मीडिया में लिंग संवेदनशीलता (जेन्डर सेंसिटिविटी) के प्रति अपने योगदान के लिए दैनिक भास्कर इंदौर के रफी मोहम्मद शेख को यूनाइटेड नेशन्स पापुलेशन फंड ‘लाडली मीडिया अवार्ड’ 2010-11 प्रदान किया गया है। शेख को बेस्ट ह्यूमन इंट्रेस्ट स्टोरी कैटेगरी में नार्दन रीजन के 10 प्रदेशों के विभिन्न प्रविष्ठियों में सर्वश्रेष्ठ रहने पर यह अवार्ड दिया गया है।
नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में मैग्सेसे पुरस्कार विजेता पूर्व आईपीएस किरण बेदी, यूएनएफपीए (एशिया पैसेफिक) की डायरेक्टर नोबुको होरीबे और सेंटर फॉर रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर डॉ. रंजना कुमारी ने यह पुरस्कार प्रदान किए। प्रिंट कैटेगरी में हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी व उर्दू व अंग्रेजी भाषा, टीवी व वेब कैटेगरी में हिन्दी-अंग्रेजी, रेडियो कैटेगरी हिन्दी-उर्दू श्रेणियों में विभिन्न पुरस्कार दिए गए।

लाड़ली मीडिया अवार्ड समिति द्वारा गत वर्ष प्रकाशित समाचार, फीचर, ब्लॉग के आधार पर इन पुरस्कारों के लिए नार्दन रीजन से चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व काश्मीर, मध्यप्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से प्रविष्ठियां आमंत्रित की गई। इन प्रविष्ठियों में से अवार्ड जूरी ने इन पुरस्कारों की घोषणा की।
जूरी में फरहत अहसास, ईरा झा, राजी पी. श्रीवास्तव, देवेन्द्र चिंतन, शमीम अख्तर, गोविन्द सिंह, उषा राय, ओआर नियाजी, सलमा सुल्तान, पामेला भगत, अरूण चड्ढा, शोभा सोमन, अन्नु आनंद शामिल थे।
रफी मोहम्मद शेख की स्टोरी ‘सब पत्थरदिल’ को प्रिंट हिन्दी में सर्वश्रेष्ठ ह्यूमन इंट्रेस्ट स्टोरी माना गया। अब रफी नेशनल अवार्ड के लिए नामांकित किए हैं। रफी मोहम्मद शेख को पूर्व में चार बार गोपीकृष्ण गुप्ता श्रेष्ठ रिपोर्टिंग अवार्ड सहित राजेन्द्र माथुर रिपोर्टिंग व संपादन अवार्ड मिल चुका है। उन्हें विकास संवाद द्वारा प्रदेशस्तरीय फेलोशिप भी मिल चुका है।












Mahesh Sharma
March 16, 2011 at 9:12 am
Shabash,
Rafi Tumne hamara bhi sina choda kar diya . mehnat ek din rang lati hai.jana tumko use manzil tak jiske aage rah nahi.
aneko ashish
Sushma
March 17, 2011 at 1:38 am
बहुत बढ़िया रफ़ी… बधाई
sadaab hameed
March 19, 2011 at 2:29 pm
khuda aapko is kadar ataa kare shohrat ki
aapke naam ke aage kisi ka naam n ho