हरदोई जिले के पाली थाने की पुलिस ने राष्ट्रीय सहारा अखबार के एक पत्रकार को घर से घसीट कर ना सिर्फ सरेआम उसकी पिटाई की, बल्कि उसे बचाने आई माँ और बहन को भी नहीं बख्शा. पत्रकार का कुसूर सिर्फ इतना था कि पाली कसबे में अवैध रूप से हो रहे स्मैक और गोकशी के कारोबार की खबर उसने अपने अखबार में प्रकाशित की थी.
कहते हैं कि खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे, जब पुलिस इन अवैध धंधों को नहीं रोक पाई, या यूँ कहें कि पुलिस उनसे अच्छी खासी रकम वसूल करती है, इसलिए जान बूझकर उनके संरक्षण में स्मैक और गोकशी का धंधा फल फूल रहा है. अब आपको बताते हैं कि पूरा वाकया है क्या? पिछले कुछ दिनों से पाली कस्बे में अवैध रूप से पुलिस की मिली भगत से बिक रही स्मैक और गोकशी की खबर राष्ट्रीय सहारा अखबार में स्थानीय संवाददाता शोभित मिश्र ने कई बार प्रकाशित की थी, चुकी पाली पुलिस को इन अवैध कारोबारियों से महीने में अच्छी खासी रकम

अंडरवियर में खड़े पत्रकार शोभित को पकड़ कर ले जाता बिना वर्दी का सिपाही
जिला स्तर पत्रकारों ने जब अधिकारियों से इसकी वजह पूछी तो पहले तो उन्होंने बताया कि उक्त पत्रकार स्मैक का धंधा करता है और स्मैक सहित पकड़ा गया है. बाद में पत्रकारों के हस्तक्षेप से पुलिस ने उसे स्मैक में तो नहीं बंद किया लेकिन सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में जेल भेज दिया. आरोप पत्र में ये भी लिखा कि उक्त पत्रकार ने सिपाही की वर्दी फाड़ दी, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घर पर दबिश देने गए सिपाही ने वर्दी पहनी ही नहीं थी और दूसरी सबसे ख़ास बात ये कि साढ़े छह फीट के देवेन्द्र यादव नामक सिपाही की दुबले पतले और चालीस किलो वज़न वाले पत्रकार ने सिपाही की वर्दी कैसे फाड़ दी, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है. जबकि पुलिस ने यही आरोप लगाया है.
सबूत के तौर पर साथ में वो फोटो भी दिया जा रहा है, जिस में साढ़े छह फीट का सिपाही बिना वर्दी में शोभित को उसके घर से खींच कर एवं मारपीट कर जबरन अपने साथ ले जा रहा है, जिसका विरोध उसकी माँ और बहन कर रही हैं, जो कि स्वाभाविक है. किसी शख्स को सादे कपडे़ पहने हुए कोई घर में घुस कर मारे पीटे और जबरन अपने साथ ले जाये तो घर वाले तो विरोध करेंगे ही. फिलहाल शोभित मिश्र जेल में है और उसकी ज़मानत अभी नहीं हुई है, लेकिन इस सारे मामले की जानकारी हरदोई के एसपी को दिए जाने के बावजूद ईमानदार कहे जाने वाले एसपी ने भी अपने थानेदार का ही पक्ष लिया, और दोषी पुलिस कर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. इस घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में खासा रोष है. कई पत्रकार संगठनों ने पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाने के लिए लडाई लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है.
हरदोई से आमिर किरमानी की रिपोर्ट.












