: याद किए गए शहीद पत्रकार मौलवी : प्रेस क्लब आफ इंडिया के तत्वावधान में भारतीय पत्रकारिता के इतिहास के पहले शहीद मौलवी मोहम्मद बाकर का 153वां शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू पत्रकारिता का चरित्र विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। प्रेस क्लब आफ इंडिया ने इस अवसर पर मौलवी मोहम्मद बाकर की स्मृति में 25 हजार रुपए राशि का एक राष्ट्रीय पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की।
इसके लिए एक चयन समिति का गठन किया जाएगा। इसी तरह उर्दू पत्रकारिता के क्षेत्र में मोहन चिरागी तथा परवाना रुदौलवी की स्मृति में 11-11 हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा भी की गयी। प्रेस क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने इस अवसर पर उर्दू पत्रकारिता के इतिहास को संकलित करने के लिए क्लब की ओर से सहायता देने की घोषणा भी की। यह भी तय किया गया कि विभिन्न भारतीय भाषाओं के पत्रकारों को और नजदीक लाने तथा एक दूसरे को जानने की कड़ी के तहत कई और परिचर्चाएं भी की जाएंगी।
संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए मुख्य अतिथि और विख्यात इतिहासकार डा. शबी अहमद ने स्वतंत्रता आंदोलन में उर्दू पत्रकारिता के योगदान पर अपना लंबा और तथ्यपूर्ण आख्यान दिया। उन्होंने स्वाधीनता संग्राम के काल खंड के अखबारों को संरक्षित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने बहुत तथ्यात्मक भाषण में स्वाधीनता आंदोलन के दौरान की उर्दू पत्रकारिता के कई अनछुए पहलुओं का जिक्र भी किया।
वरिष्ठ पत्रकार और भारतीय रेल के परामर्शदाता अरविंद कुमार सिंह ने संगोष्ठी में 1857 के शहीद पत्रकार मौलवी बाकर तथा सांप्रदायिकता से संघर्ष करते हुए शहीद पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी का उल्लेख करते हुए इनके संदेशों से सीख लेने की बात कही और भाषाई पत्रकारों की एकता पर भी बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार मासूम मुरादाबादी ने 1857 में देहली उर्दू अखबार, पयामे आजादी और सादिकुल अखबार की भूमिका रेखांकित करते हुए उर्दू पत्रकारिता की संघर्षगाथा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ पत्रकार फिरोज नकवी ने स्वातंत्रता समर के दौरान उर्दू पत्रकारिता में आचार संहिता व मूल्यों के पत्र पर प्रकाश डाला। प्रेस क्लब आफ इंडिया के अध्यक्ष परवेज अहमद ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए भविष्य की कार्ययोजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि क्लब की ओर से ऐसे कार्यक्रम आगे भी होते रहेंगे। प्रेस क्लब आफ इंडिया के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सभी आगंतुकों को धन्यावाद देते हुए कहा कि 16 सिंतबर को आगे के वर्षो में भी इस कार्यक्रम को जारी रखा जाएगा।












dhirendra pratap singh
September 18, 2010 at 7:08 am
sri arvind ji desh ke janemane patrakar h aur kshetriy patrakaro ke liye barabar sochate rahte h iske liye vo sadhuvaad ke patra h—-dhirendra pratap singh hindusthan samachar dehradun
mohammad zakir hussain
September 18, 2010 at 9:30 am
yashwant bhai,
shaheed maulvee mohd. baqar ki shakhsiyat ke baare mein bhi jaankaari dein to behatar hoga. samman ke liye aavedan ka kya byora hai.