक्ष्मीबाई झांसी से आईं और उन्होंने ग्वालियर के किले पर कब्जा किया था। अंतत: वहीं पर लड़ती हुईं वे शहीद हुईं थीं. उन महारानी लक्ष्मीबाई को हम गहरी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान का जन्मस्थान मध्य प्रदेश में है और मैं तो मध्य प्रदेश में पैदा हुआ, लेकिन जमाई महाराष्ट्र का बना. इसलिए पृथ्वीराजजी न हमको कोई ठौर है न आपको कोई और है. इस मौके पर इतना जरूर कहना चाहूंगा जातिगत जनगणना 1931 में अंग्रेजों ने करवाई थी. जो आज हम स्वतंत्र भारत में भी करवा रहे हैं. मैं मानता हूं कि पिछड़ी जातियों को सहायता की आवश्यकता है. लेकिन जाति के आधार पर उन्हें गिनने की जरूरत क्या है? हम तो बरसों से कहते आ रहे हैं कि सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:। अब कई बार नेता नहीं बोल पाते कि विरोध करें कि न करें, वोट बैंक बिगड़ जाये. लेकिन अखबार जरूर बोल सकते हैं। भ्रष्टाचार की बात कई बार आती है तो मैं यह कहता हूं, कि भ्रष्टाचार की बुनियाद में जो है वो लगातार होने वाले चुनाव है। चौबीसो घंटे, सातों दिन चुनाव की तैयारी चलती हैं। हिंदुस्तान में लोकसभा और विधान सभा के चुनाव पांच साल में एक बार और एक साथ हों। अगर बहुमत समाप्त होता है तो बैठ कर नेता चुनो। लगातार चुनाव होते हैं और चुनाव तो चंदे के बिना होता नहीं है. चंदा जरूरी नहीं कि व्हाइट मनी हो. जब आएगा तो एेसा आता है जिसका कोई हिसाब नहीं होता। अगर आप किसी से चंदा लेते हैं तो उसकी बात रखनी पड़ती है। इसके कारण भ्रष्टाचार पनपता है। मैं मानता हूं काम कठिन है लेकिन देश में एक साथ चुनाव हो, पांच साल बाद चुनाव हो और तीसरी चीज चुनाव के लिए स्टेट फंडिंग होनी चाहिए। चुनाव के लिए जितना पैसा चाहिए, चुनाव आयोग को सरकार दे। आयोग उम्मीदवारों को पहचानपत्र दें, एक ही स्थान पर पार्टियों की सभाओं का आयोजन करें. इसके अलावा कोई एक भी पैसा खर्च करे तो उसे चुनाव से बाहर कर दीजिए. करप्शन बार-बार के चुनावों से ही पनपता है। ऐसे अभियान राजनेता नहीं चला सकते। यह काम अखबार बखूबी कर सकते हैं।

साभार : भास्कर डॉट कॉम

ईरानी पत्रकार फातिमा ने मांगी भारतीय नागरिकता

फगवाड़ा। ईरानी पत्रकार फातिमा बेगम ने भारत में जन्म होने का दावा करते हुए भारतीय नागरिकता की मांग की है। उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन पर बिना वजह मामले को लटकाए जाने का आरोप लगाया है। फगवाड़ा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए फातिमा बेगम ने कहा कि उनके वीजा की अवधि समाप्त होने वाली है। भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए वे लंबे समय से चंडीगढ़ प्रशासन से संपर्क में हैं।

फातिमा नें चंडीगढ़ के पीजीआई में अपने जन्म सबंधी दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि उनका जन्म 1980 में हुआ था। उनके माता-पिता 1970 में ईरान से पढ़ाई के सिलसिले में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ आए थे। फातिमा ने कहा कि वे अपनी जन्मभूमि से जुड़ी रहना चाहती हैं। साभार : भास्‍कर

शत्रुघ्‍न दैनिक भास्‍कर पहुंचे, लोकेंद्र का तबादला

नव दुनिया, भोपाल से शत्रुघ्‍न प्रसाद गुप्‍ता ने इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, भोपाल से शुरू की है. उन्‍हें सिटी डेस्‍क पर चीफ सब एडिटर बनाया गया है. इसके पहले वे राज एक्‍सप्रेस, भोपाल तथा दैनिक आज, वाराणसी को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

पत्रिका, ग्‍वालियर से लोकेंद्र सिंह राजपूत का तबादला भोपाल के लिए हो गया है. वे ग्‍वालियर में सेकेंड डेस्‍क इंचार्ज की भूमिका में थे. लोकेंद्र ने भोपाल में सिटी डेस्‍क पर ज्‍वाइन किया है. वे इसके पहले ग्‍वालियर स्‍वेदश, नई दुनिया और दैनिक भास्‍कर को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

बब्‍बल गर्ग ने भास्‍कर, नीरव ने ईटीवी से इस्‍तीफा दिया

दैनिक भास्‍कर ने पिछले साल पंजाब के बठिंडा शहर में प्रेस स्‍थापित की एवं बठिंडा संस्‍करण की शुरुआत की, लेकिन शुरुआत से अब तक दैनिक भास्‍कर अपनी पॉलिसियों के कारण एक अच्‍छी टीम बना पाने में असमर्थ नजर आ रहा है। चार माह पहले अमर उजाला छोड़कर इस समूह का हिस्‍सा बनने वाले संवाददाता कम फोटोजर्नालिस्‍ट बब्‍बल गर्ग ने अब इस समूह से नाता तोड़ लिया है। उन्‍होंने संस्‍थान को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया है। वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।

बब्‍बल गर्ग ने बतौर फोटो जर्नलिस्‍ट अमर उजाला से अपने करियर की शुरुआत की थी। अमर उजाला के साथ लम्‍बे समय तक जुड़े रहने के बाद उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर ज्‍वाइन कर लिया था। बताया जा रहा है कि उन्‍होंने यह फैसला कार्यालय के खराब माहौल के चलते लिया है। कार्यालय की राजनीति से तंग आकर समूह से नाता तोड़ने वाले अकेले बब्‍बल गर्ग ही नहीं हैं, इससे पहले भी पांच संवाददाता भास्‍कर छोड़ चुके हैं। सिर्फ छोटे से अंतराल के दौरान राजेश नेगी, कुलवंत हैप्‍पी, शशीकांत शर्मा, लता मिश्रा, मनीष शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया था।

ईटीवी, गुजरात से नीरव ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर एंकर थे. वे काफी समय से चैनल से जुड़े हुए थे. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. फिलहाल वे नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं.

दैनिक भास्‍कर ने बताया ओबामा ने की पांच शादियां, 24 बच्‍चों के बाप

भास्‍करदैनिक भास्‍कर के धनबाद की धरती पर कदम रखने के बाद कुछ भी सही नहीं हो रहा है. खबरों को लेकर हॉकर तथा आम लोगों ने इस अखबार की प्रतियां फूंकी. खबरों के तेवर को लेकर इस पर लोगों ने कई आरोप लगाया. एक बार फिर इस अखबार ने एक बड़ी गलती की है. भास्‍कर ने ओसामा को ओबामा बना दिया है. इस खबर को पढ़कर कोयलांचल के पाठक भी हतप्रभ हैं, वे भास्‍कर के कार्यालय में फोन कर तमाम बातें सुना रहे हैं.

भास्‍कर के तीन मई के अंक में पेज नम्‍बर 14 के बॉटम में छपी इस खबर की हेडिंग है, ‘पांच पत्नियां और 24 बच्‍चे ओबामा के.’ सूत्रों का कहना है कि खबर में इतनी बड़ी गलती के बाद हुई छीछालेदर से नाराज प्रबंधन जिम्‍मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

भास्‍कर

भास्‍कर के मैनेजर संतोष सिंह के पिता का निधन

दैनिक भास्कर, भोपाल में मैनेजर (प्रिंटिंग) संतोष सिंह के पिता आरपी सिंह का आज सुबह कस्तूरबा अस्पताल में निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें कैंसर था और करीब एक महीने से कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका इलाज चल रहा था। 67 वर्षीय श्री सिंह बीएचईएल के सेवानिवृत्‍त कर्मचारी थे तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते थे।

उन्‍होंने आज छह बजे अस्‍पताल में अंतिम सांस लिया। वे अपने पीछे दो पुत्र, तीन पुत्रियां तथा पत्‍नी को छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्‍कार आज ही भोपाल के सुभाष नगर श्‍मशान घाट पर किया जाएगा। भोपाल सेंट्रल प्रेस क्‍लब ने संतोष सिंह के पिता के निधन पर शोक जताते हुए अपनी संवेदनाएं व्‍यक्‍त की।

हवाला में लिप्‍त भास्‍कर कर्मियों के लाखों रुपये डूबे!

जयपुर में इनदिनों दैनिक भास्‍कर के कई कर्मचारी काफी बौखलाए हुए हैं. कारण है इन लोगों का लाखों रुपये कमोडिटी, शेयर और हवाला में डूब जाना. चार-पांच दिनों पूर्व बैठक कर इस मामले को सुलझाने की भी कोशिश की गई परन्‍तु कोई बात नहीं बनी. नाराज लोगों ने पैसा लगाने वाले तथा उसके परिवार के कुछ सदस्‍यों को जमकर मारापीटा. मामला अभी पुलिस तक नहीं पहुंचा है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर शहर में अखबार के हॉकर गजानन शर्मा के बेटे सूजर शर्मा के मार्फत भास्‍कर के लगभग एक दर्जन कर्मचारियों समेत दर्जनों हॉकरों ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपए कमोडिटी, हवाला और शेयर मार्केट में लगाए थे. फायदा होने की बजाय इन लोगों का पूरा पैसा डूब गया. ये लोग पैसा वापस पाने के लिए हॉकर गजानन तथा उनके लड़के सूरज पर दबाव बनाने लगे. पर उसने टालमटोल करना शुरू कर दिया.

सूत्रों ने बताया कि इसी मामले को लेकर बीते 25 अप्रैल को भास्‍कर के कर्मचारियों समेत जिन लोगों का पैसा इस कारोबार में लगा था, सभी ने एक मीटिंग गुलाब बाग सेंटर लिंक रोड पर रखी थी. इसमें भास्‍कर के कुछ वरिष्‍ठ लोग भी मौजूद थे. इन लोगों ने गजानन शर्मा से अपने लगाए रुपये वापस मांग तो गजानन ने जवाब दिया कि जब इन लोगों ने रुपये लगाए थे या उनके पुत्र को दिए थे तो उनसे पूछा था, इस पर नाराज लोगों ने गजानन और उनके छोटे बेटे की जमकर धुनाई कर दी.

सूत्रों ने बताया कि अब गजानन ने पत्रिका में विधिवत विज्ञापन देकर अपने पुत्र से संबंध विच्‍छेद की घोषण कर डाली है. यानी अब उनसे उनके पुत्र का कोई मतलब नहीं रहा. हालांकि सूत्रों ने बताया कि इन धंधे में जो भी पैसा सूरज को मिला वो गजानंद की गुडविल और क्रेडिबिलिटी के चलते ही मिला. अब पैसा डूबने से भास्‍कर कर्मी परेशान हैं. मामला सीधा-साधा न होने के चलते वे पुलिस के पास भी नहीं गए हैं. शिकायत दर्ज कराने पर खुद की गर्दन भी फंसने की संभावना है.

सूत्र ने बताया कि भास्‍कर के कई कर्मचारी लॉटरी के धंधे से भी जुड़े हुए हैं. इन लोगों के पैसे लॉटरी के व्‍यवसाय में लगा हुआ है, जिसका संचालन ब्‍याज पर पैसा देने वाला एक व्‍यक्ति करता है. लिंक रोड पर अवैध लॉटरियों के धंधे में भी कई भास्‍करकर्मी और हॉकर संलिप्‍त बताए जाते हैं. खबर है कि इसी व्‍यवसाय से हुए लाभ के पैसे को कमोडिटी और हवाला में झोका गया था. अब इस मामले में पूरी सच्‍चाई क्‍या है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा. पर पैसे डूबने से भास्‍कर कर्मी और हॉकर परेशान हैं.

इस संदर्भ में जब पूरे मामले की जानकारी के लिए गजानन शर्मा से बात की तो उन्‍होंने व्‍यस्‍तता का बहाना बनाकर पहले बाद में फोन करने को कहा. जब उनके पास दुबारा फोन किया गया तो उन्‍होंने कॉल ही रिसीव नहीं किया. बताया जा रहा है कि इस मामले की अगर गहराई से जांच की जाए तो एक बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि इसमें सिर्फ भास्‍कर से जुड़े लोग ही नहीं कई अन्‍य अखबारों के लोग भी शामिल हैं.

इस बारे में जो कोई कुछ कहना चाहता हो या जिसको इस मामले की और अधिक जानकारी हो वो अपनी बात नीचे कमेंट बॉक्‍स लिख सकता है या bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकता है.

पुलिसिया भाषा लिखने से नाराज लोगों ने भास्‍कर की प्रतियां फूंकी

दैनिक भास्कर, धनबाद में पाठकों की मर्जी भांपने में पूरी तरह असफल है। जिसका प्रमाण 28 अप्रैल को शहर के कई हिस्से में पाठकों द्वारा दैनिक भास्कर की प्रतियां जलाना तथा पैर से कुचलना है। घटना इस तरह है कि 27 अप्रैल को बीसीसीएल कंपनी के अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा फायरिंग किए जाने से चार लोगों की मौत और सैंकड़ों लोगों के घायल होने की घटना घटी थी।

इस घटना का विरोध कर रहे कई नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। धनबाद के सभी अखबारों ने इस घटना को पुलिसिया बर्बरता बताते हुए समाचार छापा। लेकिन दैनिक भास्कर ने इसके लिए सीधे नेता और आम जनता को जिम्मेवार ठहराते हुए खबर प्रकाशित किया। साथ ही लोगों को आगे कर नेताओं के भाग जाने तथा गिरफ्तार नेताओं का थाना हाजत में मुर्गा पार्टी का आनंद लेने का समचार प्रकाशित किया गया।

भास्‍कर

बताते हैं कि 28 अप्रैल को बाजार में अखबार आते ही लोगों ने इस तरह की खबर पढ़कर आग बबूला हो गये और भास्कर की प्रतियां जलानी शुरू कर दी। कई जगह भास्कर को जमीन पर फेंक उसे पैर से कुचला भी गया।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मुसलमानों ने किया भास्‍कर का बहिष्‍कार, प्रतियां फूंकी

मध्‍य प्रदेश में मुसलमान भास्‍कर से खफा हैं. मुसलमानों ने दैनिक भास्‍कर, माय एफएम और बीटीवी का बहिष्‍कार करने का निर्णय लिया है. मुसलमानों की संस्‍था मध्‍य प्रदेश तंजीम इत्‍तेहादउल मुलसेमीन ने यह फरमान जारी किया है. मुसलमानों ने आरोप लगाया है कि भास्‍कर मुस्लिम कौम को बदनाम करने और नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रहा है.

नाराज मुसलमानों ने दैनिक भास्‍कर की प्रतियां भी जलाईं तथा पूरे समाज से दैनिक भास्‍कर को न पढ़ने की अपील की. कई मुस्लिम संस्‍थाओं की बैठक में मुसलमानों से भास्‍कर अखबार न खरीदने का आह्वान किया गया.

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भास्‍कर डॉट कॉम की गेस्‍ट एडिटर बनीं एकता कपूर

टेलीविजन के दुनिया की मशहूर हस्ती एकता कपूर मंगलवार को दैनिक भास्कर के इंटरनेट संस्करण भास्कर डॉटकॉम की गेस्ट एडिटर थीं। इस मौके उन्होंने टेलीकांफ्रेंसिंग के जरिए दैनिक भास्कर के विभिन्न संस्करणों में पत्रकारों व पाठकों के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘रागिनी एमएमएस’  के बारे में भी चर्चा की।

एकता ने आईपीएल पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें क्रिकेट बिल्कुल पसंद नहीं है, क्योंकि जब भी सचिन शतक जमाते हैं तो सचिन का शतक उनके सीरियलों की टीआरपी पर भारी पड़ता है। सास-बहू, पारिवारिक मर्यादाएं व संस्कृति-परंपरा पर आधारित सीरियल बनाने वालीं एकता अचानक इतनी बोल्ड कैसे हो गईं कि खुल्लमखुल्ला सेक्स संबंधी फिल्में बनाने लगीं? यह पूछने पर एकता ने कहा कि समय बदल रहा है। ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है, जो ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं। यह भी मानवीय जिंदगी का एक पहलू है, बस इसे गलत तरीके से देखा जाता है।

जब उनसे शादी को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शादी मेरे लिए अमंगल साबित हो सकती है, इसलिए फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे खुद को अभी बच्चा मानती हैं और शादी के लिए खुद को परिपक्व नहीं मानती हैं। इसलिए अब से पांच साल बाद यानी 39  साल की उम्र में शादी करेंगी। एकता ने अपनी फिल्म ‘रागिनी एमएमएस’  को रिलीज करने के लिए भी खास समय तय किया है, यह 12  मई को रात 12 बजे यानी 13  मई शुक्रवार को रिलीज होगी।

जब उनसे इस फिल्म के गीत रात अकेली है के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि ‘मैंने इस गीत को री-मिक्स नहीं किया है। मैं मानती हूं कि जब भी किसी गीत को री-मिक्स किया जाता है तो नए-पुराने की तुलना होने लगती है और उसकी तारीफ कम आलोचना ज्यादा होती है, इसलिए इस गीत के मूल वर्जन का ही इस्तेमाल किया।’ साभार : भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर से जुड़े दीपक और चरणजीत

प्रभात खबर, जमशेदपुर से दीपक शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे काफी समय से प्रभात खबर से जुड़े हुए थे. वे डेस्‍क पर अपनी जिम्‍मेदारी निभा रहे थे.  उन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, धनबाद के साथ शुरू की है. इसके पहले वे प्रभात खबर को धनबाद में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

न्‍यू इस्‍पात मेल, जमशेदपुर से चरणजीत सिंह ने भी इस्‍तीफा दे दिया है. चरणजीत पिछले काफी समय से प्रबंधन से नाराज चल रहे थे. उन्‍होंने अपने नई पारी दैनिक भास्‍कर, जमशेदपुर के साथ शुरू की है. उन्‍हें रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है.

भास्‍कर सीपीएच-2 में रोहतक यूनिट रहा अव्‍वल

दैनिक भास्कर सीपीएच-2 की पिछले दिनों चंडीगढ़ में हुई 2010-11 एनुवल कानक्लेव (वार्षिक समीक्षा बैठक) में नव सृजित रोहतक यूनिट बेस्ट अवार्ड पाने में कामयाब हुई है। सीपीएच-2 में हरियाणा से चार, पंजाब से चार, चंडीगढ़ से एक, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से एक-एक यूनिट के सम्पादक शामिल हैं। रोहतक यूनिट विगत 29 जनवरी को शुरू हुई थी। महज तीन माह की अवधि में सम्पादकीय टीम ने बेस्ट काम करके दिया। इसके फलस्वरूप एक साल की समीक्षा में रोहतक का तीन माह का काम अन्य यूनिटों से बेहतर रहा।

इस उपलब्धि पर दैनिक भास्कर के एमडी श्री सुधीर अग्रवाल व सीपीएच-2 के स्टेड हैड श्री कमलेश सिंह द्वारा बेस्ट यूनिट का अवार्ड समाचार सम्पादक शिव कुमार शर्मा को प्रदान किया गया।

रोहतक

बिजली विभाग को ब्‍लैकमेल कर ब्‍यूरोचीफ ने सरकारी गाड़ी कब्जाया

दैनिक भास्कर अखबार के सिवनी ब्‍यूरो चीफ पर एक अधिकारी को ब्‍लैकमेल कर सरकारी गाड़ी का निजी उपयोग करने का मामला सामने आया है. यह मामला कांग्रेसजनों द्वारा आरटीआई डालकर पूछे गए सवालों के जवाब में खुला है. आरटीआई से सामने आई जानकारी को पत्रिका अखबार ने खबर के रूप में प्रकाशित किया है.

पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक ब्यूरो चीफ ने भास्कर अखबार में खिलाफ खबर न छापने के एवज में बिजली विभाग के लोगों से सरकारी गाड़ी ली और इसका भरपूर इस्‍तेमाल किया. पूरे प्रकरण को पत्रिका अखबार में प्रकाशित खबर के जरिए भी जान सकते हैं, जिसे नीचे दिया जा रहा है…

पत्रिका

दैनिक भास्‍कर से राजेश, अनुराग, सुरेश और मनोज का नाता टूटा

दैनिक भास्‍कर, रांची में इन दिनों काफी उथल-पुथल मची हुई है. यहां से राजेश कुमार सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे प्रिंसिपल करेस्‍पांडेंट थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी न्‍यूज11 के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां पर इनपुट हेड बनाया गया है. राजेश इसके पहले भी न्‍यूज11 से जुड़े रहे हैं. वे हिंदुस्‍तान को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. भास्‍कर, रांची से अनुराग ठाकुर ने भी इस्‍तीफा दे दिया है. वे क्राइम रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी कशिश न्‍यूज के साथ शुरू की है. इन्‍हें सीनियर रिपोर्टर बनाया गया है. अनुराग इसके पहले हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से भी जुड़े रहे हैं.

भास्‍कर, रांची में नियु‍क्‍त किए गए कार्टूनिस्‍ट सुरेश कुमार को भी हटा दिया गया है. उनको किस कारण से हटाया गया है, इसकी जानकारी नहीं हो पाई है. भीतरखाने की खबर ये है कि प्रभात खबर से तोड़ कर लाए गए फैजल अनुराग के साथ भी वादाखिलाफी किया जा रहा है. जिसके चलते वो प्रबंधन से खुश नहीं हैं. बताया जा रहा है कि कई लोग दूसरे संस्‍थानों के संपर्क में हैं, वो कभी भी इस्‍तीफा दे सकते हैं. इसके पीछे कारण बताया जा रहा है संपादक का रवैया तथा अपशब्‍दों के साथ बात करने की आदत.

दैनिक भास्‍कर, जमशेदपुर से खबर है कि मनोज खरे ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी आई-नेक्‍स्‍ट, कानपुर के साथ शुरू की है. इन्‍हें रिपोर्टर बनाया गया है. मनोज इसके पहले भी कई अखबारों में काम कर चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर, रोहतक से एक महीने में चार का इस्‍तीफा

दैनिक भास्कर ने जब से रोहतक में यूनिट स्थापित की है, तभी से प्रबंधन के सामने लगातार मुश्किलें खड़ी होती जा रही है। 29 जनवरी को यूनिट की लांचिंग के कुछ दिन बाद ही नवनियुक्त महिला पत्रकार ऑफिस के माहौल को देखकर बॉय कर गईं। इस स्थान को भरने के लिए रोहतक यूनिट प्रबंधन ने काफी जद्दोजहद की, लेकिन कोई भी महिला रिपोर्टर यहां काम करने के लिए तैयार नहीं हुई।

बताते हैं दो सप्ताह पहले ऑफिस की राजनीति के चलते सिटी ऑफिस के सीनियर रिपोर्टर ओपी वशिष्ठ ने भी संस्थान छोड़ दिया है। उन्‍होंने अपनी नई पारी रोहतक में ही आज समाज से शुरू की है। उन्‍हें ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. ओपी इसके पूर्व हरिभूमि, अमर उजाला को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बताया जाता है कि ओपी वशिष्ठ की क्राइम रिपोर्टिंग पर अच्‍छी पकड़ है। ओपी वशिष्ठ के जाने से संस्थान को पहले ही तगड़ा झटका लगा था, उस पर दो और रिपोर्टरों ने संस्थान को बॉय-बॉय कह कर मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

भिवानी अमर उजाला से आए पवन शर्मा और दैनिक हिंदुस्तान से आए अमित कुमार से सिटी टीम काफी मजबूत हो गई थी, लेकिन दोनों रिपोर्टरों को भी ऑफिस की राजनीति रास नहीं आई और दो महीने के भीतर ही संस्थान को अलविदा कहने के लिए मजबूर हो गए। बताया जाता है कि रोहतक यूनिट में दो लोग एक ही पद पर नियुक्त हैं, जिसकी वजह से यहां गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है।

मुकेश का तबादला, गुरुदत्‍त और विशाल का इस्‍तीफा

पत्रिका, ग्‍वालियर से गुरुदत्‍त तिवारी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर चीफ सब एडिटर कम सीनियर  करेस्‍पांडेंट थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, भोपाल के साथ शुरू की है. इन्‍होंने यहां भी वरिष्‍ठ पद पर ज्‍वाइन किया है. गुरुदत्‍त इसके पहले पीपुल्‍स समाचार और बिजनेस स्‍टैंडर्ड को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

पत्रिका, ग्‍वालियर से मुकेश सक्‍सेना का तबादला भोपाल के लिए कर दिया गया है. वे यहां पर नैने के इंचार्ज थे. ये अब भोपाल में डेस्‍क पर अपनी सेवाएं देंगे. इसके पहले ये भास्‍कर को ग्‍वालियर एवं भोपाल में सेवाएं दे चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर के रतलाम संस्‍करण में लगातार विकेट गिर रहे हैं. सीनियर रिपोर्टर आसिफ कुरैशी के बाद विशाल पराशर ने भी इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. माना जा रहा है कि संपादक और वरिष्‍ठों के व्‍यवहार से आजिज आकर इन्‍होंने इस्‍तीफा दिया है.

कोयलांचल के मिजाज को समझ पाने में फेल रहा दैनिक भास्कर धनबाद

17 अप्रैल से धनबाद कोयलांचल के बाजार में पूरे ताम-झाम के साथ दैनिक भास्कर उतरा और पूरी तरह से फ्लॉप हो गया. यह एकदम सही है. इसकी  एक बड़ी वजह यह है कि दैनिक भास्कर धनबाद कोयलांचल के मिजाज को समझ पाने में एकदम फेल रहा. न तो पहले दिन और न ही अंतिम दिन भास्कर की जो टीम बनी है, वह भी एकदम डी ग्रेड की है. हिंदुस्तान और प्रभात खबर से जो लोग भास्कर में गये, वे एक तरह से दोनों अखबारों में रिजेक्‍ट श्रेणी में थे.

