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भोजपुरी की उपेक्षा पर दिग्‍गजों ने जताई चिंता

हमारपुरबिया चैनल हमार टीवी पर भोजपुरी भाषा को बढ़ावा देने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. इसी कड़ी में चैनल ने अभी चैनल ने ‘भोजपुरिया समाज के जुटान’ नामक एक कार्यक्रम प्रसारित किया. इस शो में मारीशस और हिंदुस्तान के कोन-कोने से आये भोजपुरी दिग्गज डॉ. सरिता बुद्दू, मा‍रीशस के पूर्व मंत्री जगदीश गोवर्धन, डॉ. अरूणेश नीरन, डॉ. बीएन तिवारी और मनोज श्रीवास्तव ने भाग लिया. मनोज भावुक इस शो को होस्ट कर रहे थे.

हमारपुरबिया चैनल हमार टीवी पर भोजपुरी भाषा को बढ़ावा देने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. इसी कड़ी में चैनल ने अभी चैनल ने ‘भोजपुरिया समाज के जुटान’ नामक एक कार्यक्रम प्रसारित किया. इस शो में मारीशस और हिंदुस्तान के कोन-कोने से आये भोजपुरी दिग्गज डॉ. सरिता बुद्दू, मा‍रीशस के पूर्व मंत्री जगदीश गोवर्धन, डॉ. अरूणेश नीरन, डॉ. बीएन तिवारी और मनोज श्रीवास्तव ने भाग लिया. मनोज भावुक इस शो को होस्ट कर रहे थे.

इस कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा के इतिहास, क्रमबद्ध विकास-यात्रा, विश्व भर में फैले तमाम भोजपुरी भाषी देशों में भोजपुरी की वर्तमान स्थिति का तुलनात्मक विवेचन, लोक गीत, लोक रंग, लोक कथा, संस्कार गीत, तीज-त्यौहार, भोजपुरी भाषा के बदलते स्वरुप, चुनौती, संभावना और भविष्‍य के बारे में चर्चा की गई.

कार्यक्रम में सवाल उठाया गया कि भोजपुरी समाज ने देश को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्‍द्रीय मंत्री, स्पीकर, मुख्‍यमंत्री एवं दिग्गज सांसद दिए लेकिन भोजपुरी को इन नेताओं ने क्‍या दिया? भोजपुरी आज भी अपने अस्तित्व के लिए दर-ब-दर की ठोकरे खा रही है. कार्यक्रम में बताया गया कि भोजपुरी भाषा हिंदुस्तान की सरकारी भाषा नहीं है. इसे अब तक आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है. पर सत्य तो यह है कि भोजपुरी भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा बन गई है.

इस भाषा को बोलने वालों की संख्या भारत में करीब 15 करोड़ है तो वहीं भारत के बाहर करीब 5 करोड़ लोग इस भाषा में संवाद करते हैं. इन देशों में मारीशस, फिजी, गुयाना, त्रिनीदाद, सूरीनाम, हॉलैंड, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, नेपाल और अफ्रीका के कई देश शामिल हैं. भोजपुरी भाषा का इतिहास एक हजार साल पुराना है और इस भाषा में करीब पांच हजार पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं. अपने देश में बोली जाने वाली मातृभाषाओं मे यह भाषा सबसे ज्यादा बोली जाती है.

कार्यक्रम को प्रस्तुत कर रहे मनोज भावुक ने कई बार इस सवाल को उठाया कि एक हजार साल पुराने इतिहास वाली भाषा, देश में हिन्दी के बाद सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी को अपने ही देश भारत में वह सम्मान व सरकारी मान्यता नहीं प्राप्त है, जो इसे मारीशस में प्राप्त है, जबकि भारत इस भाषा का संस्थापक है.

मारीशस के आये भोजपुरी के विद्वानों का कहना था कि मारीशस में प्राईमरी लेबल पर भोजपुरी भाषा की पढ़ाई करवाई जाती है, लेकिन हिंदुस्तान में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है. यहां केवल ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर ही यह पढ़ाई करवाई जाती है. इसी वजह से भारत में भोजपुरी भाषा को इतना नहीं जाना जाता. यहां पर भी प्राईमरी लेबल पर भोजपुरी भाषा की पढ़ाई कराई जानी चाहिए. प्रेस विज्ञप्ति

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0 Comments

  1. umesh shukla

    January 17, 2011 at 11:40 am

    Antarrashtriya bhasha ke roop me aham mukam bana chuki Bhojpuri Bhasha ko aathavin anushuchi me shamil kiya jana chahiye. iske liye Bhojpuri Belt ke janpratinidhiyon ko mukhar dhang se awaaj uthain chahiye.

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