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यह वीकली अखबार तो बड़ा क्रांतिकारी निकला!

एक वीकली अखबार है, ‘टाइम्स ऑफ क्राइम’ नाम से. इसने जाने कहां से स्विस बैंक में जमा भारतीय नेताओं की रकम का पता लगा लिया है और नाम सहित रकम का खुलासा कर दिया है. इस बारे में एक मेल भड़ास4मीडिया के पास आई है. मेल भेजने वाले की आईडी [email protected] है. साथ में एक लेख और दो अटैचमेंट है. एक अटैचमेंट में प्रकाशित खबर है तो दूसरे में वीकली न्यूजपेपर का मुखपत्र. प्रशांत श्रीवास्तव द्वारा भोपाल डेटलाइन से लिखित लेख में जो कुछ प्रमुख बात है, वो इस प्रकार है-

एक वीकली अखबार है, ‘टाइम्स ऑफ क्राइम’ नाम से. इसने जाने कहां से स्विस बैंक में जमा भारतीय नेताओं की रकम का पता लगा लिया है और नाम सहित रकम का खुलासा कर दिया है. इस बारे में एक मेल भड़ास4मीडिया के पास आई है. मेल भेजने वाले की आईडी [email protected] है. साथ में एक लेख और दो अटैचमेंट है. एक अटैचमेंट में प्रकाशित खबर है तो दूसरे में वीकली न्यूजपेपर का मुखपत्र. प्रशांत श्रीवास्तव द्वारा भोपाल डेटलाइन से लिखित लेख में जो कुछ प्रमुख बात है, वो इस प्रकार है-