arvind singh
August 2, 2011 at 3:44 pm
up pulice kuchha bhi kar sakati hai. isi tarah ki ghatana hamaare saath pichhale mahine me up ke hi jaupur jile ho ho chuki hai. me apani bahan ke ghar jaupur jile ke hisaampur gaon me gaya hua tha. bahan ke ghar par sirf usaki saas hi rahati hai aur usake jetha ka 15 saal ka ladaka rahat hai. usake patidaaro ne jo grp me police hai. unhone hi usaki jameen par awaidha kabjaa kiya hua hai. bhopu aur bhandaari unaka naam hai. ek alahabaad aur doosara lucknow me tainaat hai. ab ascharya janak roop se jaise hi me bahan ke ghar jafarabaad thana ke antargat hisampur gaun me pahucha aur haath muha bhi nahi dho payya tha ki thane se ek police sipaahi khan ayya aur muzase bola ki aap hi arvind singh hai. to mere haa kahate hi usane muze yah kar kar apani motor cycle par bitha diya ki aapko abhi so sahab arthaat sabase bade daaroga thane ke prabhari ne bulaaya hai. to mene usase kaha ki aap chaliye me 10 minut me aa raha hu kyunki me to so sahab se hi milane ke liye yahaa aaya hu to bhi jab wah nahi mana to me usake saath chal diya aur jaise hi police thane me pahucha ek nayaab daaroga jisaka naam rajdeo yadav hai muze seedhe seedhe galiya dene laga aur bola ki saale naukari dilaane ke naam par logo se paisa aithata hai aur dhamakata hai. usaki ye baate sunakar muze ascharya hi nahi hua balki mahaan ascharya hua aur mene jaise hi kaha ki aisi koi baat hi nahi hai kyunki yaha to me ikka dukka logo ko chhodakar jab kisi ko jaanata hi nahi to fir paise kaise loonga. itana kahate hi wah fir bola ki seedhe se jaakar under baith nahi to marate marate jindagi kharab jjar dynga, aur poore teen ghante tak thane me bithaakar muze beijjat kiya gay. tab jaakar so ke kahane par usane muze yah kahate huye waha se jaane diya ki jaa saale nahi to goli mar dunga. usaki isatarah ke vyavahaar ko dekhakar me apani beijjati par pareshaan hinahi hua to aaj tak bhi yah socha nahi paa raha hu aakhir aisa kisake kahane par hua aur police ne aisa kyu kiya. mumbai ke ek aise patrakaar ke saath jise poora shahr sif jaanata hi nahi balki bahut hi ijjat se manata bhi hai, kyunki me poori tarah se janata ko samarpit patrakaar hu. to up police kuchha bhi kar de asambhav hi nahi hai.
arvind, gwalior m.p.
August 2, 2011 at 3:51 pm
wah ri maya sarkar, aur uske police bale gunde
jo kare so kam h
श्रीकांत सौरभ
August 2, 2011 at 4:12 pm
निकम्मी हो चली है यूपी पुलिस जो अपराधियों को तो पकड़ती नहीं और बेगुनाहों व शरीफों पर बेवजह जुल्म धा रही है . धिक्कार है ऐसी राज्य सरकार को जहां कि पुलिस गुण्डई का नंगा नाच कर रही है . एक तरफ यूपी में बलात्कारी सर उठाए घूम रहे हैं . दूसरी तरफ पत्रकारों को झूठे इल्जाम में फंसाकर प्रताड़ित कर रही है . ये शाले पुलिस वाले समझते क्यों नहीं उसने एक शोभित को पकड़ा है . इसकी बचाव में पूरे हिन्दी पट्टी की मीडिया बिरादरी हल्ला बोल शुरू कर देगी तो अक्ल ठिकाने आ जाएंगे . पुलिस को यदि अपनी वर्दी की अकड़ है तो पत्रकारों को भी अपनी कलम पर नाज है . देखिए जंग में जीत किसकी होती है . वैसे शोभित तू घबड़ाना नहीं हम सब तुम्हारे साथ हैं .
ADIL SAIFI
August 3, 2011 at 6:32 am
yashwant bhai saap ko rassi aur rassi ko saap bana dena to police ka purana khel hai lakin shobhit ke sath jo hua wo koi pehla mamla nahi hai doshi police karmiyo ko eske saza milne chaheye nahi to police prashan ke press confrence ka bahishkar kar dena chaheye
waise bhi patrkar ki kalam koi nahi rok sakta
Hemendra Singh
August 3, 2011 at 12:13 pm
ye khabar pdker sayad sabhi patrakaron ko sharm aani chahiye.
kami police ki nahin balki ham sabhi ki hai. ham logon me ekta nahin hone ke karan ek dalal sipahi bekhauf hokar apni takat dikha raha hai. hame sirf khabar padkar chup nahin baithna chahiye.balki sipahi sahit thana prabhari ko bhi ishki saja milni chahiye.taki iss tarah ki galati karne ki koi dushra vardidhari himmat na juta sake.
parvesh kumar chaudhary
August 3, 2011 at 1:04 pm
हरदोई में पत्रकार के साथ जो घटना हुई उसके लिए पुलिस कप्तान जिम्मेदार है पुलिस कप्तान की लापरवाही के चलते एक सिपाही ने पत्रकार के घर जाकर परिवारजनों से बतमीजी की और फर्जी मामले में फ़सा दिया बड़े शर्म की बात है
raghwendra sahu
August 3, 2011 at 2:15 pm
वाकई में पुलिस की गुंडागर्दी से लोग परेशां हो गए हैं………..पत्रकार के साथ की गई एस तरह की बदतमीजी और गुंडागर्दी के लिए सभी को एकसाथ एकस्वर में विरोध करना चाहिए………..
prashant hardoi (u.p.)