बेहतर टीम बनाने की भास्कर की तमाम कोशिशें नाकाम हो गयी. अंतत: भास्कर को जैसे-तैसे टीम बनानी पड़ी. प्रभात खबर ने अपने जिन दो रिपोर्टरों अखिलेश कुमार व अमित रंजन को गलत-तथ्यहीन रिपोर्टिंग और बिना सूचना के अक्‍सर गायब होने की शिकायत को लेकर बर्खास्त कर दिया था, उन्हें भास्कर को अपना स्टार रिपोर्टर बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा. आज निश्चित तौर पर भास्कर को कोयलांचल के पाठकों ने रिजेक्‍ट कर दिया है. हालात यह बने हैं कि मजबूर होकर भास्कर को मुफ्त में अखबार बांटना पड़ रहा है. पिछले दो दिनों से धनबाद में जिन घरों में प्रभात खबर, हिंदुस्तान और जागरण जाता है, वहां मुफ्त में भास्कर की कॉपियां फेंकी जा रही हैं. भास्कर को जितनी खराब स्थिति का सामना धनबाद में करना पड़ रहा है, उतनी खराब स्थिति देश में शायद ही कहीं और झेलनी पड़ी हो.

सिर्फ एक संस्करण ही निकाल पाया भास्कर : यही नहीं धनबाद से निकलने वाले सभी अखबार प्रभात खबर, हिंदुस्तान व दैनिक जागरण की ओर से धनबाद, बोकारो और गिरिडीह तीनों जिलों के लिए तीन अलग-अलग संस्करण निकाले जाते हैं. दैनिक जागरण ने भी वर्ष 2003 में जब धनबाद से प्रकाशन शुरू किया, तब पहले दिन से ही धनबाद, बोकारो और गिरिडीह तीनों जिलों के लिए तीन संस्करण निकाले थे. मगर भास्कर सिर्फ एक संस्करण ही निकाल पाया, वह भी धनबाद जिले के लिए. बोकारो व गिरिडीह में आज तक उसकी टीम नहीं बन पायी है.

हिंदुस्तान नंबर वन है : एक सच यह भी : जब बात पूरे झारखंड की होती है, तो प्रभात खबर नंबर वन है. रांची और जमशेदपुर में प्रभात खबर का प्रसार हिंदुस्तान की तुलना में सीधे दोगुना है. मगर धनबाद में हिंदुस्तान नंबर वन है और प्रभात खबर दूसरे स्थान पर है. इसकी सबसे बड़ी वजह है धनबाद और बोकारो में बड़े पैमाने पर बिहार के लोगों का होना. और बिहार के लोगों के बीच में पिछले ढाई दशक से हिंदुस्तान एक ब्रांड बना रहा है. पटना से नवभारत टाइम्स का प्रकाशन बंद होने के बाद से ही. उस दौर में जब धनबाद और बोकारो में अखबार का मतलब होता था आवाज (एक स्थानीय हिंदी दैनिक), तब भी पटना से छपकर धनबाद के मार्केट में आनेवाला हिंदुस्तान अधिक बिकता था. कारण हिंदुस्तान में बिहार की खबरों के 5-6 पन्ने होते थे.

कुछ और सच : पहला सच : आज हिंदुस्तान धनबाद में अपने अस्तित्व संकट से जूझ रहा है. वजह तेजी से बढ़ता प्रभात खबर. अप्रैल,  2010 जहां धनबाद, बोकारो व गिरिडीह में प्रभात खबर की मुश्किल से 20,000 कॉपियां बिकती थीं, वहीं आज 82,700 कॉपियां हर रोज बिक रही हैं. जून, 2010 में धनबाद समेत पूरे झारखंड में प्रभात खबर, हिंदुस्तान व दैनिक जागरण ने अपने-अपने अखबार की कीमतें घटाकर दो रुपये की. दो रुपये कीमत होने का सबसे ज्यादा लाभ प्रभात खबर को मिला. हिंदुस्तान की भी कुछ कॉपियां बढ़ी हैं, मगर प्रभात खबर जैसी दोगुनी-तीगुनी नहीं.

दूसरा सच : धनबाद में आज हिंदुस्तान का प्रोडक्‍ट बेहद कमजोर है. हिंदुस्तान आज अपने संपादकीय कंटेंट के बूते नहीं, बल्‍िक एजेंट आरएन सिंह के बल  पर बिक रहा है. धनबाद में हिंदुस्तान के एजेंट आरएन सिंह काफी पुराने एजेंट हैं. आरएन सिंह के पास बांग्ला अखबार आनंदोबाजार और अंगरेजी का अखबार द टेलीग्राफ है. कोई हॉकर यदि हिंदुस्तान की एक कॉपी घटाता है, तो उसे आरएन सिंह आनंदोबाजार व टेलीग्राफ देना बंद कर देते हैं. हॉकर मजबूर होते हैं, क्‍योंकि हिंदी भाषी पाठक कोई भी अखबार पढ़ सकते हैं, मगर धनबाद के बांग्ला भाषी 20 हजार पाठक सिर्फ और सिर्फ आनंदोबाजार पढ़ते हैं.

तीसरा सच : धनबाद में हिंदुस्तान का वर्षों पुराना गढ़ अब ध्वस्त होने को है. वजह प्रभात खबर की तेजी से बढ़ती मांग. यहां गौरतलब है कि हाल में एआईआर की रिपोर्ट में धनबाद में प्रभात खबर का सबसे ज्यादा 18 प्रतिशत ग्रोथ बताया गया है.

आपके भड़ास4मीडिया की निम्‍नलिखित पंक्तियां एकदम गलत हैं : हिंदुस्‍तान के संपादक ओमप्रकाश अश्‍क के लंबे समय का गहरा अनुभव और उनके सानिध्‍य में काम कर चुके दैनिक जागरण के संपादक बसंत भारतीय की रणनीति ने भास्‍कर को पहले ही दिन पटकनी दे दी। दोनों ने अपने अपने अखबारों के बेहतरीन कंटेंट जुझारू तेवर का अखबार में नजारा पेश कर भास्‍कर को हर मोर्चे पर चित कर दिया।

सच तो यह है : धनबाद में बीते 17 अप्रैल  को भास्कर के प्रकाशन के दिन न सिर्फ भास्कर फ्लॉप हुआ, बल्कि कंटेंट के मामले में हिंदुस्तान व दैनिक जागरण भी पीछे छूट गये. बेहतर कंटेंट व जुझारू तेवर दिखा, तो सिर्फ प्रभात खबर का. उस दिन का ईपेपर देख सकते हैं.

हिंदुस्तान के पहले पन्ने पर ओमप्रकाश अश्क ने झरिया पर बॉटम लिखा है : हल्की भी हिली धरती, तो जमींदोज होगी झरिया. झरिया की कोयला खदानों में लगी आग और उस कारण हो रहे भू-धंसान की समस्या काफी पुरानी है. रही बात धरती हिलने की, तो दुनिया में कहीं भी धरती हिलेगी, तो वहां का क्‍या होगा, यह बताने की जरूरत नहीं. क्‍या दिल्‍ली और गुजरात में धरती हिलेगी, तो सब कुछ सामान्य रहेगा?

इसी तरह दैनिक जागरण में उस दिन अपने पहले पन्ने पर एक खबर छाप दी है : दांव पर लाखों श्रमिकों की जिंदगी.. इस खबर में खान सुरक्षा महानिदेशालय के महानिदेशक सतीश पुरी का बयान है. महानिदेशक की प्रतिक्रिया आप खुद ही बात करके जान सकते हैं.  महानिदेशक ने कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में जागरण जैसा झूठा अखबार नहीं देखा.

प्रभात खबर ने भास्कर के प्रकाशन के दिन किस तरह का कंटेंट दिया और उसके बाद लगातार किस तरह का अभियान चला रहा है, उसका प्रमाण ईपेपर के जरिए देख सकते हैं. यूपी तक कोयला के अवैध धंधेबाजों के खिलाफ अभियान शुरू है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भास्‍कर के संपादक नरेंद्र सिंह अकेला पर नकाबपोशों ने किया जानलेवा हमला

दैनिक भास्कर, सागर के संपादक नरेन्द्र सिंह अकेला पर चार-पांच नकाबपोशों ने उस समय हमला बोल दिया जब वे छतरपुर भास्कर कार्यालय के लिये नये भवन की तलाश में निकले थे। संपादक पर हमला करके नकाशपोश अपने अपने वाहन में बैठकर फरार हो गये। हमला शुक्रवार की दोपहर साढे़ तीन बजे से चार बजे के बीच कान्हा रेस्टोरेट के पीछे महाराजा होटल छतरपुर के पास किया गया। उन्‍होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

संपादक नरेन्द्र सिंह अकेला के साथ सागर यूनिट हेड सुरेन्द्र राय एवं छतरपुर मार्केटिंग के सुशील अग्रवाल एवं एक दो लोग और साथ में थे। उन लोगों को किनारे हटाकर नकाबपोशों ने उन पर हमला किया। उनको कंधे, सिर, पैर के साथ आंतरिक चोटें भी लगी हैं। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस बल के साथ सीएसपी जयदेवन आईपीएस, एएसपी सुनील तिवारी सहित तहसीलदार व एसडीएम पहुंचे। मामले को जांचा परखा और समझा। पीडित संपादक को अपनी गाड़ी में बैठाकर जिला चिकित्सालय ले जाया गया जहां पर उनका प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सक ने उन्हें आराम करने को कहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना प्रारम्भ कर दी है।

जानकारी में बताया गया कि दैनिक भास्कर के संपादक नरेन्द्र सिंह अकेला और यूनिट हेड सुरेन्द्र राय अपने रूटींन विजिट पर छतरपुर आये और दैनिक भास्कर के कार्यालय की अव्यवस्थाओं को देखकर नवीन कार्यालय की तलाश में निकल पडे़। तभी उनके ऊपर नकाबपोशों ने हमला बोला है। पीडित संपादक नरेन्द्र सिंह अकेला ने मीडिया को कोई भी बयान नहीं दिया है, उनके चेहरे को देखकर ऐसा लगा कि उन्हें इस बात का पहले से अंदेशा था और उनके साथ घटना घट गई, वे बेहद दुखी होने के कारण किसी से भी कुछ नहीं बोले। सीएसपी जयदेवन आईपीएस ने कहा है कि नकाबपोश कितने भी ताकतवर हों उनकी गिरफतारी शीघ्र होगी और मामले का खुलासा किया जायेगा। हालांकि इस हमले को कार्यालयी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

छतरपुर से रवि गुप्‍ता की रिपोर्ट.

दैनिक भास्‍कर से उमेश और संजय का इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर, खंडवा से जुड़े खरगौन के ब्‍यूरोचीफ उमेश रेवलिया ने इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने अपनी नई पारी खंडवा में ही पत्रिका के साथ शुरू की है. वे सिटी का काम देखेंगे. वे काफी समय से भास्‍कर से जुड़े हुए थे.

दैनिक भास्‍कर, खंडवा से संजय पंडया ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां सब एडिटर थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी राज एक्‍सप्रेस, खरगौन से शुरू की है. उन्‍हें यहां भी सब एडिटर बनाया गया है. भास्‍कर आने से पहले संजय राज एक्‍सप्रेस को ही अपनी सेवाएं देते थे.

धनबाद में तेवर नहीं दिखा पाया भास्‍कर, हॉकरों ने प्रतियां फूंकी

लगभग दो माह की तैयारी तामझाम और तोड़फोड़ के बाद बाजार में उतरे भास्‍कर को देख पाठकों ने पहली नजर में ही सिरे से नकार दिया। जिस तरह बैनर व पोस्‍टर में दावे किए गए थे वैसा कुछ भी नहीं दिखा। सिर्फ गिनाने के लिए उसके संस्‍करणों में एक और संस्‍करण जरूर जुड़ गया। लांचिंग के एक दिन पहले पाठकों के बीच बांटे गए चार पेज के पोस्‍टर में भास्‍कर ने यह दावा किया था कि पहले दिन 32 पेज का अखबार होगा, लेकिन पाठकों को सिर्फ 24 पेज ही मिले।

इस कारण पाठकों में भारी आक्रोश है। हालांकि भास्‍कर को मात मिलेगी इसका संकेत पहले से ही मिलने लगा था, जब दूसरे अखबारों से उसने तोड़-फोड़ की प्रक्रिया शुरू कर दी। जागरण से तो कोई गया नहीं। हिंदुस्‍तान से जो तीन गए उनमें से एक पूनम तिवारी लांचिंग के एक दिन पहले ही लौट आईं। उसने भास्‍कर की व्‍यवस्‍था का रोना रोते हुए भविष्‍य में ऐसी गलती करने का माफीनामा लिखा। हिंदुस्‍तान के संपादक ओमप्रकाश अश्‍क के लंबे समय का गहरा अनुभव और उनके सानिध्‍य में काम कर चुके दैनिक जागरण के संपादक बसंत भारतीय की रणनीति ने भास्‍कर को पहले ही दिन पटकनी दे दी। दोनों ने अपने अपने अखबारों के बेहतरीन कंटेंट जुझारू तेवर का अखबार में नजारा पेश कर भास्‍कर को हर मोर्चे पर चित कर दिया।

इसे देखकर ऐसा लगता है कि बिहार में भी भास्‍कर की राह आसान नहीं होगी। रांची में भले ही भास्‍कर ने थोड़ा बहुत बढ़त लिया हो, लेकिन धनबाद में उसे पांव जमाने में काफी मशक्‍कत करनी होगी। रांची में उसने अन्‍य अखबारों के बेहतरीन पत्रकारों को ऊंची कीमत पर खरीद लिया। शायद यही वजह रही कि उसने काफी हद तक अन्‍य अखबारों को नुकसान पहुंचाया। लेकिन धनबाद में प्रबंधन ने ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं कि जिसका खामियाजा उसे लांचिंग के दिन ही भुगतना पड़ा। वैसे अन्‍य अखबारों के कर्मी भी भास्‍कर से ऊंचे वेतन की उम्‍मीद लगाए बैठे थे। जागरण में बसंत भारतीय के प्रबंधन कौशल, हिंदुस्‍तान में ओमप्रकाश अश्‍क पर टीम का अटूट भरोसा काम आया।

पहले ही दिन भास्‍कर का सर्कुलेशन सेंटर खाली-खाली दिखा। भास्‍कर की वादाखिलाफी के चलते हॉकर और आमलोग नाराज भी दिखे। भास्‍कर ने 32 पेज का छापने का वादा करके 24 पेज दिया था. जबकि हॉकरों को भास्‍कर से साइकिल या ऐसे ही किसी गिफ्ट की उम्‍मीद थी, परन्‍तु भास्‍कर प्रबंधन ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, जिसके चलते कुछ नाराज हॉकरों ने पहले ही दिन भास्‍कर की प्रतियां जला दीं।

भास्‍कर

भास्‍कर

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

दैनिक भास्‍कर के संपादक नरेंद्र सिंह अकेला के खिलाफ निंदा प्रस्‍ताव

: भास्‍कर के सिटी चीफ को प्रताडि़त करने का आरोप : अखिल भारतीय कायस्‍थ महासभा ने दैनिक भास्‍कर सागर यूनिट के संपादक नरेंद्र सिंह अकेला के खिलाफ निंदा प्रस्‍ताव पारित किया है. कायस्‍थ महासभा ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र सिंह अकेला ने दैनिक भास्‍कर, सागर के सिटी चीफ अजय खरे को प्रताडि़त किया. सभा का कहना है कि अजय को प्रताडि़त करने का कारण मात्र इतना है कि वे कायस्‍थ महासभा के सदस्‍य हैं और उनके फोटो कई बैनरों तथा होर्डिंगों में छपे. जो संपादक महोदय को नागवार गुजरे.

नीचे पढि़ए भास्‍कर के सागर संपादक पर कायस्‍थ महासभा द्वारा लगाया गया आरोप तथा निंदा प्रस्‍ताव. इस निंदा प्रस्‍ताव को राज्‍य स्‍तरीय कई अखबारों ने प्रकाशित भी किया.

अकेला

अकेला

सागर के आचरण अखबार में निंदा प्रस्‍ताव के संदर्भ में छपी खबर.

विवादित सीडी की बातचीत भास्कर में प्रकाशित

पूर्व कानूनमंत्री और अपने पिता शांति भूषण और सपा प्रमुख मुलायम सिंह एवं अमर सिंह की कथित बातचीत के टेप को गंभीर साजिश बताते हुए सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने सीडी को फर्जी करार दिया है. उनका दावा है कि यह जोड़-तोड़ कर तैयार की गई है. इस मामले में उन्‍होंने अमर सिंह का हाथ होने का शक जताते हुए सरकार के लोग के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया.

प्रशांत भूषण ने मानहानि का मुकदमा भी दायर करने की बात कही. आइए सुनाते हैं क्‍या बातचीत है इस सीडी में. इस सीडी में मौजूद बातचीत को छापा है दैनिक भास्‍कर ने. वहीं से साभार.

प्रमुख अंश

ऑपरेटर : आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण है..

मुलायम सिंह (एमएस) : हैलो.. हैलो…

अमर सिंह (एएस) : नेताजी आप तो जानते ही हैं ये.. शांतिभूषण जी को (एमएस- हम्म)… बगल में बैठे हुए हैं, (एमएस- हां) प्रशांत भूषण जी इन्हीं के लड़के हैं पीआईएल वगैरा करते हैं, (एमएस-हां) फेमस हैं बहुत, वो भी अच्छे-खासे वकील हैं (एमएस – हम्म) कह रहे थे आगरा वाले मामले के लिए… जस्टिस सिंघवी से उनका बहुत अच्छा है (एमएस- हां) और वो काम करा देंगे (एमएस- बहुत अच्छा किया) ये आप इनसे बात कर लीजिए खुद ही… जो उचित समझें आप कर लीजिए (एमएस- ठीक है)

एमएस : हैलो

शांति भूषण (एसबी) : देखिए प्रशांत पीआईएल करते हैं.. (एमएस- हम्म) उससे कुछ कमाते नहीं (एमएस-हां) देखिए हमने सब स्टोरी सुन ली (एमएस-हम्म) एक ही तरीका है, प्रशांत बहुत अच्छा मैनेज करते हैं (एमएस-ठीक है) इसके लिए बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं है, चार करोड़ रुपया बहुत है (बैकग्राउंड आवाज अस्पष्ट)

देखिए ये तो मजबूरी है।

भारद्वाज, वो खुद ही करप्ट है (एमएस- ठीक है) चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया तो ये तो जज बनाने के लिए कहते हैं कि अच्छा इत्ते लाख रुपए ले आओ, मैं तुम्हें जज बनवा दू (वाइस कट)

एमएस : अब इनको कौन समझाए, चाहे गृह मंत्री हो चाहे कोई हो ऐरा-गैरा, इनको क्या समझाया जाए

एसबी : रिश्वत.. रु.. रुपया लेते हैं। जज बनाने के लिए तो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया वगैरा सारे जैसे करप्ट हैं तो इन सब जजेस को तो रुपए दिए (एमएस : चलिए ठीक है) लेकिन जो हम कह रहे थे कि आप प्रशांत का इंतजाम कर दीजिए (बैकग्राउंड की बातचीत अस्पष्ट) (फोन फिर से बजता है)..

एमएस : वो हम कर लेंगे (फोन फिर बजता है, दूसरी बातचीत शुरू होती है)..

एमएस : हैलो।

एएस : ठीक हो गया सर।

एमएस : हां, ठीक हो गया बहुत अच्छा।

एएस : नहीं तो ये तो मर जाएंगे ये सब।

एमएस : हां कहीं के नहीं रहेंगे… कल प्रकाश करात देंगे?

एएस : हां देंगे.. चलिए सर…

एमएस : हां चलिए..

एएस : आपका आशीर्वाद बना रहे हम लोगों के साथ।

एमएस : बस पूरा आशीर्वाद है…

एएस : जी-जी..

एमएस : अमिताभ गए?

एएस : हां, वो गए..

एमएस : अच्छा।

एएस : ओके।

धूमधाम से हुई दैनिक भास्‍कर धनबाद की लांचिंग

दै‍निक भास्‍कर का धनबाद एडिशन धूमधाम से लांच हो गया. यह भास्‍कर समूह का 59वां तथा झारखंड से तीसरा संस्‍करण है. भास्‍कर ग्रुप इसके पहले रांची और जमशेदपुर एडिशन लांच कर चुका है. इसके साथ अब भास्‍कर की पहुंच पूरे झारखंड राज्‍य में हो गई है. भास्‍कर ने अपना लांचिंग संस्‍करण 24 पेज का छापा. हालांकि पहले इसे 32 पेज छापे जाने की योजना थी.

झारखंड की धरती पर पूरी योजना की सफलता के बाद भास्‍कर ग्रुप का अगला पड़ाव बिहार हो गया है. ग्रुप अपने साठवें संस्‍करण के रूप में पटना की तैयारियां शुरू कर दी हैं. भास्‍कर की लांचिंग के समय कोई ज्‍यादा दिक्‍कत नहीं आई. पहले दिन भास्‍कर के प्रतिस्‍पर्धी अखबारों की भी इस पर नजर थी. परन्‍तु बहुत ज्‍यादा धूम-धड़ाका देखने को नहीं मिला. भास्‍कर के सर्कुलेशन सेंटरों पर काफी गहमा-गहमी देखी गई.

गेस्‍ट एडिटर अन्‍ना हजारे ने संभाली भास्‍कर की कमान

सिने स्‍टार अभिषेक बच्‍चन कल प्रभात खबर के अतिथि संपादक थे तो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आइकन बन चुके अन्‍ना हजारे दैनिक भास्‍कर के गेस्‍ट एडिटर थे. गेस्‍ट एडिटर के रूप में अन्‍ना ने अखबार प्रकाशन की बारीकियों को भी समझा. उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर के लिए विशेष संपादकीय लिखा. जिसे दैनिक भास्‍कर से साभार लेकर नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.

चरित्र साफ हो तो सरकार झुकाना कठिन नहीं

मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतना व्यापक समर्थन मुझे मिलेगा। आम आदमी भ्रष्टाचार से आजिज आ चुका है। जीना मुश्किल है। अभी लड़ाई की शुरुआत हुई है। हमें दूर तक जाना है। यह सिस्टम या किसी राजनीतिक दल का हिस्स बन कर नहीं हो सकता है। आज बाहर रहकर लोगों का जो विश्वास जीता है वह पार्टी या संगठन बनाकर नहीं टिकेगा।

संगठन बनाने के बहुत खतरे हैं। संगठन पूरे देश के अलग अलग राज्यों में खड़ा होगा। संगठन में आने वाले लोग कौन हैं इसकी जांच कराना बहुत मुश्किल होगा। हम कैसे चेक करेंगे। अगर संगठन में ऐसे लोग आ गए जो भ्रष्टाचार या अनैतिक कामों में लिप्त हैं तो बहुत बदनामी होगी। इसलिए हमने तय किया है कि हम जगह जगह भरोसे का आदमी तलाशकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से आगे बढ़ेंगे। मैंने जिंदगी में बहुत से आंदोलन किए हैं। मुझे पता है कि सिस्टम से कैसे लड़ा जाता है।

मैंने अपने चरित्र को इतना संभाला है कि यह हर तरह से संदेह से परे है। ऐसा न हो तो आप सरकार को झुका नहीं सकते। मैंने गांधी जी के साथ शिवाजी का जिक्र अपने आंदोलन में किया क्योंकि गांधी जी कठोर शब्द बोलने को भी हिंसा मानते थे। मैं समाज की भलाई के लिए सरकार के खिलाफ कठोर शब्द इस्तेमाल कर रहा था।

अब हमारे सामने सबसे पहला काम लोकपाल बिल का अच्छा ड्राफ्ट तैयार करना है। हमने सरकार से कहा है कि अगर आपके पास कुछ है तो हमें दीजिए। मैं 15 -20 राज्यों में जाकर लोगों से सुझाव मागूंगा। अगर किसी जज के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की पुख्ता शिकायत मिलती है तो इसकी जांच करने और मुकदमा चलाने का अधिकार लोकपाल को होगा, लेकिन उसको हटाने का अधिकार नहीं होगा। उनकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुमति लेने की भी जरूरत नहीं होगी।

मंत्रियों को हटाने का अधिकार लोकपाल को नहीं होगा क्योंकि यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन मंत्रियों की जांच करने और उनपर मुकदमा चलाने की अनुमति लोकपाल जरूर दे सकेगा। हम आने वाले दिनों में राइट टू रिकाल की मुहिम को भी आगे बढ़ाएंगे। लोगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा है। इसे अगर सही तरह के इस्तेमाल नहीं किया गया तो अराजकता फैल जाएगी। नीयत साफ हो तो किसी भी आंदोलन की सफलता में संदेह नहीं होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों की इस मुहिम के सफल होने का मुझे पूरा भरोसा है।

दैनिक भास्‍कर, धनबाद की लांचिंग आज

दैनिक भास्कर आज अपना 59वां संस्करण धनबाद से लांच करने जा रहा है.  भास्‍कर ग्रुप का झारखंड में यह तीसरा संस्करण होगा.  इसके पहले भास्‍कर रांची, जमशेदपुर में अपने संस्‍करण लांच कर चुका है. इसके साथ ही भास्‍कर हिंदुस्‍तान, जागरण और प्रभात खबर की तरह तीनों जगह से संस्‍करण निकालने वाला अखबार हो गया.   झारखंड के बाद अब दैनिक भास्कर बिहार में भी अपने संस्करण शुरू करने की तैयारी में जुट गया है.

दैनिक भास्कर समूह देश का सबसे बड़ा मीडिया ग्रुप है. यह ग्रुप हिन्दी में दैनिक भास्कर के अलावा समूह गुजराती में दिव्य भास्कर, अंग्रेजी में डीएनए का प्रकाशन करता है. भास्‍कर ग्रुप के 7 राज्यों के 17 शहरों में एफएम रेडियो स्टेशन हैं.