”कालेधन को भारत वापस लाने के लिए समय-समय पर नेताओं ने अपने-अपने तर्क दिए. सरकारों ने ही पहल कर जनता के सामने यह संदेश दिया कि हम स्वच्छ साफ छवि के हैं. कई नेताओं ने तो कालेधन पर अपना चुनावी एजेंडा तक बना डाला. परंतु क्या मालूम था जिसे वे चुनावी एजेंडा बना रहे हैं वही आगे चलकर उनकी गले की फांस बन जाएगा. सरकार तो आज तक कालेधन को वापस लाने की बात कही करती रही लेकिन एक संस्था ने भारत के राजनेताओं द्वारा स्विस बैंक में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये जमा कराए जाने की सूची उजागर की है जिसमें कांग्रेस-भाजपा के अलावा तमाम राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के नामों और उनके धन की जानकारी दी गई है. इस सूची के आते ही तमाम पार्टियों में हड़कंप मच गया है और उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर स्विस बैंक की गोपनीय जानकारी आखिरकार बाहर कैसे आ गई. यह खबर साप्ताहिक टाइम्स ऑफ क्राइम समाचार पत्र ने प्रकाशित की है. चलिए हम आपको बात देते हैं कि यह कारनामा किया है गुजरात के अंकलेश्वर के रहने वाले एके बकानी ने. इनके माध्यम के जारी सूची में तमाम नेताओं के धन का विवरण उपलब्ध कराया गया है. इस सूची को जारी करने वाली संस्था हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना (इंडिया) का दावा है कि ये जानकारी पूरी तरह तथ्यात्मक है और स्विस बैंक के सूत्रों के हवाले से दी गई है. संस्था का कार्यालय उत्तर प्रदेश के गोड़ा जिले के बकासिया गांव में स्थित है. सूची में 152 लोगों के नाम एवं कोड सहित संपत्ति का पूर्ण विवरण दिया गया है. इस सूची में कांग्रेस-भाजपा के दिग्गज नेताओं के नाम उजागर हुए हैं. सूची में सबसे पहला नाम देश की विख्यात नेत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का है, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने स्विटजर लैंड में करीबन दस क्विंटल सोना, सौ किलो चांदी, और भारत में भुगतान किए जाने वाले दो करोड़ रुपए जमा कराए थे, उनके खाते का कोड क्रमांक नहीं दिया गया है. जबकि उनके पुत्र संजय गांधी के खाते को एसजीएलएफ ओ स्विटजरलैंड नाम से दर्शाया गया है, इस खाते में एक हजार एक सौ ग्यारह किलो सोना और छह सौ बावन किलो हीरे और भारत में भुगतान किए जाने वाले पचास लाख रुपए जमा कराए गए थे. इसी तरह राजीव गांधी का खाता क्रमांक एलसीटीएस सात सौ किलो सोना, 125 किलो चांदी, 352 किलो हीरे और भारत में भुगतान किए जाने वाले 352 लाख रुपए रखकर संचालित किया जाता है. संस्था के सूत्र बताते हैं कि इन खातों के संचालन के लिए स्विस बैंकों की ओर से विशेष घड़िय़ां और अंगूठियां जारी की जाती है. इन्हें लेकर जाने वाला व्यक्ति इन खातों को संचालित कर सकता है. यदि किसी खाता धारक का निधन भी हो जाता है तो उसके परिजन इस विशेष प्रतीक के माध्यम से उस खाते को संचालित कर सकते हैं. यदि कोई व्यक्ति इस प्रतीक को चुरा भी लेता है तो वह भी इस खाते का संचालन कर सकता है. स्विस बैंकों में गुप्त धन रखने के लालची ऐसा नहीं कि सिर्फ कांग्रेसी हैं इन नामों की सूची में भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम भी है. पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान श्री आडवाणी ने स्विस बैंक में जमा धन की वापसी के लिए बाकायदा प्रचार अभियान छेडा था, लेकिन सूची के मुताबिक श्री आडवाणी का भी खाता स्विस बैंक से मौजूद है. एनएसओएल नाम से खोले गए इस खाते में 552 किलो सोना, 152 किलो हीरे, और भारत में भुगतान किए जाने वाले साठ लाख रुपए शामिल हैं. भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने स्विस कोड क्रमांक एपीपीपीएन के माध्यम से कथित तौर पर दो सौ दस किलो सोना, सत्तर किलो चांदी, सत्तर किलो हीरे और भारत में घर पर दिए जाने वाले छिहत्तर लाख दस हजार रुपए जमा कराए हैं. इसी तरह मप्र नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने स्विस बैंक कोड क्रमांक एसएनकेवी के माध्यम से 79 किलो 900 ग्राम सोना, और 119 करोड़ दस लाख रुपए भारत में भुगतान की जाने वाली मुद्रा जमा कराई है. कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, कोड क्र. वायजीकेएस माध्यम से 112 किलो सोना, 18 किलो हीरे, चार करोड़ रुपए, कमला नाथ कोड क्र. जेओवायएएन के माध्यम से 310 किलो सोना, 117 किलो चांदी, 120 किलो हीरे, एक करोड़ अड़सठ लाख की राशि जमा कराई गई है.”


तो ये था प्रशांत श्रीवास्तव का आलेख. उन्होंने अपने लेख में कुछ तथ्य और आंकड़े आदि दिए हैं. पर ये आंकड़े, नाम, राशि आदि कितने सच हैं, इसकी भड़ास4मीडिया अपने स्तर पर नहीं कर पाया है. यह खबर हम इसलिए प्रकाशित कर रहे हैं ताकि इस वीकली अखबार में प्रकाशित तथ्यों की पड़ताल की जा सके. जाहिर है, पड़ताल का काम आसान नहीं होगा और जिन-जिन दिग्गजों के नाम प्रकाशित हुए हैं वे अपनी मानहानि के संबंध में दावा भी ठोंक सकते हैं. इतने सारे खतरों के बावजूद अगर इस वीकली ने दावे के साथ इस खबर को प्रकाशित किया है तो एक संभावना यह भी है कि इस अखबार के पास पर्याप्त सुबूत हैं. अगर पर्याप्त सुबूत हैं तो फिर ये खबर अभी तक दबी क्यों हुई है. इसे तो इस साल की सबसे बड़ी खबर बन जाना चाहिए था. सो, शंका ये भी है कि वीकली न्यूजपेपर ने किन्हीं संस्था के दावे पर भरोसा कर खबर का प्रकाशन तो कर दिया लेकिन इस वीकली अखबार का सरकुलेशन कम होने या छोटा अखबार होने के कारण खबर की चर्चा नहीं हो पाई और अखबार के संपादक – प्रकाशक को संभावित मुश्किलों से दो-चार नहीं होना पड़ा है. यह खबर आकाशमेल डाटकाम नामक वेबसाइट पर भी है, जो संभवतः इसी वीकली न्यूजपेपर की साइट है. इस साइट तक www.aakashmail.com के जरिए पहुंच सकते हैं. इस वेबसाइट के होमपेज का स्क्रीनशाट भी यहां प्रदर्शित कर रहे हैं.

