हरिभूमि, कुरुक्षेत्र के ब्यूरो चीफ डा. सुशील तायल के बारे में सूचना है कि उन्होंने पत्रकारिता को अलविदा कह दिया है. वे अब शिक्षक के रूप में नई पारी शुरू कर चुके हैं. उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीबीएसई स्कूल में ज्वाइन किया है. सुशील तायल हिंदी में पीएचडी हैं. दस साल से हरिभूमि में काम कर रहे थे पर उन्हें वो पद व सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे. मीडिया में तरक्की, सम्मान व शांति के रास्ते बंद देखकर उन्होंने शिक्षण के क्षेत्र में पदार्पण कर दिया है.












som
November 7, 2010 at 12:07 pm
acha kiya jo samay se nikal gaye
vikram
November 7, 2010 at 12:22 pm
समाचार तीन माह पुराना है लकिन अब पर्काशित हुआ तो सरकार सबसे पहले नाम सशोधित करे डा. सुशील तायल नहीं डा. सुशील टाया दुसरी बात महज कागजी डिग्री लेने से कोई डा.नहीं बन जाता तीसरी और सबसे बड़ी बात जो लोग पत्रकारिता की आड़ में नोकरी की तलाश में रहते हैं उनसे बड़ा पेशे का दुश्मन कोई नहीं टाया साहिब का यदि बस चलता तो इनेलो के राज में पुलिस कन्सटेबल लग गए होते और कलम की जगह पुश्तैने पिता का लठ चला रहे होते ( डा. सुशील टाया के पिता पुलिस में थे ) लकिन तब दाल नहीं गली तो अब डाक्टर राम परकाश ने मेहरबानी कर टाया साहिब को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीबीएसई स्कूल में फिट करवा दिया वैसे टाया साहिब कुरुक्षेत्र जिले में पत्रकारिता की आड़ राजनेताओ से संबंधो का दोहन करने वाले पहले पत्रकार नहीं हैं इससे पहले अतुल यादव , राममेहर अत्री , परवीन कुमार अशोक शर्मा ,आबिद अली ………की लम्बी लिस्ट है जिन्हों ने पत्रकारिता की आड़ राजनेताओ से संबंधो का दोहनकिया और सरकारी नोकरी प्राप्त की अलबत्ता ये बात दीगर है की आज भी उनका दिल सरकारी नोकरी के बावजूद अख़बार के किसी भी कोने छपने के लिए म्याऊं म्याऊं करता रहता है
rakesh choudhary
November 7, 2010 at 3:29 pm
acha kiya ji…..bahut acha
yahan kuch nai hai…..bina aproch ke bina kuch nai
sonu
November 8, 2010 at 10:13 am
विक्रम जी आप न जाने क्या क्या कह गये आपने कमेन्ट में ..आप तो खुद को बड़ा धर्मात्मा कह रहे है ..पहली बात आपकी बातो से खुनस की बू आ रही है .. जो लोग पत्रकारिता की दल दल से निकले है…वो सब अकल्मन्द है .. आप खुद को धर्मात्मा बताना चाह रहे है ..आप नाम बदलकर कोंसे बे बुनिअद आरोप जड़ रहे है..य़े सबको पता है.. मै यकीं से कहता हु की आपके अलावो कोई सख्स इन पत्रकारों के सरकारी निकरी में जाने का विरोध नही करेगा डा. सुशील टाया आपने बहुत आछा किया. ज्यदातर पत्रकार आपके फैसले का समर्थन कर रहे है..बस एक महोदय न जाने कोन से द्वेष भाव से अनाप सनाप बोले जा रहे है जहा तक तक आपने कहा खबर तिन माह पुरानी है..सो प्बिना पर्कासित हुए पुरे संसार के लिए तो नया ही था
nandkishorbhagat
November 8, 2010 at 1:21 pm
bahut accha nirnaye liya jo jis kabil hai use vahe milna hi chahie
raju
November 9, 2010 at 7:48 am
विक्रम भाई भड़ास ने अभिव्यक्ति का जो मंच दिया है..उसका नाजायज फायदा मत उठाओ ..आपने डॉ> सुशिल के पत्रकार से अध्यापक बनने को लाकर सिर्फ डॉ> सुशिल पर ही बिना प्रमाण दिए अरोअप जड़े बल्कि कई अन्य लोगो की भी बेवजह पगड़ी उछाली है ….आप अपनी बात में आबिद का नाम देते हुए पकडे गये है. आप कहते है की नेताओ की चमची मारकर नोकरी पाने वालो में कुरुक्षेत्र विस्विदालये के मास कॉम इंस्टिट्यूट में प्राध्यापक आबिद अली भी है . हक्कीकत ये है की आबिद ने कभी अख़बार में चंद दिन के लिए भी कम नही किया , आबिद पर मेरबनी तो उसके sc कोटे ने की. sc होने के वजह से उसे पत्रकारिता में पीजी ओअर नेट करने के बाद नोकरी मिली . आबिद के आलावा कोई sc था ही नही ,
khabri lal
November 10, 2010 at 1:37 pm
yah bahas hi galat hai
jise jo thik laga vo us naukri main chala jaye
vaise mera manana hai ki sambandhon ka dohan karne main shaksham vayakti patarkarita nahi chhorega aur vo bhi adyapak ki naukri ke liye to bilkul nahi.
log sambandhon ka dohan karte hue patarkarita main hi jingi nikal rahen hain. jin logon ke naam vikram ne kiye hain vo sbhi achhe akhbaron main gujare layak vetan par thai, kai patarkar log to bina tankhvah ke thath ki jingi gujar rahain hain. jo chale gaye inse to achhe hi honge:):);)