डिमोशन से नहीं डिगे, संघर्ष से मजबूत हुए पग

दैनिक भास्‍कर के पुराने साथी नरेश भारद्वाज को फिर एक बार उनके मेहतन का फल मिला है. भास्‍कर प्रबंधन ने नरेश को कैथल का ब्‍यूरोचीफ बना दिया है. इन्‍होंने अपनी बीस साल की पत्रकारिता में 12 साल भास्‍कर को दिए हैं. साढ़े तीन साल पहले भी ये कैथल के ब्‍यूरोचीफ थे, परन्‍तु प्रबंधन ने अचानक यहां से इनका डिमोशन करते हुए कुरुक्षेत्र रिपोर्टर बनाकर भेज दिया था.

तत्‍कालीन पानीपत के एडिटर दिनेश मिश्रा ने कई पुराने पत्रकारों के साथ ऐसा किया था. परन्‍तु नरेश ने हार नहीं मानी और कड़ी मेहतनत की. जिसका परिणाम उन्‍हें कैथल के ब्‍यूरोचीफ के पुराने सम्‍मान के रूप में मिला है. कैथल के ब्‍यूरोचीफ रहे अमरजीत मधोक को जिंद का प्रभार सौंपा गया है. दूसरी तरफ अन्‍य बदलावों में संदीप शाही को भी कुरुक्षेत्र से करनाल का ब्‍यूरोचीफ बनाकर भेज दिया गया है. जिंद ब्‍यूरोचीफ सुशील भार्गव का पद घटाते हुए उन्‍हें करनाल में रिपोर्टर बना दिया गया है. करनाल के ब्‍यूरोचीफ धर्मेश पांडेय को सोनीपत में खाली पड़े ब्‍यूरोचीफ की कुर्सी थमाई गई है.

लक्ष्‍मी पंत जयपुर, राघवेंद्र रांची तथा बीएम‍ सिंह चंडीगढ़ के आरई बने

: हरिशचंद्र सिंह बनेंगे एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर : दैनिक भास्‍कर प्रबंधन ने अपने चार वरिष्‍ठ संपादकीय सहयोगियों का पदोन्‍नति कर नई जिम्‍मेदारी सौंपी है. जो परिवर्तन किए गए हैं उनमें जयपुर में लक्ष्‍मी पंत, हरिशचंद्र सिंह, रांची में राघवेंद्र तथा चंडीगढ़ में बीएम सिंह शामिल हैं. इसमें तीन लोगों को तीन एडिशनों का स्‍थानीय संपादक बना दिया गया है. हरिशचंद्र सिंह का प्रमोशन एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर के रूप में हुआ है.

अब तक भास्‍कर, जयपुर में एक्‍जीकयूटिव एडिटर के रूप में सेवाएं दे रहे लक्ष्‍मी पंत को वहां का स्‍थानीय संपादक बना दिया है. पंत पिछले छह सालों से भास्‍कर के साथ थे. प्रबंधन ने उन्‍हें 2005 में श्रीगंगानगर का स्‍थानीय संपादक बनाया था. 2007 में इन्‍हें श्रीगंगानगर से सीकर का आरई बनाकर भेज दिया गया. 2009 में इन्‍हें जयपुर बुलाकर एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर बना दिया गया था. ये भास्‍कर के इन्‍वेस्‍टीगेशन टीम को लीड कर रहे थे. अब इन्‍हें प्रबंधन ने आरई के रूप में प्रमोट कर दिया है. मूलत: उत्‍तराखंड के अल्‍मोड़ा के रहने वाले लक्ष्‍मी पंत भास्‍कर के पहले अमर उजाला और जागरण के साथ दिल्‍ली, देहरादून और जम्‍मू कश्‍मीर में वरिष्‍ठ पदों पर काम कर चुके हैं.

दूसरी पदोन्‍नति भी जयपुर में की गई है. लक्ष्‍मी पंत की जगह हरिश्‍चन्‍द्र सिंह को भास्‍कर, जयपुर का एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर बनाये जाने की चर्चा है. ये अभी तक डिप्‍टी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले हरिशचंद्र सिंह 2009 में डिप्‍टी एडिटर के रूप में भास्‍कर से जुड़े थे. उसके पहले ये डीएनए में चीफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थे. ये पिछले बारह सालों से जयपुर की पत्रक‍ारिता में सक्रिय हैं. ये राजस्‍थान पत्रिका के भी चीफ रिपोर्टर रह चुके हैं.  बताया जा रहा है कि हरिशचंद्र सिंह के जिम्‍मे डीबी स्‍टार और जयपुर सिटी दोनों का प्रभार रहेगा.

तीसरी पदोन्‍नति रांची में की गई है. अब तक पॉलिटिकल एडिटर के रूप में भास्‍कर को अपनी सेवा दे रहे राघवेंद्र जी को रांची का आरई बनाया गया है. राघवेंद्र जी लगभग दो सालों से भास्‍कर से जुड़े हुए हैं. बीच में राघवेंद्र जी के भास्‍कर, धनबाद एडिशन के आरई बनने की चर्चा थी परन्‍तु प्रबंधन ने इनकी जगह बसंत झा को धनबाद का आरई बना दिया. जिससे कुछ दिन तक राघवेंद्र प्रबंधन से नाराज भी रहे. परन्‍तु फाइनली रांची का आरई बनाकर प्रबंधन ने इनकी नाराजगी दूर कर दिया है. राघवेंद्र जी भास्‍कर के पहले प्रभात खबर के साथ जुड़े हुए थे. ये प्रभात खबर, धनबाद एडिशन के संपादक भी रह चुके हैं. चौथी पदोन्‍नति प्रबंधन ने चंडीगढ़ में किया है. यहां पर बीएम सिंह को आरई बनाया जा रहा है.

दैनिक भास्‍कर से दो ऑपरेटर और एक रिपोर्टर का इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर, अंबाला से रिपोर्टर अशोक, प्रदीप और राकेश के इस्‍तीफा देने के बाद दो ऑपरेटर भी संस्‍थान को बॉय कर दिया. अम्‍बाला में भास्‍कर रिपोर्टरों की कमी से जूझ रहा है. दूसरे अखबारों से कोई रिपोर्टर आने को तैयार नहीं है. जिसके बाद भास्‍कर को अपने दूसरे यूनिट से रिपोर्टरों को बुलाना पड़ा.

दूसरी ओर दैनिक भास्‍कर, करनाल से इस्‍तीफा देकर अनिल भारद्वाज आज समाज चले गए हैं. अनिल ने रिपोर्टर के रूप में आज समाज ज्‍वाइन किया है. इसके चलते भास्‍कर प्रबंधन लगातार परेशान है. वह समझ नहीं पा रहा है कि आखिर क्‍यों लोग भास्‍कर छोड़कर जा रहे हैं.

भास्‍कर ने छापी झूठी और गलत खबर

यशवंत जी नमस्कार, मैं आप को एक सूचना देना चाहता हूँ जो मेरी आँखों देखी है, इस घटना स्थल पर मैं मौजूद भी था, जो मेरी सूचना को पुख्ता करती है. भास्कार के बेब पर खबर छपी है जिसका शीर्षक है  पत्रकारिता विश्विद्यालय में छात्रों ने जमकर की तोड़-फोड़, जो सरासर गलत खबर है. ऐसा लगता है कि भास्कार वाले बिकी हुई खबर चलाने का ठेका ले लिए हैं, मगर पत्रिका और अन्य टीवी चैनलों ने भास्कर के विपरीत सही खबर चलाई है, जो मेरी बात को और भी पुख्ता करेंगे.

अगर सर भास्कर की बात को सच माना जाए तो फिर दृश्य एवं श्रव्य विभाग के 5 छात्र ,जनसंचार विभाग के 1 छात्र और पत्रकारिता विभाग के 5 छात्र का हिंदुस्तान के कैम्पस में कैसे सोमवार को चयन हुआ? जबकि पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का कहना था कि विभाग में लेक्चर चल रहा था, जो कि लेक्चर नहीं अन्य विभागों के विद्यार्थियों के अनुसार डेमो चल रहा था.

आप ही बताइये कि क्या डेमो की क्लास चल रही थी इसलिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों को छोड़ कर समस्त विभाग के छात्रों ने विरोध किया? फिर यह हिंदुस्तान का कैम्पस कैसे हो गया? और अन्य विभाग के छात्रों का सलेक्शन कैसे हुआ? भास्कर ने पूरी खबर को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया है और सच्चाई पर पर्दा डाला है, जिससे लगता है कि भोपाल भास्कर बिक गया है, और इसी तरह ये अपनी विश्वसनीयता पर भी ठप्पा लगा रहा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

गालियों का अड्डा बना भास्‍कर डॉट कॉम

यशवंतजी, मैं आपका ध्यान भास्कर डॉट कॉम (हिंदी वेबसाइट) के होम पेज पर दिए गए ब्लॉग की ओर दिलाना चाहूंगा। यहां पर लीबिया के बारे में एक ब्लॉग पोस्ट किया गया है। लेख तो किसी भी दृष्टिकोण से प्रभावी नहीं लगा, पर अचंभा हुआ यह जानकर कि साइट को मॉडरेट करने वाले कितने सजग हैं। दरअसल इस ब्लॉग के नीचे कमेंट्स में किसी ने अभद्र शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी टिप्पणी की है, जिसे मॉडरेटर ने बिना पढ़े ही पब्लिश कर दिया है।

मैंने भड़ास पर पहले भी इसी तरह की खबर पढ़ी थी, जिसमें भास्कर डॉट कॉम की ऐसी ही कारगुजारी का जिक्र था। उक्त खबर दिग्विजय सिंह से संबंधित थी, जिसमें ढेरों गालियां पब्लिश कर दी गई थीं। ब्लॉग का लिंक और स्क्रीनशॉट आपके साथ भी शेयर कर रहा हूं। साथ ही वह टिप्पणी भी जिसमें वो शब्द प्रयोग किए गए हैं।


 

एक और अफगानिस्तान न बन जाए लीबिया !

लीबिया में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की सेना लीबिया के लोगों को बचाने के लिए पूरी मुस्तैदी से गद्दाफी की सेना से लड़ रही है। इनका लक्ष्य एक ही है, बस मानवता के नाते जनता को गद्दाफी के जुल्मों से बचाया जाए। कम से कम अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही हैं खबरों से तो ऐसा ही प्रतीक हो रहा है। विश्व के किसी भी कोने में जुल्म बढ़ेगा तो वे उसे मिटाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोडं़ेगे। लेकिन क्या यह वाकई में सही है?

इस मुद्दे पर अमेरिका और ब्रिटेन के पुराने इतिहास को खंगालें तो बिना फायदे के ये देश कुछ नहीं करते हैं। इराक और अफगानिस्तान से लेकर वियतनाम तक इसके उदाहरण हैं। लेकिन फिर भी लीबिया को बचाने के लिए दुनिया के आका सामने आ चुके हैं। लीबिया में जो हो रहा है, उसे बिल्कुल जायज नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन आगे वहां अमेरिका-ब्रिटेन लीबिया को गद्दाफी से मुक्त कराके वहां नई लोकतांत्रिक सरकार बनाने में मदद करेंगे? कहीं वैसी सरकार तो नहीं, जो अफगानिस्तान में बनाई गई थी। यह पूरी दुनिया जानती है कि किस प्रकार अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने इराक और अफगानिस्तान को दुनिया में शांति कायम करने के नाम पर तहस-नहस करवा दिया।

लेकिन जब अमेरिका में नए राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा की ताजपोशी हुई थी तो पूरी दुनिया को लगा कि एक अश्वेत क्रांति फिर से जन्म ले रही है। लेकिन जिस तरह लीबिया में बमबारी की जा रही है, उससे एक बार फिर से अमेरिका-ब्रिटेन का असली चेहरा सामने आ गया है। लीबिया की सड़कों पर जनता आमने सामने है। एक तरफ गद्दाफी समर्थक हैं तो दूसरी ओर गद्दाफी की नीतियों से पस्त आवाम। लेकिन भुगतना दोनों को ही पड़ रहा है। मिस्त्र से फैली यह आग लीबिया तक पहुंचने में कुछ ही दिन लगी।

लेकिन चिंगारी अंदर ही अंदर भड़क रही थी। बराक ओबामा भी जानते हैं कि दूसरे के मामले में टांग अड़ाने का तब तक कोई अर्थ नहीं है जब तक कोई फायदा नहीं हो। अपने राष्ट्रपति की बातों से अमरीकी विदेशमंत्री रॉबर्ट गेट्स भी इतेफाक रखते हैं। अब देखना यह है कि कब और कैसे अमेरिका और ब्रिटेन लीबिया से दूर होते हैं? अमेरिका और ब्रिटेन के इतिहास को देखकर नहीं लगता है कि ये देश लीबिया से खाली हाथ चले जाएंगे।

मानवाधिकार के बारे में दुनियाभर में खराब – अच्छा तय करने का अधिकार बड़े राष्ट्रों को किसने दिया?

क्या अमेरिका-ब्रिटेन का असली मकसद लीबिया में शांति स्थापना है?

क्या गद्दाफी के हटाये जाने भर से वहां शांति स्थापित हो जाएगी?

लीबिया में लोकतांत्रिक की आड़ में कहीं लेकिन पिट्ठू सरकार न बन पाए ऐसा कैसे संभव हो सकता है?

आखिर बड़े देशों को दुनिया का थानेदार बनने का हक किसने दिया?

पूरे घटनाक्रम में जिस तरह से दमन हो रहा है, हमले हो रहे हैं आम जनता की जानमाल की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?

आप भी इस बहस में भाग लेकर भास्कर डॉटकॉम के अन्य व्यूअर्स के साथ अपने विचार शेयर कीजिए।

Posted by Ambrish Pathak (24th Mar 11 10:16:29)
आशीष महर्षि जी, लगता है आपको इस बात की गलतफहमी है कि केवल आप ही अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दखल रखते हैं। दरअसल जिस विषय पर आपने यह अपनी “विशेष टिप्पणी” दी है, उसे पूरे विश्व का मीडिया पहले दिन से ही बता रहा है। इसलिए इस पोस्ट के जरिये यह बताना कि अमरीका या ब्रिटेन अपने फायदे के लिए लीबिया में जंग छेड़ रहे हैं, नई बात नहीं है। एक और बात पर ध्यान दिलाना चाहुंगा कि थोथे टाइप के विषयों पर लिखने से बचें। लिखना ही था तो इसके आर्थिक पहलुओं पर नजर डालते।

Posted by Anil (23rd Mar 11 21:11:46)
yeh haram se hi peda hote hain in madar chodon ko apne bap aur mata ka bhi pata nahi hai yeh kisi ka kya bhala karenge yeh to dunyan main shanti chahte hi nahi hai. inka to matlab hi dunya main hinsa failana hai. jab hinsa hoti hai inko shanti milte hai. yeh sirf ek bahana hai oil k bhandaron per kabja karne ka. is se pehle bhi yeh iraq main esa kar chuke hain.

Posted by Wasim (23rd Mar 11 17:11:47)
sahi kaha sikandra aapne ye sale kutte h aapa fayeda jaha dikhta h waha kud padte h…

sawarti kism k log h middle east k tail k kahjanoo par nazar h inki. bahrin,oman,yaman, seriya yaha bhi to sarkar virodhi demostration ho rahe h.waha to ye kuch kr nahi rahe kuki waha unka swarth nahi h. libiya ek kamjor mulk h aur uus k paas petro oil k bhandar h. isliye y westrron contries ek k petro oil khajane par kabja jamana chahte h jaise Iraq aur afganistran m huaaa……

Posted by Indian (23rd Mar 11 15:13:40)

i have question to all thos ewho posten comments here,will it give any solution? we all know europe were always selfish and want to get only oil of libi,but why all libia;s friend countries are silent in the begnning iran had spoken very big word int se int baja denge where is iran now

Posted by Sikander Khan (23rd Mar 11 10:49:50)
Ye vo haram khor log hai ke sirf is baat ka intajar karte hai ki kisi bhi desh me kuch ho our us desh par kabja jama la pahale in British ne hamko luta ab inki niyat arab ke petrol ke khajane par hai ye log shuru se hi ham ko lut te aye hai 250 sal tak inhone ham par raaj kara hai ye samrajvadi log inka maksad sirf logo ko lutna hai na ki kisi ki jaan bachana

Posted by Raj (23rd Mar 11 10:16:35)
बिल्कुल सहि कह रहे है………सले हरमि है.

Posted by Raghuraj Singh (22nd Mar 11 19:08:15)
ये अमेरिका और ब्रिटेन की एक बहुत बड़ी चाल है। ये देश लीबिया के खजाने अर्थात तेल भंडार पर इसी बहाने कब्जा करना चाहते हैं। इतिहास गवाह रहा है कि इन पर हमेशा से स्वार्थ हावी रहा है। ये लीबिया के लोगों की रक्षा करने नहीं बल्कि अपने घर का खजाना भरने के लिए गए हैं।

Ashish maharishi (22nd Mar 11 19:33:23)
हमला करने वाले देशों की नजर लीबिया के तेल भंडारों पर लगी है। लीबिया के अधिकांश तेल ठिकाने बेंगजी और देश के पूर्वी हिस्से में हैं, जहां सत्ता का विरोध करने वाले लड़ाकों का कब्जा है। मुअम्मर गद्दाफी ने बेंगजी पर वापस कब्जा करने के लिए बड़ा हमला किया, लेकिन उसके ठीक बाद पश्चिमी देशों ने लीबिया पर हमला बोल दिया।

Posted by एक छुट्टा पत्रकार (22nd Mar 11 19:05:01)
अरे भई, मगरमच्छ जिन्दा तभी है,  जब छोटी मछलियों को खाएगा।  और इस गलाकाट युग में शांति, मदद ऐसे शब्द नहीं चलते। फायदे के लिए तो पश्चिम वाले अपनों का भी गला काट दें।

Posted by Brijesh (22nd Mar 11 19:02:08)
ye bilkul adhipatya ki shuruaat hai jo naye kalevar me hai.

Ashish (22nd Mar 11 19:12:37)
Sahi kahan Brijesh apne

भास्‍कर

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

सहारा से राजकिशोर की छुट्टी, उर्मिला एवं विनय की नई पारी

रायसेन जिले में सहारा के लिए काम कर रहे स्ट्रिंगर राजकिशोर सोनी अब संहारा को सेवाएं नहीं दे पाएंगे. प्रबंधन ने उनसे किनारा कर लिया है. बताया जा रहा है कि कुछ शिकायतों के बाद प्रबंधन ने उन्‍हें काम करने से मना कर दिया. राजकिशोर अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

हमारा महानगर, मुंबई से भी दो लोगों के जाने की सूचना है. हमारा महानगर की फिल्‍म रिपोर्टर उर्मिला कोरी ने यहां से इस्‍तीफा देकर प्रभात खबर के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. जबकि विनय यादव यहां से इस्‍तीफा देने के बाद दैनिक भास्‍कर से जुड़ गए हैं.

नीमच में व्‍यापारियों ने जलाई भास्‍कर की होली

दैनिक भास्‍कर के रतलाम यूनिट के नीमच भास्‍कर में प्रकाशित खबरों से नाराज व्‍यापारियों ने भास्‍कर की प्रतियां जलाईं. नीमच के मनासा तहसील के कई व्‍यापारी पिछले दिनों भास्‍कर में छपे एक खबर से नाराज थे. व्‍यापारी इस खबर का खंडन चाह रहे थे परन्‍तु अखबार इसके लिए तैयार नहीं था. इससे नाराज व्‍यापारियों ने भास्‍कर की होली जला दी.

व्‍यापारियों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर और दुर्भावना से प्रेरित होकर अखबार में खबर लिखी गई थी. गौरतलब है कि इसके पहले नीचम जिले के ग्राम सावन तथा गिरदौड़ा के ग्रामीण भी अखबार में प्रकाशित खबरों से नाराज होकर भास्‍कर की प्रतियां जलाई थीं.

भास्‍कर

भास्‍कर

भास्‍कर

भास्‍कर के कार्यक्रम में महिमा चौधरी के साथ छेड़छाड़

: जमशेदपुर में अखबार के सौ दिन पूरे होने पर आयोजित था दौड़ : जमशेदपुर में दैनिक भास्कर की सफलता के सौ दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में शनिवार को रन फॉर जमशेदपुर का आयोजन किया गया। इसमें फिल्म अभिनेत्री महिमा चौधरी के साथ पूरा शहर दौड़ा। दौड़ के वक्त महिमा के साथ छेड़छाड़ की जाने का मामला सामने आया है।

दरअसल कार्यक्रम की शुरुआत सुबह छह बजे मोदी पार्क से हुई। यह दौड़ सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल, जुबिली पार्क, कीनन स्टेडियम, बाग-ए-जमशेद होते हुए मोदी पार्क में समाप्त हुई। इसी दौड़ के दौरान महिमा के साथ छेड़छाड़ की खबर आई।

महिमा

क्‍या यही है भास्‍कर की पत्रका‍रिता का स्‍टैंडर्ड!

आखिर, मीडिया ऐसा क्यों है। सूचनाओं और समाचारों को सलीके से प्रस्तुत करना तो शायद हम भूल ही गए हैं। पिछले दिनों दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर एक खबर पढ़ी ‘बाबा रामदेव ने खुद को बताया भगवान राम और महात्मा गांधी’। हेडिंग के नीचे मैटर भी पढ़ा। लेकिन मुझे बाबा रामदेव के बयान से ऐसा कुछ कहने की बू नहीं आई। खबर में रामदेव के हवाले से लिखा गया है- ‘मैं तो वही कर रहा हूं जो महात्मा गांधी और भगवान राम ने किया था। जब भगवान राम को नहीं बख्शा गया तो वे मुझे कैसे छोड़ सकते हैं।’

इसी बयान को हमारे इतने बड़े मीडिया प्रतिष्ठान ने जिस तरीके से छापा, वह बहुत गलत लगा। रामदेव के इस बयान से कहीं नहीं झलकता कि वे खुद को भगवान राम या महात्मा गांधी कह रहे हैं। क्या आपको लगा? अंत में पाठकों की राय मांगी गई है। लिखा है- बाबा रामदेव के विचारों और कार्ययोजना पर आपकी क्या राय है? क्या उनके द्वारा अपने मुंह से अपनी तुलना भगवान राम और महात्मा गांधी से करना शोभा देता है? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिख कर सबमिट करें और दुनिया भर के पाठकों से शेयर करें।

सवाल है कि क्या यह जिम्मेदार पत्रकारिता है? कम से कम मुझे यह जिम्मेदार पत्रकारिता नहीं लगती। इस समाचार में कुछ अन्य अच्छी बातें भी हैं, जिन्हें हाईलाइट किया जा सकता था। जैसे कि राजनीतिक सुधार देश की बड़ी जरूरत, तेलंगाना के लिए आत्महत्याएं न करें आदि। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मात्र सनसनी फैलाने के लिए इस तरह से खबर पेश की गई होगी या फिर सरकार से पैसा लेकर। क्योंकि रामदेव सरकार के खिलाफ लगातार बोल रहे हैं और सरकार उनके खिलाफ।

लगातार विभिन्न खबरों पर नजरें रहती हैं और इसलिए प्रतिक्रियाएं भी होने लगती हैं। यह एक स्वाभाविक दिमागी क्रिया है। जब से बाबा रामदेव और सरकार के बीच विवाद पैदा हुआ है, तब से दैनिक भास्कर ने रामदेव के खिलाफ समाचार प्रकाशित किए हैं। उनके लिंक हैं-

योग गुरु बाबा रामदेव : साइकिल से स्कॉटलैंड तक की सवारी

रामदेव के बाबा बनने की पूरी कहानी

बाबा रामदेव ने खुद को बताया भगवान राम और महात्मा गांधी

इन हेडिंग्स पर क्लिक करके आप पूरी खबरें पढ़ सकते हैं और देख सकते हैं ‘पत्रकारिता का स्टैंडर्ड’।

लेखक मलखान सिंह पत्रकार हैं तथा इनदिनों वेब पत्रकारिता में जमे हुए हैं. उनका यह लेख उनके ब्‍लॉग दुनाली से साभार लिया गया है.

भास्‍कर के सागर इकाई में उथल-पुथल, पत्रिका ने खरीदी जमीन

दैनिक भास्‍कर ग्रुप के बुंदेलखंड एडिशन में धड़ाधड़ हो रहे तबादलों के बीच पत्रिका भी सागर में दस्‍तक देने की तैयारी शुरू कर दी है. खबर है कि पत्रिका ने सागर के इंडस्‍ट्रीयल एरिया में दो हजार वर्ग मीटर जमीन खरीदी है. इधर भास्‍कर के भीतर लगातार तबादलों से कर्मचारियों में नाराजगी है.

भास्‍कर ने हाल ही में सागर इकाई में 19 वर्षों से सेवा दे रहे वरिष्‍ठ पत्रकार प्रह्लाद नायक को रतलाम भेज दिया है. प्रह्लाद यहां पर जमे हुए तथा पकड़ रखने वाले पत्रकार थे. इसी तरह छतरूर के ब्‍यूरोचीफ आशीष खरे को भोपाल बुला लिया गया है. खबर है कि अभी कई और तबादले किए जाने वाले हैं. टीकमगढ़ से घनश्‍याम पटेल को दामोह भेजा गया है. इस कारण बुंदेलखंड इकाई में उथल-पुथल की हालत है. कई कर्मचारी तो भास्‍कर को अलविदा कहने का भी मन बनाने लगे हैं.

पत्रिका फिलहाल अपने रीवा वाले प्रोजेक्‍ट को टाल दिया है. बिलासपुर एडिशन के बाद सागर एडिशन लांच करने की तैयारी है. वह सागर में मचे उथल-पुथल का फायदा उठाना चाहती है. भीतर खाने में चर्चा यह भी है कि भास्‍कर के कुछ सीनियर पत्रिका प्रबंधन के संपर्क में हैं. वे देर सबेर पत्रिका के साथ जुड़ सकते हैं. इसलिए ही वे भास्‍कर के भीतर तबादलों से असंतोष पैदा कर रहे हैं.

