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मजदूरों पर मिल मालिकों के कातिलाना हमले की कड़ी निन्दा

नई दिल्ली, 3 मई : ‘मजदूर मांगपत्रक आन्दोलन’ के तहत मई दिवस पर दिल्ली में रैली करके सरकार को मांगपत्रक सौंपने आए गोरखपुर के मजदूरों के वापस लौटने पर मिल मालिकों द्वारा किए गए कातिलाना हमले की हम कठोरतम शब्दों में भर्त्सना करते हैं और उत्तर प्रदेश तथा केन्द्र सरकार से अविलम्ब हस्तक्षेप करके दोषियों को सजा दिलाने की माँग करते हैं। मालूम हो कि 1 मई को रैली में गोरखपुर से लगभग 2000 मजदूरों ने भाग लिया था।

नई दिल्ली, 3 मई : ‘मजदूर मांगपत्रक आन्दोलन’ के तहत मई दिवस पर दिल्ली में रैली करके सरकार को मांगपत्रक सौंपने आए गोरखपुर के मजदूरों के वापस लौटने पर मिल मालिकों द्वारा किए गए कातिलाना हमले की हम कठोरतम शब्दों में भर्त्सना करते हैं और उत्तर प्रदेश तथा केन्द्र सरकार से अविलम्ब हस्तक्षेप करके दोषियों को सजा दिलाने की माँग करते हैं। मालूम हो कि 1 मई को रैली में गोरखपुर से लगभग 2000 मजदूरों ने भाग लिया था।

इनमें से अंकुर उद्योग लिमिटेड कारखाने में काम करने वाले सैकड़ों मजदूर जब आज सुबह काम पर लौटे तो मालिक द्वारा भाड़े पर बुलाए गए कुख्यात अपराधी प्रदीप सिंह और उसके गुण्डों ने मजदूरों से मारपीट शुरू कर दी और फिर उन पर अन्धाधुन्ध गोलियां चलाईं जिससे करीब 20 मजदूर घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल 18 मजदूरों को जिला अस्पताल में भरती कराया गया है।

सुनियोजित ढंग से किए गए इस हमले में जिला तथा पुलिस प्रशासन की पूरी मिलीभगत है जो बेशर्मी के साथ स्थानीय भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के इशारे पर काम कर रहे हैं। पुलिस अपने संरक्षण में हमलावरों को फैक्ट्री से बाहर लेकर गयी और कुछ दूर ले जाकर उन्हें छोड़ दिया।

यह घटना उत्तर प्रदेश सरकार के घोर निरंकुश और मजदूर विरोधी रवैये की एक और बानगी है। मजदूर माँगपत्रक आन्दोलन की संयोजन समिति चेतावनी देती है कि अगर मजदूरों का खून बहाने वाले मिलमालिकों, अपराधियों और उनके संरक्षक अफसरों पर कार्रवाई नहीं की गयी तो इस मुद्दे को पूरे देश में जनता के बीच ले जाया जाएगा और देश भर से मजदूरों के जत्थे गोरखपुर पहुंचकर विरोध दर्ज कराएंगे।

कृते, संयोजन समिति,
मज़दूर माँगपत्रक आन्दोलन 2011

प्रेस विज्ञप्ति

गोरखपुर में मजदूरों पर हुई फायरिंग की उच्चस्तरीय जांच हो- PUCL

लखनऊ 3 मई 2011/ मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) ने गोरखपुर के औद्योगिक क्षेत्र बरगदवां में अंकुर उद्योग पर आज मजदूरों पर कम्पनी के गुंडों द्वारा की गई गोलबारी की कड़ी निंदा करते हुए कम्पनी के मालिक अशोक जालान समेत उसके गुंडों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। पीयूसीएल का कहना है कि गोरखपुर प्रशासन और स्थानीय सांसद योगी आदित्यनाथ मजदूर आंदोलन को बाहरी लोगों द्वारा भड़काने का आरोप लगातार लगाते हुए मजदूर आंदोलन को तोडंने की हर संभव कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में इस पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाय।