देखना ये है कि भड़ास4मीडिया पर इस वीकली अखबार के क्रांतिकारी कारनामे की खबर प्रकाशित होने के बाद देश की मीडिया, पत्रकार, नेता आदि किस तरह रिएक्ट करते हैं. भड़ास4मीडिया खुले दिमाग से यह अपील करता है कि इस प्रकरण के बारे में जिसे जितनी जानकारी हो वह कमेंट के माध्यम से नीचे देने की कृपा करे ताकि इस प्रकरण की सच्चाई की छानबीन हो सके. फिलहाल तो खबर पढ़ने के बाद आप भी कह ही देंगे- ये वीकली अखबार तो बड़ा क्रांतिकारी निकला!

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0 Comments

  1. Manoj

    January 9, 2011 at 4:57 am

    Yaaro, Main bhi manta hoon ki, Ye news 99.99% galat hai par ye to hum sabhi jante hai ki hamare neta kitne sharif hai ? …. Swiss bank me na shirf hamare desh ke neta balki dusre desh ke currupt log bhi money deposit karte hai ,so, mujhe lagta hai ki Swiss bank “Money” ko Gold, Silver, Diamond ke format me hi convert kar ke deposit karta hoga, kayonki sabhi desh apne desh ke note ka format (Rup Rang) change karte rahte hai……. par yaaro kuchh to karna chahiye desh ka bahut paisa swiss bank me jama hai….kahin maine pada tha ki —————– “Indians r poor but India is not a poor country”. – Says one of the swiss bank directors.

    He says that “280 lac crore” of Indian money is deposited in swiss banks which can be used for ‘taxless’ budget for 30 yrs.

    Can give 60 crore jobs to all Indians.

    From any village to Delhi 4 lane roads.

    Forever free power suply to more than 500 social projects.

    Every citizen can get monthly 2000/- for 60 yrs. No need of World Bank & IMF loan.