पत्रिका के बुंदेलखंड प्रोजेक्‍ट शुरू होने से पहले ही भास्‍कर में मची धमाल पत्रिका के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. पत्रिका ने सागर में जमीन रजिस्‍ट्री करा ली है. बताया जा रहा है कि जल्‍द ही इसपर काम शुरू होने वाला है. इस प्रोजेक्‍ट को रीवा में शुरू होने वाले प्रोजेक्‍ट से पहले तैयार किया जाएगा.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आ‍धारित.

भास्‍कर, धनबाद 17 को आएगा बाजार में

दैनिक भास्‍कर के धनबाद एडिशन की लांचिंग के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं. खबर है कि अखबार को 17 अप्रैल में बाजार में लाए जाने की योजना हैं. इसके लिए यूनिट को अप टू डेट किया जा रहा है. इसके लिए सभी रिपोर्टरों को ट्रेनिंग दी जा रही है. डेस्‍क के लोगों को भी जानकारियां दी जा रही हैं. प्रबंधन कहीं कोई कमी नहीं छोड़ना चाह रहा है.

रिपोर्टरों को खबरों की समझने के तरीके बताए जा रहे हैं तो डेस्‍क वालों को खबरों को कसना और भास्‍कर की कसौटी पर लाना सिखाया जा रहा है. प्रबंधन ले आउट से भी कोई समझौता नहीं करना चाहता है, लिहाजा ले आउट के बारे में सभी को बारीकी से और विस्‍तार से जानकारी दी जा रही है. इस यूनिट के लांचिंग की पूरी जिम्‍मेदारी झारखंड स्‍टेट हेड ओम गौड़ को सौंपी गई है. सारा काम उनके निर्देशन में चल रहा है. खबर है कि भास्‍कर प्रबंधन धनबाद में लांचिंग के दिन से ही जोरदार उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भास्‍कर, रांची से विकास का तबादला धनबाद, चीफ सब एडिटर बने

दैनिक भास्‍कर, रांची में रीजनल डेस्‍क पर सीनियर सब एडिटर के रूप में काम कर चुके विकास शुक्‍ला को धनबाद भेजा जा रहा है. खबर है कि उन्‍हें धनबाद में चीफ सब एडिटर बनाया गया है. विकास ने धनबाद में ज्‍वाइन कर लिया है. इसके पहले विकास रांची में भी धनबाद की टीम को ट्रेनिंग दी थी.

चर्चा थी कि विकास के साथ गिरिजेश मिश्रा और मुकेश कुमार को भी धनबाद भेजा जाना था, परंतु रांची में बेहतर स्‍टॉफ की कमी को देखते हुए इस योजना को टाल दिया गया.

विजय भास्‍कर से जुड़े, सतपाल का पंजाब केसरी से इस्‍तीफा

विजय मनोहर राव टाले ने दैनिक भास्‍कर, औरंगाबाद के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. उन्‍हें सर्कुलेशन मैनेजर बनाया गया है. वे इसके पहले दैनिक देशोन्‍नति से जुड़े हुए थे. वे देशोन्‍नति को जलगांव तथा नागपुर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. बारह साल के अपने करियर में विजय दैनिक गांवकरी के साथ भी जुड़े रहे हैं.

पंजाब केसरी, जम्‍मू से सतपाल चौधरी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. वे कहां ज्‍वाइन कर रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. सतपाल की पंजाब केसरी संग यह दूसरी पारी थी. बताया जा रहा है कि उन्‍हें पिछले छह महीने से तनख्‍वाह नहीं मिली थी, जिससे नाराज होकर उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया. अपनी पहली पारी में वे इस कार्यालय के ब्‍यूरोचीफ रह चुके थे. अब जम्‍मू ऑफिस में केवल तीन रिपोर्टरों के सहारे काम चल रहा है.

नईदुनिया, पत्रिका और भास्‍कर की जंग, पिस रहा विज्ञापनदाता

ग्वालियर इन दिनों अखबारी जंग का अखाड़ा बना हुआ है। यह जंग तब से और तेज हो गई है जब से पत्रिका ने ग्वालियर में कदम रखा। ग्वालियर  को अखबार के मालिक सदैव से कमाऊ मानते रहे हैं। लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब रेवेन्यू कलेक्शन की बात होती है। विज्ञापनदाता सीमित हैं और वे इस अखबारी जंग में पिस रहे हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे विज्ञापन दें और किसे न दें।

दैनिक भास्कर और पत्रिका की जंग जाहिर है। इसी जंग को आगे बढ़ाते हुए अब दैनिक भास्कर ने नईदुनिया में सेंध लगाना शुरू कर दी। मार्केटिंग का काम देखने वाले अभिक सूर को दैनिक भास्कर ने अपने पाले में लेते हुए भिलाई भिजवा दिया है। सूर प्रसन्न हैं। वे अपने घर रायपुर के निकट पहुंच गए हैं। अब दैनिक भास्कर के ग्वालियर में पदस्थ जनरल मैनेजर आशुतोष मिश्रा नईदुनिया के जीएम अनिल सेंगर पर डोरे डाल रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने दो दिन पहले सिटी सेंटर स्थित एक कैफे काफी डे में लंबी मंत्रणा की। सेंगर को आश्वस्त किया गया है कि नईदुनिया छोडऩे पर उन्हें भास्कर की इंदौर के आसपास स्थित किसी यूनिट का प्रभारी बनाया जा सकता है।

सेंगर को इंदौर से ग्वालियर भेजा गया है। वे भी होम सिकनेस के चलते छटपटा रहे हैं और किसी भी तरह घर वापस लौटना चाहते हैं। दैनिक भास्कर की मंशा यह है कि नईदुनिया के लिए रेवेन्यू जुटाने वाली टीम तोडक़र नईदुनिया की कमर तोड़ो। दैनिक भास्कर विज्ञापनदाताओं से यह बात पहले ही कह चुका है कि पत्रिका में उनका विज्ञापन नहीं दिखना चाहिए। इस तरह भास्कर रेवेन्यू कलेक्शन में नंबर बने रहना चाहता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भास्‍कर शहर में सबसे ज्‍यादा पढ़ा जाने वाला अखबार

दैनिक भास्कर समूह ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए पांच लाख नए पाठक जोड़े हैं। इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस)-2010 की चौथी तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, दैनिक भास्कर समूह एक करोड़ 79 लाख पाठकों के साथ देश का सबसे बड़ा अखबार समूह है। समूह का प्रमुख अखबार दैनिक भास्कर अपने प्रसार क्षेत्र में बढ़त कायम रखे हुए है और शहरी क्षेत्र में देश का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार है।

भास्कर ने यह उपलब्धि पिछले 18 महीनों में 11 लाख नए पाठक जोड़कर हासिल की है। रिपोर्ट के आंकड़े हरियाणा में दैनिक भास्कर की ग्यारह साल की गाथा दुहरा रहे हैं। 13.89 लाख पाठकों के साथ दैनिक भास्कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 32 प्रतिशत ज्यादा लोगों की पसंद है। पिछले साल दैनिक भास्कर ने झारखंड में कदम रखा और आईएमआरबी के आंकड़ों ने दैनिक भास्कर को पहले दिन ही रांची का अव्वल अखबार घोषित कर दिया था।

मध्य प्रदेश में सिर्फ तीन महीनों में 1.77 लाख नए पाठकों के जुडऩे के साथ ही वहां दैनिक भास्कर के पाठकों की संख्या अब 35 लाख से ऊपर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ में 10 लाख से ज्यादा पाठकों के साथ भास्कर फिर पहले नंबर पर है। राजस्थान में अकेले जयपुर में दैनिक भास्कर के दस लाख से ज्यादा पाठक हो गए हैं जो इस शहर के लिए कीर्तिमान है।

चंडीगढ़ में 1.82 लाख पाठकों के साथ दैनिक भास्कर अपने बाद के तीन प्रतिद्वंद्वियों की कुल पाठक संख्या से भी ज्यादा विस्तृत है। इसमें 11 हजार नए पाठक हैं, जो पिछली चौमाही में जुड़े हैं। पंजाब में जालंधर, लुधियाना और अमृतसर शहरों की कुल पाठक संख्या में दैनिक भास्कर सबसे ऊपर है और जालंधर और अमृतसर में अपना वर्चस्व बनाए हुए है। अकेले जालंधर में एक पिछले साल के अंतिम चार महीनों में दैनिक भास्कर ने 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है।

पंजाब प्रदेश में चालीस हजार नए पाठकों के साथ, आपका अखबार 4.6 प्रतिशत प्रति चौमाही वृद्धि दर्ज कर रहा है। गुजरात में दिव्य भास्कर, अहमदाबाद 10.58 लाख पाठकों के साथ एकमात्र ऐसा गुजराती अखबार है जिसके एक संस्करण के पाठकों की संख्या दस लाख से ज्यादा है। साभार : भास्‍कर

भास्‍कर के सागर यूनिट में उथल-पुथल, क्राइम रिपोर्टर की छुट्टी

: प्रह्ललाद नायक समेत तीन लोग इधर से उधर : दैनिक भास्‍कर के सागर यूनिट में इनदिनों काफी उथल-पुथल मची हुई है. तीन लोगों को इधर-उधर किया गया है तो क्राइम रिपोर्टर की छुट्टी कर दी गई है. चर्चा है कि एडिटर से पटरी न बैठ पाने के चलते इन लोगों को सागर से दूसरे क्षेत्रों के लिए विदा होना पड़ा है. इस फेरबदल में सागर में पिछले पन्‍द्रह सालों से काम कर रहे प्रह्लाद नायक का नाम भी है.

प्रह्लाद नायक भास्‍कर के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. वे 1995 से सागर यूनिट के साथ जुड़े हुए थे. इनदिनों सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. इन्‍हें रतलाम भेज दिया गया है. भास्‍कर ने रतलाम में भी कार्यालय खोला है, उसकी जिम्‍मेदारी प्रह्लाद नायक को सौंपे जाने की खबर है.

सागर में रिपोर्टर के रूप में सेवाएं दे रहे आशीष खरे को भोपाल भेज दिया गया है. अब ये भोपाल में भास्‍कर के लिए रिपोर्टिंग करेंगे. भास्‍कर, टीकमगढ़ के ब्‍यूरोचीफ को वहां से हटाकर दामोह भेज दिया गया है. अभी टीकमगढ़ में किसी को जिम्‍मेदारी नहीं सौंपी गई है. वहीं क्राइम रिपोर्टर बसंत की छुट्टी कर दी गई है.

दैनिक भास्‍कर से जुड़े राकेश, अमित, अजय एवं अखिलेश

दैनिक भास्‍कर, धनबाद की लांचिंग अप्रैल में होने वाली है. इसके लिए नई नियुक्तियां शुरू हो गई हैं. चार लोगों ने भास्‍कर से अपनी नई पारी शुरू की है. चारों लोग इसके पहले प्रभात खबर से जुड़े हुए थे. भास्‍कर से जुड़ने वालों में राकेश पाठक, अमित रंजन, अजय कुमार और अखिलेश कुमार शामिल हैं.

राकेश पाठक प्रभात खबर में डिप्‍टी न्‍यूज कोआर्डिनेटर के पद पर थे. उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर में न्‍यूज कोआर्डिनेटर के पोस्‍ट पर ज्‍वाइन किया है. राकेश ने अपने करियर की शुरुआत 97 में आवाज दैनिक के साथ शुरू की थी. इसके बाद बिहार आबजर्बर से जुड़ गए थे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद प्रभात खबर आ गए थे. कई वर्षों तक इन्‍होंने प्रभात खबर को अपनी सेवाएं दीं.

अमित रंजन ने दैनिक भास्‍कर में रिपोर्टर के रूप में ज्‍वाइन किया है. प्रभात खबर में उनका पद न्‍यूज राइटर का था. अमित ने अपने करियर की शुरुआत छह साल पहले बिहार आबजर्बर के साथ की थी. इसके बाद आज और दैनिक जागरण को भी अपनी सेवाएं दीं. जागरण से इस्‍तीफा देने के बाद प्रभात खबर से जुड़ गए थे.

प्रभात खबर के फोटोग्राफर अजय ने सेम पोस्‍ट पर दैनिक भास्‍कर का दामन थामा है. वे पिछले आठ सालों से प्रभात खबर से जुड़े हुए थे. अजय ने अपने करियर की शुरुआत बारह साल पहले रांची एक्‍सप्रेस के साथ की थी. इसके बाद वे आज चले आए. इन्‍होंने एनडीटीवी तथा स्‍टार न्‍यूज के लिए भी काम किया. इसके बाद ये प्रभात खबर से जुड़ गए थे.

प्रभात खबर से इस्‍तीफा देकर अखिलेश कुमार ने भी दैनिक भास्‍कर ज्‍वाइन कर लिया है. अखिलेश भी कई अखबारों में काम कर चुके हैं.

नवज्‍योति में समाचार संपादक बने अरविंद अपूर्वा

दैनिक भास्कर, अजमेर के उप संपादक अरविंद अपूर्वा ने दैनिक नवज्योति, कोटा ज्वाइन किया है। ज्वाइन करने के बाद छुट्टी पर गए अपूर्वा होली के बाद नियमित काम पर देखेंगे। राजेंद्र हाड़ा के दैनिक भास्कर छोड़ने के बाद अपूर्वा नागौर डाक संस्करण प्रभारी बने थे। इससे पहले वे सिटी डेस्क पर थे। डाक संस्करणों का कलस्टर बना दिए जाने के बाद वे फिर सिटी डेस्क पर थे।

अपूर्वा दैनिक नवज्योति के समाचार संपादक बनाए गए हैं। वे कोटा के ग्रामीण संस्करणों के साथ बारां और झालावाड़ का प्रभार भी देखेंगे। कोटा में कोई स्थानीय संपादक नहीं है। इस कारण अपूर्वा को कई चुनौतियों और जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है।

डा. रमेश अग्रवाल होंगे भास्‍कर, अजमेर के संपादक

रमेशजीदैनिक भास्‍कर, अजमेर के नए संपादक डा. रमेश अग्रवाल होंगे. संपादक के रूप में डा. अग्रवाल की भास्‍कर, अजमेर संग यह दूसरी पारी है. इसके पहले वे 1997 से 2000 तक यहां स्‍थानीय संपादक रह चुके हैं. इसके बाद इन्‍हें समन्‍वय संपादक बना दिया गया था. फिलहाल वे दैनिक भास्‍कर, जयपुर में स्‍टेट कोआर्डिनेटर के पद पर हैं.

डा. रमेश अग्रवाल पिछले 35 सालों से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. मूल रूप से अजमेर के रहने वाले डा. अग्रवाल की शिक्षा-दीक्षा भी यहीं से हुई है. पत्रकारिता में गोल्‍ड मेडलिस्‍ट डा. अग्रवाल ने वकालत और पीएचडी भी की है. इन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक नवज्‍योति से किया था. यहां लगभग बीस सालों तक विभिन्‍न पदों पर अपनी सेवाएं दीं. इसके बाद इन्‍होंने दैनिक भास्‍कर ज्‍वाइन कर लिया था. पिछले चौदह सालों से भास्‍कर से जुड़े हुए हैं. अजमेर के संपादक होने के साथ समन्‍वय संपादक के रूप में इन्‍होंने भास्‍कर को जयपुर, जोधपुर, उदयपुर में भी अपनी सेवाएं दीं.

भास्‍कर, अजमेर के आरई का पद आशीष व्‍यास के हिंदुस्‍तान, बरेली चले जाने के बाद से रिक्‍त चल रहा था. अजमेर जैसे संस्‍करण का स्‍थानीय संपादक पद उनके कद और अनुभव से काफी कमतर है, परन्‍तु अपने गृह नगर आने की चाहत के चलते उन्‍हें यह जिम्‍मेदारी संभाली है. खबर है कि होली के बाद वे अजमेर में अपना कार्यभार ग्रहण कर लेंगे. इन्‍हें अजयमेरू प्रेस क्‍लब के संस्‍थापक अध्‍यक्ष होने का गौरव भी प्राप्‍त है.

हिंदुस्‍तान ने फिर उधेड़ी भास्‍कर के डीबी पावर की बखियां

हिंदुस्‍तान ने अब खुल्‍लम-खुल्‍ला डीबी पावर के खिलाफ अपना मोर्चा खोल लिया है. बुधवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद आज दूसरे दिन भी हिंदुस्‍तान के सिपहसलार सुहैल हामिद ने एक स्‍टोरी लिखी है. इसे संपादकीय के बाद वाले पेज पर प्रमुखता के साथ छापा गया है. ‘डीबी पावर के प्रस्‍ताव पर भड़के लोग’ शीर्षक से मुख्‍य स्‍टोरी के साथ एक दूसरी स्‍टोरी भी प्रकाशित की गई है.

‘दूसरी कंपनियों से ज्‍यादा विरोध’ शीर्षक से छपी इस स्‍टोरी में एसपी के हवाले से यह बताया गया है कि स्‍थानीय लोग अन्‍य कंपनियों के मुकाबले डीबी पावर को बिल्‍कुल पसंद नहीं कर रहे हैं. अभी तक पत्रिका ही भास्‍कर का खुलेआम विरोध करता था. अब हिंदुस्‍तान ने भी भास्‍कर की लुटिया डूबोने की पूरी तैयारी कर ली है.

वैसे भी भास्‍कर समूह को अखबार समूह से ज्‍यादा रीयल इस्‍टेट एवं अन्‍य दूसरे कारणों से चर्चा में रहता है. पिछले दिनों डीबी कॉर्प यानी भास्‍कर समूह एक मॉल के निर्माण को लेकर चर्चा में रहा था. जबलपुर के भी एक विधायक ने भास्‍कर के खिलाफ अपना अभियान चला रखा है. पत्रिका भी भास्‍कर से सीधी लड़ाई लड़ रहा है. भास्‍कर के उल्‍टे-सीधे कामों के खिलाफ अब हिंदुस्‍तान ने भी कमर कस ली है. यानी भास्‍कर को अब कई मोर्चों पर लड़ाई लड़नी होगी.

नीचे हिंदुस्‍तान में छपी खबर


डीबी पावर के प्रस्‍ताव पर भड़के लोग

* खनन के बाद कोयले को कंपनी कहां रखेगी इसका जिक्र नहीं

* लोगों ने ली कंपनी को मकसद में कामयाब नहीं होने देने की शपथ

सुहेल हामिद

: रायगढ़ (छत्तीसगढ़) : कंपनी ने कहा, शहरी क्षेत्र में माइनिंग नहीं : लोगों ने इसे एकता तोड़ने की चाल बताया : कोल ब्लॉक में धर्मजयगढ़ नगरपालिका क्षेत्र का हिस्सा छोड़ने का डीबी पावर कंपनी का दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। लोगों के विरोध के बाद भास्कर समूह की डीबी पावर कंपनी ने नगर पालिका की 350 एकड़ जमीन में माइनिंग नहीं करने का हलफनामा दाखिल किया है। पर कंपनी के इस कदम से लोगों का गुस्सा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यह एकता तोड़ने की एक चाल भर है।

आदिवासी शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य धीरेंद्र सिंह माल्या कहते हैं कि कंपनी ने लोगों की एकता तोड़ने की साजिश के तहत यह प्रस्ताव किया है। डीबी पावर के जनरल मैनेजर (प्लानिंग) आलसी ने लोगों की नाराजगी के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने टेलीफोन पर बताया कि कंपनी ने नगर पंचायत की जमीन पर माइनिंग न करने का हलफनामा दिया है। कंपनी भास्कर फाउंडेशन के साथ मिलकर सामाजिक गतिविधियों का दायित्व निभा रही है।

धीरेंद्र माल्या धर्मजयगढ़ के पतरापाड़ा इलाके में रहते हैं और प्रस्तावित कोल ब्लॉक को मंजूरी मिलती है, तो उन्हें भी विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि, कंपनी के एंवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट (ईआईए) में उनके क्षेत्र का कोई जिक्र नहीं है। वह कहते हैं कि शहर की जमीन में माइनिंग नहीं करने का प्रस्ताव सिर्फ एक चाल है। कंपनी 693.32 हेक्टेयर में से शहरी क्षेत्र में माइनिंग नहीं करेगी, तो बाकी बची हुई भूमि में खनन और निकाले गए कोयले को जमा कहां करेगी। शहर की जमीन छोड़ने के प्रस्ताव में कंपनी ने इसका कोई जिक्र नहीं किया है। इस बारे में जन सुनवाई से पहले धीरेंद्र माल्या अपने साथियों के साथ गांव-गांव जाकर लोगों को प्रोजेक्टर के जरिए पर्यावरण पर असर के बारे में जागरुक करते थे। अब वह धर्मजयगढ़ के मोहल्लों में लोगों को समझा रहे हैं कि कंपनी ने शहरी क्षेत्र छोड़ दिया तो भी उन्हें विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कोयला जमीन के पांच सौ फुट नींचे है और उसे निकालने के लिए विस्फोट होंगे। इससे धूल के गुबार उठेंगे और पानी के स्रोत सूख जाएंगे।


दूसरी कंपनियों से ज्‍यादा विरोध

विशेष संवाददाता

: जनसुनवाई में सभी 438 लोगों ने कंपनी को आवंटन को विरोध किया : बाल्को कंपनी को लेकर जनसुनवाई में लोगों ने किया था समर्थन : धर्मजयगढ़ में डीबी पावर कंपनी के प्रस्तावित कोल ब्लॉक आवंटन का विरोध किसी और कंपनी के मुकाबले काफी ज्यादा है। रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राहुल शर्मा कहते हैं कि लोग बहुत नाराज हैं और भास्कर समूह भी लोगों का भरोसा जीतने में नाकाम रहा है।

शर्मा ने ‘हिंदुस्तान’ के साथ बातचीत में कहा कि डीबी पावर के प्रस्तावित कोल ब्लॉक को लेकर लोगों की नाराजगी दूसरी कंपनियों को आवंटित किए गए ब्लॉकों से कहीं ज्यादा है। जन सुनवाई में सभी 438 लोगों ने डीबी पावर कंपनी को आवंटन का विरोध किया। जबकि धर्मजयगढ़ के पास बाल्को कंपनी के प्रस्तावित कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर हुई जनसुनवाई में कई लोगों ने बाल्को का समर्थन किया था।

राहुल शर्मा के मुताबिक, डीबी पावर के प्रस्तावित कोल ब्लॉक के विरोध का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि लोगों ने कंपनी के दफ्तर और एक टेंट में आग लगा दी थी।

डीबी पॉवर के खिलाफ हिंदुस्‍तान ने भी खोला मोर्चा

: सुहैल हामिद ने छापी बड़ी रिपोर्ट : यकीन करना मुश्किल है कि देश के मीडिया घराने अब पत्रकारिता की आड़ में संपत्ति हथियाने की लड़ाई में उतर गए हैं. दैनिक भास्‍कर ग्रुप का कारनामा अक्‍सर सुर्खियों में रहता है. इस समय सुर्खी छत्‍तीसगढ़ के धर्मजयगढ़ में डीबी पॉवर को मिले कोल ब्‍लॉक के ठेके को लेकर है. हिंदु के बाद हिंदुस्‍तान ने भी डीबी पॉवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इसके लिए सुहेल हामिद को तैनात किया गया है. अब इस खबर को जनहित में लिखा गया है या फिर व्‍यवसायिक प्रतिद्वंद्वता में, यह तो हिंदुस्‍तान जाने पर इस खबर ने इस प्रोजेक्‍ट के पीछे चल रहे गोरखधंधे को जरूर उजागर किया है.

डीबी कार्प समूह दैनिक भास्कर निकालता है. इसी समूह की नई नवेली कंपनी है डीबी पावर. इस कंपनी को छत्तीसगढ़ के धर्मजयगढ़ में कोल खादान का एक बड़ा ठेका मिला है. इसके लिए करीब 693.32 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. इस अधिग्रहण से इलाके के करीब सवा पांच सौ परिवार उजड़ जाएंगे. इस प्रोजेक्‍ट का विरोध स्‍थानीय लोग भी कर रहे हैं. यहां के रहने वाले कतई नहीं चाहते कि उन्‍हें उजाड़ा जाए. वे लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं. डीबी पॉवर के कार्यालयों पर हमले हो रहे हैं. पुलिस और प्रशासन के लोग भी डीबी पॉवर के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं. इस कारण इससे संबंधित कोई भी शिकायत थाने में दर्ज नहीं हो रही है. जिलाधिकारी भी जन अदालत लगाकर स्‍थानीय लोगों को ही समझा रहे हैं. ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि क्‍यों उन्‍हें यह जमीन डीबी पॉवर को सौंप देनी चाहिए और इसके बदले उन्‍हें क्‍या-क्‍या लाभ मिलेगा.

पिछले दिनों भास्‍कर पत्रकारिता के मानकों को भूलकर पूरी तरह से मालिक के पक्ष में उतर आया था. पहले पन्‍ने पर कई खबरें प्रकाशित की गईं. ऐसा दिखाया गया कि डीबी पॉवर को जमीन सौंप देने के बाद उनकी तकदीर पूरी तरह चमक जाएगी. इस स्थिति में यह उम्‍मीद कतई नहीं थी कि कोई अखबार दूसरे मीडिया ग्रुप की पोल खोलेगा. परन्‍तु प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक द हिंदू ने पहले पूरी कहानी विस्‍तार से प्रकाशित कर डीबी पॉवर की पोल खोली. इस खबर के झटके से अभी डीबी पॉवर उबरा भी नहीं था कि इस बार दैनिक हिंदुस्‍तान ने डीबी पॉवर की पोल खोलती एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.

हिंदुस्‍तान ने धर्मजयगढ़ में डीबी पॉवर प्रोजेक्‍ट की खामियों पर निशाना साधा है. सुहेल हामिद के हवाले से लिखी गई इस खबर में बताया गया है कि धर्मजयगढ़ के आसपास अगर डीबी पॉवर कंपनी को प्रस्‍तावित कोल ब्‍लॉक में कोयला खनन की इजाजत मिलती है तो यहां की जनजातियों के अलावा एलिफैंट प्रोजेक्‍ट को भी भारी नुकसान पहुंचेगा. यहां के रहने वालों के साथ हाथियों को भी विस्‍थापन झेलना पड़ेगा. रिपोर्ट में मंडल वन अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि इस रेंज में 55 हाथियों के दो झुंड हैं और वह आसपास के जंगली इलाकों में स्‍थाई रूप से निवास कर रहे हैं. उसके अलावा उड़ीसा से भी इस कॉरिडोर में हाथियों का आजा-जाना होता है.

