Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

मालिकों को मुश्किल में डालते हैं विनोद मेहता!

विनोद मेहता ने अपने तेवर के कारण कई बार अपने मालिकों को मुश्किल में डाला. ऐसा हम नहीं, खुद विनोद मेहता बता रहे हैं. कैसे विनोद मेहता कभी नौकरी छोड़ते रहने वाले एडिटर कहे जाते थे और अब लोग उनसे पूछते हैं कि आउटलुक से रिटायर कब होंगे. मीडिया पर जो वैश्विक संकट है, स्थानीय संकट है, उसे वैश्विक और स्थानीय चिंतक किस नजरिए से देखते हैं. इसको लेकर आउटलुक अंग्रेजी ने एक विशेषांक निकाला है.

विनोद मेहता ने अपने तेवर के कारण कई बार अपने मालिकों को मुश्किल में डाला. ऐसा हम नहीं, खुद विनोद मेहता बता रहे हैं. कैसे विनोद मेहता कभी नौकरी छोड़ते रहने वाले एडिटर कहे जाते थे और अब लोग उनसे पूछते हैं कि आउटलुक से रिटायर कब होंगे. मीडिया पर जो वैश्विक संकट है, स्थानीय संकट है, उसे वैश्विक और स्थानीय चिंतक किस नजरिए से देखते हैं. इसको लेकर आउटलुक अंग्रेजी ने एक विशेषांक निकाला है.

यह मीडिया विशेषांक आउटलुक के 15 साल पूरे होने के मौके पर निकाला गया है. 316 पन्नों  के इस मीडिया विशेषांक को हर मीडियाकर्मी को पढ़ना चाहिए. ‘द ग्रेट इंडियन मीडिया क्राइसिस’ शीर्षक से कवर स्टोरी है. इसमें मीडिया संकट की विस्तार से कई और दृष्टिकोण से चर्चा की गई है.  यह विशेषांक आउटलुक (अंग्रेजी) का नवम्बर प्रथम अंक न सिर्फ पठनीय है बल्कि सहेज कर रखने लायक भी है. प्रधान संपादक विनोद मेहता ने अपने दो पेज के संपादकीय निबंध में अपना दिल उड़ेल कर रख दिया है और चार शानदार सवालों के बेहतर जवाब दिए हैं. जैसे वे अपने कुत्ते को संपादक क्यों कहते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया के समीर जैन पर सुमीर लाल ने ऐसा लिखा है जो किसी को भी जरूर सोचने पर मजबूर कर देगा तो बेनट कोलेमन ग्रुप के सी.ई.ओ. रवि धारीवाल का इंटरव्यू साफ कहता है कि हमारा पेपर संपादकों के लिए नहीं, लोगों के लिए है.

बीबीसी से जुड़े रहे मार्क टुली ने वर्तमान समाचार चैनलों के परिदृश्य के लिए पत्रकारों की बजाए संपादकों को जिम्मेदार ठहराया है क्योंकि अपने संस्थान में सिखाने, समझाने की जिम्मेदारी संपादकों की होती है. नोम चोमस्की का साक्षात्कार कई सवालों को उठाने के साथ-साथ पाकिस्तानी मीडिया को भारतीय मीडिया से ज्यादा स्वतंत्र बताता है. इसी तरह प्रंजाय गुहा ठाकुर, पेटरिक फ्रेंच जैसे कई बुद्धिजीवियों के लेख विचारोतेजक हैं. खुशवंत सिंह ने आउटलुक और इंडिया टुडे की पुस्तक समीक्षा में तुलना में आउटलुक को बेहतर करार दिया है. विनोद मेहता की कोर टीम ने अपने अनुभव साझे किए है जो काफी रोचक हैं जैसे दाउद इब्राहिम, छोटा शकील का फोन आना. डेढ दशक का सफर तस्वीरों, घटनाओं के माध्यम से दर्शाया गया है तो पुराने पाठकों की आकर्षक प्रतिक्रियाएं भी हैं. कुल मिलाकर मीडिया से जुड़े हर आदमी के लिए यह अंक पठनीय और आपस में चर्चा के लिए बेहतर विषय सामग्री है.

रिपोर्ट धीरज तागरा (सहायक संपादक, अपैरल ऑनलाइन हिन्दी, दिल्ली)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. Vinita Pandey

    November 2, 2010 at 8:22 pm

    Good one!

  2. Vinita Pandey

    November 2, 2010 at 8:24 pm

    Good one. Keep it up. But what is Bhadaas4media?

  3. dr ms parihar

    November 3, 2010 at 12:11 am

    यशवंत जी, आउटलुक के इस विशेषांक को जरूर पढेंगे

  4. Rupesh

    November 3, 2010 at 12:25 am

    Vinod Mehta kahne ko armchair Marxist hain lekin Gandhi family ke wafaadaar bhi rahe hain. Isse zyada kuch nahin kahna chahoonga. Sawaal yeh hai ki aajkal Hindi me aisi patrikayen kyon nahin hain. ek zamaana tha jab Dharamvir Bharati jaise diggaj Dharmayug nikalte the, Manohar Shyam Joshi jaise diggaj Saptahik Hindustan (dharmayug se kamtar) nikalte the. Aaj kyon nahin nikalti. Hindi patrikaon ka sanhaar karne me Sameer Jain Lala ka bada yogdaan raha hai. Dharmayug, Sarika, Dinmaan, sabhi ko ek ek kar band kar diya. Apne ko hi-fi media group kahne wale Bhaskar, Jagran, Amar Ujala aisi ek bhi patrika nikaal kar dikha den. Hindi me Angrezi se kamtar lekhak aur vishleshak nahin hain. Raghuvir Sahay jaison ke saamne Angrezi ke (Indian) lekhak paani bharte nazar aayenge.

  5. sharad

    November 3, 2010 at 7:07 pm

    Dheeraj ji ke visleshan ne mujhe outlook padne par majbbor kar diya…shukriya is samiksha k liye.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...