मिस्र में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच राजधानी के दो परिवार जान बचाकर शुक्रवार की शाम रायपुर लौट आए। प्रदर्शनों के बीच जान जाने के डर में उन्होंने वहीं पर अपनी वसीयत भी लिख दी। दोनों परिवार 26 जनवरी को हफ्ते भर के लिए टूर पर मिस्र गए थे। रायपुर निवासी प्रेमचंद अग्रवाल व उनकी पत्नी सावित्री बगड़िया और ट्रांसपोर्टर गुरजीत सिंह गरचा व उनकी पत्नी जतिंदर कौर के अलावा पटियाला से आये गुरजीत सिंह गरचा के साढू शुक्रवार को रायपुर पहुंचे।
मिस्र में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सहयोग करने के बजाए टिकट के नाम पर पांच गुना अधिक राशि वसूल ली। पहले तो उन्हें अपने रिस्क पर लक्सोर से काहिरा तक बुलाया गया, उसके बाद भारत आने के लिए कोई इंतजाम नहीं था। काहिरा से भारत के लिए केंद्र सरकार ने विशेष विमान भेजे थे, उसके टिकट के लिए 55 हजार रुपए मांगे गए। जब कहा गया कि इतने पैसे नहीं हैं तो दूतावास के अफसरों ने कहा कि पैसे का इंतजाम हो जाएगा, लेकिन शर्त यह है कि आपको पासपोर्ट भारत में हमारे दफ्तर में जमा करने पड़ेंगे। 55 हजार रुपए लौटाने पर पासपोर्ट मिलेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो नेट पर आप लोगों के नाम डाल दिए जाएंगे और आप लोग फिर किसी देश की यात्रा नहीं कर सकेंगे।
मिस्र से लौटे भारतीय पर्यटक दल के सदस्य गुरजीत सिंह गरचा ने व्यथा व्यक्त करते हुए बताया हम लोग तीन परिवार मिस्र गए थे। प्रेम अग्रवाल और मेरे साढू करमजीत सिंह और मैं अपनी पत्नी के साथ गए थे। घूमने के हिसाब से गए थे लेकिन वहां जाकर हमें एक नया अनुभव मिला, तक़रीबन जान पर बन आयी थी, लगा कि पता नहीं जिन्दा जा पाएंगे या नहीं किसी तरीके से बस निकल के आये हैं। भारतीय दूतावास के व्यवहार से खिन्न गुरजीत सिंह गरचा ने बताया दूतावास मिस्र में रह रहे लोगों और पर्यटकों के साथ जिस तरह व्यवहार कर रहे हैं उनकी जितनी भी भर्त्सना की जाये कम है।
सिर्फ वो यहाँ पर टीवी पर न्यूज़ दे रहे हैं कि हम लोग इंडियन को वापस लेकर आ रहे हैं, हमारे साथ बहुत बुरा व्यवहार हुआ, हम लोगों ने उनसे दो तीन बार संपर्क किया और हमसे फोन पर यही कहा उन लोगों ने कि आप लक्सोर से किसी भी तरीके से कैरो पहुंचें। हमने कहा- हमें घर पहुँचने का रास्ता नज़र नहीं आ रहा है हम कैरो कैसे पहुंचे? उन्होंने कहा वो हमारी जवाबदारी नहीं है, आप कैरो आइये फिर हम कोई मदद कर सकते हैं। हम किसी भी तरीके से फ्लाइट लेकर कैरो पहुंचे, लक्सोर से लोकल आदमी की मदद लेकर के एक्स्ट्रा फेयर देकर, क्योंकि हमारी ट्रेन वैगरह सब कैंसल हो गयी थी।
कैरो पहुँचने के बाद वहाँ संपर्क किया तो कहने लगे पचपन हजार लेकर आइये तब आपको इंडिया लेकर जायेंगे। मैंने कहा पचपन हजार किस बात के, तो उन्होंने कहा इंडियन गवर्मेंट ने रेट फिक्स्ड किया है कि जिनको भी मिस्र से भारत ले जाना है पचपन हजार ले रहे हैं। हमने उनसे कहा- हम तो उतने ही खर्चा लेकर आये थे जितना हमको खाना-पीना है या थोडा सा कुछ खरीदी करनी है, क्योंकि हमारा रहने का, खाने का सारा बुकिंग हम रायपुर से कर चुके थे। तब दूतावास के अधिकारियों का कहना था कि ठीक है यदि आपके पास पैसा नहीं है तो हम आपको ले जाते हैं, भारत ले जाकर आपका पासपोर्ट जमा कर लिया जाएगा। पासपोर्ट आपको तब दिया जायेगा जब आप पचपन हजार रूपये जमा करियेगा। रकम जमा न करने पर आपकी एक्सटर्नल अफेयर मिनिस्ट्री नेट से आपके पासपोर्ट वैगरह की सारी जानकारी नेट में डाल देंगे, उसके बाद भविष्य में किसी भी देश में जाना चाहेंगे, दौरा करने जायेंगे तो इस पासपोर्ट से आपकी सारी सुविधाएँ समाप्त कर दी जाएँगी।
एक तरफ इंडियन एयरलाइंस यह दावा करने से नहीं चूक रही है कि वो मिस्र में फंसे भारतियों की हर संभव मदद कर रही है, क्या यही मदद है मज़बूरी का फायदा उठाकर मौत के मुंह में फंसे मजबूर लोगों से पांच गुनी रकम की वसूली की जाये। रायपुर से जो दल पर्यटन के हिसाब से पैकेज टूर में भी गए थे तो उनको पचास प्रतिशत उससे तो ज्यादा नहीं मिला होगा। इस घटना के बाद इंडियन एयरलाइंस और मिस्र में स्थित भारतीय दूतावास ने सिद्ध कर दिया कि भारत में भ्रष्टाचार पचास प्रतिशत नहीं वरन 99 प्रतिशत है।