हिंदुस्‍तान ने विस्‍तार से इस खबर को प्रकाशित किया है. बताया गया है कि धर्मजयगढ़ एलिफैंट कॉरिडोर है पर रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं किया गया है. इसमें खरगोश, लोमड़ी सहित सिर्फ 14 वन्‍य प्राणियों के प्रभावित होने का जिक्र है. रिपोर्ट में कई तथ्‍यों को छिपाने का आरोप लगाया गया है, जिसमें इस प्रोजेक्‍ट के आसपास के 300 हेक्‍टेयर संरक्षित वन क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का जिक्र न किया जाना, इससे खनन और ढुलाई से होने वाले प्रदूषण के बारे में कोई जानकारी न देना शामिल है.

डीबी पॉवर प्रोजेक्‍ट मीडिया हाउसों की बढ़ती धन कमाने की ललक के रूप में देखा जा सकता है. आज ज्‍यादातर बड़े मीडिया हाउस पेड न्‍यूज एवं अन्‍य तरीकों से पैसा कमाने के बाद उसे सफेद करने की नीयत से दूसरे धंधों में उतरने लगे हैं. ये धंधे ही अब उनकी प्राथमिकता में शामिल होते जा रहे हैं. पत्रकारिता बाद की चीज बनती जा रही है या फिर इन धंधों को आड़ देने की छतरी. कुल मिलाकर अब कारपोरेट कंपनियों के बाद मीडिया कंपनी भी जनसम्‍पत्तियों को हथियाने की लड़ाई में उतर चुकी हैं. यानी अब तक आम आदमी की आवाज संसद, विधानसभाओं से तो दूर हो ही चुका था, अब मीडिया से भी दूर होने लगा है.

नीचे हिंदुस्‍तान में प्रकाशित खबर


डीबी पावर प्रोजेक्‍ट से हाथियों पर आफत

सुहेल हामिद

धर्मजयगढ़ (छत्‍तीसगढ़)।: विस्‍थापित हो जाएंगे हाथी, करोड़ों रुपए हो रहे हैं एलीफेंट प्रोजेक्‍ट पर खर्च : छत्तीसगढ़ सरकार के प्रोजेक्ट एलीफेंट को पलीता लग सकता है। धर्मजयगढ़ और उसके आसपास के गांवों में डीबी पावर कंपनी के प्रस्तावित कोल ब्लॉक में कोयला खनन की इजाजत मिलती है, तो बिरहोर और पहाड़ी कोरबा जनजातियों के साथ हाथियों को भी विस्थापित होना पड़ेगा। इसलिए कोल ब्लॉक आवंटन का विरोध कर रहे संगठन अपनी लड़ाई में वाइल्ड लाइफ के लिए काम करने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी साथ लेने की तैयारी कर रहे हैं।

धर्मजयगढ़ के वन मंडल अधिकारी सत्यप्रकाश मसीह कहते हैं कि इस रेंज में करीब 55 हाथियों के दो झुंड हैं और वह आसपास के क्षेत्रों में स्थाई तौर पर निवास कर रहे हैं। स्थितियां अनुकूल होने की वजह से उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि धर्मजयगढ़ को प्रोजेक्ट में एलीफैंट कॉरिडोर के बजाय मुख्य स्थान के तौर पर शामिल किया जाए। रायगढ़ के वनमंडल अधिकारी आशुतोष मिश्रा भी इसकी तसदीक करते हुए कहते हैं कि इस इलाके में उड़ीसा की तरफ से हाथियों का आना-जाना है।

कंपनी की रिपोर्ट में हाथी नदारद कोल ब्लॉक आंवटन का विरोध कर रहे जन चेतना मंच के रमेश अग्रवाल कहते हैं कि डीबी पावर ने अपने एन्वायमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट (ईआईए) में हाथियों का कोई जिक्र नहीं किया, जबकि सरकार प्रोजेक्ट एलीफैंट पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। कोल ब्लॉक आवंटन से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को मुद्दा बनाकर लड़ाई की तैयारी में जुटे रमेश कहते हैं कि लोग संगठित हैं। उन्हें एक जुट रखने के लिए वह हर सप्ताह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।पिछले माह हुई जनसुनवाई में लोगों ने भास्कर समूह की डीबी पावर कंपनी को ब्लॉक आवंटित करने का विरोध कि या था।


कोल ब्‍लॉक आवंटन का विरोध तेज

भास्कर समूह के डीबी पावर प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित कोल ब्लॉक आवंटन का विरोध बढ़ता जा रहा है। रायगढ़ के कलेक्टर अशोक अग्रवाल भी मानते हैं कि धर्मजयगढ़ के लोग कोल ब्लॉक आवंटन के खिलाफ हैं। इसमें आदिवासी, धर्मजयगढ़ नगर पंचायत के लोग और बांग्लादेश से लाकर बसाए गए शरणार्थी शामिल हैं। यही वजह है कि जनसुनवाई के वक्त प्रशासन को 700 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात करने पड़े थे।

‘हिंदुस्तान’ के साथ बातचीत में अशोक अग्रवाल ने कहा कि इस मामले की जनसुनवाई करवाना उनका मुख्य उद्देश्य था। कोल ब्लॉक के बारे में 28 फरवरी को हुई सुनवाई में सभी लोगों ने इसका विरोध किया है। इसके अलावा बड़ी तादाद में लोगों ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई है।

उनके मुताबिक, प्रस्तावित कोल ब्लॉक में धर्मजयगढ़ नगर पंचायत का करीब 40 फीसदी हिस्सा आता है। पंचायत के तीन वार्डों में रहने वाले लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा। प्रभावित होने वाले क्षेत्र में आठ स्कूल, अस्पताल और सरकारी दफ्तर भी हैं। पर कोल ब्लॉक आवंटित करने के बारे में अंतिम फैसला केंद्र सरकार को करना है। जनसुनवाई मामले में स्थानीय प्रशासन अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है।

राज्य सरकार की उद्योग के लिए जमीन अधिग्रहण करने की नीति का जिक्र करते हुए जिला कलेक्टर अशोक अग्रवाल कहते हैं, ‘पहले किसानों को एक से डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मिलता था। पर अब बंजर जमीन के लिए छह लाख, एक फसल वाली भूमि के लिए आठ लाख और दो फसल वाली जमीन के लिए दस लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाता है।’

रमेंद्र ने भास्‍कर छोड़ा, शालिनी जीएनएन पहुंचीं

दैनिक भास्‍कर, रांची से रमेंद्र नाथ झा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर सब एडिटर थे. बताया जा रहा है उन्‍होंने पत्रकारिता को ही अलविदा कह दिया है. अब वे अपने खुद के कार्य में लगेंगे. रमेंद्र इसके पहले काफी समय तक दैनिक जागरण को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

टाइम न्‍यूज से शालिनी सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर थीं. इन्‍होंने अपनी नई पारी जीएनएन न्‍यूज चैनल के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां भी असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर बनाया गया है. शालिनी ने अपने करियर की शुरुआत भोजपुरी न्‍यूज चैनल हमार टीवी के साथ किया था. इसके बाद उन्‍हें नोएडा बुला लिया गया था. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद वे टाइम न्‍यूज के साथ जुड़ गई थीं.

दैनिक भास्‍कर, नागपुर में घमासान जारी, नाराज संजय वापस लौटे

: योगेश चिवंडे को बनाया गया नया चीफ रिपोर्टर : दैनिक भास्‍कर, नागपुर में आंतरिक उठापटक जारी है. नाराज होने और मानने का दौर चल रहा है. खबर है कि चीफ रिपोर्टर पद से हटाए गए संजय देशमुख लंबी छुट्टी वापस लौट आए हैं. उन्‍होंने सेंट्रल डेस्‍क पर ज्‍वाइन किया है. इसके बाद अब आतंरिक गुटबाजी भी तेज होने की संभावना बढ़ गई है. देशमुख पर पहले भी मराठीवाद करने के आरोप लगते रहे हैं.

नागपुर भास्‍कर में काफी समय से उथल-पुथल चल रहा है. शिशिर द्विवेदी के जाने के बाद संजय देशमुख को चीफ रिपोर्टर बनाया गया था. इन्‍हें प्रकाश दुबे का खास माना जाता है. इनकी कई शिकायतें मिलने के बाद संपादक मणिकांत सोनी ने इन्‍हें बैठकों में उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया था. बावजूद इसके संजय ने इसपर ध्‍यान न‍हीं दिया. जिसके बाद संपादक ने संजय को चीफ रिपोर्टर की कुर्सी से हटाकर सेंट्रल डेस्‍क भेज दिया. चीफ रिपोर्टर की जिम्‍मेदारी योगेश चिवंडे को सौंप दी गई. सेंट्रल डेस्‍क पर भेजे जाने से नाराज संजय लंबी छुट्टी पर चले गए थे. बताया जा रहा है इस दौरान इन्‍होंने दूसरे संस्‍थानों में भी अपने लिए जगह तलाश की. परन्‍तु बात नहीं बनी.

इस बीच प्रकाश दुबे भी संजय की चीफ रिपोर्टर की कुर्सी कायम रखने के लिए मैनेजमेंट से बात की, लेकिन पूर्व में मिली शिकायतों को ध्‍यान में रखकर मैनेजमेंट ने संजय की वापसी चीफ रिपोर्टर के रूप में कराने से इनकार कर दिया. अंतत: संजय छुट्टी से वापस लौट आएं हैं. कल से वे ऑफिस आ रहे हैं. इस संदर्भ में पूछे जाने पर संजय ने कहा ऐसी कोई बात नहीं है. ऐसी बातों थोड़ी बहुत हर संस्‍थान में होती है. मैं ऑफिस आ रहा हूं.

सतीश ने हरिभूमि एवं अशोक ने प्रदेश टुडे ज्‍वाइन किया

पिछले दिनों दैनिक भास्‍कर, लुधियाना से इस्‍तीफा देने वाले न्‍यूज एडिटर सतीश श्रीवास्‍तव ने अपनी नई पारी शुरू की है. वे हरिभूमि रोहतक से जुड़ने जा रहे हैं. उन्‍हें यहां भी न्‍यूज एडिटर की जिम्‍मेदारी दी जाएगी. वे भास्‍कर से पहले अमर उजाला से जुड़े हुए थे. अमर उजाला को पंजाब तथा यूपी में अपनी सेवाएं दीं. दैनिक जागरण, प्रभात खबर को भी अपनी सेवांए दे चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर, भोपाल से अशोक चतुर्वेदी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर सब एडिटर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी प्रदेश टुडे के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां सिटी डेस्‍क पर रखा गया है. अशोक भास्‍कर के अलावा कई हिंदी दैनिकों में काम कर चुके हैं.

टीवी चैनल चाहते हैं एडल्‍ट सामग्री दिखाना

: केंद्र सरकार ने नहीं दी नग्‍नता दिखाने की अनुमति : केन्द्र सरकार ने एडल्ट सामग्री परोसने की चैनलों की मांग और दलील को साफ तौर से ठुकरा दिया है। चैनलों ने प्रस्ताव दिया था कि चूंकि ‘वाटरशेड’ के दौरान दर्शकों को एडल्ट सामग्री उपलब्ध कराने का दुनिया भर में रिवाज है, लिहाजा उन्हें भी यह अनुमति मिले। टीवी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली ‘वाटरशेड’ वह समयावधि है जिसके दौरान एडल्ट सामग्री का प्रसारण किया जा सकता है। भारत में ‘वाटरशेड’ अवधि रात्रि11 बजे से लेकर 5 बजे सुबह के बीच में है।

सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने उनके इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि सबसे पहले चैनलों से यह उम्मीद की जाती है कि वे भारत में दिखने वाले चैनलों पर मौजूदा सामग्री के प्रसारण में परिपक्वता और आत्मनियंत्रण का परिचय दें। करीब तीन महीने पहले, चैनलों की प्रतिनिधि संस्था आईबीएफ (इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन) ने सरकार को भेजे एक प्रस्ताव में कहा था कि सरकार चैनलों को अनुमति दे कि वे रात्रि 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे के बीच एडल्ट सामग्री प्रसारित कर सकें और बदले में चैनलों से उम्मीद होगी कि वे कार्यक्रम को एडल्ट (ए) कहकर प्रचारित करें और कार्यक्रमों के शुरू होने से पहले लिखें कि सामग्री में नग्नता है, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल है और अत्यधिक हिंसा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि आत्मनियंत्रण के फार्मूले के तहत हर चैनल को अब कंटेंट ऑडिटर्स (जो प्रसारित होने वाली सामग्री पर नजर रखें) की नियुक्ति करनी है और इनकी प्रतिनिधि संस्था आईबीएफ को इस महीने के आखिर तक ब्रॉडकास्ट कंटेंट कमप्लेन काउंसिल (प्रसारण सामग्री शिकायत सामग्री) का गठन करना है।

उक्त अधिकारी ने कहा कि जिस तरह से सभी लोकप्रिय हिंदी मनोरंजन चैनल दर्शकों को रोमांस, शादी और हनीमून तक से जुड़े रीयलिटी शो परोस रहे हैं, उनमें सेक्स और अश्लीलता का इतना ओवरडोज होता है कि कल्पना के लिए कुछ भी नहीं बचता। उक्त अधिकारी ने इस संबंध में बिग बॉस, जोर का झटका, और लव लॉक अप जैसे रीयलिटी शो का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर चैनलों पर नियंत्रण न किया जाए तो वे लोकप्रियता की आड़ में किसी भी हद तक जा सकते हैं।

दैनिक भास्‍कर में अमिताभ पराशर की रिपोर्ट.

अभिषेक भास्‍कर से जुड़े, राजेश का अमर उजाला से इस्‍तीफा

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, हरदा से अभिषेक दुबे ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, भोपाल के साथ शुरू की है. उन्‍हें रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. अभिषेक पीटीआई को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अमर उजाला, बदायूं से ऑपरेटर कम स्ट्रिंगर राजेश मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. राजेश ने अमर उजाला से ऑपरेटर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. बाद में इन्‍हें स्ट्रिंगर बना दिया गया था.

हजारीबाग में तीन मीडियाकर्मियों से मारपीट, कैमरे छीने गए

: घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई : हजारीबाग में न्‍यूज कवर करने गए दो पत्रकार एवं एक फोटोग्राफर के साथ ग्रामीणों ने मारपीट की. इनलोगों के कैमरे, मोबाइल और पैसे भी छीन लिए गए. तीनों को चोटें भी आई हैं. मीडियाकर्मियों ने घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दे दी है. पुलिस ने अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया है.

हजारीबाग के सदर थाना क्षेत्र के सिंदूर गांव के पास एनएच33 पर एक सड़क हादसा हो गया. हादसे में एक उन्‍नीस साल की लड़की की मौत हो गई. मौत से गुस्‍साए ग्रामीणों ने दुर्घटना करने वाले ट्रक को फूंक दिया तथा सड़क पर जाम लगा दिया. इसकी सूचना मिलते ही दैनिक आज के वरिष्‍ठ रिपोर्टर कृष्‍ण गुप्‍ता, इंडिया टीवी राजीव रंजन तथा दैनिक भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट रवींद्र मौके पर पहुंचे. पत्रकार घटना स्‍थल पर विजुअल बनाने और फोटो लेने में लगे ही थे कि कुछ ग्रामीण उग्र हो गए तथा समाचार कवर करने से रोकने लगे.

इन लोगों ने समझाने का प्रयास किया तो तीनों से मारपीट की गई. राजीव का वीडियो कैमरा, रवींद्र का कैमरा, एटीएम कार्ड तथा उनके पर्स में रखे पैसे छीन लिए गए. कृष्‍ण गुप्‍ता का सैमसंग का मोबाइल लूट लिया गया. कुछ लोगों ने बीच बचाव करके इन लोगों को छुड़ाया. वहां से आने के बाद तीनों लोगों ने सदर कोतवाली में घटना की लिखित तहरीर दी. पुलिस ने अभी मामला दर्ज नहीं किया है.

बताया जा रहा है कि पुलिस ने आश्‍वासन दिया है कि दोनों लोगों के कैमरे तथा अन्‍य सामान पुलिस वापस करा देगी. ऐसा न होने की स्थिति में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. खबर देने तक तीनों मीडियाकर्मियों के सामान वापस नहीं मिल पाए थे.

प्रशांत भास्‍कर पहुंचे, प्रदीप और दिनेश इंडिया न्‍यूज से जुड़े

हिंदुस्‍तान, आगरा से प्रशांत झा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर सब एडिटर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर के साथ दिल्‍ली में शुरू की है. यहां भी इन्‍हें सीनियर सब एडिटर बनाया गया है. मूल रूप से कानपुर के रहने वाले प्रशांत ने अपने करियर की शुरुआत राष्‍ट्रीय सहारा, लखनऊ से की थी. इसके बाद अमर उजाला, कानपुर से जुड़ गए थे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद हिंदुस्‍तान ज्‍वाइन कर लिया था.

ईटीवी, राजस्‍थान से प्रदीप आजाद ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी इंडिया न्‍यूज के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां भी रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है.

दैनिक भास्‍कर ग्रुप के डीबी स्‍टार से दिनेश कुमार ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे रिपोर्टिंग करते थे. दिनेश ने भी अपनी नई पारी इंडिया न्‍यूज के साथ शुरू की है. इन्‍हें भी रिपोर्टर बनाया गया है.

भास्‍कर समूह की गुंडागर्दी, पत्रकारों पर कराया मुकदमा

रायगढ़ जिले धरमजयगढ़ में दैनिक भास्कर समूह की कोल डिविज़न का एक ब्लाक सरकार ने आबंटित किया है, जिसकी जनसुनवाई 28 फ़रवरी को होनी है, पर इससे पहले दैनिक भास्कर समूह ने गुंडागर्दी की पराकाष्ठ पार कर दी. 22 फ़रवरी को स्थानीय ग्रामीणों ने डीबी पॉवर के खिलाफ हल्ला बोल दिया और उनके धरमजयगढ़ स्थित कार्यालय में तोड़-फोड़ कर दी. इसके बाद डीबी पॉवर के अधिकारियों ने ग्रामीणों के अलावा उन पत्रकारों पर भी एफ़आईआर दर्ज करावा दी, जो घटना की कवरेज़ करने गए थे.

वहां के स्थानीय लोगों ने जब पत्रकारों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया, तब जाकर प्रशासन ने विवेचना में पत्रकारों का नाम हटाने का आश्वासन दिया. इस मामले क दूसरा लज्जास्पद पहलू यह है कि 2 अखबार (स्थानीय) और एक चैनल (सहारा समय) को छोड़ कर किसी ने भी इस खबर को न छापा न दिखाया. मीडिया के इस चुप्पी से दैनिक भास्कर समूह के लोगों का मनोबल बढ़ा हुआ है. दूसरी ओर उनके अपने समाचार पत्र में जो जी में आया लिखा भी गया. पहले यहाँ उद्योगों की दादागीरी चला करती थी अब मीडियागिरी हावी हो जाएगी और आम आदमी का सुनने वाला शायद ही कोई रहेगा.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भास्‍कर से इस्‍तीफा देकर हिंदुस्‍तान, बरेली के संपादक बने आशीष व्‍यास

आशीषदैनिक भास्‍कर, अजमेर के संपादक आशीष व्‍यास ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे पिछले डेढ़ दशक से भास्‍कर के साथ जुड़े हुए थे. वे अपनी नई पारी हिंदुस्‍तान के साथ शुरू कर रहे हैं. उन्‍हें हिंदुस्‍तान, बरेली का आरई बनाया जा रहा है. अगले कुछ दिनों में वे अपना कार्यभार संभाल लेंगे. उल्‍लेखनीय है कि केके उपाध्‍याय का आगरा तबादला किए जाने के बाद हिंदुस्‍तान, बरेली में संपादक का पद खाली चल रहा था.

आशीष व्‍यास ने अपने करियर की शुरुआत 1995 में दैनिक भास्‍कर, इंदौर के साथ की थी. वहां वे फीचर डेस्‍क पर कार्यरत थे. इसके बाद इन्‍हें फीचर इंचार्ज बना दिया गया. राजस्‍थान में भास्‍कर की लांचिंग के दौरान इन्‍हें वहां ग्रुप फीचर हेड बना दिया गया. ये जयपुर में पांच साल रहे. फीचर के अलावा बाल भास्‍कर की भी जिम्‍मेदारी संभाली. 2001 में इन्‍हें दैनिक भास्‍कर, श्रीगंगानगर का एडिटर बना दिया गया.

यहां से प्रमोशन देते हुए इन्‍हें अलवर का एडिटर बना दिया गया. बाद में अजमेर एडिटर बनाकर भेज दिया गया. पिछले तीन सालों से अजमेर के एडिटर के रूप में कार्य कर रहे थे. श्री व्‍यास आईआईएम, इंदौर द्वारा तैयार लीडर एडिटर सेक्‍शन में भी चयनित हुए तथा एक साल का कोर्स किया. उन्‍होंने भास्‍कर के नेशनल टैलेंट पुल को भी अपनी सेवाएं दीं. इनकी गिनती ईमानदार तथा तेजतर्रार पत्रकारों में होती है.

एमआर मलकानी की नई पारी, दिनेश जोशी का इस्‍तीफा

एमआर मलकानी ने डीजी न्‍यूज, जोधपुर के साथ नई पारी शुरू की है. उन्‍हें रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. वे पिछले तीस वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. मलकानी ने अपने करियर की शुरुआत 1980 में दैनिक नवज्‍योति से की थी. इसके बाद तीसरा प्रहर, खोज खबर, हलचल एवं मेट्रो दृष्टि जैसे समाचार पत्रों में काम किया. वे केबल सन सिटी, दृष्टि टीवी नेटवर्क और लाइव इंडिया से भी जुड़े रहे. इन्‍हें क्राइम का अच्‍छा पत्रकार माना जाता है.

दैनिक भास्‍कर, जोधपुर से दिनेश जोशी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे सब एडिटर थे तथा सिटी डेस्‍क पर काम कर रहे थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी सुनहरा राजस्‍थान, जयपुर के साथ शुरू की है. उन्‍हें डेस्‍क इंचार्ज बनाया गया है. वे इसके पहले राजस्‍थान पत्रिका तथा लोकमत में भी सिटी डेस्‍क पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. जोशी के इस्‍तीफे के बारे में बताया जा रहा है कि जयपुर में उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे. निवेदन के बाद प्रबंधन उनका तबादला जयपुर नहीं कर रहा था, जिसके बाद उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया.

सीबीआई करेगी पत्रकार सुशील पाठक हत्‍याकांड की जांच

छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दै‍निक भास्‍कर बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्‍या की जांच सीबीआई से कराने की घोषणा की है. नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे और विधायक धर्मजीत सिंह ने सीबीआई जांच की मांग की थी. दोनों नेताओं कहा था कि यह सुपारी किलिंग का मामला है. दोबारा इस तरह की घटना ना हो इसलिए यह मामला सीबीआई को देना चाहिए.

विपक्ष की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीआई से जांच कराने में हमें कोई आपत्ति नहीं है. उन्‍होंने इस हत्‍याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान करते हुए कहा कि वे इसके लिए पत्र लिखेंगे. गौरतलब है कि बिलासपुर में अज्ञात हमलावरों ने 20 दिसम्‍बर की रात गोली मारकर सुशील पाठक की हत्या कर दी थी. सुशील की हत्या उस समय की गई थी जब वे देर रात अपने कार्यालय से घर लौट रहे थे. घटना के तीन दिनों बाद 23 दिसंबर को पुलिस ने जमीन व्यवसाय से जुड़े बादल खान को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस के मुताबिक बादल खान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है लेकिन पुलिस बादल खान से हत्या में प्रयुक्त हथियार और सुशील पाठक का मोबाइल बरामद नहीं कर पाई है.

इसे लेकर पत्रकार तथा सामाजिक संगठनों ने विरोध भी जताया था. उन्‍होंने असली हत्‍यारों को गिरफ्तार करने की मांग की थी. जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिए रायपुर के क्राइम ब्राच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नियुक्त किया था, लेकिन पुलिस को अब तक कुछ खास नहीं कर पाई. इस घटना के लगभग एक महीने बाद छुरा में भी नई दुनिया से जुड़े पत्रकार उमेश राजपूत की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी. इस मामले में भी असली हत्‍यारे अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं.

भास्‍कर के पत्रकार वेदप्रकाश को पितृशोक

दैनिक भास्‍कर, जोधपुर में सीनियर सब एडिटर वेदप्रकाश शर्मा के पिता सुख वल्‍लभ शर्मा का निधन हो गया. वे 95 वर्ष के थे. वे काफी दिनों से बीमार थे तथा उनका इलाज चल रहा था. उनका अंतिम संस्‍कार कर दिया गया. वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. श्री शर्मा के निधन पर पत्रकारों ने गहरा शोक व्‍य‍क्‍त किया है तथा वेदप्रकाश को दुख सहने की शक्ति देने की भगवान से प्रार्थना की है.

रामानुज का एमएच1 से इस्‍तीफा, बिंदिया की भास्‍कर संग नई पारी

एमएच1 से रामानुज सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर टिकर इंचार्ज थे. वे अपनी नई पारी कहां शुरू करने जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. रामानुज ने चैनल की आंतरिक परिस्थितियों से तंग आकर इस्‍तीफा दिया है.