    *****So Yaaro think about it “ki kaise swiss bank se paise wapas laya jaye:*****

  2. ravi solanki sach kahene ka sahas

    January 8, 2011 at 4:33 pm

    2010 ye kala sall sabit hua hai bharatdes ke liye agar ye satya hai to- ye kala dhan hi garibo or kisano ko aatma-hatya karne par majboor kar raha hai. mahngai asman ko choo rahi hai. or ye navab log hamari hi hukumat pr raj kar hami ko safed dhoka de rahe hai. aaj bhi garib do vakt ki roti-kapda or makan ke liye insan mohtaj hai ! aakhir kon sunega garibo ki pukaar are ae des ke neta 4 !
    2011 aaya garibo pr or aatyachar barsaya-garibo ki suno pukar are des ke neta 4, or kitna bhrastachar failao ge- garib janta ko suke aaso rulaoo ge-sarma karo hamare nasib or janta par des ke neta 4. hamare vote ka aaisan videso me batate ho. garibo se aata mangvate ho. hamara vyapar ghatakar videso me ponji fasate ho. aaisa abhiyan ek chalaoo har ek garib ko mitaoo. kyo ghatate ho aapni saan. kar diya bharat des ko badnaam. aakhir kab tak sahegi ye garib janta aatyachar. are des ke neta 4, yojnaye to banate ho pr garibo ko bech khaya. aamiro ko haq dilvaya. garibo ke tale-namak tak ka kar liya videso me vyapaar. rajniti ka sikar banate ho, bhukmari ke kode barsate ho. garibo ko bech khaya. garib to pahle se hi bhuka or n.. hai or kitni bhukmari failao ge rajniti ka sikar banao ge. garibo ke jine tak ka chinliya adhikar. petrol disel ko ghatakar aapni jabo ko bharvaya.
    des ki satta hat me laker- kar diya des ko be-ghar or bekar – are des ke mantri 4 ! aaise hi karte rahoge to ho jayega ek din bharat des ka bhantachar ! are des ke neta 4…batao kaise karoge des ka udhar…fir kaise karoge janta ke samne ishar…jab ho jayega sarkari kursi ka naam bekar…mere bharatdes ke neta… 4 !
    ————————————–*************—————————————-
    ye line sirf bhrastacharo ke liye hai jo des ke liye safed chadar odkar 420 janta or bharat des ke liye karte hai…ye who kide hote hai jaise demak lakdi ko aandar hi aandar khokla kar deti hai-vaise hi ye rajneta hai jo bharat des ko andar hi aandar kha rahe hai….m………?
    EK GARIB
    [b][/b][b][/b]

  3. suresh chiplunkar

    January 8, 2011 at 2:38 pm

    अपूर्व कुलश्रेष्ठ जी से सहमत,
    बकवास टाइप की थोथी हड़कम्प मचाने वाली खबर लगती है…
    अपूर्व जी की 13 अंकों के कोड नम्बर व बाहरी व्यक्तियों को लॉकर नहीं दिये जाने की बात सही है…

    इस रिपोर्ट की लिस्ट में “भारत की रानी विक्टोरिया” और “भोंदू युवराज” का नाम नहीं है क्या?

  4. kumardeep

    January 8, 2011 at 6:32 am

    samagh nahi ata ki…is tarah ki……vevkuphi khabar chhap ker……..kukurmutte ki tara upje ye newspaper…….akhir kya prove karana chahte hai….jinki apni na to koi pahchan hai na hi…viswasniyta……….ek bahut halke jock se jyada kuchh nahi…..

  5. abhishek singh

    January 8, 2011 at 4:46 am

    ek baat ye bhi hai ki jab tak swiss bank se janakari nahi mil jati loi kuch bhi bol sakta hai. kyoki koi usko cross check to kar nahi sakta, bolne lo to mai bhi bol sakta hu ki swiss bank me yaswant ji ka 50000000 crore rupay hai,
    mai ye nahi bol raha hai ki hamare desh le politician ke paise nahi honge, mai viswash ke sath bol sakta hu ki jarur honge hamare desh ke poltican ki black money swiss bank me, lekin ye lhabar totally preplan ho kar banaee gayi hai

  6. indra kumar shukla

    January 7, 2011 at 2:41 pm

    यशवंत जी समाचार मे सत्यता की झलक है, रही बात मानहानी का मुकदमा लगाने की तो एक बात आपको बता दू इन भ्रष्ट नेता ओ मे इतना शाहस नहीं की वे सच का सामना कर सके वे जानते है चुप रहे तो बात दब जावेगी और कुछ बोला तो हंगामा हो जावेगा यह भी कटु सत्य है की बड़े स्तर पर मीडिया कितना ,,,,,,है ? मे इस वीकली के साहस की दाग दूगा ,और मुझे विश्वाश है यह मामला जब उठेगा तब इस वीकली को खोजी पत्रकार का पुरस्कार मिले ! इन्द्र कुमार शुक्ला संपादक वेब न्यूज़ ऑफ़ इंडिया भोपाल [म,प्र ,]

