: करछना में जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों पर बल प्रयोग : पुलिस की पिटाई से मर गया गुलाब : इलाहाबाद स्थित करछना पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में चल रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया। शुक्रवार को वहां भारी बवाल हुआ। एक किसान की मौत के बाद स्थिति अनियंत्रित हो उठी। ग्रामीणों के पथराव में जहां एडीएम और एसपी पुलिस क्षेत्राधिकारी समेत कई अधिकारी घायल हो गए वहीं पुलिस ने ग्रामीणों पर जमकर लाठीचार्ज किया। देर रात प्रशासन द्वारा किसानों से आठ बिंदुओं पर समझौता किये जाने की भी खबर प्रकाश में आई है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री मायावती द्वारा समीक्षा बैठक कर आला अफसरों को तमाम दी गई हिदायतों के बावजूद प्रदेश में आये दिन घटित होती घटनाओं ने एक बार फिर मौजूदा सरकार के भयमुक्त समाज के नारे की प्रदेश में धज्जियां उड़ाकर रख दीं है. विपक्ष के नेताओं ने सरकार को चौतरफा घेरने का जाल आगामी 2012 के चुनाव के मददेनजर अभी से बुनना शुरू कर दिया है। उक्त घटना की करीब -करीब सभी राजनैतिक दलों ने निन्दा की है। आज कई दिग्गज नेता इलाहाबाद भी पहुंच रहे है।
हुआ यह कि इलाहाबाद स्थित करछना पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में धरने पर बैठे किसानों को जब स्थानीय प्रशासन ने बल प्रयोग करने की बात कह उठा दिया व कुछ किसानों को गिरफ्तार किया तो किसान उग्र हो गये। फिर क्या था किसान भारी तादात में एकत्रित हो पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुये उग्र प्रदर्शन करने लगे। पुलिस ने स्थिति बिगड़ते देख जवाब में रबर की गोलियां दागनी शुरू कर दी। पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस के गोले भी दागे।
इसी बीच एक प्रदर्शनकारी किसान गुलाब विश्वकर्मा (36) की पुलिस पिटाई में मौत हो गई। फिर क्या था गुलाब की मौत की खबर मिलते ही किसान आग बबूला हो गए। डंडा, हंसिया लिए किसानों ने पुलिस और जिला प्रशासन के अफसरों को खदेड़ लिया। अफसर अपनी जान बचाने के लिए खेत और रेलवे लाइन की तरफ भागे। इसी बीच एसपी गंगापार और सीओ करछना को किसानों ने पकड़ लिया और दोनों पर किसान लाठियां लेकर टूट पड़े। किसी तरह से पुलिस दोनों अफसरों को भीड़ से निकालने में कामयाब हो सकी। एडीएम नजूल सुभाष उत्तम भी पत्थरबाजी का शिकार हो गए। किसानों के साथ कई आला अधिकारियों के भी चोटें आईं।
गुलाब का शव लेकर सड़क जाम की : करछना के कचरी गांव में हुए लाठीचार्ज में घायल हुए किसान गुलाब विश्वकर्मा की मौत उसके परिवार पर कहर बनकर टूटी है। चार बच्चों के पिता गुलाबचंद की मौत से उसका सारा परिवार सदमे है। दोपहर बाद जब उसका शव आया तो ग्रामीणों ने उसे बीच सड़क पर ही रख दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने गुलाब के परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। हालांकि देर शाम तक जिलाधिकारी ने पांच लाख मुआवजा दिए जाने का आश्वासन उसके परिजनों को दिया। बताया यह जा रहा है कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में गुलाब को रबर की गोली लग गई थी। गोली लगने के सदमे से गुलाब का हार्ट फेल हो गया, जबकि गुलाब के पिता फूलचंद्र का कहना है कि पुलिस की लाठीचार्ज से ही वह घायल हुआ था। मृतक के पिता फूलचंद्र के अनुसार गुलाब ही उसके परिवार का मात्र सहारा था। आलम यह था कि गुलाब के शव के पास विलाप कर रहे उसके बेटे पिंटू, शिंटू, पंकज और बेटी को देखकर हर किसी की आंखे नम थी।
ज्ञात हो कि करछना के भीरपुर रेलवे स्टेशन के पास कचरी गांव में जेपी ग्रुप का पावर प्लांट लगना है। पावर प्लांट के लिए आठ गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। किसानों का आरोप था कि उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला है। इसे लेकर किसानों ने पहले क्रमिक अनशन किया। इसके बाद पांच किसान आमरण अनशन पर बैठ गए। यह अनशन 15 दिन से चल रहा था, इसबीच जिला प्रशासन के अधिकारी शुक्रवार को सुबह अनशन स्थल पर पहुंचे। आरोप है कि पुलिस ने अनशन पर बैठे किसानों को वहां से उठा लिया। इससे नाराज किसान सड़क पर उतर आए करीब 14 घंटे हालात बेकाबू रहे। देर रात प्रशासन ने मृत किसान के परिजनों को मुआवजा देने समेत आठ बिंदुओं पर समझौता किया तो स्थिति सामान्य हुई।
रिजवान चंचल की रिपोर्ट.