बैग फिल्‍म्‍स से बिंदिया भट्ट ने इस्‍तीफा देकर अपनी नई पारी भास्‍कर ग्रुप के साथ शुरू किया है. वे यहां पर न्‍यूज24 और ई24 चैनल्‍स की इंग्लिस वेबसाइट में सब एडिटर के रूप में कार्यरत थीं. वे अब भास्‍कर ग्रुप की वेबसाइट डेली भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे रही हैं. उन्‍हें सब एडिटर कम जर्नलिस्‍ट बनाया गया है. बिंदिया भट्ट बेहद ईमानदार, मेहनती और प्रतिभाशाली जर्नलिस्ट हैं.

राजेश और प्रदीप की नई पारी

दैनिक भास्‍कर, दंतेवाड़ा से हटाए गए राजेश दास अगली पारी पत्रिका के साथ शुरू करने की तैयारी में हैं. वे भास्‍कर में ब्‍यूरोचीफ के पद पर कार्यरत थे. बस्‍तर में पत्रिका की लांचिंग होने वाली है. राजेश को दंतेवाड़ा का ब्‍यूरोचीफ बनाया जा रहा है. वे इसके पूर्व हरिभूमि को भी क्राइम रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अमृत प्रभात, इलाहाबाद से प्रदीप कुमार सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. प्रदीप ने अपनी नई पारी दैनिक जागरण, फरीदकोट के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां भी रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. वे इसके पहले भी कई समाचार पत्रों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. काफी समय से प्रदीप फरीदकोट के लिए प्रयासरत थे.

पंकज और चंद्रभूषण ने शुरू की नई पारी

दैनिक आज, पटना से पंकज मालवीय ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी नई दुनिया के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां भी सीनियर रिपोर्टर बनाया गया है. पंकज इसके पहले भी नई दुनिया को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत दो दशक पहले नवभारत टाइम्‍स के साथ की थी. पंकज दैनिक जागरण, प्रभात खबर समेत कई समाचार पत्रों के साथ काम कर चुके हैं.

दैनिक भास्‍कर, बठिंडा से चंद्रभूषण तिवारी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टिंग देखते थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी की शुरुआत लुधियाना में दैनिक जागरण के साथ की है. इन्‍हें यहां भी रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी दी गई है. चंद्रभूषण पिछले दो सालों से भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे रहे थे. इसके पहले भी वे कई अखबारों में काम कर चुके हैं.

रिचिक का भास्‍कर और संजय का प्रभात खबर संग नई पारी

पत्रिका ग्रुप के डेली न्‍यूज से रिचिक मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, जयपुर के साथ की है. इन्‍हें सीनियर सब एडिटर बनाया गया है. रिचिक एजेंसी डेस्‍क देखेंगे. मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश के अयोध्‍या के रहने वाले रिचिक माखनलाल से पास आउट छात्र हैं. इन्‍होंने करियर की शुरुआत लोकमत टाइम्‍स औरंगाबाद से की थी. लोकमत को मुंबई में भी अपनी सेवाएं दीं. इसके बाद डीएलए एएम, आगरा से जुड़ गए. पिछले ढाई साल से ये डेली न्‍यूज को अपनी सेवाएं दे रहे थे.

दैनिक जागरण, सोनीपत से संजय निधि ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी प्रभात खबर, भागलपुर के साथ शुरू की है. इन्‍हें यहां भी रिपोर्टर बनाया गया है. मूल रूप से बिहार के रहने वाले संजय जागरण को जालंधर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वे दैनिक भास्‍कर के साथ पानीपत में भी काम कर चुके हैं.

अमल ने भास्‍कर और शैलेंद्र ने बंसल न्‍यूज ज्‍वाइन किया

हिंदुस्‍तान, बरेली को अमल चौधरी ने अपने इस्‍तीफे का नोटिस दे दिया है. अमल यहां फीचर एडिटर थे. वे अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, भोपाल के साथ शुरू करने जा रहे हैं. उन्‍हें सीनियर सब एडिटर बनाया गया है. वो पिछले चार साल से हिंदुस्‍तान को अपनी सेवाएं दे रहे थे. मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले अमल ने बरेली में हिंदुस्‍तान का रीमिक्‍स सप्‍लीमेंट बंद हो जाने की बात को ध्‍यान में रखकर पहले ही सुरक्षित किनारा ढूंढ लिया है. वे कई अखबारों में काम कर चुके हैं.

रीजनल चैनल टाइम टुडे से शैलेंद्र द्विवेदी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर एंकर कम प्रोड्यूसर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी भोपाल से लांच हुए रीजनल चैनल बंसल न्‍यूज एमपी-सीजी के साथ शुरू की है. इन्‍होंने यहां बतौर बुलेटिन प्रोड्यूसर ज्‍वाइन किया है. शैलेंद्र इससे पहले टीवी24 के लिए भी काम कर चुके हैं. शैलेंद्र को तेजतर्रार पत्रकार माना जाता है.

अभिषेक ने हिंदुस्‍तान, निखिल ने भास्‍कर छोड़ा

हिंदुस्‍तान, बरेली से अभिषेक पांडेय ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे मार्केटिंग विभाग में कार्यरत थे. अभिषेक अखबार की बरेली में लांचिंग के समय से ही जुड़े हुए थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी एसओडीपी टूर एंड ट्रेवेल्‍स कंपनी से शुरू की है. अभिषेक ने सीनियर एक्‍जीक्‍यूटिव ग्रुप सेल्‍स के पोस्‍ट पर ज्‍वाइन किया है. हिंदुस्‍तान से पहले अभिषेक अमर उजाला के साथ मुरादाबाद और देहरादून में भी काम कर चुके हैं.

भास्‍कर डाट काम, भोपाल से निखिल सूर्यवंशी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे सब एडिटर थे. वे  फिलहाल मुंबई में हैं. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. वे काफी समय से भास्‍कर से जुड़े हुए थे. अखबार के वेब सेक्‍शन में पिछले एक साथ से कार्यरत थे. इसके पहले वे भास्‍कर के पुल आउट सिटी भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे रहे थे. वे फ्री प्रेस के लिए भी काम कर चुके हैं.

धनबाद में बसंत झा संभालेंगे भास्‍कर, राघवेंद्र छुट्टी पर

दैनिक भास्‍कर अपने धनबाद एडिशन के लांचिंग की तैयारियों में जुटा हुआ है. यहां से जानकारी मिली है कि इस एडिशन के संपादक को बदल दिया गया है. पहले धनबाद एडिशन के एडिटर के रूप में राघवेंद्र का नाम तय किया गया था, जो रांची दैनिक भास्‍कर में इस समय पॉलिटिकल एडिटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अब नई खबर है कि अब धनबाद एडिशन के लिए बसंत झा का नाम एडिटर के रूप में फाइनल किया गया है, जो इस समय डीबी स्‍टार, रांची के इंचार्ज के रूप में काम कर रहे हैं.

इस सूचना के बाद राघवेंद्र जी अचानक छुट्टी पर चले गए हैं. अब इसके पीछे का असली कारण क्‍या है, कोई बता नहीं पा रहा है. वो अपना मोबाइल भी नहीं उठा रहे हैं. कयास लगाया जा रहा है कि राघवेंद्र जी किसी बात को लेकर नाराज हैं. ज्‍यादा संभावना जताई जा रही है कि वे धनबाद के लिए अपना नाम फाइनल नहीं होने से नाराज चल रहे हैं. धनबाद से उनका नाम हटने के बाद भास्‍कर, पटना के लिए उनके नाम की चर्चा थी. पर भास्‍कर प्रबंधन ने पटना प्रोजेक्‍ट की लांचिंग को भी फिलहाल टाल दिया है. यानी यहां भी फिलहाल उनके लिए कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है.

इधर, रांची भास्‍कर के एडिटर गौड़ जी और धनबाद के होने वाले एडिटर बसंत झा धनबाद में टीम बनाने में जुटे गए हैं. कई लोगों के इंटरव्यू भी लिए जा चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक वहां के दूसरे अखबारों के लोगों को तोड़ने की तैयारी चल रही है. इससे दोहरा फायदा उठाने का मकसद है. एक तो अपने प्रतिद्वंदी अखबारों को कमजोर करना, दूसरे अपनी टीम को मजबूत करना. अगर राघवेंद्र जी के नाराज होने की खबरों में सच्‍चाई है तो आगे कुछ नए समीकरण और खबरें भी देखने-सुनने को मिल सकती हैं. राघवेंद्र जी कुछ साल पहले प्रभात खबर, धनबाद के एडिटर के रूप में भी काम कर चुके हैं.

चेतावनी : कानाफूसी कैटगरी की खबरें चर्चाओं, अफवाहों, कयासों पर आधारित होती हैं, जिसमें सच्चाई संभव है और नहीं भी. इसलिए इन खबरों को प्रामाणिक मानकर न पढ़ें. अगर कोई इसे प्रामाणिक मानकर पढ़ता है तो वो उसकी मर्जी व समझ पर निर्भर करता है और वह उसके लिए खुद जिम्मेदार है.

पत्रकार सुशील हत्‍याकांड की सीबीआई जांच की मांग

: पत्रकारों ने जिला मुख्‍यालय पर दिया धरना : बिलासपुर के पत्रकारों ने दैनिक भास्कर के वरिष्ठ पत्रकार सुशील पाठक के हत्यारों की दो महीने बाद भी गिरफ्तारी न होने पर पुलिस प्रशासन के खिलाफ धरना दिया. नेहरू चौक पर धरनारत पत्रकारों का गुस्‍सा पुलिस की नाकामी पर फूट पड़ा. पत्रकारों ने जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपे जाने की मांग की. कलक्‍टर के माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया.

लगभग दो महीने बाद भी सुशील के हत्‍यारों की गिरफ्तारी न होने पर प्रेस क्‍लब के बैनर तले पत्रकारों ने मोर्चा खोल दिया. पत्रकारों ने आरोप लगाया कि दो महीने बाद भी हत्‍यारों की गिरफ्तारी न होना कानून व्‍यवस्‍था के लिए चुनौती है. यह किसी भी समाज के लिए उचित नहीं है. पत्रकारों ने मांग किया कि किसी भी कीमत पर हत्‍यारों की गिरफ्तारी जरूरी है. चाहे मामला भले ही सीबीआई को सौंपनी पड़े. शासन-प्रशासन को अपनी जिम्‍मेदारी समझने की जरूररत है. पुलिस चोरी, डकैती, लूट जैसी घटनाओं को रोकने में अक्षम हो रही है, जिसके चलते शहर में अपराध बढ़ते जा रहे हैं. सुशील पाठक के हत्‍यारों का खुला घूमना इस बात का प्रमाण है.

सर्वदलीय मंच के लोगों ने आरोप लगाया कि आम आदमी और पत्रकारों के प्रति पुलिस का रवैया उपेक्षापूर्ण है. तभी पुलिस सुशील के असली हत्‍यारों की गिरफ्तारी के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठा रही है. पत्रकारों ने मुख्‍यमंत्री से मांग की कि हत्‍याकांड की जांच सीबीआई से कराई जाय. गौरतलब है कि पिछले साल 18-19 दिसंबर की रात पत्रकार सुशील पाठक की सरकंडा स्थित उनके निवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

सर्वदलीय मंच के दबाव में राज्य शासन ने एसपी का तबादला कर दिया और जांच के लिए विशेष टीम का गठन कर दी, लेकिन अब तक कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आया. पुलिस शक के आधार पर एक व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया है परन्‍तु उसके पास से भी हत्‍या में प्रयुक्‍त हथियार तथा सुशील का मोबाइल पुलिस बरामद नहीं कर पाई है. धरना-प्रदर्शन में मुंगेली, कोटा, पेंड्रा, तखतपुर, लारेमी समेत पूरे जिले के पत्रकार शामिल होने के लिए आए थे.

धरना देने वालों में ज्ञान अवस्‍थी, प्राण चड़ढा, मनीष दवे,  नंदकिशोर शुक्ल, बजरंग केडिया, हबीब खान, ओपी शर्मा, वासु कलवानी, बल्लू दुबे, सूर्यकांत चतुर्वेदी, कौशल मिश्रा, कमलेश शर्मा, प्रियंक परिहार, तिलकराज सलूजा, सलीम काजी, दिनेश ठक्कर, दिलीप जगवानी, राजेश दुआ, अनिल टाह, सुदीप श्रीवास्तव, शहजादी कुरैशी, हर्ष पाण्डेय, यशवंत गोहिल, विश्वेश ठाकरे, सुनील चिंचोलकर, अशोक व्यास, सुब्रत पाल, कृष्णा गोस्वामी, कृष्णा तंबोली, बल्लू दुबे, कमल दुबे, वीरेन्द्र शर्मा, रविशंकर मिश्रा, सतीश मिश्रा, जोगेंदर खालसा, रियाज अशरफी, सुरेश केडिया, रमेश दुबे, संतोष ठाकुर, रमेश शर्मा, धर्मेश दुबे आदि मौजूद थे. संचालन किशोर श्रीवास्‍तव ने किया.

राजस्‍थान के दो पत्रकारों को पितृशोक

राजस्थान पत्रिका, जोधपुर में उप संपादक महेन्द्र त्रिवेदी के पिता चिरंजीलाल श्रीमाली का नागौर में निधन हो गया. वो कुछ दिनों से बीमार थे. उनका इलाज चल रहा था. मंगलवार रात को उन्‍होंने अंतिम सांस ली. तमाम पत्रकार संगठनों ने श्रीमाली के निधन पर गहरा दुख जताया है. पत्रकारों ने उनके परिवार को ईश्‍वर से दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की है.

दैनिक भास्कर, बांसवाड़ा में कार्यरत पत्रकार गोविंद प्रसाद गुप्ता के पिता रामेश्वर प्रसाद गुप्ता का भी मंगलवार को असामयिक निधन हो गया. वे  लगभग 62 वर्ष के थे. वे पिछले काफी दिनों से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे. उनका इलाज चल रहा था. सवाई माधोपुर जिले के गंगापुरसिटी में रहने वाले रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के निधन पर राजस्‍थान के पत्रकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया है.

जेब अख्‍तर ने दैनिक भास्‍कर ज्‍वाइन किया

प्रभात खबर, भागलपुर से जेब अख्‍तर ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे डीएनई थे. कुछ दिन पहले उनका तबादला प्रभात खबर ने रांची से भागलपुर के लिए किया था. उन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर के साथ शुरू की है. फिलहाल उन्‍होंने रांची में ज्‍वाइन किया है, परन्‍तु बताया जा रहा है कि वे धनबाद से लांच होने जा रहे भास्‍कर एडिशन को अपनी सेवाएं देंगे. जेब काफी समय से पत्रकारिता में हैं तथा कई अखबारों में काम कर चुके हैं.

अजीत ने भास्‍कर छोड़ा, भारत ने इवनिंग प्‍लस ज्‍वाइन किया

दैनिक भास्‍कर के साथ अजीत सिंह को अपनी दूसरी पारी रास नहीं आई. उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर, जयपुर से इस्‍तीफा दे दिया है. वो स्‍टेट ब्‍ूयरो में काम कर रहे थे. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. अजीत इसके पहले न्‍यूज टुडे, भास्‍कर और आउटलुक में भी काम कर चुके हैं.

भारत भूषण ने अपनी नई पारी जयपुर से प्रकाशित होने वाले सांध्‍यकालीन दैनिक इवनिंग प्‍लस से शुरू की है. उन्‍हें यहां रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी दी गई है. इसके पहले वे एक स्‍थानीय अखबार को अपनी सेवाएं दे रहे थे.

प्रेम एवं विजेंद्र ने जनवाणी, राजीव ने भास्‍कर ज्‍वाइन किया

दैनिक जागरण, नोएडा से प्रेम भट्ट ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे जागरण के नेशनल एडिशन में चीफ सब एडिटर थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी की शुरुआत जनवाणी, मेरठ के साथ की है. यहां भी उन्‍हें चीफ सब एडिटर बनाया गया है. प्रेम मेरठ में इसके पहले भी रह चुके हैं. जागरण ज्‍वाइन करने से पहले वे अमर उजाला, मेरठ में सीनियर सब एडिटर के पोस्‍ट पर तैनात थे.

दैनिक जागरण, हलद्वानी से विजेंद्र कुमार श्रीवास्‍तव ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे सिटी डेस्‍क पर कार्यरत थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी जनवाणी के साथ शुरू की है. उन्‍हें सब एडिटर बनाया गया है. विजेंद्र पिछले तीन वर्षों से जागरण से जुड़े हुए थे.

प्रभात खबर, पटना से राजीव कुमार ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे रिपोर्टर थे तथा काफी समय से प्रभात खबर से जुड़े हुए थे. राजीव अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर, धनबाद के साथ शुरू करने जा रहे हैं. जिसकी शीघ्र लांचिंग होने वाली है. उन्‍हें सीनियर सब एडिटर कम रिपोर्टर बनाया गया है. वे डेस्‍क के साथ रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी भी निभाएंगे.

पकड़े गए जुआरियों में दैनिक भास्कर, भोपाल का भी एक कर्मी?

भोपाल में कई जुआरी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं. सूत्रों का कहना है कि इनमें से एक दैनिक भास्‍कर, भोपाल के सर्कुलेशन विभाग में कार्यरत कर्मचारी है जिनका नाम सलज गुप्ता हैं. सभी जुआरी सिंचाई विभाग के दफ्तर में जुआ खेलते पकड़े गये. इस संबंध में पीपुल्स समाचार एवं पत्रिका अखबार में खबर भी प्रकाशित की गई. लेकिन प्रकाशित खबर में भास्कर का कर्मचारी होने का उल्लेख नहीं है, सिर्फ जुआरियों के नाम भर दिए गए हैं.

बताया जाता है कि जुआ खेलते पकड़े गए कर्मचारी के खिलाफ भास्कर के सरकुलेशन विभाग के वरिष्ठ लोग कार्रवाई करने के मूड में हैं. सूत्रों के मुताबिक भोपाल के सर्कुलेशन विभाग में ऐसे कई कर्मचारी हैं, जिन पर जुआ-सट्टा से लेकर कई अन्य संगीन अपराधों के मामले दर्ज हैं. पर सरकुलेशन विभाग के कुछ अधिकारी इनकी करतूत छिपाने में लगे रहते हैं. चरित्र पड़ताल की उचित व्यवस्था न होने के कारण और मामलों को छिपाने की प्रवृत्ति से ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती.

खबर

”भास्‍कर की घोषणा से हजारों अभिभावक परेशान हैं”

दैनिक भास्कर के 31 जनवरी 2011 के अंक में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए एक करोड़ रूपये की स्कालरशिप देने की घोषणा का आधे पेज का विज्ञापन अखबार के पेज नम्‍बर दो पर छापा गया है। जिसमें अभिवावकों से अपने बच्चों का रजिस्‍ट्रेशन वेबसाइट भास्कर जीनियस 2011 डॉट कॉम, भास्‍कर स्‍कालरशिप डॉट कॉम पर कराने के लिए कहा गया है। इस वेबसाइट पर न तो कहीं भी रजिस्‍ट्रेशन का कालम है और न ही कहीं भी दैनिक भास्कर जीनियस 2011 का ही विवरण है।

मैं अपने बच्चे का रजिस्‍ट्रेशन कराने के लिए कई दिन तक परेशान हुआ। 9 फरवरी के अंक के साथ आई मधुरिमा में भी विज्ञापन छापा गया है। इसमें वेबसाइट के साथ फोन नंबर 1800 2222011 भी छापा गया हैं। मैंने कई बार फोन करने की कोशिश की लेकिन नंबर इनवैलिड मिला। कल मैंने भास्कर में अपने संपर्कों से जानकारी की तो पता चला कि वेबसाइट में तकनीकी खराबी है और फोन नंबर भी काम नहीं कर रहा है।

करोड़ों के जीवन में प्रकाश लाने के लिए भास्कर द्वारा एक करोड़ देने की घोषणा से फिलहाल हजारों प्रतिभाओं के अभिभावक परेशान हो रहे हैं। समाचार में मेरे नाम का उल्लेख न करें इससे मेरे बच्चे को स्कालरशिप टेस्ट में नुकसान हो सकता है। सादर,

हरियाणा से एक अभिभावक द्वारा भेजा गया पत्र. आग्रह पर हम उनका नाम यहां प्रकाशित नहीं कर रहे हैं.

रवींद्र कैलासिया बने भास्‍कर टीवी, भोपाल के संपादक

पत्रिका, जबलपुर से रवींद्र कैलासिया ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे एनई थे. उन्‍होंने नई पारी दैनिक भास्‍कर ग्रुप के भास्‍कर टीवी के साथ शुरू की है. उन्‍होंने एडिटर के पोस्‍ट पर ज्‍वाइन किया है. ये भास्‍कर ग्रुप के साथ उनकी दूसरी पारी है. कैलासिया ने अपने करियर की शुरुआत 1984 में नई दुनिया, इंदौर के साथ की थी. इसके बाद वे चौथा संसार, दैनिक नई दुनिया, नवभारत को भी अपनी सेवाएं दीं.

वे दैनिक भास्‍कर के विशेष सवांददाता और सिटी चीफ रहे. भास्‍कर छोड़ने के बाद पत्रिका से जुड़ गए थे. पत्रिका, ग्‍वालियर से जुड़ गए थे. इन दिनों उनका तबादला जबलपुर के लिए कर दिया गया था.

पत्रिका और भास्‍कर के पत्रकारों को ढंग से नींद भी नहीं आ रही

हनुमानगढ़ में इन दिनों पत्रिका- भास्कर में खूब घमासान मचा हुआ है. दोनों अखबारों ने गंगानगर से अलग ”हनुमानगढ़-संस्करण” शुरू कर दिए हैं. प्रसार, विज्ञापन से ज्यादा इन दिनों समाचारों को लेकर जंग छिड़ी हुई है. दोनों के कार्यालयों में सम्पादक-मंडल में करीब 8 -9 पत्रकार होने के बावजूद अन्य अखबारों के पत्रकारों से भी सहयोग लिया जा रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि पत्रिका- भास्कर के पत्रकारों को सुबह होने के इंतजार में आजकल रात को नींद भी ढंग से नहीं आती है.

कुछ तो 4 बजते ही गेट पर खड़े होकर हॉकर का इंतजार करने लग जाते हैं. उनका बस चले तो वे गंगानगर से आती अख़बार ढोने वाली जीप के सामने ही चले जाएं. कारण सिर्फ एक है वो है ”डर”, डर लगता है उन्हें कि कहीं कोई समाचार छूट न जाए. क्राइम, कोर्ट, विभाग से लेकर सभी प्रकार के समाचारों के अलावा विशेष समाचारों (स्टोरी) पर भी ध्यान देना पड़ रहा है. पता चला है कि पिछले दिनों एक ही दिन में पत्रिका ने दो बड़े कोर्ट के समाचार छोड़ दिए, जिसे भास्कर ने छापा. इस पर पत्रिका ब्यूरो-चीफ को गंगानगर और जयपुर से खूब खरी-खोटी सुननी पड़ी.

आईएमसीएल से एचआर मैनेजर आकांक्षा का इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर के वेब डिवीजन आईएमसीएल, नोएडा से आकांक्षा हांडा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर एचआर मैनेजर थीं. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाली हैं, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. आकांक्षा पिछले ढाई वर्षों से आईएमसीएल के साथ थीं. यहां आने से पहले वो नोकिया के साथ जुड़ी हुई थीं.

मराठी में अखबार निकालेगा भास्कर समूह

मुंबई स्टाक एक्सचेंज को आज डीबी कार्प लिमिटेड ने दो लाइन की सूचना दी कि कंपनी अब मराठी भाषा में महाराष्ट्र में विस्तार करते हुए अखबार के प्रकाशन की तैयारी कर रही है. इस एनाउंसमेंट के बाद माना जा रहा है कि भास्कर प्रबंधन जल्द ही महाराष्ट्र में पांव पसारने वाला है. डीबी कार्प की तरफ से हिंदी में दैनिक भास्कर अखबार कई हिंदीभाषी प्रदेशों से प्रकाशित किया जाता है. इसके अलावा गुजराती में दिव्य भास्कर गुजरात के कई शहरों से प्रकाशित किया जा रहा है.

वहीं अंग्रेजी में मुंबई व कई अन्य शहरों में डीएनए नामक अखबार जी ग्रुप की साझीदारी में प्रकाशित किया जा रहा है. मराठी भाषा में अखबार प्रकाशित करने के बाद डीबी कार्प इस मामले में कई अन्य हिंदी अखबारों की कंपनियों से आगे निकल जाएगा कि वह एक साथ चार भाषाओं में अखबार निकाल रहा है. प्रसार के मामले में देश के नंबर वन अखबार दैनिक जागरण को प्रकाशित करने वाली कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड अभी हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में पांव नहीं पसार पाई है.

उर्दू अखबार इंकलाब के टेकओवर के बाद उर्दू हिंदी के अलावा उर्दू का भी प्रवेश इस ग्रुप में हो गया है. अंग्रेजी में छिटपुट किस्म के प्रोडक्ट निकाले जाते हैं, कोई बड़े पैमाने पर प्रसारित अंग्रेजी अखबार जागरण समूह के पास नहीं है. इसके अलावा गुजराती व मराठी में भी यह समूह नहीं है. फिलहाल डीबी कार्प ने अपने तेवर व विस्तार के जरिए दूसरे मीडिया समूहों में हड़कंप मचा रखा है. डीबी कार्प ने कंटेंट पर बहुत जोर दिया है और इसी के कारण कुछ दिनों पहले दैनिक भास्कर के लेआउट, कंटेंट आदि को काफी मजबूत किया गया है.

संडे के दिन खासतौर पर दैनिक भास्कर अलग तरह का कंटेंट अपने पाठकों को देता है जो दूसरे अखबार फिलहाल दे पाने में सफल नहीं है. कह सकते हैं कि कंटेंट के मामले में भास्कर ने दूसरे अखबारों को पीछे कर रखा है. तमाम तरह के विवादों, आरोपों के बावजूद डीबी कार्प के कर्ताधर्ता देश का नंबर वन मीडिया हाउस बनने के अपने मिशन की ओर लगातार व तेजी से अग्रसर हैं. ऐसे में दूसरे मीडिया प्लेयरों में बेचैनी स्वाभाविक है. महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश जहां देश की आर्थिक राजधानी मुंबई है, में मराठी में अखबार निकालकर डीबी कार्प उस तबको पर पकड़ बनाना चाहता है जो आर्थिक रूप से काफी समृद्ध और निर्णायक है. बीएसई में डीबी कार्प की तरफ से दायर की गई सूचना इस प्रकार है….