  7. indra kumar shukla

    January 7, 2011 at 2:39 pm

    यशवंत जी समाचार मे सत्यता की झलक है, रही बात मानहानी का मुकदमा लगाने की तो एक बात आपको बता दू इन भ्रष्ट नेता ओ मे इतना शाहस नहीं की वे सच का सामना कर सके वे जानते है चुप रहे तो बात दब जावेगी और कुछ बोला तो हंगामा हो जावेगा यह भी कटु सत्य है की बड़े स्तर पर मीडिया कितना ,,,,,,है ? मे इस वीकली के साहस की दाग दूगा ,और मुझे विश्वाश है यह मामला जब उठेगा तब इस वीकली को खोजी पत्रकार का पुरस्कार मिले ! इन्द्र कुमार शुक्ला संपादक वेब न्यूज़ ऑफ़ इंडिया भोपाल [म,प्र ,]

  8. Ankit Khandelwal

    January 7, 2011 at 1:25 pm

    Is khabar ke sachai main kaafi sandeh hain.. Swiss bank apne database kabhi kisi or se share nahi karta hain..

  9. अपूर्व कुलश्रेष्ठ `प्रसून`

    January 7, 2011 at 1:10 pm

    यशवंतजी … यह समाचार पूरी तरह से निराधार है, क्योंकि जिस तरह से कोड समाचार में दर्शाए गये हैं इस तरह के कोई कोड स्विटजरलैण्ड की कोई बैंक जारी नहीं करती है। स्विटजरलैण्ड में कुल मिलाकर लगभग 221 बैंक हैं जिनकी 2348 शाखाएं हैं। सबसे बड़े टॉप के 9 बैंक हैं – Bank Sarasin & Cie AG, Clariden Leu AG, Credit Suisse, EFG Bank European , Financial Group SA, Julius Bär & Co. AG, Rothschild Bank AG, UBS AG
    Union Bancaire Privée, UBP, Bank Vontobel AG इसके अलावा कई अन्य बैंक भी हैं। सभी बैंकों में अकाउंट का कोड व्यक्ति के नाम को समाहित करके तैयार किया जाता है एवं बैंक अकाउंट का कोड लगभग 13 से 19 अंकों के मध्य होता है। विशेष घड़ियां और अंगूठी तो आज तक किसी भी स्विस बैंक ने जारी नहीं की है, पढकर हंसी आती है। दूसरी अहम बात कि वर्ष 1980 के बाद स्विस बैंक के बाहर के अकाउंट में किसी तरह की लाकर की सुविधा नहीं है। सोना, चांदी और हीरे जवाहरात जमा होने की बात मन-गढंत है। किसी भी स्विस बैंक में बाहर निवासरत व्यक्ति केवल केश ट्रांजेक्शन कर सकता है। वर्ष 1988 से सभी स्विस बैंक के ग्राहकों को माइक्रो चिप आधारित कस्टम लेवल दिया जा रहा है और उसमें भी कोड हर वक्त बदलता रहता है, इससे ही अकाउंट पूरी दुनिया में कहीं से भी कोई भी आपरेट कर सकता है। क्या समाचार है… पूरी तरह से बकवास । स्विस बैंक के अकाउंट कोड मिलना तो बहुत ही हास्यास्पद बात है क्योंकि कोई भी स्विस बैंक इस तरह से कोड उपलब्ध नहीं करवा सकता है और वह भी ऐसे कोड जो कि पूरे स्विटजरलैण्ड की कोई बैंक जारी नहीं करती। खैर …. समाचार पत्र पर तो मानहानि का दावा किया ही जाना चाहिए।

  10. rajan c

    January 7, 2011 at 11:05 am

    सच क्या है ये कहाँ से पता चलेगा? खबर तो बहुत छपती हैं पर उनमे दोनों पक्षों की विचारधारा बताई जाये तभी खबर की विश्वसनीयता जांची जा सकती है.

  11. Laeek Ahemad

    January 7, 2011 at 10:51 am

    agar ye khabar sahi hai to electronic mediake liye ye tamacha hai, ki ve kya kar rahe hai.

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