PUCL के प्रदेश संगठन सचिव राजीव यादव और शाहनवाज आलम ने कहा कि आज जिस तरह घटना के बाद मजदूर संगठन गोरखपुर के कमिश्नर के रवींद्र नायक से मिलने गए तो मजदूरों के नेता प्रशांत और तपिश से कमिश्नर ने उन पर बाहरी और मजदूरों को भडकाने का आरोप लगाया तो ऐसे में मजदूरों पर हुई इस गोलीबारी में प्रशासन की संलिप्तता उजागर होती है कि उसे गोलीबारी में घायल हुए मजदूरों से ज्यादा कम्पनी के खिलाफ चल रहे आंदोलन की चिंता है। पिछली एक मई को भी अखबारों में आए बयानों में कमिश्नर के रवीन्द्र नायक ने मजदूर नेता प्रशांत, प्रमोद और तपिश पर कड़ी कार्यवाई करने जैसे बयान दिए थे।

PUCL नेता राजीव यादव और शाहनवाज आलम ने कहा कि बाहरी और माओवाद का ठप्पा लगाकर स्थानीय सांसद और प्रशासन की मिलीभगत से मजदूर आंदोलनों को गोरखपुर में लगातार दबाया जा रहा है। अभी पिछले 10 अपै्रल को भी इसी तरह पुलिस ने बिगुल मजदूर दस्ता और टेक्सटाइल वर्कर्स यूनियन से जुडे़ दो मजदूर नेताओं तपीश मैन्दोला और प्रमोद कुमार को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। इसके विरोध में थाने पर गए मजदूरों पर बुरी तरह लाठीचार्ज किया गया और थानाध्यक्ष से बात करने गए दो अन्य मजदूर नेताओं प्रशांत तथा राजू को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

दरअसल, पिछले कुछ समय से मजदूर ‘मांगपत्रक आन्दोलन-2011′ की तैयारी में गोरखपुर के मजदूरों की भागीदारी और उत्साह देखकर गोरखपुर के उद्योगपति बौखलाए हुए हैं। उद्योगपतियों और स्थानीय सांसद की शह पर लगातार मजदूरों के इस आन्दोलन के खिलाफ भड़काने की कोशिश की जा रही है और फर्जी नामों से बांटे जा रहे पर्चों-पोस्टरों के जरिए और जबानी तौर पर मजदूरों और आम जनता के बीच यह झूठा प्रचार किया जा रहा है कि यह आन्दोलन माओवादियों द्वारा चलाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पहले जब गोरखपुर के मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ने की शुरुआत की थी तभी से उद्योगपति-प्रशासन-स्थानीय सांसद का गठजोड़ उसे बदनाम करने के लिए इसी प्रकार का कुत्सा-प्रचार करता रहा है।

PUCL मांग करता हैं कि मजदूरों द्वारा आज की गोलीबारी के लिए जिम्मेदार जिन चार लोगों अशोक जालान, अंकुर जालान, प्रदीप सिंह और विश्राम यादव के खिलाफ एफआईआर किया गया है उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाय और प्रदेश सरकार इस गोलीबारी की घटना पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। क्योंकि मजदूर नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने इन चारों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया
है।

द्वारा जारी-
राजीव यादव, शाहनवाज आलम
प्रदेश संगठन सचिव PUCL

प्रेस विज्ञप्ति

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0 Comments

  1. धीरेन्द्र

    May 3, 2011 at 4:50 pm

    अंकुर उद्योग के मालिकों के बारे में तो माना जा सकता है, लेकिन योगी आदित्यनाथ का नाम? कुछ लोगों को जबरदस्ती विवाद पैदा करने की आदत होती है इसलिये योगी के नाम को उछालने से अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता.;.

  2. सत्य

    May 3, 2011 at 8:08 pm

    मजदूरों का हर समर्थक माओवादी होता है! चाहे वो गोरखपुर हो, गोविन्दगढ़ हो, उड़ीसा हो या छत्तीसगढ़.

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