दैनिक भास्कर ब्यूरो कार्यालय में तालाबंदी

तालाअपने को देश का सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह कहने वाले दैनिक भास्कर की स्थिति यह है कि किराया भुगतान नहीं करने से उसके ब्यूरो कार्यालय में ताला लगा दिया गया। यह माजरा है छत्तीसगढ़ के महासमुंद ब्यूरो का। भड़ास ने पहले ही खबर दी थी कि यदि भास्कर प्रबंधन ने महासमुंद भास्कर ब्यूरो के मकान मालिक योगेश कुमार की बात नहीं मानी तो वे एक फरवरी को भास्कर कार्यालय में ताला लगा देंगे। हुआ भी यही।

दिसंबर और जनवरी महीने का किराया भुगतान नहीं करने और लगातार अल्टीमेटम देने के बावजूद 4 महीने से मकान खाली नहीं किए जाने से नाराज योगेश कुमार ने दो फरवरी की सुबह भास्कर के ब्यूरो कार्यालय में ताला जड़ दिया। इससे हड़कंप मच गया और भास्कर के कुछ कर्मचारी मकान मालिक योगेश को बडे़ बैनर का धौंस जमाते हुए देख लेने और निपटा देने तक की धमकी देने लगे। इसका मकान मालिक पर कोई असर नहीं हुआ और वह किराया भुगतान तत्काल करने की मांग पर अड़े रहे।

अंततः महासमुंद में दैनिक भास्कर के 20 साल पुराने कर्ताधर्ता बाबूलाल साहू ने 10 फरवरी तक मकान खाली करा लेने और किराया भुगतान की पूरी जिम्मेदारी खुद ली, तब कहीं जाकर दोपहर में तालाबंदी खत्म हुई। अपने को बड़ा बैनर और ब्रांड कहने वाले अखबार के ब्यूरो कार्यालय का मासिक 3000 रूपए किराया भुगतान नहीं करना समझ से परे है। दैनिक भास्कर समूह के इस अड़ियल रवैया को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है।

आज समाज से सुरजीत सैनी भास्‍कर पहुंचे

आज समाज से बड़ी खबर आ रही है। पता चला है कि चंडीगढ़/अंबाला आज समाज से समाचार सम्पादक सुरजीत सैनी ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दैनिक भास्कर का दामन फिर से थाम लिया है। इस बार उन्होंने जालंधर में बतौर डिप्टी एडीटर ज्वाइन किया है। यहां बता दें कि हरियाणा में आज समाज के शुरू हुए अभी एक साल ही हुए हैं। लेकिन इस दौरान अखबार ने कई फेरबदल देख लिए हैं।

सबसे पहले अखबार में संपादक के तौर पर स्वतंत्र सक्सेना का नाम जाता था। टीम ने मेहनत की और अखबार अच्छा चल निकला। ये बात अलग रही कि मशीन की खराबी के कारण अक्सर अखबार देर से छप पाया और लोगों तक नहीं पहुंच पाया। लेकिन प्रबंधन को यह सब अच्छा नहीं लगा और कुछ ही समय बाद स्वतंत्र सक्सेना को राजनीतिक सम्पादक बनाकर चंडीगढ़ भेज दिया गया। यही नहीं अखबार की प्रिंट लाइन में समाचार सम्पादक के रूप में सुरजीत सिंह सैनी का नाम जाने लगा। अखबार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।

प्रबंधन को यह भी रास नहीं आया और हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ ब्यूरो चीफ रहे संजीव शुक्ला को अंबाला में बतौर सीनियर एसोसिएट एडीटर के रूप में लाया गया। अब सुरजीत सिंह सैनी का नाम प्रिंट लाइन में जाना बंद हो गया। खफा सैनी ने अपने लिए जगह तलाशनी शुरू की और जल्द ही भास्कर जालंधर से उनकी बात फिट हो गई। यही नहीं एक दौर ऐसा भी आया जब प्रबंधन ने स्वतंत्र सक्सेना और सुरजीत सैनी को तुगलकी फरमान जारी करते हुए दिल्ली इंडिया न्यूज बुला लिया। यह सब इसलिए किया गया क्योंकि किसी डेस्क कर्मी की गलती की वजह से हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा के खिलाफ एक खबर छप गई थी।

इस बीच जो एक नाम नहीं बदला वह था रवीन ठुकराल का। उनका नाम अखबार के पहले दिन से अब तक बतौर सम्पादक जा रहा है। यह बात अलग है कि अब वे अखाबर पर ध्यान कम दे रहे हैं और इंडिया न्यूज पर ज्यादा। पता यह भी चला है कि जल्द ही अंबाला और चंडीगढ़ आफिस से कुछ और लोग संस्थान से अलविदा कह सकते हैं। इसका एक बड़ा कारण वेतनवृद्धि न किया जाना माना जा रहा है।

एक साल में यहां के लोगों ने अखबार को भास्कर, अमर उजाला और पंजाब केसरी के समक्ष खड़ा किया लेकिन प्रबंधन ने इसके एवज में कुछ नहीं किया। किया भी तो सिर्फ उनके साथ जो जी हुजूर में लिप्त रहे। प्रबंधन अगर इसी तरह निजाम बदलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हरियाणा संस्करण का हाल भी दिल्ली जैसा हो जाए।

भास्‍कर ने नौसेना के आईएनएस को मुंबई एयरपोर्ट पर डूबाया

अब तक तमाम बड़े अखबारों के वेबसाइट किसी के मरने पर किसी और की फोटो छाप देते थे. किसी जिंदा व्‍यक्ति को दिवंगत बता देते थे. आंकड़ों में गलतियां कर देते थे. पर अब तो ये चमत्‍कार और असंभव को संभव करने जैसा भी काम करने लगे हैं. इस बार यह असंभव काम दैनिक भास्‍कर की वेबसाइट ने किया है. भास्‍कर ने नौसेना के युद्धपोत आईएनएस को मुंबई बंदरगाह की जगह मुंबई एयरपोर्ट पर डूबा दिया है. अब लोगों की समझ में नहीं आ रहा है आखिर नौसेना का जहाज मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा कैसे?

अब भास्‍कर वालों ने आईएनएस को जितनी भी मुश्किल से एयरपोर्ट पहुंचाया हो पर एक सुधी पाठक से भास्‍कर की ये परेशानी देखी नहीं गई और उन्‍होंने उस खबर की स्‍क्रीनशॉट लेकर भड़ास के पास भेजी दी. नीचे आप भी देखिए मुंबई एयरपोर्ट पर आईएनएस के डूबने की खबर.

भास्‍कर

अश्‍वनी ने मीडिया छोड़ा, रामलच्‍छा की नई पारी

आर्थिक पत्रकार अश्‍वनी कुमार श्रीवास्‍तव ने 10 साल के करियर के बाद मीडिया जगत को अलविदा कह दिया है. खबर है कि अब वे अपना बिजनेस शुरू करने जा रहे हैं. लखनऊ के रहने वाले अश्‍वनी फिलहाल दैनिक भास्‍कर से जुड़े हुए थे. आईएआईएमसी के छात्र अश्‍वनी ने दस साल पहले अपने करियर की शुरुआत की थी. अश्‍वनी ने दिसम्‍बर 2010 में बिजनेस स्‍टैण्‍डर्ड हिंदी में सहायक समाचार संपादक के पद से इस्‍तीफा देकर दैनिक भास्‍कर से जुड़े थे. ये नवभारत टाइम्‍स एवं हिन्‍दुस्‍तान को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

दैनिक जागरण, गाजीपुर से रामलच्‍छा सिंह कुशवाहा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे जागरण में विज्ञापन देख रहे थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी अमर उजाला, गाजीपुर के साथ शुरू की है. इन्‍हें गाजीपुर का विज्ञापन प्रभारी बनाया गया है. रामलच्‍छा काफी समय से दैनिक जागरण से जुड़े हुए थे.

कल भास्‍कर के महासमुंद कार्यालय में ताला लगा देंगे योगेश!

अगर दैनिक भास्‍कर ने योगेश कुमार की बात नहीं मानी तो एक फरवरी को वे भास्‍कर के महासमुंद कार्यालय में तालाबंदी कर देंगे. योगेश ने अपना अल्‍टीमेटम दैनिक भास्‍कर, रायपुर के महाप्रबंधक, महासमुंद के पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी को दे चुके हैं. आज उस अल्‍टीमेटम का आखिरी दिन है.

दरअसल पूरा मामला यह है कि योगेश कुमार उस मकान के मालिक हैं, जिसमें भास्‍कर, महासमुंद का जिला कार्यालय किराये पर चल रहा है. वे एक अक्‍टूबर को दैनिक भास्‍कर प्रबंधन को सूचना देकर अपना मकान खाली करने का अनुरोध किया था. जिस पर 23 अक्‍टूबर को इन्‍हें मकान खाली करने का आश्‍वासन दिया गया था. इसके बाद भी अखबार ने इनका मकान नहीं खाली किया, जिसके बाद इन्‍होंने आठ नवम्‍बर को इन्‍होंने दूसरा सूचना पत्र अखबार प्रबंधन को दिया. इसके बाद भी अब तक मकान खाली नहीं किया गया.

योगेश कुमार आरोप है कि अनुबंध पत्र के अनुसार उन्‍हें प्रत्‍येक महीने की 20 तारीख को किराया मिल जाना चाहिए था, परन्‍तु कभी भी अखबार प्रबंधन ने किराया समय से नहीं दिया. मकान का रखरखाव भी ठीक ढंग से नहीं किया जाता है. उनके द्वारा नोटिस दिए जाने के तीन महीने के बाद भी प्रबंधन ने मकान खाली नहीं किया. योगेश कुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि अखबार पिछले दिसम्‍बर माह का किराया भी अब तक उन्‍हें नहीं दिया है, जबकि जनवरी माह भी बीतने वाला है. उन्‍होंने अपना अल्‍टीमेटम भेज दिया है.

अल्‍टीमेटम

रोहतक में भास्‍कर ने लांच की अपनी नई यूनिट

दैनिक भास्‍कर ने अपनी नई प्रकाशन यूनिट रोहतक में लांच कर दी है. हरियाणा के मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दैनिक भास्‍कर के रोहतक यूनिट का शुभारंभ नई प्रिंटिंग मशीन का बटन दबाकर किया. इस मौके पर उन्‍होंने प्रकाशित विशेषांक का भी विमोचन किया. इसके साथ ही हरियाणा में भास्‍कर के तीसरी प्रिंटिंग यूनिट स्‍थापित हो गई है. इसके पहले पानीपत तथा हिसार में भास्‍कर की प्रिंटिंग यूनिट स्‍थापित थी.

सीएम हुड्डा ने इस मौके पर कहा कि बदलते दौर में पत्रकारिता व्‍यवसाय में बदलती जा रही है. ऐसे में अखबारों की जिम्‍मेदारी और अधिक बढ़ जाती है. पत्रकारिता का उद्देश्‍य जनता को जागरूक करना है. इसलिए पत्रकारों को आम आदमी को केंद्र बिंदु मानकर काम करना चाहिए. इस मौके पर सांसद शादीलाल बतरा, विधायक भारत भूषण बतरा, आनंद सिंह दांगी, श्रीकृष्‍ण हुड्डा, जगवीर मलिक, शकुंतला खटक समेत काफी लोग मौजूद रहे.

अवनीन्‍द्र एवं अनूप की नई पारी, कमलेश का इस्‍तीफा

टाइम्‍स ऑफ इंडिया से अवनीन्‍द्र मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने अपनी नई पारी भास्‍कर समूह के अंग्रेजी अखबार डीएनए से की है. अवनीन्‍द्र की भास्‍कर ग्रुप के साथ यह दूसरी पारी है. वे इसके पहले भास्‍कर टीवी में भी काम कर चुके हैं. राव जसवंत सिंह पहले ही डीएनए के हिस्‍सा बन चुके हैं.

लोक संपर्क डॉट कॉम से अनूप जोशी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे लोक संपर्क से संवाददाता के रूप में जुड़े हुए थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक बढ़ता राजस्‍थान से शुरू की है. उन्‍हें रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी दी गई है. अनूप कई स्‍थानीय अखबारों से भी जुड़े रहे हैं.

दैनिक भास्‍कर, नागौर से कमलेश केसोट ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे भास्‍कर में रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी संभालते थे. उन्‍होंने इस्‍तीफा किन कारणों से दिया है तथा अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

भास्‍कर ने बनाया अजीम प्रेमजी को लक्ष्‍मी निवास मित्‍तल का समधी!

रिशद प्रेमजी
रिशद प्रेमजी
गलत फोटो लगाना जैसे हिंदी के दिग्‍गज अखबारों के वेबसाइटों की परम्‍परा सी बन गई है. अभी दो दिन पहले दैनिक जागरण ने पंडित भीम सेन जोशी की जगह पंडित जसराज की फोटो छाप कर उन्‍हें मार डाला था. आज जागरण का प्रतिद्वंदी दैनिक भास्‍कर भी उससे पीछे नहीं रहा. इस अखबार की वेबसाइट ने तो रिश्‍तेदारियां ही बदल कर रख दी.

वेबसाइट ने स्‍टील किंग लक्ष्‍मी निवास मित्‍तल के दामाद अमित भाटिया को विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी का सुपुत्र रिशद प्रेमजी बता दिया. यानी अखबार ने लक्ष्‍मी निवास मित्‍तल और अजीम प्रेम जी को संबंधी बना दिया है. एक पाठक ने भास्‍कर की वेबसाइट पर हुई इस गलती का स्क्रीनशाट लेकर उसे भड़ास4मीडिया के पास भेज दिया है. भड़ास की तरफ से जब भास्‍कर की वेबसाइट पर चेक किया गया तो गलती इस समय तक भी जारी है. संभव है खबर छपने के बाद भास्‍कर अपनी गलती सुधार ले. यकीन न हो तो आप भी इस लिंक ‘भास्‍कर में गलती‘ पर क्लिक कर देख सकते हैं. उपर आप अजीम प्रेमजी के पुत्र रिशद की फोटो देख सकते हैं.

भास्‍कर

भास्‍कर को चाहिए वितरकों से कमाई में हिस्‍सा!

दैनिक भास्‍कर अब कमाई का कोई जरिया छोड़ना नहीं चाहता है. जैसे भी मिले पैसे आने चाहिए. अब अखबार को वितरकों द्वारा अखबार में भरे जाने वाले इंसर्ट और पम्‍पलेट से होने वाली कमाई में भी एक तिहाई हिस्‍सा चाहिए. यह पैसा कंपनी के खाते में जाएगा. जो वितरक यह हिस्‍सा नहीं देंगे उनकी सप्‍लाई बंद कर दी जाएगी.

ऐसा ही एक वाकया आज सुबह भोपाल के ज्‍योति सेंटर पर देखने को मिला. इस सेंटर के वरिष्‍ठ वितरक वीपी सिंह ने कल एक संस्‍थान के पम्‍पलेट सभी अखबारों में भरे थे. आज सुबह दैनिक भास्‍कर के मुलाजिम मुकेश गुप्‍ता ने वीपी सिंह से कल भरे गए पम्‍पलेट की कमाई का एक तिहाई हिस्‍सा मांगा. वीपी सिंह के मना करने पर उनकी सप्‍लाई रोक दी गई. और उनको सप्‍लाई तब तक नहीं दी जब तक कि वीपी सिंह द्वारा उक्‍त राशि जमा नहीं करा दी गई. खास बात यह रही कि वितरक द्वारा रसीद मांगे जाने पर उन्‍हें कोई रसीद भी नहीं दी गई.

उल्‍लेखनीय है कि भास्‍कर के एजेंटों पर इस तरह का नियम पिछले दो माह से लागू है. जिसके बाद एजेंटों ने पम्‍पलेट भरना बंद कर दिया है. इसे लेकर एजेंट अंदरखाने काफी नाराज हैं. एजेंटों का कहना है कि भास्‍कर जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा है उसकी सोच भी उसी स्‍तर पर छोटी और घटिया होती जा रही है.

भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल भगोड़ा!

जिला कोर्ट रोहतक ने दैनिक भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल को भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू की है. रमेश चंद्र अग्रवाल के भोपाल स्थित घर पर इसके लिए एक नोटिस चस्‍पा किया गया है. एक नोटिस भोपाल के महाराणा प्रताप चौक पर भी चस्‍पा किया गया है. यह कार्रवाई कोर्ट ने सैनी एजुकेशन सोसायटी के प्रधान विजय सैनी की कथित मानहानि के मामले में सुनवाई करते हुए की.

इस संबंध में विजय सै‍नी के अधिवक्‍ता ने बताया कि दैनिक भास्‍कर ने 24 दिसम्‍बर 2007 को पंजाब एवं हाई कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर सैनी एजुकेशन सोसायटी के प्रधान विजय सैनी के खिलाफ एक झूठी खबर प्रकाशित कर दी थी कि हाई कोर्ट आठ सप्‍ताह के भीतर अथवा 20 फरवरी  2008 तक सैनी एजुकेशन सोसायटी के चुनाव सम्‍पन्‍न करवाने के आदेश जारी किए हैं. जबकि वास्‍तव में हाई कोर्ट ने ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया था. इस गलत खबर पर विजय सैनी से स्‍थानीय संवाददाता से संपर्क किया तथा ऐसा कोई भी आदेश जारी ना होने की बात बताकर इस गलत खबर का खंडन छापने का आग्रह किया. परन्‍तु संवाददाता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्‍होंने कोर्ट की शरण ली. उन्‍होंने अखबार मालिक, स्‍थानीय संपादक और संवाददाता के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत कोर्ट में दर्ज कराई.

उन्‍होंने बताया कि कोर्ट ने विजय सैनी द्वारा प्रस्‍तुत किए गए दस्‍तावेजों तथा गवाहों के बयान सुनने के बाद भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल, तत्‍कालीन कार्यकारी संपादक दिनेश मिश्रा और खबर छापने वाले संवाददाता को कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था. कई तारीखों पर उपस्थित न होने पर जुडिशियल मजिस्‍ट्रेट की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 500, 501 तथा 502 के तहत सम्‍मन जारी कर अदालत में तलब किया था.

कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूत याचिका की दलीलों का समर्थन करते हैं लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को तलब करना जरूरी एवं न्‍यायसंगत है. भास्‍कर का संवाददाता तो सुनवाई के दौरान नियमित उपस्थित होता रहा लेकिन मालिक और संपादक एक बार भी उपस्थित नहीं हुए. जिसके बाद जिला कोर्ट ने मालिक को भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है.

बरखा ने बनवाया राजा को मंत्री!

कनिमोझी ने अपने पिता और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि से कहा था यदि उन्होंने मारन को मंत्री बनने से नहीं रोका तो वे आत्महत्या कर लेंगी। कनिमोझी के बारे में यह जानकारी नीरा राडिया ने सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष तरुण दास को दी थी।

कनिमोझी, राजा को मंत्री बनवाना चाहती थी। पत्रिका आउटलुक में जारी हुए राडिया के 800 नए टेप्स में यह खुलासा हुआ है। इनमें से कुछ की ही ट्रांसक्रिप्ट तैयार की जा सकी है। इससे पहले 140 टेप्स जारी हो चुके हैं। सत्ता की दलाली में मुख्य किरदार निभाने वाली नीरा राडिया ने दूसरी यूपीए सरकार के मंत्रिमंडल गठन में मीडिया का मनचाहा उपयोग किया।

राजा की पैरवी

सुनील मित्तल के करीबी तरुण दास को राडिया ने खबर दी कि राजा को मंत्रिमंडल में ले लिया गया है और वे वैसा ही करेंगे, जैसा हम चाहेंगे।

राडिया– .. उन्होंने (मनमोहन सिंह) राजा के लिए इशारा (डीएमके को) कर दिया है।

दास– ..लेकिन वे काफी अलोकप्रिय हैं। नहीं, ऐसा सिर्फ सुनील (सुनील मित्तल) समझते हैं। आप विश्वास करिए, वे (राजा) वैसा ही करेंगे जैसा हम चाहेंगे। राजा ने वादा किया है कि वे सुनील से बात करके सारा मामला सुलझा लेंगे। आप वह सब मुझ पर छोड़ दीजिए।

राडिया ने तरुण दास को कमलनाथ के बारे में बताया कि वे कर्मठ हैं और अपना 15 फीसदी हिस्सा (कमीशन) बना ही लेते हैं। राडिया ने कहा कि रतन टाटा मारन को लेकर चिंतित थे कि कहीं उन्हें टेलीकॉम मंत्री न बना दिया जाए। राजा के आने पर वे खुश हैं।

(तरूण दास : सीआईआई के पूर्व प्रमुख)

जैसा तुमने (राडिया) बताया था वैसा ही लिखा ना

वीर सांघवी की राडिया से बातचीत

अब तक : हिंदुस्तान टाइम्स के सलाहकार वीर सांघवी ने कहा था कि उन्होंने कॉलम को लेकर राडिया से जो बातें कीं, वे सिर्फ सूचना हासिल करने के लिए थीं।

नए टेप्स : सांघवी- जैसा तुमने बताया था वैसा ही लिखा। ताकि संसाधनों (गैस) को लेकर लोगों में एक नजरिया बने।

राडिया – बहुत अच्छा, धन्यवाद वीर।

सांघवी – मैंने ऐसा लिखा कि वह मनमोहन सिंह के लिए अर्जी लगे, न कि अंबानी भाइयों का विवाद।

(अपने सहयोगी को राडिया ने वीर सांघवी के लिए प्रश्न तैयार करने को कहा और बताया कि वीर सांघवी कुछ इंटरव्यू लेना चाहते हैं। इसमें पहला मुकेश अंबानी का होगा और दूसरा रतन टाटा का। इसमें वे वही प्रश्न पूछेंगे, जैसा हम कहेंगे।)

बरखा ने बनवाया राजा को मंत्री

(राडिया की अपने किसी साथी से बातचीत)

अब तक : एनडीटीवी की ग्रुप एडिटर बरखा दत्त ने राडिया को केवल सूत्र बताया था और कहा था कि राजा को मंत्री बनवाने के लिए उन्होंने किसी कांग्रेस नेता से बात नहीं की।

नए टेप्स : राडिया- कांग्रेस ने तो थैंक गॉड बयान दे दिया, बरखा ने ये सब करवा दिया। (राजा को मंत्रिमंडल में लिए जाने की घोषणा पर)

अंजान साथी – हां, वो मैंने देख लिया। आ गया ना मनीष तिवारी का..(कांग्रेस प्रवक्ता के बयान के बाद)।  साभार : भास्‍कर

भास्‍कर साइट : अंग्रेजी की ऐसी की तैसी!

महोदय ऐसा लगता है कि दैनिक भास्‍कर अपने अंग्रेजी साइट के लिए कुछ अक्षम और मूर्ख पत्रकारों को काम पर रखा है. आज पहली बार मैं दैनिक भास्‍कर का साइट खोला और होम पेज देखने के बाद तो मेरी हंसी रूक ही नहीं रही थी. ऐसा लग रहा है कि इस साइट पर लिखा गया अंग्रेजी के अलावा कुछ भी हो सकता है. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भास्‍कर को कोई योग्‍य पत्रकार नहीं मिला, जिसे कम से कम अंग्रेजी की बेसिक बातों की जानकारी हो. अगर विश्‍वास नहीं हो रहा तो नीचे खुद देख लीजिए.

दैनिक भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

बजरंग दास गर्ग का गुलाम हुआ भास्कर

भास्‍कर आदरणीय कल्पेश जी, पिछले दिनों आप हरियाणा के पत्रकारों को आक्रामता और पाठकों के साथ न्याय कराने का पाठ पढ़ाकर गए थे। भड़ास में यह खबर पढक़र हमें बहुत अच्छा लगा था कि आजकल आप जैसे संपादक भी बचे हुए हैं, लेकिन आपके अखबार के संपादकों की करतूत मुझे अपनी भड़ास निकालने पर मजबूर कर रही है।

दरअसल हरियाणा में आपका अखबार जिस तरह से सरकार के एक चापलूस चेयरमैन की चापलूसी में जुटा हुआ है, उसे देखकर तो ऐसे लगता है कि भास्कर कानफेड के चेयरमैन बजरंग दास गर्ग का गुलाम हो गया है। दरअसल नवंबर माह में ही बजरंग दास गर्ग की सरकारी चापलूसी भरी छह खबरें दैनिक भास्कर के हरियाणा पेज पर प्रकाशित हो चुकी हैं। शुक्रवार को ये महाशय शाहबाद आए और यहां की लोकल कार्यकारिणी गठित की। यह खबर दैनिक भास्कर के हरियाणा पेज पर प्रकाशित हुई है। अब संपादक पाठकों को यह बताएं कि शाहबाद जैसे छोटे से कस्बे की यह खबर हिसार, रोहतक या सोनीपत जिले के पाठकों के लिए किस मतलब की है।

नवंबर महीने में ही महान बजरंग दास गर्ग की खबर दैनिक भास्कर में पांच, आठ, दस, बारह, तेरह और पंद्रह तारीख को प्रकाशित हो चुकी हैं और अभी तो आधा महीना बाकी है। एक जमाना था जब ये महाशय दैनिक भास्कर अखबार में घुसने से भी डरते थे, लेकिन अब पानीपत और हिसार जोन के संपादक बदलने के बाद इनकी पौ बारह हो गई है और सुना है कि अब चंडीगढ़ में भी इनकी बढिया सेटिंग हो गई है, इसलिए पाठकों के सामने इनकी घटिया सूरत भास्कर में हर रोज ही दिखाई देगी।

भास्‍कर

भड़ास में खबर पढक़र आप अगर इस बारे में संपादकों पर लगाम कसेंगे तो पाठकों पर आपका बहुत बड़ा अहसान होगा। हमें अच्छा लगेगा अगर भास्कर के संपादक बजरंग दास गर्ग से हिसाब मांगें कि उन्होंने व्यापारियों के लिए अब तक किया ही क्‍या है। खुद लालबती की गाड़ी में घूमने वाले बजरंगी को हांसी में व्यापारियों के खून से सनी सडक़ दिखाई नहीं देती या दैनिक भास्कर के संपादक बजरंग की नौकरी करने में जुटे हैं, इसका जवाब तो ये ही दे सकते हैं।

आपका अपना

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

खबर से नाराज ग्रामीणों ने भास्‍कर की होली जलाई

भास्‍करमध्‍य प्रदेश के नीमच जिले में एक खबर छपने से नाराज ग्रामीणों ने भास्‍कर की होली जला दी. खबर एक स्‍थानीय डाक्‍टर के खिलाफ लिखी गई थी. खबर पढ़ने के बाद ग्रामीण नाराज हो गए और अखबार की दर्जनों प्रतियां आग के हवाले कर दिया.