August 3, 2011 at 4:21 pm
पुलिस और पत्रकारों का आंकड़ा छतीस का आज से नहीं पुराना है कडुवासच यह है पुलिस से अगर पत्रकार ने पार पाया तो अपनी सोच और अक्ल के जरिये ,पुलिस को मुह की खानी पड़ी जब मीडिया के आदमी ने अपनी कलम के साथ अपनी अक्ल को जोड़ा तथ्यहीन और नासमझी जब कोई पत्रकार करता है उसे कोई भी चिट कर सकता है चाहे वोह पुलिस हो या प्रसाशन , बल्कि सच यह है की मीडिया में इस समय चिल्लर पार्टी का दौर चला हुआ है नासमझ लोगो ,नपुंसको की लम्बी चौड़ी कतार मीडिया में प्रवेश कर गयी है | जनता से अधिक मोह पत्रकारों में पुलिस वा प्रसाशन के अधिकारियो के कमरे में बैठ कर पत्रकारिता करने का हो गया है अधिकारियो के हमाम में बैठने वाले मेरे साथी मेरी बात को और पत्रकारिता की पीड़ा को समझ गए होगे आप पेशे से इमानदार रहे और अपनी अक्ल का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करे संकट के समय तो शायद शोभित जैसे हालात ना आये |
समझदार लोग मेरे एक प्रश्न का उत्तर जरुर दे जो फोटो लगी है इसे सामान्य नज़र से देखे क्या इसमें आपको कही पर से लगता है की शोभित को फोटो ने नज़र आ रहा लम्बा व्यक्ति खीच रहा है यह लम्बा व्यक्ति शोभित को मार रहा है आपको ऐसा जरुर इस फोटो को देखने के बाद लग रहा होगा की दो महिलाये और एक लड़का मिलकर इस लम्बे आदमी के कपडे फाड़ कर इसको सबक सिखाने पर आमादा है मुझे तो यही लगता है अब ऐसी फोटो को पुलिस अधिकारियो को देने मीडिया की वेबसाईट पर दिखाकर किस तरह के न्याय की उम्मीद की जा सकती है मेरी नेक सलाह ऐसे बे अक्ल लोगो के लिए ,लडाई लडे तो मजबूती की साथ लेकिन अक्ल के साथ ,ऐसी नेकी करके किसी को कुए में डालने का काम ना करे ,मेरा यशवंत जी से भी निवेदन है की पत्रकारिता हित में अगर मेरी बात कुछ उनकी समझ में आये तो इस फोटो को हटा दे , पीड़ा वाले की पीड़ा दिखनी चाहिए |
मेरा इरादा मीडिया की लडाई को कमजोर करना नहीं है उसमे पैनापन और मजबूती आये इस बात का है आप पत्रकारिता कर रहे है और अपनी लडाई लडे तो अक्ल का सबसे पहला इस्तेमाल करे आपके पास ना हो तो मदद ले ले लोगो से राय ले फिर कदम आगे बढ़ाये ,आमिर किरमानी ने इस लडाई को यहाँ तक पहुचाया उनको साधुवाद लेकिन उनसे भी निवेदन की जोश में होश जरुर रहे
अगर मैंने गलत कुछ कहा हो तो गलती का ज्ञान जरुर करा दे मार्गदर्शन से कुछ मिलता ही है
shobhit tyagi
August 3, 2011 at 4:39 pm
ye kissa bhi bhrashtachar se sambandhit hai aaj ye patrakar ke sath hua roj aam vyaktiyon ke sath hota hai yeh bahut hi sharm ki bat hai patrakar jo ki desh ki neev hai use jad se jhoote aaropon ke sath kaccha banaya ja raha hai mera prashn prashasan se hai kyon nai abhi tak is aur koi thos kadam uthaya jata ? kyon nai abhi tak patrkaron ke sath ho rahe apmajank vakyon ke khilaf koi kanoon banaya jata ? swami ram dev ke sath jo hua vo bhi to bhrashtachar per uthaye gaye thos kadam ke karan tha prashasan ne aankhein moond lin hai mai shobhit tyagi aaj poore bharose k sath kehta hun ki yadi patrakaron ke liye bhi kannon banya jay jaise in bhrashtit pulice valon ke liye hai hai koi bhi vykti pulice vale ko peet nai sakta peetna to door uske sath ashabd bolne per bhi saza hai to kya patrakar desh ke liye karya nai kerte ? kya unki suraksha nai honi chahiye ? kya patrakar is prakar surakshit hain ?
RAJIV GUPTA
August 4, 2011 at 3:08 pm
WAH RI UP POLISH.
sanjay
August 5, 2011 at 7:47 am
police ka cherha yahi hai …ye nahi badal sakte..asali gundai ka lisence enhi ke pas hota….