जानकारी के अनुसार डा. सुरेन्‍द्र सोनी का गिरदोड़ा में क्‍लीनिक है. यहीं पर वो मरीजों का इलाज करते हैं. जैसा आरोप है कि डाक्‍टर सोनी से भास्‍कर के रिपोर्टर मूलचंद खिंची ने पांच हजार रुपये की मांग की. डा. सोनी ने रिपोर्टर को पैसा देने से इनकार कर दिया. इससे नाराज रिपोर्टर ने अखबार में डा. सोनी के खिलाफ खबर प्रकाशित कर दी. जिसमें उनपर कई आरोप लगाए गए. इस खबर को पढ़ने के बाद गिरदोड़ा के ग्रामीण नाराज हो गए. अखबार की दर्जनों प्रतियों को उन्‍होंने आग के हवाले कर दिया.

भास्‍कर

चार युवा पत्रकारों का संघर्ष

: पिछले दो साल से लड़ रहे हैं भास्‍कर के खिलाफ अदालती लड़ाई : 2008 में जब वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में पूरा देश और समूचा विश्व परेशान था, ऐसे समय में अकारण ही नौकरी से वंचित होकर परेशान होने वालों की लंबी फेहरिस्त में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों और भोपाल, पूना जैसे सेमी मेट्रो के साथ ही छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जैसे छोटे से शहर में समाज और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिये कलम चलाने वाले पत्रकार भी शामिल थे.

सच कहे तो आर्थिक मंदी दरअसल महज एक बहाना था. जिस तरह से पत्रकारों और कमोबेश फोटोग्राफरों व अन्य मीडियाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, उसके पीछे ऐसे अखबार समूहों की साजिश थी, जो कम दाम में अधिक काम की मानसिकता से ग्रस्त थे. पहले स्थापित होने के लिये उन लोगों ने भले ही पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति कर ली थी, लेकिन उसके बाद कम वेतन देना पड़े इसलिये उन्होंने आर्थिक मंदी का बहाना बनाकर कर्मचारियों के साथ पत्रकारों को भी ठिकाने लगाना शुरू कर दिया.

दिन-रात एक कर अपने हिस्से के भी समय को समाज और देश के नाम करते हुये लोगों के अधिकार, सामाजिक समस्याओं, सरकारी तंत्र की कमजोरियों और उसकी नाकामियों के खिलाफ कलम चलाने वाले कलम के सिपाहियों की हालत और उनकी स्थिति हालांकि अब किसी से छिपी नहीं है, लेकिन आज भी आम लोग पत्रकारों पर होने वाले अत्याचार और उनके शोषण की कहानी नहीं जानते. समय-समय पर अखबारों में नहीं पर पत्रकारिता के कुछ अन्य माध्यम (वेबपोर्टल) के माध्यम से पत्रकारों पर होने वाले अत्याचार और उनके खिलाफ रची जाने वाली साजिश का पर्दाफाश होता रहा है. इसके लिये ऐसे माध्यम साधुवाद के पात्र तो हैं, लेकिन एक बड़ा संकट यह भी है कि आखिर केवल प्रकाशित करने से या इंटरनेट पर अपने सुधी पाठकों तक ऐसी सामग्री पहुंचाकर क्या दैनिक भास्कर जैसे अखबार समूह का कुछ बिगाड़ा जा सकता है.

वैश्विक आर्थिक मंदी का बहाना बनाकर पत्रकारों को निकाले जाने के इस प्रकरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में दरार पड़ चुकी है. क्योंकि इस चौथे स्तंभ पर अब चंद पूंजीपतियों का जैसे मालिकाना हक है. उन्हें न पढ़ना-लिखना आता है और न ही उन्हें देश की जनता और उनकी पीड़ा से ही कोई लेना-देना है. वे तो गरीबों की भूख, औरतों के बलात्कार और बच्चों की कुपोषण से मौत की खबर भी केवल इसलिए छापते हैं क्योंकि उन्हें इससे पूंजी कमाना है. अखबारों का यह पूंजीवादी स्वरूप 21वीं सदी की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. आम जनता आज भी अखबार में लिखा हुआ को सच मानती है जबकि सच तो यह है कि छपता वहीं है जो पूंजीपति छपवाना चाहते हैं.

अब न प्रेमचंद है और न महावीर प्रसाद द्विवेदी, माधव राव सप्रे की भी पत्रकारिता का अंत हो चुका है. अब तो पेड न्यूज का विरोध करने वाले प्रभाष जोशी भी इस दुनिया में नहीं है और नांदगांव के मुक्तिबोध भी इस संसार से विदा हो चुके हैं. अब तो ऐसे संपादक, अखबार मालिक पत्रकारिता की जमीन पर उग आये हैं, जो बातें तो जनता की समस्याओं के बारे में करते हैं लेकिन उनका पूरा ध्यान पावर प्लांट लगाने, कोलवाशरी चलाने और शराब का ठेका, पेट्रोल पंप के लाइसेंस से लेकर मकान बनाने में रहता है. साफ-साफ कहे तो दलाल, बिल्डर, उद्योगपति, शराब ठेकेदार, भू-माफिया, नेताओं के चमचे और न जाने किस-किस बिरादरी के कैसे-कैसे लोग अखबारों के धंधे में शामिल हो चुके हैं. कलम की धार कमजोर क्या पूरी तरह खतम हो चली है, यहां साथी वी.वी.रमण किरण की बहुचर्चित कविता बरबस ही याद आती है- कलम टूटकर लकड़ी बन गई, रोटी सेंकने का साधन बन गई.

पत्रकारों पर अत्याचार और उनके शोषण की कहानी कोई नई नहीं है. यह तो इमरजेंसी और इमरजेंसी के पहले से चली आई है पर 2008 में मीडिया के क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसने पूरे पत्रकारिता जगत में उथल-पुथल मचा दी. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से लेकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों के पत्रकार भी इससे प्रभावित हुये बिना नहीं रह सके. 2008 में आर्थिक मंदी की आड़ में सैकड़ों की तादाद में पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. और सोचने वाली बात यह है कि ये सभी ऐसे अखबारों में थे जो देश में खुद को नंबर वन, नंबर टू या नंबर थ्री कहकर गौरान्वित महसूस करते हैं.

बिलासपुर में पत्रकारों के खिलाफ साजिश और उन्हें मानसिक प्रताड़ना देने की शुरुआत का श्रेय दैनिक भास्कर के उस कार्यालय को जाता है, जिसका दफ्तर रवींद्र नाथ टैगोर चौक से गांधी चौक जाने वाले मार्ग पर माननीय उच्च न्यायालय भवन के ठीक सामने गुंबर काम्पलेक्स में स्थित है. यदि मैं गलत नहीं हूं और मेरी स्मृति को कुछ नहीं हुआ है तो वह 20 दिसंबर 2008 को सुबह 11 बजे की बात है, उस समय संपादकीय विभाग की मीटिंग होती थी और अब भी होती है. वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र पांडेय, मोहम्मद यासीन अंसारी, सुनील शर्मा और फोटो जर्नलिस्ट वी.वी. रमण किरण दैनिक भास्कर के दफ्तर पहुंचे. जैसे ही वे रिसेप्शन से होकर गुजरने लगे उन सभी को रिसेप्शनिस्ट ने यह कहकर रोक दिया कि उसे आदेश है कि आप लोगों को अंदर न आने दिया जाये.

हेड सुपरवाइजर श्री झा ने भी रिसेप्शनिस्ट की बात को दोहराया. पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आखिर ऐसा क्या हो गया जो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? श्री झा ने उनसे कहा कि वे पता करके आते हैं, तब तक आप लोग वेटिंग रूम में चाहे तो इंतजार कर सकते है. पत्रकारों को इस अपमान और इस व्यवहार से बेहद पीड़ा हुई लेकिन वे बगैर कारण जाने कुछ नहीं कर सकते थे. बिलासपुर में पत्रकारों के साथ अपने ही दफ्तर में होने वाले दुर्व्यवहार की यह पहली घटना थी जिसे किसी भी सूरत में सामान्य नहीं लिया जा सकता था.

खैर, पत्रकार अपमान का घूंट पीते हुये वेटिंग रूम में इंतजार करने लगे लेकिन दो घंटे तक इंतजार करवाने के बाद स्थानीय संपादक संदीप सिंह ठाकुर और क्षेत्रीय प्रबंधक देवेश सिंह ने उन्हें अगले दिन आने का संदेश चपरासी के माध्यम से भिजवा दिया. दूसरे दिन जब सुबह 11 बजे पत्रकार पहुंचे तो उन्हें फिर से वेटिंग रूम में डेढ़-दो घंटे तक इंतजार करवाया गया और उसके बाद उनके हाथों में एक-एक पत्र थमा दिया गया, जो दरअसल उनका स्थानांतरण आदेश- पत्र था. स्थानांतरण आदेश देखकर पत्रकार हतप्रभ रह गये. पत्र पढकर पता चला कि शैलेंद्र पांडेय का अंबिकापुर, मोहम्मद यासीन अंसारी का रायगढ़, सुनील शर्मा का जशपुर और वी.वी. रमण किरण का रायगढ़ ब्यूरो दफ्तर में स्थानांतरण कर दिया गया है. देखते ही देखते पत्रकारों के सामने विकट परिस्थिति आ खड़ी हुई. उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि वे क्या करें? उन्होंने जब इसका कारण पूछा तो उन्हें इसका कारण भी नहीं बताया गया.

दफ्तर के अन्य साथियों से पता चला कि उन्हें उनके एक सप्ताह के अवकाश पर चले जाने के कारण यह सजा दी गई है. जबकि सच्चाई यह थी कि अखबार समूह इस छोटी सी गलती की सजा नहीं दे रहा था, बल्कि पत्रकारों को निकाल बाहर करने की योजना बना चुका था. साजिश रची जा चुकी थी और प्रबंधन जानता था कि पत्रकार इतनी कम तनख्वाह में दूसरे शहर नहीं जायेंगे और वे नौकरी छोड़ देंगे. और ऐसा उसने केवल बिलासपुर में नहीं किया, अपने अन्य एडिशन में भी इस अखबार ने यही किया, जिसका कवरेज भड़ास4मीडिया ने किया था.
पत्रकारों के सामने दो ही विकल्प थे, पहला उतने ही वेतनमान में ट्रांसफर पर जायें या फिर नौकरी छोड़ दें. पत्रकारों ने प्रबंधन को पत्र लिखकर अपनी आर्थिक, सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं का जिक्र करते हुये स्थानांतरण रद्द करने की मांग भी की, लेकिन बात नहीं बनी.

दोनों ही विकल्प पर विचार करने के पश्चात पत्रकारों ने तीसरे विकल्प की तलाश की, जो उन्हें न्याय की देहरी पर अर्थात अदालत पर ले गई, जहां पत्रकारों ने न्याय की गुहार लगाई. साजिश का शिकार हुये पत्रकारों ने सिविल कोर्ट में परिवाद दायर कर स्थानांतरण रद्द करने की मांग की. उन्हें अंतरिम रूप से न्याय भी मिला. संबंधित अदालत ने मामले के निराकरण तक यथास्थिति बनाये रखने का आदेश देते हुये पत्रकारों को दैनिक भास्कर के बिलासपुर कार्यालय पर ही काम पर रखने का आदेश प्रबंधन को दिया.

इसके बाद पीडि़त पत्रकारों ने नौकरी ज्वाइन की. नौकरी ज्वाइन करने के महज कुछ ही दिनों बाद प्रबंधन ने ऊपरी अदालत से एक अंतरिम आदेश का हवाला देते हुये पत्रकारों को पुन: काम से निकाल दिया. यदि वास्तव में देखा जाये, तो यथास्थिति का तात्पर्य ऐसा नहीं था, बल्कि यथास्थिति का मतलब तो यहीं होता है कि जो पत्रकार जिस स्थिति में यहां के कार्यालय में काम कर रहे हैं, उन्हें वहां उसी स्थिति में काम करने दिया जाये. फिर निचली अदालत के जिस आदेश का परिपालन हो चुका था, उसे कैसे वापस लिया जा सकता था? बहरहाल प्रबंधन ने ऊपरी अदालत के जिस आदेश की त्रुटिपूर्ण व्याख्या करके छलपूर्वक व्यवहार करते हुये पत्रकारों को काम से निकाल दिया. इस मामले को लेकर पीडि़त पत्रकारों ने पुन: अदालत में गुहार लगाई, जिस पर सुनवाई चल रही है. मामला फिलहाल लंबित है और पीडि़त पत्रकार किसी तरह तंगहाली में गुजर-बसर कर रहे हैं.

उक्त मामले में एक बात तो स्पष्ट है कि पत्रकारों के लिये आज भी जीवन-यापन की अनिश्चितता बनी हुई है. वे लोगों के लिये आवाज उठाकर, संघर्ष करके भले ही उन्हें न्याय दिलाने में सहयोग करते हैं. यथासंभव वे इसमें सफल भी होते हैं, लेकिन वे खुद अपने लिये कुछ नहीं कर पाते. उनके मामलों में शासन के पास भी कोई निश्चित और कारगर नीति नहीं है.
दैनिक भास्कर ने उक्त पत्रकारों को प्रताडि़त करने का कोई मौका नहीं छोड़ा और उनके न्याय के लिये कोर्ट जाने को अपनी संस्था का अपमान समझा. पत्रकार अपनी लड़ाई में विजयी होंगे या नहीं, यह तो कहा नहीं जा सकता, लेकिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में दैनिक भास्कर जैसे मीडिया समूह के खिलाफ पत्रकारों द्वारा अदालत की लड़ाई लड़ने के इस पहले मामले को लेकर युवा पत्रकारों में जोश और उत्साह का जरूर संचार हुआ है.

मीडिया में रुचि रखने वाले स्थानीय लोगों में इन पत्रकारों व उनके परिजनों के प्रति सहानुभूति भी है. साथ ही इस पूरे मामले से एक बात और साफ हो गई कि पत्रकार को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ती है. उसके कंधे का इस्तेमाल भले ही कोई कर ले लेकिन जब उसे सहारे की जरूरत पड़ती है तो गैर व्यवसाय के लोगों के साथ ही पत्रकारिता के व्यवसाय से जुड़े वरिष्ठजनों का भी कंधा झुका हुआ दिखाई देता है. और आखिर में एक बात जब तक दम में दम है, ये पत्रकार लड़ते रहेंगे. चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े.

लेखक सुनील शर्मा भी भास्‍कर के खिलाफ इस संघर्ष में शामिल हैं.

‘छतिग्रस्‍त’ और जागरण, भास्‍कर व पत्रिका

देश के तीन बड़े अखबार यानी दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण एवं पत्रिका में हिंदी के जानकारों की कमी होती दिख रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इस कमी को आप उनकी वेबसाइटों में देख सकते हैं। इस पर पब्लिश होने वाली खबरों को लगता है कोई पढ़ना जरूरी नहीं समझता है। तभी तो इन लोगों को ‘छतिग्रस्त’ और ‘क्षतिग्रस्त’ के बीच में कोई अंतर नहीं लगता है।

हिन्‍दी मीडिया के महारथी होने का दावा करने वाले तीनों अखबार इस गलती को किया है। इस आप नीचे दिये खुद देख सकते हैं।

गलती1

गलती2

गलती3

एक पत्रकार की तरफ से भेजे गए पत्र पर आध‍ारित.

पत्रिका के सर्कुलेशन मैनेजर बने लोकेन्‍द्र

: ब्रजेश ने अमर उजाला छोड़ा, मनीष व आलोक की नई पारी : लोकेन्‍द्र जैन ने दैनिक भास्‍कर, इंदौर से इस्‍तीफा दे दिया है. लोकेन्‍द्र का स्‍थानांतरण रायपुर के लिए कर दिया गया था. जिसके चलते उन्‍होंने भास्‍कर को अलविदा कह दिया. लोकेन्‍द्र ने अपने नई पारी की शुरुआत पत्रिका, इंदौर के साथ शुरू की है. वे पत्रिका से सर्कुलेशन मैनेजर बनाए गये हैं.

लोकेन्‍द्र ने बताया कि व्‍यक्तिगत कारणों से वे रायपुर जा पाने में असमर्थ थे. इसके चलते उन्‍हें भास्‍कर को छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा. उन्‍होंने भास्‍कर के अपने कार्यकाल और अनुभव को बढि़या बताया.

अमर उजाला, हरदोई के ब्‍यूरो चीफ ब्रजेश मित्र ने इस्‍तीफा दे दिया है. व्‍यक्तिगत कारण बताते हुए उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा प्रबंधन को सौंप दिया. वे अभी कहां ज्‍वाइन करने वाले हैं इसका पता नहीं चल पाया है. ब्रजेश ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के साथ ही की थी. वे पिछले आठ सालों में अमर उजाला में विभिन्‍न पदों पर रहे.

हमार टीवी के वीडियो एडिटर मनीष सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी की शुरुआत देश लाइव चैनल, रांची के साथ कर रहे हैं. मनीष ने देश लाइव में बतौर सीनियर वीडियो एडिटर ज्‍वाइन किया है.

आलोक रंजन ने एमएच1 म्‍यूजिक से इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने अपनी नई पारी की शुरुआत देश लाइव के साथ की है. वहां वे सीनियर वीडियो एडिटर बनाये गए हैं. आलोक इसके पूर्व हमार टीवी, शक्ति टीवी के साथ भी काम कर चुके हैं. आलोक ने अपने करियर की शुरुआत 2003 में पटना के एक क्षेत्रीय चैनल से की थी.

पत्रकार को फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी रात

: अमन को चुकानी पड़ी संस्‍थान बदलने की कीमत : मीडिया जगत में ऐसा अक्सर होता रहता है कि एक पत्रकार या डेस्क कर्मी यहां तक कि संपादक तक बढिय़ा मौके व वेतन की तलाश में एक संस्थान से दूसरे संस्थान में चले जाते हैं। लेकिन ऐसा होने के बावजूद भी मीडियाकर्मियों के मन में कोई बदलाव नहीं होता और न ही कोई मनमुटाव। सभी को पता रहता है कि हो सकता है कि आने वाले समय में वह फिर से एक दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हों, लेकिन बठिंडा में जो हुआ, वह पत्रकार जगत में चलती इस भाईचारे वाली परंपरा के उलट हुआ।

सभी को पता है कि कुछ ही दिनों पहले दैनिक भास्कर द्वारा बठिंडा में अपना नया संस्करण लांच किया गया है और अन्य कई सेंटरों से स्टाफ को यहां ट्रांसफर करके भेजा गया है। कुछेक साथी अपने शहरों से बठिंडा में काम करने से खुश नहीं थे। यही वजह थी कि उन्होंने दूसरे मीडिया हाउसों में अपने शहर की नौकरी तलाशनी शुरू कर दी। इनमें से ही एक हैं अमन चौहान। दैनिक भास्कर जालंधर से कैरियर शुरू करने वाले अमन चौहान को डेस्क कार्य का अच्छा-खासा अनुभव है और इस अंतरमुखी व्यक्तित्तव को बठिंडा शहर पसंद नहीं आया था।

किसी खास मित्र के जरिए दैनिक जागरण लुधियाना में नौकरी की सूचना मिली और अपने संपर्क के जरिए इसने भी अप्रोच किया। किस्मत अच्छी थी कि उसे बढ़े हुए वेतन पर जाने का मौका मिल गया। साफ दिल के मालिक अमन चौहान ने इस बारे में दैनिक भास्कर के बठिंडा एडिशन के एडिटर चेतन शारदा को बता दिया। नौकरी से औपचारिक त्याग पत्र भी दे दिया, जिसके बाद वह उस दिन की अपनी ड्यूटी को पूरा करने में जुट गया।

अपना काम निकलवाने के लिए प्यार व पुचकार करने तथा काम निकल जाने पर पहचानने से भी इनकार करने वाली पंजाब केसरी की मानसिकता वाले चेतन शारदा को शायद अमन चौहान की साफगोई बर्दाश्त नहीं हुई, जिस कारण डेस्क का काम खत्म होने तक चेतन शारदा ने अपनी कुंठित मानसिकता को छुपाए रखा और अमन से काम करवाते रहे। लेकिन रात के दो बजते ही चेतन शारदा का क्रूर चेहरा सामने आ गया। काम खत्म होने के कगार पर था और चेतन ने इंसानियत व भाईचारे की भावनाओं को तार-तार करते हुए अमन चौहान को तत्काल अपना बोरिया-बिस्तर उठाने और आफिस से बाहर चले जाने को कह दिया।

आफिस द्वारा उपलब्ध करवाए गए होटल रूम से पहले ही अमन का चेकआउट करवाया जा चुका था। आफिस के बाहर तैनात सिक्योरिटी गार्ड को भी अमन चौहान को अंदर न घुसने देने की ताकीद करके चेतन शारदा द्वारा इस भले मानुष को फुटपाथ पर रात गुजारने के लिए मजबूर करने का इंतजाम किया जा चुका था।न्यूज एडिटर का यह रुख देखकर किसी भी साथी कर्मचारी की हिम्मत नहीं हुई कि वह अपना बैग लेकर फुटपाथ पर बैठे अमन चौहान को भीतर बैठने या अपने साथ कमरे पर चलने को कह सके। अपना काम खत्म कर, एक-एक करके सभी चले गए। चेतन शारदा भी, लेकिन आफिस के बगल में ही फुटपाथ पर बैठे रहे अमन चौहान की हालत पर किसी ने भी तरस नहीं खाया।

बठिंडा से बस सर्विस सुबह साढ़े चार बजे के बाद ही शुरू होती है, इसलिए अमन ने तिरस्कार से भरे तकरीबन ढाई घंटे फुटपाथ पर बैठे-बैठे ही बिताए। ऐसी हरकत एडिटर लेवल के व्यक्ति को तो क्या किसी को भी शोभा नहीं देती। यदि एक व्यक्ति आपके साथ संस्थान में काम कर रहा था और दूसरी जगह जा रहा है तो भी उसका जुड़ाव तो मीडिया से ही रहेगा। चेतन शारदा की इस हरकत से तो ऐसा महसूस होता है कि शायद उन्हें उसी ईष्‍या या दुर्भावना का आभास हुआ होगा, जो एक शोरूम में दो हजार रुपये प्रतिमाह लेकर साफ-सफाई करने वाले को म्यूनिसिपैलिटी में 15 हजार रुपये लेकर सफाई करने वाले से हो सकता है।

इन अखबारों पर थूकें ना तो क्या करें!

दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे मीडिया हाउसों ने इमान-धर्म बेचा : देवत्व छोड़ दैत्याकार बने : पैसे के लिए बिक गए और बेच डाला : पैसे के लिए पत्रकारीय परंपराओं की हत्या कर दी : हरियाणा विधानसभा चुनाव में दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे बड़े अखबारों ने फिर अपने सारे कपड़े उतार दिए हैं। जी हां, बिलकुल नंगे हो गए हैं। पत्रकारिता की आत्मा मरती हो, मरती रहे। खबरें बिकती हों, बिकती रहे। मीडिया की मैया वेश्या बन रही हो, बनती रहे। पर इन दोनों अखबारों के लालाओं उर्फ बनियों उर्फ धंधेबाजों की तिजोरी में भरपूर धन पहुंचना चाहिए। वो पहुंच रहा है। इसलिए जो कुछ हो रहा है, इनकी नजर में सब सही हो रहा है। और इस काम में तन-मन से जुटे हुए हैं पगार के लालच में पत्रकारिता कर रहे ढेर सारे बकचोदी करने वाले पुरोधा, ढेर सारे कलम के ढेर हो चुके सिपाही, संपादकीय विभाग के सैकड़ों कनिष्ठ-वरिष्ठ-गरिष्ठ संपादक।

इनके गले से विरोध की कोई बोली नहीं निकल रही है। कोई उफ तक नहीं कर रहा है। इन्हें कोई अव्यवस्था नहीं दिख रही है। पापी पेट के नाम पर ये ढेर सारे पापों के भागीदार बने हुए हैं। वैसे, बाकी दिनों में ये ही लोग पत्रकारिता पर ढेर सारा भाषण पिलाते नजर आ जाएंगे। कंधे उचकाते और खुद को देश-समाज का प्रहरी दिखाते दिख जाएंगे। व्यवस्था, नैतिकता और नियम-कानून की दुहाई देते हुए सैकड़ों उदाहरण और तर्क-कुतर्क पेश करने में क्षण भर नहीं लगाएंगे। फिलहाल ये चुप हैं, आंखें मूंदे हैं, क्योंकि इनके मालिक का सीजन है, सो इनका भी थोड़ा-बहुत सीजन है ही। शायद, कुत्ते और कुकुरमुत्ते कुछ इसी तरह के होते हैं।

दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर। इन दोनों बड़े अखबारों के हरियाणा संस्करणों पर नजर डालिए।  इनका पैसे लेकर खबरें छापने का खुला खेल दिखने लगा है। दैनिक भास्कर ने एक फर्जी सर्वे के जरिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जय-जयकार की है। पूरी खबर हमने नीचे दे दी है। इस खबर को पढ़ लीजिए। आपको उल्टी हो जाएगी। करोड़ों रुपये लेने के बाद फर्जी, प